NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जब देश को एक सशक्त विपक्ष की सख़्त ज़रूरत है तब कांग्रेस असमंजस में है!
अगले पखवाड़े में देश के दो महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं लेकिन दोनों जगहों पर मुख्य विपक्षी दल के रूप में शुमार कांग्रेस में उठा-पटक खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।
अमित सिंह
07 Oct 2019
congress
Image courtesy: Twitter

चुनावों से पहले सियासी दलों में उठा-पटक देखने को मिलती रहती है। नेता किसी राजनीतिक दल का दामन थामते हैं तो किसी का छोड़ते हैं, लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के पहले कांग्रेसी नेताओं के बीच जैसी उठा-पटक देखने को मिल रही है वह अभूतपूर्व है।

हरियाणा विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण से नाराज प्रदेश कांग्रेस समिति के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने शनिवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर के कुछ लोगों के कारण पार्टी अस्तित्व के संकट से जूझ रही है।

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि राहुल गांधी के करीबियों की 'राजनीतिक हत्या' की जा रही है। त्यागपत्र में तंवर ने कहा, 'मौजूदा समय में कांग्रेस अपने राजनीतिक विरोधियों के कारण नहीं, बल्कि आपसी अंतर्विरोधों के चलते अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। जमीन से उठे और किसी बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक नहीं रखने वाले मेहनती कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है।'

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पार्टी में ‘पैसे, ब्लैकमेलिंग और दबाव बनाने की रणनीति’ काम कर रही है।

इससे पहले तंवर और समर्थकों ने टिकट वितरण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास के बाहर प्रदर्शन भी किया था। आपको बता दें कि पिछले महीने तंवर को हटाकर पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा को प्रदेश कांग्रेस समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। इसके साथ ही भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नेता प्रतिपक्ष और चुनाव प्रबन्धन समिति का प्रमुख बनाया गया था।

वहीं, दूसरी ओर मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम पार्टी छोड़ने की कगार पर खड़े हो गए हैं।

महाराष्ट्र में टिकट बंटवारे से नाराज संजय निरुपम ने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ सीटों को छोड़कर महाराष्ट्र में पार्टी की जमानत जब्त होगी। कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि मैं पार्टी छोड़ना चाहूंगा, लेकिन अगर पार्टी के भीतर चीजें इस तरह जारी रहती हैं, तो मुझे नहीं लगता कि मैं पार्टी में लंबे समय तक रह सकता हूं। मैं चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं लूंगा।

शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस के पूरे मॉडल में ही खामियां हैं। कांग्रेस पार्टी में योग्य लोगों के साथ न्याय नहीं किया गया। ऐसे लगता है कि जैसे पार्टी को संघर्ष करने वाले लोगों की जरूरत नहीं है। तीन-चार सीटों को छोड़ दिया जाए तो महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बाकी सीटों पर कांग्रेस की जमानत जब्त हो जाएगी।

बता दें कि पिछले कुछ दिनों के दौरान मुंबई कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी छोड़ी है। इनमें एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर और कृपाशंकर सिंह जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

इन दोनों नेताओं ने बागी तेवर दिखाने के साथ ही यह संदेश देने की भी कोशिश की कि उन्हें राहुल गांधी के करीबी होने के कारण किनारे किया गया। क्या वाकई ऐसा कुछ है?

इस बारे में अभी तो साफ तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन इससे कोई भी इनकार नहीं कर सकता है कि कांग्रेस की युवा पीढ़ी के नेताओं और बुजुर्ग नेताओं के बीच एक लंबे समय से खींचतान जारी है।

लोकसभा चुनाव के बाद जब राहुल गांधी की ओर से अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की गई थी तब युवा और बुजुर्ग कांग्रेसी नेताओं के बीच खींचतान की एक झलक देखने को मिली थी। उस दौरान जब पार्टी के युवा नेता राहुल गांधी के अध्यक्ष बने रहने पर जोर दे रहे थे तो बुजुर्ग नेता या तो मौन साधे थे या फिर विकल्प सुझा रहे थे।

लंबे इंतजार के बाद राहुल का त्यागपत्र स्वीकृत तो हुआ, लेकिन अंतरिम अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी का चयन करना बेहतर समझा गया। इससे यही संदेश निकला कि गांधी परिवार पार्टी पर अपनी पकड़ छोड़ने के लिए तैयार नहीं। इस संदेश की एक वजह प्रियंका गांधी वाड्रा का अपने पद पर कायम रहना भी था, जिन्हें लोकसभा चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस महासचिव बना दिया गया था।

फिलहाल इस पूरी स्थिति में कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी के बैंकॉक जाने की खबर ने पार्टी के अंदर हलचल पैदा कर दी है। राहुल के इस विदेशी दौरे को उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।

ऐसे कयास भी लगाए जा रहे हैं कि लोकसभा चुनाव के बाद से ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से अपनी नाराजगी के चलते पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष हरियाणा व महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं लेगें। हालांकि पार्टी के कुछ नेता ऐसे कयासों को खारिज कर यह दावा कर रहे हैं कि 11 अक्टूबर को वापसी के बाद राहुल दोनों चुनावी राज्यों में कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करेंगे।

फिलहाल इस खबर के बाहर आने से भी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के मनोबल पर बुरा ही असर पड़ा है। शनिवार रात को राहुल गांधी के बैंकॉक रवाना होने की खबर आने के बाद से ही ट्विटर पर बैंकॉक ट्रेंड होने लगा था। यही नहीं रविवार को पूरे दिन राहुल गांधी टॉप ट्रेंड में रहे।

भाजपा के नेता और उनके आईटी सेल के लोग इस मामले पर मीम बनाने से लेकर कमेंट तक करने लगे लेकिन कांग्रेस की तरफ से इस मसले पर चुप्पी छाई रही। हालांकि बाद में अभिषेक मनु सिंघवी ने बहुत ही कमजोर सा बचाव करते हुए कहा कि निजी और सार्वजनिक जीवन का घालमेल नहीं किया जाना चाहिए।  

हालांकि यह बचाव इतना कमजोर और अस्पष्ट था कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को कोई संदेश दे पाने में असफल रहा। इसी के चलते जहां चर्चाएं इन दोनों राज्यों में पार्टी की तैयारियों की होनी चाहिए वहीं सोमवार को यह चर्चा होती रही कि राहुल गांधी बैंकॉक नहीं कंबोडिया गए हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से अब तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

फिलहाल जिस तरह यह साफ नहीं है कि कांग्रेस को अगला पूर्णकालिक अध्यक्ष कब मिलेगा उसी तरह यह भी साफ नहीं कि पार्टी अपनी खोई हुई जमीन हासिल करने के लिए प्रयोग करना कब छोड़ेगी? वह मुद्दों पर अपना स्टैंड कब क्लियर करेगी?

लोकसभा चुनाव के बाद से ही अध्यक्ष पद, यूएपीए कानून, कश्मीर, तीन तलाक समेत तमाम मौकों पर पार्टी नेता से लेकर कार्यकर्ता स्पष्ट तौर पर अपना पक्ष रखने में नाकाम रहे हैं।

सशक्त विपक्ष का अभाव किसी भी लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं होता। अपने यहां भी जब देश को एक सशक्त विपक्ष की सख्त जरूरत है तब मुख्य दल होने का दावा करने वाली और लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस असमंजस से बुरी तरह ग्रस्त है। इसमें संदेह है कि वह हरियाणा और महाराष्ट्र में कुछ हासिल कर सकेगी।

इन राज्यों के साथ देश के अन्य हिस्सों में भी वह दयनीय दशा में है। वास्तव में कांग्रेस का भला तब तक नहीं हो सकता जब तक वह नेतृत्व के सवाल को ईमानदारी से हल नहीं करती। जिससे कार्यकर्ता से लेकर शीर्ष स्तर तक सबको हर मुद्दे पर स्पष्ट ब्रीफिंग मिल सके।

Indian democracy
Central Government
BJP
Opposition Failure
maharastra election
haryana Election
Rahul Gandhi
Congress
sonia gandhi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    'राम का नाम बदनाम ना करो'
    17 Apr 2022
    यह आराधना करने का नया तरीका है जो भक्तों ने, राम भक्तों ने नहीं, सरकार जी के भक्तों ने, योगी जी के भक्तों ने, बीजेपी के भक्तों ने ईजाद किया है।
  • फ़ाइल फ़ोटो- PTI
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?
    17 Apr 2022
    हर हफ़्ते की कुछ ज़रूरी ख़बरों को लेकर फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन..
  • hate
    न्यूज़क्लिक टीम
    नफ़रत देश, संविधान सब ख़त्म कर देगी- बोला नागरिक समाज
    16 Apr 2022
    देश भर में राम नवमी के मौक़े पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद जगह जगह प्रदर्शन हुए. इसी कड़ी में दिल्ली में जंतर मंतर पर नागरिक समाज के कई लोग इकट्ठा हुए. प्रदर्शनकारियों की माँग थी कि सरकार हिंसा और…
  • hafte ki baaat
    न्यूज़क्लिक टीम
    अखिलेश भाजपा से क्यों नहीं लड़ सकते और उप-चुनाव के नतीजे
    16 Apr 2022
    भाजपा उत्तर प्रदेश को लेकर क्यों इस कदर आश्वस्त है? क्या अखिलेश यादव भी मायावती जी की तरह अब भाजपा से निकट भविष्य में कभी लड़ नहींं सकते? किस बात से वह भाजपा से खुलकर भिडना नहीं चाहते?
  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में औंधे मुंह गिरी भाजपा
    16 Apr 2022
    देश में एक लोकसभा और चार विधानसभा चुनावों के नतीजे नए संकेत दे रहे हैं। चार अलग-अलग राज्यों में हुए उपचुनावों में भाजपा एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License