NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
घरबंदी के पचास दिन और मोदी सरकार का रिवर्स गियर
कोरोना के कारण घरबंदी भी नोटबंदी की तरह एक गलत निर्णय के भेंट चढ़ चुका है। ‘मेक इन इंडिया’ के नये रूप ‘आत्मनिर्भर’ का नारा देना ‘अच्छे दिन’, ‘सबका साथ-सबका विकास’ जैसे मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखाने जैसा ही है। 
सुनील कुमार
14 May 2020
modi
image courtesy: the hindu

24 मार्च, 2020 को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने रात 8 बजे घोषणा की थी कि रात 12 बजे से पूरे देश में लॉकडाउन (घरबंदी) होगी। उन्होंने एक प्लेकार्ड के माध्यम से देश को ‘कोरोना’ का मतलब समझाया- ‘कोई रोड पर नहीं निकले’। उन्होंने घर के आगे लक्ष्मण रेखा खींचने के लिए बोला और कहा कि इसको लांघिये मत। ठीक वही हुआ, लोगों के घर के आगे लक्ष्मण रेखा खिंच गई और जो भूख-प्यास से मजबूर होकर उसको पार करना चाहा उन्हें लाठी-डंडों से पीटा गया, उन पर किटाणु नाशक का छिड़काव किया गया, उनको पकड़कर जानवरों के बेड़े की तरह क्वारंटाइन कर दिया गया। क्वारंटाइन सेंटरों में सफाई नहीं है और न ही शारीरिक दूरी के लिए जगह। उनको बाहर से खाना फेंक कर दिया जाने लगा या भूखे रहना पड़ा। देखा जा रहा है कि ट्रकों, बसों, ट्रैक्टरों, दूध के टैंकर, कंक्रीट मिक्सर वाली गाड़ियों में जान जोखिम में डालकर और मुंह मांगा पैसा देकर घरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें कई लोगों की जानें भी जा चुकी हैं। एक रिर्पोट के अनुसार कोरोना लॉक डाउन के कारण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से करीब 400 लोगों की जानें जा चुकी हैं।

भारत के प्रधानमंत्री ने जिस दिन लॉकडाउन की घोषणा की थी उस दिन देश भर में 536 कोरोना के संक्रमित मरीज थे और आज देश कोरोना संक्रमितों की संख्या 75,000 का पार कर चुका है जिसमें से लगभग 24,500 लोग ठीक हुए हैं तथा 2,500 के करीब लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

प्रधानमंत्री ने शुरुआती समय में राष्ट्र के सम्बोधन में लोगों की जान बचाने पर जोर दिया और 24 मार्च, 2020 को कहा था कि 21 दिन केवल एक ही आग्रह है- ‘‘आप अपने घरों के अंदर ही रहें। जान है तो जहान है।’’

14 अप्रैल, 2020 के अपने सम्बोधन में कहा कि ‘‘हमें कोरोना को नये क्षेत्रों में फैलने नहीं देना है। लॉकडाउन का बहुत बड़ा लाभ देश को मिला है। आर्थिक दृष्टि से देखें तो महंगा जरूर लगता है लेकिन भारतवासियों की जिन्दगी के आगे इसकी कोई तुलना नहीं हो सकती।’’

प्रधानमंत्री 12 मई, 2020 को जब बोलने आये तो अचानक उनका जोर आत्मनिर्भर बनने पर आ गया। उन्होंने यह जानकारी नहीं दी कि कोरोना महामारी से भारत में कितने लोग संक्रमित हैं और कितने लोगों की जानें गई हैं लेकिन उन्होंने विश्व के कोरोना संक्रमितों की संख्या का जिक्र जरूर किया था। 24 मार्च को देश के 75 जिले कोरोना संक्रमित थे आज यह संख्या बढ़कर 420 हो गई है।

12 मई, 2020 को 8 बजे रात प्रधानमंत्री को राष्ट्र के नाम सम्बोधन सुनकर अचानक 8 नवम्बर, 2016 की शाम 8 बजे का उनका सम्बोधन याद आ गया। जब उन्होंने 12 बजे रात से 500, 1000 रुपये के नोटों का चलन बंद किया था और कहा था कि 50 दिन में सब ठीक हो जायेगा, अगर नहीं ठीक हुआ तो जिस चौराहे पर बोलेगे मैं खड़ा हो जाऊंगा। 8 नवम्बर को घोषणा करते हुए कहा था कि-‘‘देश को भ्रष्टाचार और काले धन रूपी दीमक से मुक्त कराने के लिए एक और सशक्त कदम की जरूरत है। भ्रष्टाचार, काले धन और जाली नोट के कारोबार में लिप्त देश विरोधी और समाज विरोधी तत्वों के पास मौजूद 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट अब केवल कागज के टुकड़े समान रह जाएंगे। हमारा यह कदम देश में भ्रष्टाचार, काला, धन एवं जाली नोट के खिलाफ हम जो लड़ाई लड़ रहे हैं, उसको ताकत मिलने वाली है। जो आदमी सम्पत्ति मेहनत और ईमानदारी से कमा रहे हैं, उनकी हक की पूरी रक्षा की जायेगी।’’

इन 50 दिनों में 60 बार नियम बदले गये। जब रिजर्व बैंक के आंकड़ों ने बता दिया कि 500 व 1000 रुपये के नोट 15.417 लाख करोड़ चलन में थे, जिसमें से 15.310 लाख करोड़ रुपये लौट आये हैं। पैसे लौटते देख सरकार प्रचार करने लगी कि नोटबंदी का मकसद कैशलैश इकानॉमी बनाना था, अनौपचारिक लेन देन को औपचारिक बनाया जायेगा, नकली नोटों पर पाबंदी लगेगी, इत्यादि इत्यादि। जब रिजर्व बैंक के आंकड़े ही बतलाने लगे कि पहले से ज्यादा नोट नकदी के चलन में है और नकली नोटों की संख्या भी बढ़ रही है तो सरकार कहने लगे कि नक्सलवाद और आतंकवाद की कमर टूट गई है।

नोटबंदी की ही तरह मोदी सरकार-2 पर जब कोरोना को लेकर सवाल उठने लगे और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पीपीई किट, मास्क नहीं होने की बात उठने लगी तो उन स्वास्थ्यकर्मियों के लिए ताली-थाली, शंख-घड़ियाल बजवा दिया। पहला केस आने के बाद 22 मार्च, 2020 तक 52 दिनों में कोरोना संक्रमितों की संख्या 396 की संख्या थी जो कि 24 मार्च को 536 हो गई थी, यानी दो दिन में 136 मरीज बढ़ गये तो सर से पानी ऊपर जाते देख 24 मार्च को सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की गई (उस समय तक मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार शपथ ग्रहण कर चुकी थी)। इस समय जगह-जगह स्वास्थ्कर्मियों द्वारा पीपीई किट और एन-95 मास्क की कमी को लेकर राज्य और केन्द्र सरकार को पत्र लिखे जाने लगे। मोदी जी ने 9 अप्रैल को दीये-मोमबत्ती जलाने का फरमान सुना दिया।

14 अप्रैल, 2020 को लॉक डाउन का 21वां दिन खत्म होने वाला था। मोदी जी ने 25 मार्च, 2020 को अपने निर्वाचन क्षेत्र- वाराणसी के विडियो कान्फ्रेंस में कहा था कि ‘‘महाभारत के युद्ध को जीतने में 18 दिन का समय लगा था और भारत को कोरोना वायरस के खिलाफ युद्ध जीतने में 21 दिन लगेंगे।’’ लेकिन यह युद्ध मोदी हारते जा रहे थे, क्योंकि उस दिन तक भारत में कोरोना मरीजों की संख्या 11,487 हो चुकी थी। भारत में कोरोना जंग से लड़ने की तैयारियों पर सवाल उठ रहे थे कि स्वास्थ्यकर्मियों के पास पीपीई किट नहीं है, जांच के लिए टेस्ट किट की कमी है और जांच 10-15 हजार ही लोगों का हो पा रहा था। प्रधानमंत्री ने 14 अप्रैल को ‘जान है तो जहान है’ का नारा देते हुए लॉकडाउन को तीन मई तक के लिए बढ़ा दिया।

जो लोग लॉकडाउन के पहले हफ्ते से ही परेशान थे, भूखे-प्यासे थे, वे फिर से सड़क पर पैदल ही घर जाने के लिए निकल आये। कई लोगों को पैदल चलते-चलते भूख-प्यास से मौत हो गई थी तो कुछ गाड़ियों से कुचल दिये गये। मंगल ग्रह पर जाने का सपना दिखाने वाली सरकार मजूदरों को उनके घर तक नहीं पहुंचा पाई।

तीन मई दूसरा चरण खत्म होने को आया तो मोदी जी ने सेना से ‘कोरोना योद्धाओं’ पर पुष्प वर्षा करा दी। तब तक देश भर में 400 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी और 1,000 से अधिक दिल्ली, मुम्बई पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों के जवान कोरोना से संक्रमित हो चुके थे। तीसरे लॉकडाउन को 17 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया और जब लॉकडाउन की घोषणा के 5 दिन पूरे हुए तो मोदी जी कोरोना पर बोलने के लिए पांचवी बार तब अवतरित हुए जब देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 75 हजार के करीब थी जिसमें से करीब 2,500 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। उस समय भारत के प्रधानमंत्री, अर्थशास्त्री के रूप में सामने आते हैं और कोरोना महामारी को एक अवसर के रूप में देखते हुए भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सपना दिखाये। इस सपने को बहुत दिनों के बाद भारत के प्रधानमंत्री ने याद किया है। 15 अगस्त, 2014 को लाल किले के प्राचीर से देश को सम्बोधित करते हुए कहा था कि आइये, हमारे देश में युवा श्रमिक हैं (35 उम्र से कम 65 प्रतिशत आबादी), जिनके पास कौशल, प्रतिभा और अनुशासन है, उसका इस्तेमाल कीजिये। हम विश्व को एक अवसर देना चाहते हैं- ‘कम, मेक इन इण्डिया’। 25 सितम्बर, 2014 को विज्ञान भवन में ‘मेक इन इण्डिया’ का ‘लोगो’ भी प्रधानमंत्री द्वारा जारी किया गया, लेकिन 2019 आते-आते वे इस नारे को भूल गये। भारत में नोटबंदी के दौरान जिस तरह से समय बीतता गये तो नोटबंदी का उद्देश्य दूसरा बताया जाने लगा उसी तरह लॉकडाउन के 50 दिन होते-होते कोरोना महामारी की जगह आत्मनिर्भर संकल्प के रूप में बदल गया है।

कोरोना के कारण घरबंदी भी नोटबंदी की तरह एक गलत निर्णय के भेंट चढ़ चुका है। नोटबंदी में 150 लोगों की जानें गई और बेरोजगारी दर बढ़कर 45 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। उसी तरह घरबंदी के कारण हजारों लोगों की जानें जायेंगी। बेरोजगारी दर 8.74 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल माह में 23.52 की ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच चुकी है। मोदी जी आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लेकर बेरोजगार लोगों के मन में कुछ देर के लिए हौसला अफज़ाई का काम कर रहे हैं, जिसके दम पर भारत ने 5 ट्रिलियन डॉलर का शक्तिशाली राष्ट्र बनने का सपना देख रहे थे उन मजदूरों-किसानों की क्या हालत है, हम देख सकते हैं। अभी उनके श्रम को और निचोड़ने के लिए श्रम कानूनों में बदलाव किया जा रहा है जो आठ घंटे के काम का अधिकार मजदूरों के कुर्बानियों से मिला था, आज भारत के कई राज्य उस अधिकार को दफना चुके हैं। भारत के प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर बनने के लिए कहते हैं कि ‘‘भारतवासी को अपने लोकल के लिए वोकल बनना है।’’ लेकिन भारत के प्रधानमंत्री चश्मे और पेन जो लगाते हैं, वो खुद विदेशी होते हैं। आत्मनिर्भरता का नारा नेहरू के तृतीय पंचवर्षीय योजना का नारा है तो प्रधानमंत्री कोरोना महामारी में रिवर्स गियर से काम चला रहे हैं। क्या वह घरबंदी पर देशवासियों से माफी मांगेगे जिन्होंने कष्ट झेला है, जिसके चलते बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं तक चिलचिलाती धूप में भूखे-प्यासे सैकड़ां-हजारों कि.मी. चलने को विवश हुए हैं और अपनी जाने गंवाई हैं। या वे नोटबंदी की तरह घरबंदी को भी सफल बताते रहेंगे और जश्न मनायेंगे? ‘मेक इन इंडिया’ के नये रूप ‘आत्मनिर्भर’ का नारा देना ‘अच्छे दिन’, ‘सबका साथ-सबका विकास’ जैसे मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखाने जैसा ही है।   

 

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

COVID-19
Coronavirus
Coronavirus lockdown
Narendra modi
modi sarkar

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

ख़बरों के आगे-पीछे: मोदी और शी जिनपिंग के “निज़ी” रिश्तों से लेकर विदेशी कंपनियों के भारत छोड़ने तक

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

ख़बरों के आगे-पीछे: राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज़े के पास पहुँची आप पार्टी से लेकर मोदी की ‘भगवा टोपी’ तक

कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल मॉडल ऑफ़ गवर्नेंस से लेकर पंजाब के नए राजनीतिक युग तक

उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!


बाकी खबरें

  • Victims of Tripura
    मसीहुज़्ज़मा अंसारी
    त्रिपुरा हिंसा के पीड़ितों ने आगज़नी में हुए नुकसान के लिए मिले मुआवज़े को बताया अपर्याप्त
    25 Jan 2022
    प्रशासन ने पहले तो किसी भी हिंसा से इंकार कर दिया था, लेकिन ग्राउंड से ख़बरें आने के बाद त्रिपुरा सरकार ने पीड़ितों को मुआवज़ा देने की घोषणा की थी। हालांकि, घटना के तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के…
  • genocide
    अजय सिंह
    मुसलमानों के जनसंहार का ख़तरा और भारत गणराज्य
    25 Jan 2022
    देश में मुसलमानों के जनसंहार या क़त्ल-ए-आम का ख़तरा वाक़ई गंभीर है, और इसे लेकर देश-विदेश में चेतावनियां दी जाने लगी हैं। इन चेतावनियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
  • Custodial Deaths
    सत्यम् तिवारी
    यूपी: पुलिस हिरासत में कथित पिटाई से एक आदिवासी की मौत, सरकारी अपराध पर लगाम कब?
    25 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार दावा करती है कि उसने गुंडाराज ख़त्म कर दिया है, मगर पुलिसिया दमन को देख कर लगता है कि अब गुंडाराज 'सरकारी' हो गया है।
  • nurse
    भाषा
    दिल्ली में अनुग्रह राशि नहीं मिलने पर सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ ने विरोध जताया
    25 Jan 2022
    दिल्ली नर्स संघ के महासचिव लालाधर रामचंदानी ने कहा, ‘‘लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल, जीटीबी हस्पताल और डीडीयू समेत दिल्ली सरकार के अन्य अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ ने इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग…
  • student
    भाषा
    विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में, नयी हकीकत को स्वीकार करना होगा: रिपोर्ट
    25 Jan 2022
    रिपोर्ट के अनुसार महामारी के कारण उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों में विश्वविद्यालयों के सामने अनेक विषय आ रहे हैं और ऐसे में विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License