NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तो इतना आसान था धर्म संसद को रोकना? : रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट
डाडा जलालपुर में महापंचायत/धर्म संसद नहीं हुई, एक तरफ़ वह हिन्दू हैं जो प्रशासन पर हिन्दू विरोधी होने का इल्ज़ाम लगा रहे हैं, दूसरी तरफ़ वह मुसलमान हैं जो सोचते हैं कि यह तेज़ी प्रशासन ने 10 दिन पहले दिखाई होती तो आज उनके दिलो दिमाग़ पर हिंसा, दहशत और अवसाद ने घर न किया होता।
सत्यम् तिवारी
27 Apr 2022
तो इतना आसान था धर्म संसद को रोकना? : रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट

रुड़की के डाडा जलालपुर गांव में जो 27 अप्रैल को देखने को मिला वो शायद ही इस देश में इतना आम रह गया है। पुलिस-प्रशासन की ज़बरदस्त तैनाती ने गांव के नागरिकों में सुरक्षा का भाव पैदा किया। मगर यह सुरक्षा और यह तैनाती उस हिंसा के 10 दिन बाद हुई, जिस हिंसा में लोगों के वाहन जले, घर लुटे और दिल ओ दिमाग़ पर गहरा आघात हुआ। 27 अप्रैल को होने वाली हिन्दू महापंचायत/धर्म संसद को रोक लिया गया।

इससे पहले 26 अप्रैल की शाम को गांव के 5 किलोमीटर के दायरे में धारा 144 लागू कर दी गई थी, गांव में डेरा जमाए काली सेना के महंत दिनेशानंद भारती और उनके चेलों को गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस-प्रशासन का निश्चित रवैया यही था कि पंचायत नहीं होने देनी है। यह रवैया पैदा हुआ सुप्रीम कोर्ट के दख़ल के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 26 अप्रैल को उत्तराखंड पुलिस को कड़े निर्देश दिए थे कि धर्म संसद में हेट स्पीच को हर हाल में रोका जाए। गांव के मुसलमान सवाल उठाते हैं कि इस निर्देश के जवाब में प्रशासन ने जो कड़ी कार्रवाई की, वह उस वक़्त क्यों नहीं की गई जब 16 अप्रैल की रात को हिंसा भड़की थी?

हालांकि एडीएम पीएल शाह ने बयान देते हुए कहा, "हमने गाँव में पुलिस बल की तैनाती के साथ गांव में शांति कायम करने की कोशिश की है।"

न्यूज़क्लिक जब 27 अप्रैल की सुबह डाडा जलालपुर पहुंचा तो माहौल तक़रीबन सामान्य था। फ़ज़ा में चिंता तो थी, मगर डर या दहशत नहीं थी। पुलिस हर 10 कदम पर तैनात थी, गांव से 5 किलोमीटर की दूरी पर चेकिंग की जा रही थी। प्रशासन ने क़रीब 200 कॉन्स्टेबल, 30 महिला कॉन्स्टेबल, 50 से ज़्यादा इंस्पेक्टर, पीएसी की 11 कंपनी और दमकल की 2 गाड़ियां भी तैनात की हुई थीं। सवाल फिर वही उठता है, कि हिंसा के वक़्त पुलिस का रवैया इतना सख़्त क्यों नहीं था?

न्यूज़क्लिक ने गांव के मुसलमानों से बात की तो उन्होंने एक तरफ़ तो पुलिस तैनाती पर सुरक्षित महसूस किया मगर वहीं यह भी कहा कि बहुत देर बाद जागा है प्रशासन। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए मुहम्मद मेहरबान ने पूरे घटनाक्रम पर कहा, "अगर प्रशासन इस बात में पहले ध्यान दे देता तो मामला बढ़ता ही नहीं, मगर तैनाती से आज का दंगा बच गया। हम में और सैनियों में कोई विवाद पहले नहीं था।"

मोहसिन ने कहा, "पहले कोई दिक्कत नहीं थी, अभी भी उनमें से कुछ लड़के हैं जो लड़ाई करने को तैयार हैं। जब बुलडोज़र आया तब लोगों के दिल में दहशत बैठ गई थी।"

अपने ही गाँव के हिन्दू समुदाय के लोगों पर बात करते हुए मोहसिन ने कहा, "वो कहते हैं हमारा राशन पानी बंद कर देंगे, पाकिस्तान भेज देंगे; हमें क्या लेना देना है पाकिस्तान से!"

बता दें कि 16 अप्रैल की घटना के बाद से बजरंग दल, काली सेना जैसे हिन्दुत्ववादी संगठनों ने डाडा जलालपुर गाँव की घटना में लगातार ज़हर घोलने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। आनंद स्वरूप, दिनेशानन्द भारती, हिमांशु ने 27 अप्रैल की धर्म संसद में हिंदुओं के पहुँचने के लगातार आह्वान किए थे। मगर पुलिस ने कल दिनेशानंद को गिरफ्तार करने के बाद आज बजरंग दल के हिमांशु, काली सेना के आनंद स्वरूप को भी गिरफ्तार कर के ही रखा। गाँव के ज़्यादातर हिन्दू लड़के भी पुलिस हिरासत में लिए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने 26 अप्रैल को उत्तराखंड पुलिस को निर्देश दिये और पुलिस-प्रशासन ने यह सारे कदम उठाए और कहा भी कि इसकी सीधी मॉनिटरिंग सुप्रीम कोर्ट कर रहा है। सवाल उठता है कि अगर धर्म संसद को रोकना इतना आसान है तो बुराड़ी और ऊना की धर्म संसद को क्यों नहीं रोका गया जहां यति नरसिंहानन्द जैसे महंतों ने खुलेआम मुसलमानों के क़त्ल ए आम की बात की थी?

आनंद स्वरूप ने कल तक धमकी भरे वीडियो डालने का सिलसिला बंद नहीं किया था, मगर 27 अप्रैल को जारी वीडियो में उसने काली सेना के कार्यकर्ताओं से 'शांति' बनाने की अपील की।

गाँव वालों से बात कर के एक बात साफ हो जाती है कि हिंसा गाँव के कुछ युवा लड़कों और ज़्यादातर बाहर से आए लोगों ने की थी, पुलिस का भी यही कहना है। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए लगभग सभी मुसलमानों को छोड़ दिया है, वे अभी ज़मानत पर बाहर हैं। न्यूज़क्लिक ने संजीदगी को देखते हुए उनसे बात करना ठीक नहीं समझा।

दो धर्मों की कहानी

हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोगों ने गाँव डाडा जलालपुर के बारे में एक बात कही - यहाँ तो ऐसा कभी नहीं हुआ था, यहाँ तो 50 साल से रामलीला निकल रही है।"

मेहरबान ने कहा, "आप बोलो जय श्री राम, निकालो जुलूस; हम भी साथ निकालेंगे मगर ये चिढ़ाने वाले गाने नारे चलाने का क्या मतलब है, ये सब तो राजनीति है।"

हालांकि ज़्यादातर युवा हिन्दू लड़के प्रशासन की तैनाती से दुखी नज़र आए। उनका कहना था, "प्रशासन हिन्दू विरोधी है, उसने छुरा घोंपा है।"

बुजुर्ग सुशीला भले ही दिनेशानन्द की बात से सहमत हों मगर उन्हें भी माहौल खराब होता दिख रहा था, "महंत जी ठीक बात कर रहे थे मगर प्रशासन ने भी ठीक किया, अब भीड़ में कोई कुछ बोल दे उल्टा सीधा और लड़ाई हो हम तो यह नहीं चाहते हम तो शांति चाहते हैं।"

गाँव में राशन की दुकान चलाने वाले एक हिन्दू शख़्स ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि बवाल से सारा काम रुक गया है, दूसरे गाँव का बंदा यहाँ नहीं आता। उन्होंने भी यही माना कि नफरत की राजनीति उनके गाँव में की जा रही है। उनका कहना था कि वह शांति चाहते हैं।

उनसे पूछा गया कि बवाल से क्या फ़र्क़ पड़ा तो उन्होंने कहा, "ईद की खीर खो गई हमारी और क्या हुआ!"

डर और दहशत बरक़रार

न्यूज़क्लिक ने पहले भी आपको उस घर के बारे में बताया था जिसमें रात 3 बजे सबसे आखिरी में हिंसा हुई। उस घर का मंज़र यह है कि घर में रहने वाले दिन में खेतों में छुपते हैं। 2 वयस्क और बाक़ी बच्चे इतना डरे हुए हैं कि वह अपने घर में ही सुरक्षित महसूस नहीं करते। उन्होंने बताया, "हमारी गाय को भी मारा उन्होंने घर भी जलाने की कोशिश की। वे तो चाहते हैं कि मुसलमानों का सब खतम हो जाए।"

इस डर को बढ़ाने का काम बजरंग दल जैसे संगठन लगातार कर रहे हैं। बजरंग दल हरिद्वार के हिमांशु ने कहा, "आज हमको यही सीख मिली है कि इनको हिंदुओं की ताकत का एहसास दिलवाना पड़ेगा। यह हिन्दुत्व की सदी है।"

वहीं आनंद स्वरूप ने भी यही कहा था कि यह रोक ज़्यादा दिन तक बरक़रार नहीं रहेगी।

डाडा जलालपुर गाँव में महापंचायत नहीं हुई और ज़िंदगी धीरे धीरे पटरी पर आ रही है। एक पुलिस अफ़सर ने कहा, "ये देहात है, यहाँ कोई दूध भी निकालेगा तो बेचने के लिए कहीं तो जाएगा ही।" प्रशासन की उपस्थिती गाँव में 5 मई सुबह 11 बजे तक रहने वाली है। इसी बीच 2 या 3 मई को ईद भी है, ऐसे में प्रशासन इस बात को लेकर भी सतर्क है कि कोई असामाजिक तत्व ईद के दिन कुछ बवाल न करे।

गाँव का एक माहौल, एक ढांचा होता है। वह ढांचा जो भी हो, अगर उसमें 10-11 दिन तक बाहर से आए लोग दरार डालने का काम करें तो उस ढांचे को, गांव की ज़िंदगी को कितना नुकसान पहुंचेगा इसका जवाब तो डाडा जलालपुर गाँव ही देगा।

Roorkee
dada jalalpur
Supreme Court
dharm sansad
hanuman jayanti violence
roorkee update
dada jalalpur updates
communal violence
Islamophobia

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल


बाकी खबरें

  • उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: गर्मी व सूखे से मचेगा हाहाकार
    29 Apr 2022
    जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के कई इलाके इस समय भीषण सूखे की चपेट में हैं। सूखे के कारण लोगों के पलायन में 200 फीसदी वृद्धि होने का अनुमान है।
  • भाषा
    दिल्ली दंगा : अदालत ने ख़ालिद की ज़मानत पर सुनवाई टाली, इमाम की याचिका पर पुलिस का रुख़ पूछा
    29 Apr 2022
    दिल्ली उच्च न्यायालय ने देशद्रोह के कानून की संवैधानिक वैधता पर उच्चतम न्यायालय के समक्ष आगामी सुनवाई के मद्देनजर सुनवाई टाल दी और इसी मामले में शरजील इमाम की जमानत अर्जी पर दिल्ली पुलिस का रुख पूछा।
  • विजय विनीत
    इफ़्तार को मुद्दा बनाने वाले बीएचयू को क्यों बनाना चाहते हैं सांप्रदायिकता की फैक्ट्री?
    29 Apr 2022
    "बवाल उस समय नहीं मचा जब बीएचयू के कुलपति ने परिसर स्थित विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन और अनुष्ठान किया। उस समय उन पर हिन्दूवाद के आरोप चस्पा नहीं हुए। आज वो सामाजिक समरसता के लिए आयोजित इफ़्तार…
  • अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश: बुद्धिजीवियों का आरोप राज्य में धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने का फ़ैसला मुसलमानों पर हमला है
    29 Apr 2022
    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों द्वारा धार्मिक उत्सवों का राजनीतिकरण देश के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर देगा।
  • कुमुदिनी पति
    नई शिक्षा नीति से सधेगा काॅरपोरेट हित
    29 Apr 2022
    दरअसल शिक्षा के क्षेत्र में जिस तरह से सरकार द्वारा बिना संसद में बहस कराए ताबड़तोड़ काॅरपोरेटाइज़ेशन और निजीकरण किया जा रहा है, उससे पूरे शैक्षणिक जगत में असंतोष व्याप्त है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License