NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली चलो : किसान ,मजदूर ,महिलाओं , दलितों , और नौजवानों के बाद छात्र भी दिल्ली कूच करने को तैयार
“बहुत हुआ गौशाला पर चर्चा , अब पाठशाला की बात हो” और “नौजवान को धर्म के नाम पर तोड़ने के बजाए , रोजागर के नाम पर जोड़ा जाए” की मांग को लेकर वामपंथी छात्र संगठनों के साथ ही कई विश्विद्यालयों के छात्र संघ भी 18फरवरी को पूरे देश से दिल्ली पहुँच रहे है |

मुकुंद झा
16 Jan 2019
delhi CHALO

मोदी सरकार के खिलाफ देश के लाखों  किसान ,मजदूर ,दलित और महिलाओ के मार्च के बाद अब देश के हजारो की संख्या में छात्र एसएफ़आई( SFI), एआईडीएसओ (AIDSO) ,एआईएसएफ( AISF) प्रोग्रसिव स्टूडेंट यूनियन (PSU)और  एआईएसबी (AISB) जैसे वामपंथी छात्र संगठन  के साथ ही कई विश्विद्यालय के छात्र संघ भी 18 फरवरी को पूरे देश से छात्र दिल्ली पहुँच रहे है | ये छात्र मोदी सरकार की छात्र विरोधी नीतियों और उच्च शिक्षा को तबाह करने के प्रयास के खिलाफ  दिल्ली में मार्च करंगे |

छात्र संगठनो के मुताबिक ये सरकार के सीधे छात्रों पर हमले कर रही है और संवैधानिक रूप से सुनिश्चित अधिकारों को कुचल रही है, यही नहीं लगातर छात्र और शिक्षा विरोधी नीतियाँ अपना रही है.भाजपा की अगुवाई वाली सरकार सत्ता में आने के बाद से शिक्षा और शैक्षणिक संस्थानों को नष्ट करने के लिए पूरी शिद्दत से काम कर रही है.

इस को लेकर आज इन सभी छात्र संगठनो के केन्द्रीय नेताओ ने प्रेस से बात की  और कहा कि  पुरे विश्व में अशिक्षित बच्चो का सबसे बड़ा हिस्सा भारत में है इसके साथ ही भूखे बच्चे में भारत कि स्थति बहुत ही खराब है. लेकिन हमारी सरकार इन सभी मुद्दो को छोड़कर मूर्ति निर्माण में लगी हुई है  जितने में उन्होंने मूर्ति बनाई है उतने में 5 आईआई टी और आई आई एम बन सकता था |

AISF के महासचिव विक्की महेश्वरी ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा की मोदी के वादे हवा हवाई थे वास्तविकता में कुछ भी नहीं हो रहा है आज भी करीब 9 करोड बच्चे स्कूल  में नही पहुँच पा रहे हैं. शिक्षा के साथ ही सरकार रोजगार भी नही दे पा रही है. इन सभी मांगों को लेकर हम दिल्ली कूच करेंगे |

50641912_701590650234768_1746912651260198912_n.jpg

इस मार्च की मुख्य मांगे -

1. केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा प्रणाली को लागू  करना: छात्र संगठन ने कहा कि पिछले दो दशकों में सार्वजनिक क्षेत्र की शिक्षा को खत्म किया गया है.  छात्रों ने कहा कि  पिछले चार वर्षों के दौरान यह एक  घातक स्तर पतक पहुँच गया है। ये वो दुआर हैं. जहाँ शिक्षा की पहुँच चंद लोगो तक समिति की जा रही है. भाजपा सरकार द्वारा लगतार फंड कट के कारण लगातर सर्वजनिक शिक्षण संस्थानों में कमी आ रही है.इसलिए हम मांग करते हैं- केजी से पीजी तक की शिक्षा मुफ्त होनी चाहिए |

2. जीडीपी का 6% और शिक्षा पर केंद्रीय बजट का 10% खर्च : छात्र संगठनो ने कहा  कि  1966 में कोठारी आयोग ने रिपोर्ट प्रस्तावित किया था कि जीडीपी का 6% शिक्षा के लिए आवंटित किया जाना चाहिए लेकिन 50 से अधिक वर्षों बाद आज भी नहीं हुआ है। मोदी सरकार पूरे शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट जो पहले से कम है उसे और कम करने पर तुली हुई है |

3. सभी को रोजगार सुनिश्चित करने के लिए भगत सिंह राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम (BNEGA) लागू करें :  AIDSO के प्रशांत ने कहा कि सरकार रोजगार नही दे रही है  बल्कि ऐसे पंखे बनाने की  बात कर  रही जिससे नौजवन फंसी न लगा सके | देश में लगातर रोजगार के अवसर घट रहे हैं. करोड़ो की संख्या में नौजवान आज डिग्री लेकर सड़क पर खाली हाथ घुम रहे हैं क्योंकि उनके पास रोजगार का कोई अवसर नही है। कई लोगो ने इस कारण आत्महत्या भी कर रहे है. इसी कारण इस कानून का लागू होना अत्यधिक आवश्यक हो गया है.

4. शिक्षा का साम्प्रदायीकरण बंद करो: सभी छात्र संगठनो का कहना था कि  हिंदुत्व आरएसएस का मार्गदर्शक सिद्धांत है, शिक्षा का सम्प्रदायीकरण बीजेपी सरकार की नीतियों का हमेशा से एक अभिन्न हिस्सा रहा है | इसका उदहारण दीनानाथ बत्रा जैसे लोगों को स्कूल पाठ्यक्रम बदलने के लिए स्वतंत्र कर दिया गया है| बीजेपी शासित राज्यों में पहले ही सांप्रदायिक ज़हर से किताबें  दूषित हो चुकी थी. पिछले साढ़े चार सालों में पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था को प्रदूषित करना चाहती है|

5. मौजूदा आरक्षण को ठीक से लागू करना और निजी संस्थानों में भी सामाजिक न्याय को लागू करना : छात्र नेताओं के मुताबिक, हम देख रहे हैं कि किस तरह सामजिक न्याय का मज़ाक बनाया जा रहा है। समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों को मिलने आरक्षण पर अलग अलग तरीको से हमले कर रही है, ये साफ दिखाता है कि वे नहीं चाहते हैं कि समाज का सबसे पिछड़ा तबका जो सालो से इन मनुवादियों और ब्रह्मणवादियों के शोषण के कारण आजतक भी बहुत मुश्किल से विश्वविद्यालयो तक पहुँचा है, वो आये और इनसे सवाल करे कि क्यों सैकड़ो वर्ष तक उनका शोषण हुआ|

6. सभी छात्रवृत्ति के लिए धनराशि जारी किया जाए  और फैलोशिप कि राशी में बढ़ोतरी किया जाए :  सभी छात्रों  संगठनो का कहना था कि पिछले चार साल से मोदी सरकार के दौर में  शोध छात्रों के फेलोशिप में किसी भी तरह कि बढ़ोतरी नहीं हुई है जबकि महंगाई अपनी चरम सीमा पर है, बल्कि उसमे लगातार कटौती हुई है कई सारे फेलोशिप जो समाज के पिछड़े तबके से आने वाले छात्रों के लिए हैं उनमें लगातार ऐसे नियम बनाए जा रहे है जिससे छात्रों का एक बड़ा तबका उसके लाभ से बाहर हो जाए।  अभी भारत में छात्रों के स्क्लोर्शिप और फैलोशिप का बजट 8 हज़ार करोड़ से अधिक है, जबकी सरकार केवल 3 हज़ार ही आवंटित कर रही है |

7. शिक्षा के संघीय चरित्र की रक्षा और शिक्षा के केंद्रीकरण के खिलाफ : छात्र संगठनो ने कहा की नवउदारवाद और भाजपा शासन के तहत शक्ति का  लगातर केंद्रीकरण किया जा रहा है जो शिक्षा के लिए बहुत ही खतरनाक है. पिछले चार वर्षों में, सरकार के नीतिगत पक्षाघात ने सभी निर्णय लेने वाले निकायों को तोड़ा है, जिससे लोकतांत्रिक महौल खत्म हुआ है | मानव संसाधन विकास मंत्रालय, यूजीसी और विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रशासन द्वारा अकादमिक या विशेषज्ञों के परामर्श के बिना ही नीति स्तर के निर्णय किए जा रहे हैं |

8 महिलाओ कि सुरक्षा कैंपसो में सुनिश्चित कि जाए : एसएफआई के अखिल भरतीय सुयंक्त सचिव दीपसीता धर ने कहा कि हमारी  सरकार नारा तो बेटी बचाओ  और बेटी पढ़ाओ का देती है परन्तु हम देख रहे देश के तमाम कैंपस महिलाओ के लिए खतरनाक होते जा रहे है | अभी हल में जेएनयू में छात्रों के शोषण के आरोपी  प्रोफेसर को छोड़कर पीडिता के खिलाफ ही कार्रवाई हुई ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वो सत्ताधारी दल का समर्थक था ,जो हमें और डरा रहा है.

एसएफआई के महासचिव मयूख विश्वास ने न्यूज़ क्लिक से बात करते हुए कहा कि ये सरकार मनुवादी मूल्यों को विज्ञान पर थोप रही है. इसका ताज़ा उदाहराण हमने भारतीय विज्ञान कांग्रेस में देखा, जहाँ आन्ध्र प्रदेश विश्विद्यालय के वीसी ने तो आइन्स्टाइन के सिधांत को खरिज़ कर दिया। और इस तरीके की फिजूलबयानी  कि हमारे देश साइंसटिफिक टेंपर के लिए खतरनाक है |

आगे मयूख कहते है कि हमारी सरकार लोगो को धर्म के नाम पर तोड़ रही है जबकि हम कह रहे है की लोगो को रोजगार और शिक्षा के साथ जोड़ा जाए और  बहुत हुआ गौशाला पर चर्चा, अब बात हो पाठशाला की | इन्ही सब मांगों को लेकर हम 18 फरवरी को दिल्ली मार्च करेंगे |

 

 

 

 

Delhi CHALO
SFI
AISF
AIDSO
PSU
‪‎fightforfellowship
‬HikeFellowship
fellowship
Government schools
student movement
Neo liberal policies
privatization of education
saffornisation of education

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

डीवाईएफ़आई ने भारत में धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया

दिल्ली: ''बुलडोज़र राजनीति'' के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरे वाम दल और नागरिक समाज

नई शिक्षा नीति से सधेगा काॅरपोरेट हित

उत्तराखंड : ज़रूरी सुविधाओं के अभाव में बंद होते सरकारी स्कूल, RTE क़ानून की आड़ में निजी स्कूलों का बढ़ता कारोबार 

एलएसआर के छात्रों द्वारा भाजपा प्रवक्ता का बहिष्कार लोकतंत्र की जीत है

भारत में छात्र और युवा गंभीर राजकीय दमन का सामना कर रहे हैं 

बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, छात्र बोले- जेएनयू प्रशासन का रवैया पक्षपात भरा है

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए


बाकी खबरें

  • रवि शंकर दुबे
    ‘’मुसलमानों के लिए 1857 और 1947 से भी मुश्किल आज के हालात’’
    05 Apr 2022
    ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव रहमानी ने आज के दौर को 1857 और 1947 के दौर से ज़्यादा घातक बताया है।
  • भाषा
    ईडी ने शिवसेना सांसद संजय राउत से संबंधित संपत्ति कुर्क की
    05 Apr 2022
    यह कुर्की मुंबई में एक 'चॉल' के पुनर्विकास से संबंधित 1,034 करोड़ रुपये के कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन की जांच से संबंधित है। 
  • सोनया एंजेलिका डिएन
    क्या वैश्वीकरण अपने चरम को पार कर चुका है?
    05 Apr 2022
    पहले कोरोना वायरस ने एक-दूसरे पर हमारी आर्थिक निर्भरता में मौजूद खामियों को उधेड़कर सामने रखा। अब यूक्रेन में जारी युद्ध ने वस्तु बाज़ार को छिन्न-भिन्न कर दिया है। यह भूमंडलीकरण/वैश्वीकरण के खात्मे…
  • भाषा
    श्रीलंका के नए वित्त मंत्री ने नियुक्ति के एक दिन बाद इस्तीफ़ा दिया
    05 Apr 2022
    श्रीलंका के नए वित्त मंत्री अली साबरी ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। एक दिन पहले राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने अपने भाई बेसिल राजपक्षे को बर्खास्त करने के बाद उन्हें नियुक्त किया था।
  • भाषा
    हरियाणा के मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ मामले पर विधानसभा में पेश किया प्रस्ताव
    05 Apr 2022
    हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मनोहर लाल द्वारा पेश प्रस्ताव के अनुसार, ‘‘यह सदन पंजाब विधानसभा में एक अप्रैल 2022 को पारित प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करता है, जिसमें सिफारिश की गई है कि…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License