NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
कोविड-19 संकट : सुरक्षा उपकरणों की कमी से स्वास्थ्य कर्मियों के जीवन को ख़तरा
विशेषज्ञों के अनुमान को मानें तो भविष्य में कोविड-19 के केसों की संख्या लगभग 30 करोड़ से 50 करोड़ तक हो जाएगी, जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने कथित तौर पर केवल 7.25 लाख बॉडी ओवरऑल, 60 लाख एन95 मास्क और एक करोड़ तीन-प्लाई मास्क की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है।
शिल्पा शाजी
25 Mar 2020
Translated by महेश कुमार
coronavirus
प्रतीकात्मक तस्वीर

जैसे-जैसे देश भर में कोविड-19 केसों की संख्या में तेज़ी आ रही है, स्वास्थ्य कर्मियों के काम करने के हालात ख़तरनाक स्थिति में पहुँच रहे हैं, क्योंकि वे उचित व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) के बिना काम करने पर मजबूर हैं।

मंगलवार शाम तक, भारत में नोवेल कोरोना वायरस के 527 सकारात्मक मामलों की सूचना मिली है। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले चार महीनों में देश में 30 करोड़ से 50 करोड़ लोग संक्रमित हो सकते हैं। हालांकि इनमें से कई ठीक हो पाएंगे हैं या केवल हल्के लक्षणों का सामना कर सकते हैं, लेकिन हज़ारों लोगो को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होगी। देश की पहले से ही चरमराती सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के सामने यह गंभीर चुनौती हाथ फैलाए खड़ी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 17 मार्च तक, 84,000 भारतीयों पर एक आइसोलेशन बेड और 36,000 भारतीयों पर एक क्वारंटाइन बिस्तर है। डाटा में यह भी बताया गया है कि 11,600 भारतीयों पर एक डॉक्टर और 1,826 भारतीयों पर एक अस्पताल का बिस्तर है।

यद्यपि अनुमानित मामलों की संख्या लगभग 30 करोड़ से 50 करोड़ के बीच होने की संभावना है, इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने कथित तौर पर मात्र 7.25 लाख बॉडी ओवरऑल, 60 लाख एन95 मास्क और एक करोड़ तीन-प्लाई मास्क की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है।

प्रिवेंटिव वियर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (पीएमडबल्यूएआई) के अनुमानों के अनुसार मरीज़ों की आमद से निपटने के लिए, डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिक्स, रखरखाव और अन्य सहायक कर्मचारियों सहित न्यूनतम 5 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। यदि प्रति दिन पीपीई की तीन इकाइयों की आवश्यकता होती है, तो इस हिसाब से प्रतिदिन लगभग 15 लाख पीपीई की आवश्यकता होगी।

पीडब्लूएमएआई के अध्यक्ष संजीव रेहान ने कहा कि "यह एक रूढ़िवादी अनुमान है, यदि हम प्रति स्वास्थ्य कर्मी के लिए हर दिन एक पीपीई पर भी विचार करें, फिर हम इसे मुहैया नहीं करा  सकते हैं। जब आप एक से दूसरे मरीज़ के पास जाते हैं, तो डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देश के अनुसार आपको अपना पीपीई बदलना होगा। जबकि हालात ऐसे हैं कि हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते।”

रविवार को स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की मीडिया ब्रीफिंग के समय जब संयुक्त सचिव लव अग्रवाल से सुरक्षात्मक गियर की ख़रीद में पारदर्शिता की कमी के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि पीपीई अब भारत में ही निर्मित हो रहे हैं, जबकि उन्हे पहले आयात किया जाता था।

जब उनसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशानिर्देशों के बावजूद व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) का भंडार बनाए रखने में सरकार की विफलता के बारे में भी सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "रिपोर्ट कहां है?"

27 फ़रवरी को, डब्ल्यूएचओ ने दिशानिर्देश जारी किए थे, जिसमें कहा गया था: कि “पीपीई का  मौजूदा वैश्विक भंडार विशेष रूप से चिकित्सा मास्क और सांस लेने वाली मशीन की भारी कमी है; और साथ ही गाउन और गॉगल्स की आपूर्ति भी जल्द ही कम होने की उम्मीद है। विश्व स्तर पर पीपीई की मांग बढ़ने से - न केवल कोविड-19 केसों की संख्या, बल्कि ग़लत सूचना की वजह से घबराहट बढ़ेगी और इसके चलते बेतरतीब ख़रीद और भंडारण किया जा सकता है- जिसके परिणामस्वरूप विश्व स्तर पर पीपीई की कमी हो जाएगी।”

द कारवां की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 27 फरवरी को दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन भारत सरकार ने 19 मार्च तक इंतज़ार किया और पीपीई के लिए घरेलू स्तर पर निर्मित पीपीई और कच्चे माल के निर्यात पर रोक लगाने वाली अधिसूचना जारी की थी।

लेकिन एम्स के साथ काम करने वाले डॉक्टरों ने एक प्रोटोकॉल का मसौदा तैयार किया है। इसके खंड-एक में कहा गया है कि प्रत्येक स्वास्थ्य कर्मी कोविड-19 के रोगियों की शिफ़्ट में शामिल होगा, जो बताता है कि प्रत्येक कर्मी को प्रतिदिन चार पीपीई बदलने की आवश्यकता होगी।

16 मार्च को, एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने प्रबंधन को लिखे अपने पत्र में कहा कि यह "दुख की बात है कि अधिकांश वार्डों में पर्याप्त सार्वभौमिक एहतियात घटक मौजूद नहीं हैं।"

letter_7.jpg

जीटीबी अस्पताल के एक अन्य डॉक्टर ने ट्विटर पर लिखा कि डॉक्टरों और नर्सों को एन95 मास्क नहीं दिया गया है।

twit 2.JPG

एक अन्य डॉक्टर, हरजीत सिंह भट्टी ने ट्वीट किया: “असम के मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य संबंधी कर्मियों को ख़ुद को प्लास्टिक की थैलियों से ढंकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिन थैलियों का इस्तेमाल व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों की कमी के चलते किया जा रहा है और इनका इस्तेमाल अक्सर बायोमेडिकल कचरे के बीएसी को ले जाने के लिए किया जाता है। क्या PM @narendramodi इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगे? क्या वो इन्हें #PPEsBeforeApplause (Sic) मुहैया करवा सकते हैं?"

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

COVID-19 Crisis: Shortage of PPE Will Endanger Health Workers’ Lives

COVID 19
Coronavirus
Indian Healthcare System
Covid 19 India
Personal Protection Equipment
PPE

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब स्ट्रेन BA.4 और BA.5 का एक-एक मामला सामने आया

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 

देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक


बाकी खबरें

  • Chhattisgarh
    रूबी सरकार
    छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार से नाराज़ विस्थापित किसानों का सत्याग्रह, कांग्रेस-भाजपा दोनों से नहीं मिला न्याय
    16 Feb 2022
    ‘अपना हक़ लेके रहेंगे, अभी नहीं तो कभी नहीं’ नारे के साथ अन्नदाताओं का डेढ़ महीने से सत्याग्रह’ जारी है।
  • Bappi Lahiri
    आलोक शुक्ला
    बप्पी दा का जाना जैसे संगीत से सोने की चमक का जाना
    16 Feb 2022
    बप्पी लाहिड़ी भले ही खूब सारा सोना पहनने के कारण चर्चित रहे हैं पर सच ये भी है कि वे अपने हरफनमौला संगीत प्रतिभा के कारण संगीत में सोने की चमक जैसे थे जो आज उनके जाने से खत्म हो गई।
  • hum bharat ke log
    वसीम अकरम त्यागी
    हम भारत के लोग: समृद्धि ने बांटा मगर संकट ने किया एक
    16 Feb 2022
    जनवरी 2020 के बाद के कोरोना काल में मानवीय संवेदना और बंधुत्व की इन 5 मिसालों से आप “हम भारत के लोग” की परिभाषा को समझ पाएंगे, किस तरह सांप्रदायिक भाषणों पर ये मानवीय कहानियां भारी पड़ीं।
  • Hijab
    एजाज़ अशरफ़
    हिजाब के विलुप्त होने और असहमति के प्रतीक के रूप में फिर से उभरने की कहानी
    16 Feb 2022
    इस इस्लामिक स्कार्फ़ का कोई भी मतलब उतना स्थायी नहीं है, जितना कि इस लिहाज़ से कि महिलाओं को जब भी इसे पहनने या उतारने के लिए मजबूर किया जाता है, तब-तब वे भड़क उठती हैं।
  • health Department
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग
    16 Feb 2022
    "स्वास्थ्य सेवा की बात करें तो उत्तर प्रदेश में पिछले पांच सालों में सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। प्रदेश के जालौन जिले की बात करें तो यहां के जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक पिछले चार साल से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License