NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
उत्पीड़न
भारत
देश में लापता होते हज़ारों बच्चे, लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में 5 गुना तक अधिक: रिपोर्ट
ये उन लापता बच्चों की जानकारी है जो रिपोर्ट हो पाई हैं। ज़्यादातर मामलों को तो पुलिस मानती ही नहीं, उनके मामले दर्ज करना और उनकी जाँच करना तो दूर की बात है। कुल मिलाकर देखें तो जिन परिवारों के बच्चे लापता होते हैं उन्हें सबसे ज़्यादा सरकार और प्रशासन से निराशा होती है।
सोनिया यादव
24 May 2022
kids
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

बच्चों के अधिकारों पर काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर भारत के चार प्रमुख राज्यों- मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में बच्चों के लापता होने के मामले में काफी वृद्धि हुई है। 2021 में मध्य प्रदेश और राजस्थान में लापता लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में पांच गुना अधिक है। घरेलू हिंसा, दुर्व्यवहार और उपेक्षा के कारण लड़कियां खुद भाग जाती हैं। इनमें से अधिकतर लड़कियां घरेलू नौकर या फिर व्यवसायिक यौन शोषण के धंधे में लगा दी जाती हैं। 

‘चाइल्ड राइट्स एंड यू’ (क्राइ) नाम के इस संगठन की ‘स्टेटस रिपोर्ट ऑन मिसिंग चिल्ड्रेन’ में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के 58 जिलों में प्रतिदिन औसतन आठ बच्चे– छह लड़कियां और दो लड़के-लापता हुए हैं। वहीं दिल्ली के आठ पुलिस जिलों में 2021 में कुल 1,641 बच्चे लापता हुए यानी रोजाना औसतन पांच बच्चे लापता हुए। दिल्ली में लापता हुए बच्चों में से करीब 85 प्रतिशत बच्चे 12-18 वर्ष की आयु के थे। 
रिपोर्ट कहती है कि मध्य प्रदेश से प्रतिदिन औसतन 24 लड़कियां और पांच लड़कों समेत 29 बच्चे लापता हुए हैं। जबकि राजस्थान में कुल 5,354 बच्चे (4,468 लड़कियां और 886 लड़के) लापता हुए। रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में हर दिन औसतन 12 लड़कियों और दो लड़कों समेत 14 बच्चे लापता हुए।
बता दें कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2020 के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में लापता बच्चों के 8,751 और राजस्थान में 3,179 मामले दर्ज किए गए। क्राइ के साझेदार संगठनों की ओर से सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत दायर आवेदनों के जवाब में सरकारों ने बताया कि 2021 में मध्य प्रदेश में बच्चों के गुम होने के 10,648 और राजस्थान में 5,354 मामले दर्ज किए गए हैं। ये आंकड़े 2020 की तुलना में मध्य प्रदेश में लापता बच्चों के मामलों में लगभग 26 प्रतिशत की वृद्धि और राजस्थान में 41 फीसदी की बढ़ोतरी का संकेत देते हैं।

क्या है पूरा मामला?

देशभर में साल दर साल गुमशुदा बच्चों की संख्या का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। लापता बच्चों को लेकर लंबे समय से चिंता भी जताई जा रही है। लेकिन हर साल ये चिंता गायब हुए बच्चों के आंकड़े के साथ ही सामने आती है और फिर कुछ समय बाद ठंड़े बस्ते में चली जाती है।

अलग- अलग आरटीआई आवेदनों के माध्यम से एकत्र किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि मध्य प्रदेश में लापता बच्चों की संख्या के मामले में शीर्ष पांच जिलों में इंदौर, भोपाल, धार, जबलपुर और रीवा शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में लापता बच्चों की संख्या के मामले में शीर्ष पांच जिलों में लखनऊ, मुरादाबाद, कानपुर नगर, मेरठ और महराजगंज शामिल हैं। दिल्ली के इलाके देखें तो उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड के अनुसार, दिल्ली में 2021 में सबसे ज्यादा बच्चे उत्तर पूर्वी जिले में गुम हुए है, जबकि दक्षिण पूर्व जिले में सबसे कम लापता हुए।

यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि उत्तर प्रदेश के केवल 58 जिलों ने आंकड़े उपलब्ध कराए हैं। इसी तरह, दिल्ली में सभी पुलिस जिलों ने आंकड़े मुहैया नहीं कराए गए। वहीं, हरियाणा ने आरटीआई के तहत दायर आवेदनों का जवाब नहीं दिया। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देशभर में लापता बच्चों की कुल संख्या में बालिकाओं का अनुपात 2016 में लगभग 65 प्रतिशत था, जो बढ़कर 2020 में 77 प्रतिशत हो गया।

मध्य प्रदेश और राजस्थान दो ऐसे राज्य हैं, जहां लापता बच्चों की कुल संख्या में बालिकाओं का अनुपात सबसे अधिक है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में, 2021 में लापता हुए बच्चों में 83 प्रतिशत से अधिक लड़कियां थीं।

गंभीर चिंता का विषय है लापता बच्चों में लड़कियों की संख्या अधिक होना

क्राइ (उत्तर) की क्षेत्रीय निदेशक सोहा मोइत्रा ने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि पिछले पांच वर्षों से लापता बच्चों में लड़कियों की संख्या अधिक है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में 2021 में लापता हुए बच्चों में 83 फीसदी से ज्यादा लड़कियां थीं। मध्य प्रदेश में पिछले साल 8,876 लड़कियों और राजस्थान में 4,468 लड़कियों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए थे।

मोइत्रा ने कहा, ‘इस स्थिति रिपोर्ट में किए गए एनसीआरबी डेटा के गहन विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि अखिल भारतीय स्तर पर लापता बच्चों की कुल संख्या में बालिकाओं का अनुपात 2016में लगभग 65 फीसद था, जो बढ़कर 2020 में 77 प्रतिशत हो गया है। सभी चार राज्यों में यही चलन रहा है, सभी लापता बच्चों में मध्य प्रदेश और राजस्थान में लड़कियों का अनुपात सबसे अधिक है।’

मोइत्रा के मुताबिक लापता लड़कों की संख्या भी गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि कोविड-19 महामारी के दौरान असंगठित क्षेत्र में सस्ते श्रम की कमी के कारण बाल श्रम की मांग बढ़ गई है, जिस कारण अधिकतर बच्चे बंधुआ मजदूरी की ओर धकेले जा रहे हैं।

शासन-प्रशासन की प्राथमिकता से गायब गुमशुदा बच्चों का मुद्दा

गौरतलब है कि ये उन लापता बच्चों की जानकारी है जो रिपोर्ट हो पाई हैं। जानकारों की मानें तो इन लापता बच्चों में से ज़्यादातर मामलों को तो पुलिस मानती ही नहीं, उनके मामले दर्ज करना और उनकी जांच करना तो दूर की बात है। कुल मिलाकर देखें तो जिन परिवारों के बच्चे लापता होते हैं उन्हें सबसे ज़्यादा सरकार और प्रशासन से निराशा होती है।

मालूम हो कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकारों को कई मौकों पर फटकारा है और इस समस्या पर नियंत्रण के लिए तंत्र बनाने का निर्देश भी दिया है। लेकिन ऐसा लगता है कि सरकारों की प्राथमिकता सूची में यह समस्या कोई महत्व नहीं रखती। बचपन बचाओ आंदोलन संगठन की याचिका पर 10 मई 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया था कि हर बच्चे के ग़ायब होने पर एफ़आईआर दर्ज होनी चाहिए और हर थाने में एक विशेष जुवेनाइल पुलिस अधिकारी होना भी जरूरी है लेकिन आज भी इस आदेश का पूर्णत: पालन नहीं होता दिखाई देता है।

ये भी पढ़ें: 5 वर्ष से कम उम्र के एनीमिया से ग्रसित बच्चों की संख्या में वृद्धि, 67 फीसदी बच्चे प्रभावित: एनएफएचएस-5

missing children
Missing Girl Childs
Children
Crimes Against Children

Related Stories

बच्चों की गुमशुदगी के मामले बढ़े, गैर-सरकारी संगठनों ने सतर्कता बढ़ाने की मांग की

2020 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1.28 लाख से अधिक मामले, फिर भी इस मुद्दे पर घोर सन्नाटा

एनसीआरबी: मॉब लिचिंग के आंकड़े गायब, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध में बढ़ोतरी

एक और नाबालिग, एक और बलात्कार: महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं यूपी?

बच्चों के साथ होने वाले अपराध पर चुप्पी कब तक?

मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम मामला : सुप्रीम कोर्ट ने जांच पूरी करने के लिये सीबीआई को दिए तीन महीने


बाकी खबरें

  • russia ukrain
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूक्रेन पर रूस के हमले से जुड़ा अहम घटनाक्रम
    25 Feb 2022
    यूरोपीय संघ रूस पर और आर्थिक एवं वित्तीय प्रतिबंध लगाने को सहमत। तो वहीं संयुक्त राष्ट्र ने यूक्रेन में मानवीय सहायता के लिए दो करोड़ डॉलर देने की घोषणा की।
  • ASHA Workers
    अनिल अंशुमन
    बिहार : आशा वर्कर्स 11 मार्च को विधानसभा के बाहर करेंगी प्रदर्शन
    25 Feb 2022
    आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिहार सरकार हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने में भी टाल मटोल कर रही है। कार्यकर्ताओं ने ‘भूखे रहकर अब और नहीं करेंगी बेगारी’ का ऐलान किया है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 13 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 302 मरीज़ों की मौत
    25 Feb 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 28 लाख 94 हज़ार 345 हो गयी है।
  • up elections
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : अयोध्या के प्रस्तावित  सौंदर्यीकरण में छोटे व्यापारियों की नहीं है कोई जगह
    25 Feb 2022
    अयोध्या के व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि प्रस्तावित लेआउट के परिणामस्वरूप दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़े पैमाने पर ध्वस्त या उन दुकानों का ज़्यादातर हिस्सा तोड़ दिया जाएगा।
  • yogi
    रोहित घोष
    यूपी चुनाव: योगी आदित्यनाथ बार-बार  क्यों कर रहे हैं 'डबल इंजन की सरकार' के वाक्यांश का इस्तेमाल?
    25 Feb 2022
    दोनों नेताओं के बीच स्पष्ट मतभेदों के बावजूद योगी आदित्यनाथ नरेंद्र मोदी के नाम का इसतेमाल करने के लिए बाध्य हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि नरेंद्र मोदी अब भी जनता के बीच लोकप्रिय हैं, जबकि योगी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License