NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
ग्राउंड रिपोर्ट: कोरोना काल में पूर्वांचल बेहाल
सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस, मुंबई ने पूर्वांचल के कुछ शहरों, मोहल्लों में लोगों से बात करके सच्चाई जानने की कोशिश की।
सबरंग इंडिया
04 May 2021
ग्राउंड रिपोर्ट: कोरोना काल में पूर्वांचल बेहाल

कोविड 19 की दूसरी लहर भयावह होगी ये तो खबरें आ रही थीं लेकिन हमारी सरकार की तैयारी और उसकी व्यवस्था ऐसे चरमरा जाएगी ये सोचा ही नहीं था। 1 मई को पहली बार रिकॉर्ड चार लाख से अधिक नए कोरोना मरीज मिले हैं और 3523 की जान चली गई है। हमारे प्रधानमंत्री को विश्व रिकॉर्ड बनाने का बड़ा शौक है, और इस महामारी में भी हमारा देश विश्व रिकॉर्ड की तरफ बढ़ रहा है। भारत से पहले सिर्फ अमेरिका ही ऐसा देश था जहा एक दिन में चार लाख से अधिक कोरोना पॉज़िटिव के मामले सामने आए थे। लेकिन अब ये रिकॉर्ड विश्व गुरु भारत के नाम आ गया है। 

देश में कोविड 19 की दूसरी लहर ने कोहराम मचा रखा है। रोज़ कोरोना के नए मरीजों और कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या में बढ़ोतरी से लोग दहशत में हैं। बड़े शहरों और बड़े बड़े लोगों की ख़बरें तो समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों में आ रही हैं, लेकिन छोटे शहरों, कस्बों और गरीबों पर जो गुज़र रही है वो कहीं सुनाई नहीं दे रहा है। सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस, मुंबई ने पूर्वांचल के कुछ शहरों, मोहल्लों में लोगों से बात करके सच्चाई जानने की कोशिश की। आजमगढ़ के मुबारकपुर, मऊ के कस्बा घोसी, वाराणसी के सराइय्या जो बुनकर बहुल इलाके हैं, वहाँ के लोगों ने जो बताया वो दिल दहला देने वाली ख़बरें हैं। लोग ऑक्सीजन की कमी से ज़्यादा मर रहे हैं। इन मौतों का ज़िम्मेदार कौन है ये बताना ज़रूरी नहीं है। 

सरैया की सामाजिक कार्यकर्ता कैसर बानो बताती हैं कि बहुत बुरा हाल है। घर घर में दो–तीन लोग मर रहे हैं। सुबह सास का इंतेकाल हुआ तो शाम को बहू गुज़र गई। कब्रिस्तान में लाइन लगी हुई है। कब्र खोदने वाले भी अब नहीं मिल रहे हैं। काम धंधा भी बंद है कहीं से कोई मदद भी नहीं मिल रही है। 

मऊ ज़िला के घोसी कस्बे में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता आकिब बताते हैं, कि रोज़ की मौतों को देख कर रूह काँप जा रही है। घोसी कस्बे की आबादी लगभग 50 हज़ार होगी और गत 10-15 दिनों से रोज़ 6 से 8 लोग मर रहे हैं, जिसमें ज़्यादातर ऑक्सीजन न मिलने के कारण खत्म हो रहे हैं। कई घटनाओं को बताते हुए एक दर्दनाक वाकया जो कुछ रोज़ पहले हुआ उसके बारे में बताया, कि एक भाई की तबीयत ख़राब हुई ऑक्सीजन नही मिला इंतेकाल कर गए। उनकी माँ की तबीयत बिगड़ी उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिला दो रोज़ में वो चली गईं। दूसरा बड़ा भाई बीमार हुआ उसे लेकर बहुत कोशिश हुई वक्त पर ऑक्सीजन नहीं मिला वो भी इंतेकाल कर गए। एक ही घर में तीन मौत देख कर लगता है सब खत्म हो गया है। दूसरी घटना एक पति पत्नी और उसकी 9 साल की बच्ची की है। ये लोग मज़दूर थे। बीवी के सामने कोरोना से संक्रमित मियां ने दम तोड़ दिया, दूसरे दिन बीवी जो प्रेग्नेंट थी उसने जो बच्चा पैदा किया वो कुछ घंटे में मर गया और बाद में ऑक्सीजन न मिलने के कारण माँ भी चल बसी। अब इस परिवार में सिर्फ नौ साल की बच्ची है, जिसे देखने वाला कोई नहीं है। आगे आकिब बताते हैं कि एक तरफ तो लोग मर रहे हैं दूसरी तरफ जनाज़े की नमाज़ पढ़ने वालों की कमी नहीं है, मना करने पर उलटे नाराज़ होते हैं। न मास्क लगाते हैं न ही दूरी बना कर कब्रिस्तान जाते हैं। दिन भर कब्रिस्तान में आने वालों की लाइन लगी है। 


आकिब आगे कहते हैं कि मऊ के ऑक्सीजन प्लांट से दूसरे ज़िले आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर को ऑक्सीजन सप्लाइ हो रहा है और मऊ के लोगों को नहीं मिल रहा है। लोग आक्सीजन के लिए लाइन लगाते हैं और लम्बी लाइन के बीच से ही कुछ लोग चले जाते हैं, ये कहते हुए कि मरीज खत्म हो गया अब ज़रूरत नहीं है। सरकारी अस्पताल की हालत और भी ख़राब है। घोसी के सदर अस्पताल में सिर्फ चार सिलेंडर आता है। न बेड है, न दवाई और न ही ऑक्सीजन, वेंटिलेटर तो दूर की बात है। 

मऊ में 15 अप्रैल को चेयरमैन, एसडीएम व अन्य अधिकारियों की बैठक जो कोरोना पर बुलाई गई थी उसमें आकिब को भी एक सामाजिक कार्यकर्ता के नाते बुलाया गया। इस मीटिंग में नाली, खरंजा पर बात हो रही थी जब आकिब ने टोका कि कोविड पर बात करिए, यहां ऑक्सीजन नहीं है, बेड और दवाई नहीं है लोग मर रहे हैं, तो अधिकारियों ने डांटा और चुप करा दिया, इसके बाद आकिब ने मीटिंग से वॉकआउट कर दिया आकिब के साथ साथ ही दो भाजपा के नेताओं ने भी मीटिंग से वॉकआउट कर दिया। सरकार की कोरोना से लड़ने की ऐसी तैयारी ही हमें ऐसे भयावह तस्वीरें दिखा रही हैं। सरकारी अस्पताल में जिस दिन कोरोना से सिर्फ दो मौतों को दिखाया गया था वहीं सच्चाई ये है, कि मौतें कहीं ज़्यादा थीं। सरकार कोविड से कम साँस की बीमारी से हुई मौते ज़्यादा दिखा रही है। कोविड अस्पताल बनाया गया है लेकिन दूसरे दिन ही नोटिस लगा दिया कि यहाँ बेड नहीं है और न ही ऑक्सीजन है, ऐसा आकिब का कहना था। 

आजमगढ़ के मुबारकपुर से सलमान एक सक्रिय कार्यकर्ता हैं। फोन से बात करने पर बताया कि 40% लोगों की मौतें सभी समुदाय के लोगों को मिला कर हो रही हैं। स्थिति भयानक है। अधिकतर लोगों की जाने ऑक्सीजन न मिलने की वजह से हो रही है। सलमान आगे बताते हैं कि रोज़ 12 से 15 लोग तो उन्हे ही फोन करके ऑक्सीजन की मांग करते हैं। कब्रिस्तान और शमशान घाट दोनों जगह लोगों की भीड़ है। 

एक तरफ पूर्वांचल के लोग ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे हैं, दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार 1 मई को दावा किया कि प्रदेश के किसी भी निजी या सरकारी कोविड अस्पताल में आक्सीजन की कोई कमी नहीं है। हम सरकार से पूछते हैं कि आखिरकार सच्चाई क्यों नहीं बताई जा रही है? सरकार जनता के पैसे का उपयोग सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट, कुम्भ और मंदिर निर्माण पर क्यों कर रही है। 22 लाख वर्ग फीट भूभाग पर सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत नए संसद भवन और सचिवालय समेत अन्य इमारतों का निर्माण होना है. इस परियोजना पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इस लॉकडाउन में दिल्ली में सब कामकाज बंद है लेकिन सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का काम चल रहा है। समय आ गया है कि हम भारत के लोग तय करें कि हमें क्या चाहिए, अस्पताल, ऑक्सीजन, बेड, वेंटिलेटर, दवाई जैसी स्वास्थ्य सेवाएं या सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का निर्माण? हमें सरकार से सवाल तो करना ही है साथ ही दबाव भी बनाना है कि वो अनावश्यक कार्यों पर हो रहे खर्चों को फिलहाल रोके और लोगों की जान कैसे बचाई जाय इस पर कार्य करे।

COVID-19
Coronavirus
UttarPradesh
Yogi Adityanath
Purvanchal
Purvanchal state

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • भाषा
    'आप’ से राज्यसभा सीट के लिए नामांकित राघव चड्ढा ने दिल्ली विधानसभा से दिया इस्तीफा
    24 Mar 2022
    चड्ढा ‘आप’ द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकित पांच प्रत्याशियों में से एक हैं । राज्यसभा चुनाव के लिए 31 मार्च को मतदान होगा। अगर चड्ढा निर्वाचित हो जाते हैं तो 33 साल की उम्र में वह संसद के उच्च सदन…
  • सोनिया यादव
    पत्नी नहीं है पति के अधीन, मैरिटल रेप समानता के अधिकार के ख़िलाफ़
    24 Mar 2022
    कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेक्शन 375 के तहत बलात्कार की सज़ा में पतियों को छूट समानता के अधिकार यानी अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के मुताबिक शादी क्रूरता का लाइसेंस नहीं है।
  • एजाज़ अशरफ़
    2024 में बढ़त हासिल करने के लिए अखिलेश यादव को खड़ा करना होगा ओबीसी आंदोलन
    24 Mar 2022
    बीजेपी की जीत प्रभावित करने वाली है, लेकिन उत्तर प्रदेश में सामाजिक धुरी बदल रही है, जिससे चुनावी लाभ पहुंचाने में सक्षम राजनीतिक ऊर्जा का निर्माण हो रहा है।
  • forest
    संदीपन तालुकदार
    जलवायु शमन : रिसर्च ने बताया कि वृक्षारोपण मोनोकल्चर प्लांटेशन की तुलना में ज़्यादा फ़ायदेमंद
    24 Mar 2022
    शोधकर्ताओं का तर्क है कि वनीकरण परियोजनाओं को शुरू करते समय नीति निर्माताओं को लकड़ी के उत्पादन और पर्यावरणीय लाभों के चुनाव पर भी ध्यान देना चाहिए।
  • रवि कौशल
    नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 
    24 Mar 2022
    दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने कहा कि गरीब छात्र कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट पास करने के लिए कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाएंगे। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License