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भारत
राजनीति
देशभर में वकील सड़कों पर उतरे, केंद्र पर वादाख़िलाफ़ी का आरोप
किसान, मज़दूर, युवाओं के बाद अब वकीलों ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मुकुंद झा
12 Feb 2019
lower protest in delhi

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने आज, मंगलवार को  वकीलों की मांगों को लेकर देशव्यापी आंदोलन किया जिसमें लगभग 17 लाख वकील सड़कों पर उतरे और वर्तमानसरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए उनकी मांगों के  प्रति उदासीन रैवये का विरोध किया। इस आंदोलन में बीसीआई, साथ ही हाईकोर्ट बार एसोसिएशन औरदिल्ली और एनसीआर बार एसोसिएशनों की समन्वय समितियों भी शामिल हुईं|


दिल्ली में “अखिल भारतीय अधिवक्ता विरोध मार्च” निकाला गया। जिसमें हज़ारों की संख्या में दिल्ली-एनसीआर और देश के कई अन्य राज्यों से अधिवक्ता पहुंचे। ये विरोध मार्च दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट से शुरू होकर तिलक मार्ग, भगवान दास रोड, मंडी हाउस, बाराखंभा रोड, टॉल्स्टॉय मार्ग से होता हुआ जंतर-मंतर पहुंचा जहां एक सभाकी गई।

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इस मार्च को सभी अधिवक्ता संघ के नेताओं ने संबोधित किया। बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के नेता के सी मित्तल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमे सरकार नेधोखा दिया। चार साल पहले मोदी जी हमारे एक प्रतिनिधि मंडल से गुजरात में मिले थे और हमने उनके सामने इन्हीं सारी मांगों को लेकर एक प्रजेंटेशन दिया था। जिसके बादउन्होंने हमें आश्वासन दिया था कि हमारी मांगों पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी लेकिन मोदी सरकार अब जाने वाली है परन्तु हमारी मांगें जस की तस बनी हुई हैं।
मार्च में शामिल कई वकीलों ने बताया कि आज भी देश में ऐसे कई सत्र न्यायालय हैं जहाँ शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है, जिस कारण महिला वकीलों को कई तरह कीसमस्याओं का सामना करना पड़ता है।
वकीलों की मुख्य मांगें
 •       वकीलों और उनके परिवारों (आश्रितों) के लिए 20 लाख रुपये तक का बीमा। मेडिक्लेम भी मिले जिससे वो देश के किसी भी अस्पताल में मुफ्त चिकित्सा ले सकें।इसके लिए वकीलों को एक विशेष कार्ड प्रदान किया जाना चाहिए, ताकि वे कहीं भी, कभी भी योजना का लाभ उठा सकें।
•        स्टाइपेंड : नए वकीलों को 5 साल तक वकील के रूप में अभ्यास करने के दौरान प्रति माह न्यूनतम 10,000 रुपये दिया जाए।
•        वृद्ध अधिवक्ताओं और अधिवक्ताओं की असामयिक मृत्यु के मामले में पारिवारिक पेंशन के लिए प्रावधान किया जाए।
•        अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम बनाया जाए।
•        देश के सभी बार काउंसिल  में अच्छे पुस्तकालय, ई-पुस्तकालय, शौचालयों आदि के साथ पर्याप्त भवन / आवास / बैठने की सुविधा और महिला अधिवक्ताओं के लिएभी सुविधाएं होनी चाहिए।
•        ब्याज मुक्त आवास ऋण, पुस्तकालय के लिए ऋण, जरूरतमंद अधिवक्ताओं के लिए वाहन ऋण,  सरकार को अधिवक्ताओं के आवास के लिए सस्ती दरों पर जमीनका अधिग्रहण करने की मांग।
•        कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम में संशोधन और आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए ताकि इस अधिनियम के तहत कार्य वकीलों को बदलाव का हक हो न केवलन्यायाधीशों को
•       विभिन्न न्यायाधिकरणों, आयोगों या मंचों के पीठासीन अधिकारी / सदस्य के रूप में अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को संशोधित किया जाना चाहिए ताकि सक्षमअधिवक्ताओं को भी इन स्थानों पर नियुक्त किया जा सके न कि सिर्फ न्यायाधीशों की नियुक्ति हो।
•        किसी भी अधिवक्ता की असामयिक मृत्यु (65 वर्ष से कम आयु) के मामले में। दुर्घटना, हत्या, किसी भी बीमारी के कारण, सरकार को परिवार / आश्रितों को कम सेकम 50 लाख रुपये की सहयता राशि प्रदान करनी चाहिए|
इन सभी मांगों को पूरा करने के लिए वकीलों ने सरकार से 5 हज़ार करोड़ राशि आवंटित करने की मांग की। 

BCI
Bar Council of India
nationwide lawyers' agitation
Bar Council Of Delhi
Delhi
patiyala house court
BJP

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