NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
कोविड-19
चुनाव 2022
महिलाएं
युवा
विधानसभा चुनाव
शिक्षा
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
नया बजट जनता के हितों से दग़ाबाज़ी : सीपीआई-एम
“2022-23 का बजट, आम जनता को राहत पहुंचाने के लिए प्राथमिकताओं की पहचान करने में पूरी तरह से विफल रहा है। यह विश्वासघात है”।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Feb 2022
नया बजट जनता के हितों से दग़ाबाज़ी : सीपीआई-एम

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी (सीपीआई-एम) ने 2022-23 के बजट को जनता के हितों के साथ दगाबाजी करार दिया है। उसके अनुसार 2022-23 का बजट, आम जनता को राहत पहुंचाने के लिए प्राथमिकताओं की पहचान करने में पूरी तरह से विफल रहा है। यह विश्वासघात है।

सीपीआई-एम के पोलित ब्यूरो ने 1 फरवरी को बजट के बाद इस पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए एक बयान जारी किया। बयान इस प्रकार है—

वित्त मंत्री ने 2022 का बजट ऐसे आर्थिक हालात की पृष्ठभूमि में पेश किया है, जहां जनता के बहुमत को रोजगार-हानि का और अपनी वास्तविक आय में भारी कटौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के, महामारी से पहले के स्तर से जरा सा ही ऊपर रहने का अनुमान है। निजी उपभोग व्यय तो अब भी महामारी से पहले के स्तर से नीचे ही बना हुआ है और उद्योगों को, मुख्यत: अर्थव्यवस्था में मांग के बहुत नीची बने रहने के चलते, स्थापित क्षमता के उपयोग के स्तर में गिरावट और इन्वेंटरियों के बढऩे का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे हालात में जरूरत इस बात की थी कि बजट में, रोजगार निर्माण को और घरेलू मांग को बढ़ाने को, जबर्दस्त बढ़ावा दिया जाता। यह बजट, इन मुद्दों को हल करने में पूरी तरह के नाकाम रहा है। जरूरत इसकी थी कि एक शहरी रोजगार गारंटी योजना शुरू की जाती। लेकिन, इसके विपरीत बजट में मगनरेगा के लिए खर्चे में 25,000 करोड़ रुपये की कमी कर दी गयी है और खाद्य, ईंधन व उर्वरक सब्सीडियों को और स्वास्थ्य व ग्रामीण विकास के लिए आवंटनों को भी, घटा दिया गया है।

बजट में कुल खर्च में, 2021-22 के संशोधित अनुमानों से, 1,74,909 करोड़ की बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया गया है। लेकिन, जीडीपी के अनुपात के रूप में कुल खर्च में बढ़ोतरी,  2020-21 के 17.8 फीसद के स्तर से घटकर,  2022-23 के बजट अनुमान में 15.3 फीसद ही रह गयी है। राजस्व-प्राप्तियों में हो रही बढ़ोतरी, मुख्यत: इसलिए हुई हैं कि महामारी के दौरान कारपोरेट खिलाड़ी भारी मुनाफे बटोरने में कामयाब रहे हैं, जिसकी अभिव्यक्ति कारपोरेशन कर की मद में तथा जीएसटी के जरिए उगाही में भी बढ़ोतरी में हुई है। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के जरिए, आम जनता से अप्रत्यक्ष कर की ज्यादा वसूली से राजस्व-प्राप्ति बढ़ी है। बहरहाल, कुल खर्च में बढ़ोतरी, राजस्व प्राप्तियों में बढ़ोतरी के मुकाबले काफी कम रही है और वास्तविक मूल्य के हिसाब से, पिछले साल के संशोधित अनुमानों में हुई बढ़ोतरी से भी घटकर है।

खर्च में बढ़ोतरी में यह कटौती, सिर्फ केंद्र सरकार द्वारा खर्चों में कटौती तक ही सीमित नहीं है। राज्यों के लिए संसाधनों के हस्तांतरण को घटाने के जरिए, राज्य सरकारों को भी ऐसी ही कटौती करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। राज्यों के लिए ये हस्तांतरण, जो 2021-22 के संशोधित अनुमानों में, सकल घरेलू उत्पाद के 6.91 फीसद के बराबर थे, 2022-23 के बजट में घटकर 6.25 फीसद ही रह गए हैं।

किसानों के लिए सभी प्रमुख योजनाओं में बजट कटौती कर दी गयी है। भारतीय खाद्य निगम द्वारा तथा विकेंद्रीकृत खरीद योजना के अंतर्गत, खरीदी के लिए आवंटन में करीब 28 फीसद की कमी कर दी गयी है। यह कमी उस समय की गयी है जब किसान, कानूनन गारंटीशुदा न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उर्वरक सब्सीडी के लिए आवंटन में 25 फीसद की कटौती कर दी गयी है। पीएम किसान योजना के तहत 12.5 करोड़ किसान परिवारों को 6,000 रुपये देने के लिए, 75,000 करोड़ रुपये के आवंटन की जरूरत थी। लेकिन, इसके लिए सिर्फ 68,000 रुपये का आवंटन किया गया है। फसल बीमा के लिए आवंटन में भी करीब 500 करोड़ रुपये की कटौती कर दी गयी है।

हाल के सभी वर्षों में, बाल कल्याण के लिए रखे गए बहुत ही मामूली आवंटन को भी, खर्च नहीं किया गया है। बाल कल्याण पर खर्च का 5,700 करोड़ रुपये का संशोधित अनुमान, पिछले साल के बजट में जो रखा गया था, उससे भी कम है। स्कूलों तथा आंगनवाडिय़ों के बंद होने के सत्यानाशी प्रभावों से निपटने में बच्चों की मदद करने के लिए, कुछ भी किया ही नहीं गया है।
अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के कल्याण फंड के लिए आवंटन में रुपयों में मामूली बढ़ोतरी जरूर दिखाई देती है, लेकिन मुद्रास्फीति को हिसाब में लिया जाए तो, इसमें गिरावट ही हुई है। इसी प्रकार, दोपहर भोजन योजना का नाम बदलकर पीएम पोषण किए जाने के बावजूद, उसके लिए आवंटन में 10,234 करोड़ के स्तर से कोई बढ़ोतरी नहीं की गयी। यह इसके बावजूद है कि पिछले साल 35 फीसद बच्चों को दोपहर का भोजन मिला ही नहीं था। वित्त मंत्री ने 2 लाख आंगनवाडिय़ों को अद्यतन बनाने के लिए नारी शक्ति की दुहाई जरूर दी है, लेकिन इसके लिए आवंटन को, संशोधित अनुमान के 20,000 करोड़ रुपये के स्तर पर ही रोके रखा गया है।
पिछले दो साल में, रसोई गैस सब्सीडी में भारी कटौती की गयी है। पिछले साल इसके लिए आवंटन में 60 फीसद कटौती कर दी गयी थी और 2022-23 के बजट में एक बार फिर 60 फीसद की कटौती थोप दी गयी है। ई-श्रम पोर्टलों के जरिए रजिस्टर किए गए असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए, बजट में कोई आवंटन ही नहीं रखा गया है।

महामारी के दो वर्षों में अमीर और अमीर हो गए हैं। ऑक्सफैम के अनुसार, 2021 में भारत के सबसे धनी परिवारों की संपत्ति रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच गयी थी। सबसे ऊपर के पाएदान पर आने वाले 10 फीसद लोगों के हाथों में भारत की कुल संपदा का 57 फीसद हिस्सा था। इसके बावजूद, इसका कोई प्रस्ताव नहीं किया गया है कि इन बेहिसाब मुनाफों पर अतिरिक्त कर लगाया जाए और इससे आने वाले संसाधनों का उपयोग, बदहाल जनता के विशाल बहुमत को राहत दिलाने के लिए किया जाए।

इसलिए, 2022-23 का बजट, आम जनता को राहत पहुंचाने के लिए प्राथमिकताओं की पहचान करने में पूरी तरह से विफल रहा है। यह विश्वासघात है।

सीपीआई (एम) का पोलित ब्यूरो, जनता का आह्वान करता है कि इस जनविरोधी, कारपोरेटपरस्त बजट पर विरोध प्रकट करे और आयकर की सीमा से नीचे के सभी परिवारों को, 7,500 रुपये महीना के प्रत्यक्ष हस्तांतरण और मुफ्त भोजन किटों के वितरण की मांग करे।                   

CPI(M)
CHUNAVI BUDGET
Nirmala Sitharaman
PM MODI

Related Stories

बजट 2022: क्या मिला चुनावी राज्यों को, क्यों खुश नहीं हैं आम जन

ख़बर भी-नज़र भी: किसानों ने कहा- गो बैक मोदी!

कृषि क़ानूनों के वापस होने की यात्रा और MSP की लड़ाई

जीएसटी परिषद उपाध्यक्ष की नियुक्ति न करने के पीछे की राजनीति

विडंबना: नया बजट किसानों के प्रश्न को संबोधित करने का ढोंग तक नहीं करता

क्यों किसान की समस्याओं और आंदोलन से बिल्कुल अप्रभावित दिखा आम बजट!

बजट में किसानों के लिए क्या? कुछ नहीं!


बाकी खबरें

  • air pollution
    भाषा
    वायु प्रदूषण को काबू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को आपात बैठक करने का निर्देश
    15 Nov 2021
    प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अगुवाई वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं पंजाब और दिल्ली के संबंधित सचिवों को अदालत की तरफ से बनाई गई समिति के समक्ष अपने प्रतिवेदन देने के लिए बैठक में भाग लेने का…
  • ALTAF
    शिवम चतुर्वेदी
    कासगंज: क्या अल्ताफ़ पर लड़की भगाने का आरोप झूठा था? 
    15 Nov 2021
    लड़की के पिता पर आरोप है कि उन्होंने अपनी बेटी को कहीं भेजकर, अल्ताफ़ के ऊपर लड़की भगाने का आरोप मढ़ दिया।
  • Annapurna
    विजय विनीत
    स्पेशल रिपोर्टः बनारस में अन्नपूर्णा की खंडित मूर्ति की ब्रांडिंग, काशी विश्वनाथ के भक्त आहत
    15 Nov 2021
    बनारस में अन्नपूर्णा की खंडित मूर्ति स्थापित करने के मंसूबों को देखें तो साफ पता चलता है कि इसे स्थापित करने और कराने वाले लोग हिन्दू समाज के लोगों के सैंटिमेंट को भुनाने का मकसद रखते हैं।
  • salman khurshid book
    अनिल जैन
    हिंदुत्व की तुलना बोको हरम और ISIS से न करें तो फिर किससे करें?
    15 Nov 2021
    सलमान खुर्शीद की किताब 'सनराइज ओवर अयोध्या’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने विवाद खड़ा कर दिया है।
  • The Indian Agricultural Situation Must Not Be Misread
    प्रभात पटनायक
    खेती के संबंध में कुछ बड़ी भ्रांतियां और किसान आंदोलन पर उनका प्रभाव
    15 Nov 2021
    इनमें पहली भ्रांति तो इस धारणा में ही है कि खेती किसानी पर कॉर्पोरेट अतिक्रमण तो ऐसा मामला है जो बस कॉर्पोरेट और किसानों से ही संबंध रखता है। यह ग़लत है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License