NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
देश को नेता नहीं, नीति चाहिए- येचुरी
“चुनावी जीत में लेफ्ट भले ही कमजोर हुआ हो, लेकिन देश का एजेंडा लेफ्ट ही सेट कर रहा है। लोगों की समस्याओं को आवाज़ देने और उनके लिए संघर्ष करने में लेफ्ट आगे है।”
राजु कुमार
18 Jan 2019
SITARAM YECHURI

वर्तमान में देश के जो राजनीतिक हालात हैं, उसमें बुनियादी सवाल है कि क्या हम भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को बचा पाएंगे? सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का मकसद है, देश के संवैधानिक चरित्र को बदलना, जिसमें धर्मनिरपेक्ष जनतांत्रिक गणराज्य की बात की गई है। इस समय देश पर आर्थिक हमला भी किया गया है, जिसमें देश के सारे संसाधनों को, पीएसयू को विदेशी पूंजी के लिए खोल दिया गया है। ये बातें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने भोपाल में एक चर्चा के दरम्यान कही। येचुरी मध्य प्रदेश के दौरे पर थे, इसी कड़ी में भोपाल में उनके साथ कुछ बुद्धिजीवियों के साथ संवाद का आयोजन माकपा की ओर से किया गया। इस संवाद में उन्होंने देश के वर्तमान हालात और उसमें वामपंथ व माकपा की भूमिका पर अपनी बात रखी।

येचुरी ने कहा कि देश के मूल चरित्र को बदलने के लिए सर्वोच्च न्यायालय, भारतीय रिजर्व बैंक, सीवीसी, सीबीआई जैसी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। भारत में नोटबंदी से करोड़ों लोगों को परेशानी में डाला गया और भारत का पैसा मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से सफेद किया जा रहा है। देश में मॉब लिंचिंग और सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं बढ़ी है। यह सब तभी हो रहा है, जब वे सत्ता में है। इसलिए माकपा और वामपंथियों की पहली प्राथमिकता है - उन्हें सत्ता से हटाएं, दूसरी प्राथमिकता है - धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मजबूत करे और तीसरी प्राथमिकता है - भाजपा विरोधी वोटों के बंटवारे को नहीं होने दे।

उन्होंने कहा कि चुनावी जीत में लेफ्ट भले ही कमजोर हुआ हो, लेकिन देश का एजेंडा लेफ्ट ही सेट कर रहा है। लोगों की समस्याओं को आवाज देने और उनके लिए संघर्ष करने में लेफ्ट आगे है। किसानों की बड़ी रैलियों और आंदोलन के कारण आज सभी दलों को किसानों के मुद्दे पर बात करने के लिए मजबूर होना पड़ा। खेती-किसानी और रोजगार का मुद्दा देश में अहम है। प्रधानमंत्री मोदी ने कभी किसानों की बात नहीं की थी, लेकिन अब उन्हें भी बोलना पड़ रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अब हर समय किसान एवं रोजगार की बात करते हैं। इन्हें इस एजेंडे पर कौन लाया? दिल्ली में आयोजित लेफ्ट के किसान आंदोलन के मंच पर 21 दलों के नेता पहुंच गए थे। इस तरह से जनसंघर्षों में वामपंथ अभी भी आगे है। यही वजह है कि लेफ्ट को कमजोर करने के लिए षड़यंत्र किए जा रहे हैं। 2004 में ही अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पूंजीपतियों को लग गया था कि बिना वामपंथ के भारत में सरकार नहीं बनेगी, इसलिए उन्होंने वामपंथ को हराने में ताकत लगाई। मोदी ने भी त्रिपुरा जैसे छोटे राज्य में माकपा को हराने पर कहा कि उनकी सैद्धांतिक जीत हुई है। इससे पता चलता है कि उनके लिए वैचारिक एवं सैद्धांतिक मुकाबले में वामपंथी ही सामने हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने केरल में सबरीमाला को लेकर जो बयान दिया, वह प्रधानमंत्री के पद के अनुरूप नहीं, बल्कि आरएसएस के प्रचारक के रूप में ज्यादा था। उस पर सर्वोच्च न्यायालय को अदालत की अवमानना के रूप में खुद ही संज्ञान लेना चाहिए।

येचुरी ने कहा कि सामाजिक बदलाव के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को उनके जातिवादी नेताओं ने बांध कर रख लिया, जिसकी वजह से वे राजनीतिक लड़ाई में पूरी तरह से वामपंथ के साथ नहीं आ पाए। लेकिन अब वे आर्थिक एवं सामाजिक शोषण के खिलाफ एक साथ आ रहे हैं। अब ‘जय भीम-लाल सलाम’ का नारा साथ-साथ लगाया जा रहा है। वामपंथी दलों को सामाजिक शोषण के खिलाफ लड़ाइयों में साथ रहने का विश्वास पैदा करना है।

वर्तमान राजनीतिक संकट के समय को देखते हुए सीताराम येचुरी ने कहा कि हमारे चुप रहने पर वे कामयाब होंगे, इसलिए हमें अपनी चुप्पी तोड़नी है और वाम एकता के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष ताकतों को भी मजबूत करना है। अब हम यह नारा दे रहे हैं कि ‘न हिन्दू, न मुसलमान-मजदूर, नौजवान और किसान’। उन्होंने कहा कि हम सोशल मीडिया के माध्यम का उपयोग भी लोगों तक पहुंचने के लिए करेंगे। न्यू मीडिया और सोशल मीडिया को हम और मजबूती के साथ उपयोग करेंगे। देश को नेता नहीं, नीति चाहिए और नीतिगत बदलाव के लिए वर्तमान सरकार को हटाना जरूरी है। वैकल्पिक नीतियों के सहारे बेहतर भारत के निर्माण के सपने को पूरा करना है।

CPI(M)
Sitaram yechury
Left unity
Left politics
Madhya Pradesh
BJP-RSS
Narendra modi
2019 आम चुनाव
General elections2019

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

परिक्रमा वासियों की नज़र से नर्मदा

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"


बाकी खबरें

  • Modi
    शंभूनाथ शुक्ल
    प्रधानमंत्री की कानपुर यात्रा: “बुढ़ापा हमका चापर किहिस!”
    01 Jan 2022
    कानपुर रैली में उनके भाषण को देख कर लगा कि जैसे उन्हें कानपुर से चिढ़ हो। शायद इसलिए कि कानपुर शहर का मिज़ाज थोड़ा भिन्न है। कानपुर लम्बे समय तक कम्युनिस्ट पार्टी का गढ़ रहा है।
  • kisan andolan
    लाल बहादुर सिंह
    किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे
    01 Jan 2022
    कारपोरेट-फासीवादी आक्रामकता के कैसे ख़ौफ़नाक दौर में हम  फंसे हैं, यह किसान-आंदोलन के स्थगन के 15 दिन के अंदर के घटनाक्रम से ही साफ हो गया है।
  • 2021 : जन प्रतिरोध और जीत का साल
    सुबोध वर्मा
    2021 : जन प्रतिरोध और जीत का साल
    01 Jan 2022
    पूरे साल के दौरान, औद्योगिक श्रमिकों, कर्मचारियों, किसानों, स्वरोज़गार श्रमिकों, बेरोज़गारों, पुरुष-महिलाओं, युवा-बूढ़ों – यानी कामकाजी लोगों के सभी तबक़ों ने साथ मिलकर अपनी आजीविका पर लगातार हो रहे…
  • Missionaries of Charity's
    कुमुदिनी पति
    मिश्नरीज़ ऑफ चैरिटी के FCRA रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण का आवेदन क्यों ख़ारिज हुआ?
    01 Jan 2022
    मिशनरीज ऑफ चैरिटी क्या है? यह क्या काम करता है कि इसका एफसीआरए रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण का आवेदन ख़ारिज किया गया। 
  • calendar of IIT Kharagpur
    सोनिया यादव
    क्या हिंदुत्व के प्रचार-प्रसार के लिए आईआईटी खड़गपुर का कैलेंडर तैयार किया गया है?
    01 Jan 2022
    कैलेंडर विवाद में जहां संस्थान और इस कैलेंडर को तैयार करने वाले इसमें कुछ भी गलत नहीं होने का दावा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कई शिक्षाविद् और संस्थान के पूर्व छात्र इसके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License