NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली के श्रमिक वर्ग को आवास देने में विफल रही डीडीए !
उच्च आय वाले समूहों पर दिल्ली आवास प्राधिकरण के ज़्यादा ध्यान देने के कारण शहर की आबादी का केवल 23.7 प्रतिशत ही नियोजित कॉलोनियों में निवास करता है।

टिकेंदर सिंह पंवार
20 Mar 2018
डी डी ए

जय सिंह आश्रम में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) कॉलोनी के बाहर फुटपाथ पर एक छोटी सी दुकान चलाते हैं जिसपर अखबार और दूसरी अन्य चीज़े रखते हैं। इसी छोटी दुकान की आमदनी से वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इस जगह पर दिन के समय में दुकानदारी करते हैं और रात में तिरपाल डालकर अपना घर बना लेते हैं। परिवार के लिए दो वक़्त की रोटी जुटाने राजस्थान से दिल्ली आए जय सिंह से पूछे जाने पर कि वह खाना कहां बनाते और शौच के लिए कहां जाते तो उन्होंने बताया कि पास में बाला साहिब गुरूद्वारा है वहीं ये सारा काम करते हैं।

शायद जय सिंह भाग्यशाली हैं जो गुरुद्वारा के क़रीब रहते हैं। राजधानी दिल्ली में जय सिंह की तरह क़रीब 70 प्रतिशत श्रमिक रहते हैं जिनकी ज़िंदगी बेहद ही संघर्षपूर्ण हैं और वे रोज़ दिन संघर्ष कर रहे हैं और उनकी ज़िंदगी रोज़ दिन और मुश्किल होती जा रही है।

दिल्ली के मज़दूर वर्ग के लिए आवास एक बड़े सपने जैसा है। वे कोई घर किराए पर नहीं ले सकते क्योंकि यह बहुत ही महंगा है जो उनके बजट से बाहर की चीज़ है। वे झुग्गी बस्तियों में रहने को मजबूर हैं जो अब पूरी तरह भर चुका है। यह डीडीए की दोषपूर्ण नीति का एक नतीजा भी है। सार्वजनिक आवास की आवश्यकता और महत्व की अनदेखी करते हुए प्राधिकरण ने मुख्य रूप से मध्यम वर्ग के लिए घरों का निर्माण किया।

दिल्ली सरकार के खुद के अनुमान के मुताबिक़ शहर की आबादी का केवल 23.7 प्रतिशत ही नियोजित कालोनियों में रहती है। शेष आबादी अवैध कॉलोनियों या बस्तियों में रहते हैं जिन्हें विकास के लिए कभी अधिकृत नहीं किया गया था और इसलिए वे अनियोजित तरीके से बढ़ते चले गए हैं।

नियोजन की ग़ैर मौजूदगी ने सड़क और अन्य ज़रुरी पहुंच के लिए न सिर्फ भवन निर्माण के नियमों का उल्लंघन किया है बल्कि इन बस्तियों को शहर के विस्तृत बुनियादी ढांचा वितरण प्रणाली में भी एकीकृत नहीं किया गया है।

ऐसी बस्तियों को वर्गीकृत किया गया है और इनमें रहने वाले आबादी का प्रतिशत निम्न है।

1. झुग्गी झोपड़ी क्लस्टर (जेजेसी): 14.8%

2. स्लम क्षेत्र: 19 .1%

3. अनाधिकृत कॉलोनियां: 5.3%

4. पुनर्वास कॉलोनियां: 12.7%

5. नियमित अनाधिकृत कालोनियां: 12.7%

6. ग्रामीण गांव: 5.3%

7. शहरी गांव: 6.4%

8. नियोजित कॉलोनियां: 23.7%

इस वर्गीकरण को दिल्ली के मास्टर प्लान 2021 में अनियोजित क्षेत्रों के रूप में माना गया है।

वर्गीकरण के यह रूप केवल मनुष्य के शारीरिक उपस्थिति और स्थान को प्रदर्शित नहीं करता है, यह इन स्थानों के अनुसार विकसित विभेदित नागरिकता का भी प्रतीक है।

यह एक प्रणाली का प्रकार है जिसके द्वारा सरकार अपने कार्यकाल के आधार पर विभिन्न श्रेणियों के नागरिकों को विभिन्न स्तरों की सेवाएं प्रदान करता है।

दिल्ली जैसे शहर में स्थानीय बहिष्करण (अपने लक्जरी जीवन शैली की रक्षा के लिए शहरी अभिजात्य वर्ग स्थानिक बहिष्करण का सहारा लेते हैं जिसके परिणामस्वरूप शहरी निवासियों के लिए स्थानिक पहुंच और गमन की आज़ादी सीमित होती है।) इतना व्यापक क्यों है कि जो राष्ट्रीय शासन का केंद्र भी है? इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट्स के गौतम भान ने कहा है कि दिल्ली में स्थानिक बहिष्करण असफल नियोजन का उत्पाद नहीं है बल्कि खुद को नियोजन का है। उनके अनुसार यह कार्य राज्य के विकास के उच्चतम स्तर से शुरू होता है और यह शहर की सबसे शक्तिशाली एजेंसी डीडीए द्वारा संचालित होती है।

सार्वजनिक आवास सहित भूमि प्रबंधन और विकास डीडीए की पूरी ज़िम्मेदारी है। डीडीए द्वारा तैयार किया गया दिल्ली के लिए मास्टर प्लान 1962, 1990 और 2007 जारी किया गया। इन योजनाओं के तहत व्यवस्थित रूप से शहरी विकास के लिए अधिसूचित भूमि कम दी गई और कम लागत के सार्वजनिक आवास के अनुमानित आवश्यक संख्या कम दी गई।

न केवल योजनाबद्ध आवासीय इकाइयों की संख्या वितरित करने में डीडीए पिछड़ गया है बल्कि निर्मित आवास की संख्या भी उच्च आय वाले समूहों के पक्ष में नाटकीय रूप से कर दिया गया। साल 2004-2013 की अवधि में केवल 10 प्रतिशत मकान को आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए तैयार किया गया था।

सार्वजनिक आवास की अनुपस्थिति में बड़ी संख्या में अनौपचारिक क्षेत्र उभर गए हैं जो कि सिर्फ घरों का निर्माण ही नहीं करते बल्कि ग़रीबों के लिए आवास की एक नई जगह भी लाते है। शहर के भीतर भूमि और आवास में विकास की डीडीए की विफलता से अविकसित भूमि पर कब्जे और योजनाओं की सीमा के बाहर 'अनधिकृत' बस्तियों का विशाल निर्माण हुआ।

नीति के इस रूप ने तीन महत्वपूर्ण अभिव्यक्तियों को जन्म दिया है जो शहर में और इसके आसपास स्पष्ट रूप से देखी जाती हैं।

1. डीडीए द्वारा मुहैया कराए गए आवास में एक स्पष्ट वर्गवादी पक्षपात है। यह उच्च आय वाले समूहों के लिए आवास मुहैया कराने में यह सक्रिय था। लेकिन ग़रीब वर्गों को आवास देने में असफल रही है जो ज़ाहिर तौर पर शहर में बड़ी संख्या में रहते हैं।

2. शहर की आबादी काफी बढ़ गई। नीति नियोजन में अपवर्जन अंतर्निहित है। डीडीए की विभिन्न रिपोर्टों में खाली स्थानों की घेराबंदी के जोरदार कार्यक्रमों के ज़रिए अनियोजित बस्तियों से शहर की रक्षा के लिए कहा गया है ताकि भूमि को अतिक्रमण से बचाया जा सके।

Image removed.

DDA
दिल्ली
मज़दूर

Related Stories

भीषण महामारी की मार झेलते दिल्ली के अनेक गांवों को पिछले 30 वर्षों से अस्पतालों का इंतज़ार

दिल्ली के गांवों के किसानों को शहरीकरण की कीमत चुकानी पड़ रही है

दिल्ली मास्टर प्लान : पीपल्स कलेक्टिव ने सुनिश्चित किया कि झुग्गी-झोपड़ी निवासियों और मजदूरों के सुझाव सुने जाए 

DDA के पास दिल्ली के गांवों के विकास के लिए कोई योजना नहीं

दिल्ली मास्टर प्लान 2041 में क्या है ख़ास?

"दिल्ली 2041 के लिए डीडीए का मास्टर प्लान कामगार वर्ग की समस्याओं का समाधान करने में नाकाम"

दिल्ली : डीडीए ने रविदास मंदिर के पुनर्निर्माण को दी मंज़ूरी

बिहार चुनाव, दक्षिण अफ्रीका में ट्रेड यूनियनों की हड़ताल और अन्य

बाटला हाउस में बिना नोटिस के उजाड़े घर, DDA पर उठ रहे सवाल

रविदास मंदिर ध्वस्तीकरण मामला : आप ने भाजपा पर दलित-विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया


बाकी खबरें

  • देश के 14 राज्यों में ओमिक्रॉन फैला, अब तक 220 लोग संक्रमित
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश के 14 राज्यों में ओमिक्रॉन फैला, अब तक 220 लोग संक्रमित
    22 Dec 2021
    देश में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है | देश के दो ओर नए राज्य ओडिशा और जम्मू कश्मीर में ओमिक्रॉन के मामले सामने आए है।
  • शुक्रवार की नमाज़ के विवाद में आरएसएस की भूमिका, विपक्षी दलों की चुप्पी पर पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब के विचार
    एजाज़ अशरफ़
    शुक्रवार की नमाज़ के विवाद में आरएसएस की भूमिका, विपक्षी दलों की चुप्पी पर पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब के विचार
    22 Dec 2021
    अदीब का कहना है कि उन्होंने जिन 18 पार्टियों से संपर्क साधा था,उनमें से महज़ तीन पार्टियों ने गुरुग्राम में शुक्रवार की प्रार्थना के मुद्दे पर समर्थन के सिलसिले में उनके आह्वान का जवाब दिया। उनकी यह…
  • covid
    डी रघुनंदन
    क्या बूस्टर खुराक पर चर्चा वैश्विक टीका समता को गंभीर रूप से कमज़ोर कर रही है?
    22 Dec 2021
    विश्व स्वास्थ्य संगठन लगातार इसे रेखांकित करता आया है कि बूस्टर टीकों की दौड़, वैश्विक टीका समता को गंभीर रूप से कमजोर कर रही है और वास्तव में महामारी की काट किए जाने को भी नुकसान पहुंचा रही है।…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    SSC अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन, संसद में विपक्षी सांसदों का विरोध मार्च और अन्य ख़बरें
    21 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी SSC अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन, संसद में विपक्षी सांसदों का विरोध और अन्य ख़बरों पर।
  • bhasha
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बरः गुप्त मतदान और लोकतंत्र पर हमला है आधार को वोटर i-card से जोड़ने वाला क़ानून
    21 Dec 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बताया कि किस तरह से बिना पर्याप्त चर्चा के मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने वाला कानून संसद से पारित कराना भारतीय लोकतंत्र की बुनियादी अवधारणा -गुप्त मतदान…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License