NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
देश के आधे एटीएम बंद होने का भाजपाई उद्योगपति कनेक्शन!
कैश लॉजिस्टिक मैनेजमेंट करने वाली कंपनियों के लिए सख्ती के साथ न्यूनतम नेटवर्थ संबंधी नियम का क्लॉज मल्टीनेशनल कंपनियों ने इसलिए डलवाया, ताकि बहुत सी छोटी छोटी कंपनियों का बिजनेस एक झटके में बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों को सौंप दिया जाए।
गिरीश मालवीय
26 Nov 2018
FILE PHOTO

कुछ दिन पहले एक खबर आई थी कि देश भर के आधे एटीएम बंद होने वाले हैं, दरअसल एटीएम इंडस्ट्री से जुड़े संगठन सीएटीएमआई के हवाले से ये बात कही गयी थी। संगठन ने इसकी वजह नियमों में हुए बदलाव को बताया, जिसके चलते एटीएम ऑपरेट करना आसान नहीं रह गया है।
सीएटीएमआई के डायरेक्टर वी बालासुब्रमण्यन के अनुसार अप्रैल 2018 में आरबीआई ने एटीएम सर्विस प्रोवाइडर और उनके कॉन्ट्रैक्टर पर सख्त नियम लागू कर दिए थे, इन नियमों के अनुसार एटीएम सर्विस प्रोवाइडर की कुल संपत्ति कम से कम 100 करोड़ रुपये होनी जरूरी है। उसके पास 300 कैश वैन का बेड़ा होना अनिवार्य है। हर वैन में दो संरक्षक और दो बंदूकधारी गार्ड और एक ड्राइवर तैनात करना होगा। हर कैश वैन जीपीएस और सीसीटीवी से लैस होनी चाहिए। इसके अलावा सभी एटीएम का सॉफ्टवेयर विंडोज एक्सपी से विंडोज 10 में अपग्रेड होना चाहिए इसके अलावा सुरक्षा मानकों को ध्यान मे रखते हुए और भी नियम बनाए गए हैं।
अब इन नियमों को पढ़ कर आपको भी एक बार ऐसा लगेगा कि इसमें क्या गलत है। सारे नियम तो पैसे की सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही बनाए गए हैं लेकिन आपको ध्यान रखना चाहिए है कि जो दिखाया जाता है जरूरी नहीं है कि वही पूरा सच हो!
दरअसल इन 15 से 20 सालों में इस एटीएम के बिजनेस के पीछे एक बहुत बड़ी इंडस्ट्री खड़ी हो गयी है जिसे मोटे तौर पर कैश लॉजिस्टिक बिजनेस से जुड़ी कम्पनियां कहा जा सकता है। इस बिजनेस का बड़ा हिस्सा पूरी तरह से बहुत छोटी ओर मध्यम श्रेणी की कम्पनियों के पास है जो MSME की श्रेणी में आती हैं।
इस बिजनेस में बड़े पैमाने पर सेना से रिटायर होने वाले पूर्व सैनिक जुड़े हुए हैं जो इससे अपना जीवन यापन कर रहे हैं। 60 से अधिक भारतीय कंपनियां इन नियमों की वजह से कारोबार से बाहर हो जाएंगी, जिससे हजारों कर्मचारी भी बेरोजगार हो जाएंगे। लगभग 5,000 देसी सुरक्षा एजेंसियों बन्द हो जाएंगी, सिक्योरिटी से जुड़े क्षेत्रों से जुड़े लाखो लोग बेरोजगार हो जाएंगे। ये सुरक्षा एजेंसियां पिछले 20 साल से भी अधिक समय से बैंकों और एटीएम को कैश सप्लाई का कार्य कर रही हैं।
अब बड़ी कम्पनियों द्वारा सरकार पर दबाव डाल कर जो सबसे महत्वपूर्ण नियम लागू करवाया जा रहा है वह यह है कि एटीएम सर्विस प्रोवाइडर की कुल संपत्ति कम से कम 100 करोड़ रुपये होना अनिवार्य है तथा सर्विस प्रोवाइडर के पार 300 कैश वैन का बेड़ा होना जरूरी है।
कैश लॉजिस्टिक व्यापार में लगी इस नियम को पूरा करने वाली कम्पनी सिर्फ दो या तीन ही हैं और उसमें SIS (एसआईएस) शामिल है। अब आपके सामने पूरी पिक्चर साफ हो जाएगी क्योंकि SIS कम्पनी के मालिक हैं बीजेपी बिहार के सबसे अमीर राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा।
आरके सिन्हा का नाम पनामा पेपर्स में भी आ चुका है। सिक्योरिटी सर्विसेज से जुड़ी यह कम्पनी बिहार की एकमात्र मल्टीनेशनल कंपनी है। अब इस कम्पनी का प्रबंधन उनके लड़के ऋतुराज सिन्हा सम्भाल रहे हैं जो कैश लॉजिस्टिक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएलएआई) के अध्यक्ष भी हैं और फिक्की की सिक्युरिटी सेक्टर कमेटी के को-चेयरमैन भी हैं।
ऋतुराज सिन्हा ने आते ही 2008 में ऑस्ट्रेलिया की चब सिक्युरिटी एजेंसी को खरीद लिया था जो निजी सुरक्षा क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी और SIS से सात गुना बड़ी थी धीरे धीरे इस कम्पनी ने कैश लॉजिस्टिक के क्षेत्र में प्रवेश किया और सरकार पर दबाव बनाना शुरू किया कि वो न्यूनतम नेटवर्थ वाले नियमों को लागू करे, 2017 में SIS अपना IPO भी लेकर आया, साफ था कि उसे अब कोई बड़ा काम करना ही था।
कैश लॉजिस्टिक मैनेजमेंट करने वाली कंपनियों के लिए सख्ती के साथ न्यूनतम नेटवर्थ संबंधी नियम का क्लॉज मल्टीनेशनल कंपनियों ने इसलिए डलवाया, ताकि बहुत सी छोटी छोटी कंपनियों का बिजनेस एक झटके में बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों को सौंप दिया जाए। आज जो लगभग 60 कंपनियां यह व्यापार कर रही हैं, ओने-पोने दाम अपना बिजनेस इन दो तीन बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों को बेच देंगी और ये कंपनियां इस व्यापार पर एकाधिकार स्थापित कर लेंगी।
निजी सुरक्षा एजेंसियों का संगठन सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री, एटीएम इंडस्ट्री से जुड़े संगठन सीएटीएमआई, कैश वैन ओनर्स एसोसिएशन, जैसी लाखों कामगारों का प्रतिनधित्व करने वाली संस्थाएं इन नियमों का विरोध कर रही हैं लेकिन कोई मीडिया हाउस इनकी आवाज उठाने में इंटरस्टेड नहीं है!
सीएपीएसआई अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि इन नए नियमों से केवल दो-तीन विदेशी कंपनियों को लाभ होगा। केवल यही कंपनियां बैंकों या एटीएम तक पैसा पहुंचाने के कारोबार में रह जाएंगी। नियमों को इस तरह बनाया गया है कि केवल इन कंपनियों को ही लाभ हो। अगर केवल विदेशी कंपनियों के हाथ में ही बैंकों, एटीएम और अन्य जगह पैसा पहुंचाने का कार्य चला जाता है तो यह देश की सुरक्षा को लेकर भी शंका उत्पन्न करता है।
सिंह ने कहा, ऐसी स्थिति की कल्पना कीजिए जब ये कंपनियां यह निर्णय ले लें कि वे किसी कारणवश अगले कुछ दिन कैश वितरण नहीं कर सकती हैं। ऐसे में नागरिकों तक पैसा कैसे पहुंचेगा?
यानी सच तो यह है कि इस देश को पूरी तरह से बड़े पूंजीपतियों का गुलाम बनाने में मोदी सरकार तन मन धन से लगी हुई है।

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं। उनका ये लेख उनके फेसबुक पेज से साभार लिया गया है।)
 

ATM
CATMI
RBI
ATM service provider
Logistic business
BJP
SIS

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • Chhattisgarh
    रूबी सरकार
    छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार से नाराज़ विस्थापित किसानों का सत्याग्रह, कांग्रेस-भाजपा दोनों से नहीं मिला न्याय
    16 Feb 2022
    ‘अपना हक़ लेके रहेंगे, अभी नहीं तो कभी नहीं’ नारे के साथ अन्नदाताओं का डेढ़ महीने से सत्याग्रह’ जारी है।
  • Bappi Lahiri
    आलोक शुक्ला
    बप्पी दा का जाना जैसे संगीत से सोने की चमक का जाना
    16 Feb 2022
    बप्पी लाहिड़ी भले ही खूब सारा सोना पहनने के कारण चर्चित रहे हैं पर सच ये भी है कि वे अपने हरफनमौला संगीत प्रतिभा के कारण संगीत में सोने की चमक जैसे थे जो आज उनके जाने से खत्म हो गई।
  • hum bharat ke log
    वसीम अकरम त्यागी
    हम भारत के लोग: समृद्धि ने बांटा मगर संकट ने किया एक
    16 Feb 2022
    जनवरी 2020 के बाद के कोरोना काल में मानवीय संवेदना और बंधुत्व की इन 5 मिसालों से आप “हम भारत के लोग” की परिभाषा को समझ पाएंगे, किस तरह सांप्रदायिक भाषणों पर ये मानवीय कहानियां भारी पड़ीं।
  • Hijab
    एजाज़ अशरफ़
    हिजाब के विलुप्त होने और असहमति के प्रतीक के रूप में फिर से उभरने की कहानी
    16 Feb 2022
    इस इस्लामिक स्कार्फ़ का कोई भी मतलब उतना स्थायी नहीं है, जितना कि इस लिहाज़ से कि महिलाओं को जब भी इसे पहनने या उतारने के लिए मजबूर किया जाता है, तब-तब वे भड़क उठती हैं।
  • health Department
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग
    16 Feb 2022
    "स्वास्थ्य सेवा की बात करें तो उत्तर प्रदेश में पिछले पांच सालों में सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। प्रदेश के जालौन जिले की बात करें तो यहां के जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक पिछले चार साल से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License