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अफ़ग़ानिस्तान में सिविल सोसाइटी और अधिकार समूहों ने प्रोफ़ेसर फ़ैज़ुल्ला जलाल की रिहाई की मांग की
काबुल यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान और क़ानून पढ़ाने वाले डॉ. जलाल तालिबान और अफ़ग़ानिस्तान के पिछले प्रशासन के आलोचक रहे हैं। उन्होंने महज़ सुरक्षा पर ध्यान दिये जाने की तालिबान सरकार की चिंता की सार्वजनिक तौर पर आलोचना की है और लोगों की आर्थिक समस्याओं को कम करने को लेकर कार्रवाई करने की मांग की है।
पीपल्स डिस्पैच
12 Jan 2022
Protest in Afghanistan
फ़ोटो साभार: हश्त ए सुब्ह

तालिबान सरकार की ओर से शनिवार को गिरफ़्तार किये गये प्रोफ़ेसर फ़ैज़ुल्ला जलाल की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में रविवार, 8 जनवरी को विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। मानवाधिकार संगठनों ने इस गिरफ़्तारी की निंदा "बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता" पर हमले के तौर पर की है।  

तालिबान सरकार के सार्वजनिक प्रदर्शनों पर लगाये प्रतिबंध के बावजूद विभिन्न मानवाधिकार और महिला अधिकार समूहों की महिलाओं के छोटे-छोटे समूहों ने काबुल में प्रोफ़ेसर जलाल की तस्वीर वाले बैनर के साथ मार्च किया। उन्होंने इंसाफ़ के आह्वान और जहालत के ख़त्म किये जाने की मांग करते हुए नारे लगाये और प्रोफ़ेसर की तत्काल रिहाई की मांग की।

इससे पहले उस दिन तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने एक ट्वीट में कहा कि जलाल को इसलिए गिरफ़्तार किया गया, क्योंकि वह लोगों को सरकार के ख़िलाफ़ भड़का रहे थे। मुजाहिद ने जलाल के उन कुछ असत्यापित सोशल मीडिया पोस्ट को भी साझा किया, जो सरकार की आलोचना में लिखे गये थे। टोलो न्यूज़ ने बताया कि जलाल के परिवार के लोगों का कहना है कि ये सोशल मीडिया पोस्ट फ़र्ज़ी हैं और इसके लिए उन्हें ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। 

टोलो न्यूज़ ने तालिबान के उप प्रवक्ता बिलाल करीमी के हवाले से कहा कि प्रोफ़ेसर जलाल को तालिबान ख़ुफ़िया ने "व्यवस्था को तोड़ने और लोगों की गरिमा के साथ खेलने" के लिए गिरफ़्तार किया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जलाल के राष्ट्रीय सुरक्षा को बाधित करने वाले ज़िम्मेदार समूहों के साथ रिश्ते थे।  

प्रोफ़ेसर जलाल काबुल यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान और क़ानून पढ़ाते हैं।वह एक प्रसिद्ध कार्यकर्ता और काबुल की तमाम सरकारों के आलोचक भी रहे हैं। वह अफ़ग़ानिस्तान की पहली महिला राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार और महिला मामलों की पूर्व मंत्री डॉ. मसूदा जलाल के पति हैं।

उन्होंने पिछले साल नवंबर के अंत में एक टीवी शो के दौरान अफ़ग़ानिस्तान में बिगड़ती आर्थिक स्थिति के लिए तालिबान की आलोचना की थी और सरकार से सुरक्षा को लेकर बहस को बढ़ावा देने के बजाय लोगों की रोज़-ब-रोज़ की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा था। उस शो के दौरान तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद नईम के साथ उनकी बहस भी हुई थी, जो वायरल हो गयी थी।     

विभिन्न सिविल सोसाइटी समूहों और एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने जलाल के साथ एकजुटता वाले बयान जारी किये हैं। इन बयानों में उनकी गिरफ़्तारी को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है। अफ़ग़ानिस्तान के कुछ कार्यकर्ताओं ने उनकी रिहाई की मांग को लेकर एक ऑनलाइन याचिका भी शुरू कर दी है। 

पिछले साल 15 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान में सत्ता संभालने के बाद से तालिबान एक समावेशी सरकार बनाने के अपने वादे से मुकर गया है। कई मानवाधिकार समूहों और संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान सरकार पर देश में चल रहे व्यापक आर्थिक संकट के बावजूद अपने आलोचकों के पीछे पड़ने और महिलाओं के अधिकारों का गला घोंटने का आरोप लगाया है।

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