NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली में निर्माण मजदूर संकट में, मोदी और केजरीवाल दोनों सरकारें चुप
दिल्ली में मज़दूर कल्याण बोर्ड से नियमानुसार मिलने वाले आर्थिक लाभ पिछले पांच माह से पूरी तरह से बंद हैं| भ्रष्टाचार की जांच के नाम पर यहां सारा काम ठप कर दिया गया है।
मुकुंद झा
05 Oct 2018
मज़दूरों की रैली
फ़ोटो : मुकुंद झा

कृष्णा कुमारी ने चार माह  पूर्व बच्चे को जन्म दिया और उन्हें प्रसव के 20 दिन बाद ही मजदूरी पर जाना पड़ा क्योंकि उन्हें निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड की ओर से प्रसव बाद मिलने  वाला 30 हज़ार रुपये का आर्थिक लाभ  नहीं मिला।

कृष्णा कुमारी दक्षिणी दिल्ली से हैं और निर्माण मज़दूर हैं। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए उन्होंने जो सब बताया वो सब विचलित करने वाला था। उन्होंने कहा कि उन्हें मजबूरन अपने परिवार के निर्वाह के लिए प्रसव के 20 दिन बाद ही मजदूरी पर जाना पड़ा। आप जरा सोचिए 20 दिन के नवजात को लेकर निर्माण मज़दूरी का कार्य करना पड़ रहा है और ये सब इसलिए क्योंकि सरकार द्वारा दिए जाने वाला हित लाभ उन्हें नहीं मिला जो एक भवन निर्माण मज़दूर होने के नाते उनका हक था।

इसके अलावा एक अन्य मज़दूर रामबाबू कोली दिल्ली के अशोक विहार से आए थे। उनकी उम्र 50 साल से अधिक रही होगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल में ही अपनी बेटी की शादी की जिसमें उन्होंने बाजार से पैसे उधार ले लिए इस उम्मीद में कि उन्हें मज़दूर कल्याण बोर्ड से बाद में मिलने वाली 50 हज़ार की आर्थिक सहायता मिलेगी जिससे वो इस कर्ज़ को चुका देंगे परन्तु उन्हें अबतक कोई लाभ नहीं मिला है। वे अब बड़े परेशान थे कि अगर उन्हें ये राशि नहीं मिली तो वो अपना कर्जा कैसे चुकाएंगे, इसी को लेकर पिछले कई माह से लेबर कमिश्नर के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं|

ये सिर्फ एक कृष्णा या फिर एक रामबाबू की कहानी नहीं है, कल 4 अक्टूबर को सैकड़ों मज़दूरों ने दिल्ली में “निर्माण मज़दूर संयुक्त कार्यवाही समिति” के नेतृत्व में निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड की भयावह स्थति को लेकर राज निवास पर प्रदर्शन कर सभा की, जिसे सभी ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने संबोधित किया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने उपराज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया।

क्या है पूरा मामला?

भवन या अन्य  निर्माण मजदूरों व अन्य ट्रेड यूनियनों के  एक लंबे संघर्ष के बाद इन कामगारों के काम के दौरान व परिवार की आर्थिक व सामजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए  संसद में 1996 में कानून बना और इसी कानून के तहत 2003 में में दिल्ली में सरकार द्वारा निर्माण कार्य से जुड़े हुए मजदूरों के लिए वेलफेयर बोर्ड का गठन किया गया। इस कल्याण बोर्ड में हर निर्माण कार्य की लागत का एक प्रतिशत पैसा कामगारों के लाभ के लिए जमा कराया जाता है जिसका लाभ सीधे निर्माण मज़दूर व उनके परिवार को अनेक तरीके से दिया जाता है। इसके तहत आप लाभ के हकदार तभी होते हैं जब आप ने निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड में अपना पंजीकरण करवाया हो।

दिल्ली के 2003 के मज़दूर कल्याण बोर्ड के नियमानुसार मिलने वाले आर्थिक लाभ पिछले पांच माह से पूरी तरह से बंद हैं। इसको लेकर दिल्ली के निर्माण मजदूरों में भारी रोष है। ये परिस्थिति मई के पहले हफ्ते से ही बनी हुई हैं, जबसे बोर्ड में चल रही गड़बड़ियों की जाँच एंटी करप्शन विभाग कर रहा है। इसको आधार बनाकर दिल्ली के सभी लेबर कमिशनर ऑफिस ने काम बंद कर रखा है। वहां न तो किसी प्रकार का नया पंजीकरण हो रहा है न ही पुराने बने सदस्यों का नवीनीकरण हो रहा है जो नियमानुसार साल में एक बार करना अनिवार्य होता  है, अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें इसके तहत मिलने वाला कोई भी आर्थिक या सामजिक लाभ नहीं मिलेगा।

दिल्ली में अभी लाखों मज़दूर इस कल्याण बोर्ड के तहत पंजीकृत हैं जो अभी सभी तरह के लाभों से वंचित हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि जाँच के नाम पर पूरे महकमे ने मजदूरों के सभी तरह के काम बंद कर दिए हैं, जबकि कई महकमों में जाँच होती रहती है परन्तु उनके कार्य पर किसी प्रकार का फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन मजदूरों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है, ये एक बड़ा सवाल है।

इसका जवाब न तो सरकार दे पा रही है और न ही उपराज्यपाल। श्रम विभग के अधिकारी केवल जाँच की बात कर अपना पल्ला छुड़ा रहे हैं परन्तु यह कोई नहीं बता रहा है कि दिल्ली के ये मज़दूर अपने हक के लिए कहां जाएं? 

अभी दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों ने मजदूरों के वे बच्चे जो वहाँ पढ़ते हैं उन्हें अक्तूबर तक अपने माता–पिता के नवीनीकृत कार्ड की कॉपी जमा करने के लिए कहा है तभी उन्हें मिलने वाला वज़ीफा (छात्रवृत्ति) या अन्य आर्थिक लाभ दिया जाएगा। अब सवाल यही है कि अगर अधिकारी काम ही नहीं करेंगे तो फिर उनका नवीनीकरण कैसे होगा? अगर वो नहीं होगा तो उन्हें ये वजीफा या आर्थिक लाभ कैसे मिलेगा? इसको लेकर मज़दूर चिंतित है और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

M2 (1).jpg

निर्माण मज़दूर कौन हैं?

हमें ये समझना होगा कि निर्माण मज़दूर कौन होता है और ये अन्य मजदूरों से कैसे भिन्न हैं? जो मज़दूर निर्माण कार्यों जैसे भवन बनाने व मरम्मत करने सड़क \पुल, रेलवे बिजली का उत्पादन, टावर्स बांध \नहर \जलाशय, खुदाई,  जल पाइप लाइन बिछाने, केबल बिछाने जैसे कार्यों से जुड़े होते हैं जैसे राजमिस्त्री, बढ़ई, वेल्डर, पॉलिश मैन, क्रेन ड्राईवर, बेलदार व चौकीदार ये सभी निर्माण मज़दूर कहलाते हैं|

मज़दूर कल्याण बोर्ड में भ्रष्टाचार

रैली को संबोधित करते हुए सीटू राज्य कमेटी के सदस्य सिद्धेश्वर शुक्ला ने कहा की सरकार कह रही है कि इस बोर्ड में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। हम मानते हैं कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है, परन्तु सरकार का ये कहना कि ये यूनियन कर रही हैं, ये समझ से परे है। उन्होंने कहा कि यूनियन तो केवल मजदूरों के पंजीकरण के लिए फार्म भरकर लाती है, उसकी वैधता की जाँच करना और फिर मज़दूर को कार्ड देना तो सरकारी तन्त्र का काम है, यह संभव ही नहीं है कि बिना सरकारी कर्मचारी की मिलीभगत के भ्रष्टाचार पनपे।

आगे वे कहते हैं कि जब से मजदूरों को आर्थिक लाभ मिलना शुरू हुआ है तब से भवन निर्माण यूनियनों की बाढ़ आ गई है, अभी दिल्ली सरकार के मुताबिक 89 यूनियन इस क्षेत्र में कार्य कर रही हैं, इनमें कुछ यूनियन द्वारा पैसे लेकर गलत लोगों के भी कार्ड बनाये गये हैं, परन्तु इन सबकी जाँच तो सरकार को ही करनी थी। इन सब आधार को लेकर सभी यूनियन को कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।

 

मज़दूर कल्याण बोर्ड के धन का दुरुपयोग

मज़दूर कल्याण बोर्ड में तकरीबन अभी 2700 करोड़ रुपये हैं जो मज़दूर के हैं और उनके कल्याण के लिए खर्च होने हैं परन्तु मज़दूरों के इस पैसे को किसी अन्य मद में खर्च करने का आरोप दिल्ली की सरकार पर लग रहा है। एक मज़दूर का कहना है कि हमारे हक के पैसे सरकार अन्य कार्य में खर्च कर रही है, परन्तु हमारे हक के पैसे नहीं दे रही है। इसका इसका जवाब केजरीवाल सरकार को देना पड़ेगा।

मज़दूरों ने बताया कि उनका शोषण उनके ही ठेकदार करते हैं। क्योंकि वे किसी न किसी ठेकेदार के नीचे काम करते हैं। कई मजदूरों ने बताया किस प्रकार से उन्हें लगातार 12-12 घन्टे काम कराया जाता है और फिर उन्हें 150 से 300 तक दिहाड़ी दी जाती है। उन्हें कोई भी छुट्टी नहीं मिलती है, न ही उनका कोई दुर्घटना बीमा होता है। अगर उन्हें किसी दुर्घटना में चोट आ भी जाती है तो उन्हें कोई मदद ठेकेदार या मालिक के द्वार नहीं दी जाती है।

राष्ट्र की प्रगति में इन  श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका को लगातार नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। देश की राजधानी में मज़दूरों के साथ हो रहे इस अन्याय पर केंद्र की भाजपा सरकार भी चुप है तो खुद को मजदूरों का हितैषी कहने वाली केजरीवाल सरकार भी।

constructions workers
nirman mazdoor
labor
labor welfare board
AAP
BJP
LG

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग


बाकी खबरें

  • बिहार में ज़हरीली हवा से बढ़ी चिंता, पटना का AQI 366 पहुंचा
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार में ज़हरीली हवा से बढ़ी चिंता, पटना का AQI 366 पहुंचा
    24 Nov 2021
    सोमवार को बिहार के कटिहार का एयर क्वालिटी इंडेक्स 386 था जबकि पूर्णिया का 384, वहीं सिवान का 381, जबकि दरभंगा का 369 दर्ज किया गया था।
  • Communalism
    बी सिवरामन
    सांप्रदायिक घटनाओं में हालिया उछाल के पीछे कौन?
    24 Nov 2021
    क्या भाजपा शासित पांच राज्यों में तीन महीने की छोटी अवधि के भीतर असंबद्ध मुद्दों पर अचानक सांप्रदायिक उछाल महज एक संयोग है या उनके पीछे कोई साजिश थी?
  • अमेय तिरोदकर
    क़रीब दिख रही किसानों को अपनी जीत, जारी है 28 नवंबर को महाराष्ट्र महापंचायत की तैयारी
    24 Nov 2021
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विवादित कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा के बावजूद, किसानों अपना प्रदर्शन जारी रखने के लिए दृढ़ निश्चय कर चुके हैं। शाहपुर के दत्तात्रेय शंकर महात्र
  •  "Ceasefire announced by the government, our struggle will continue
    ओंकार सिंह
    “संघर्ष विराम की घोषणा सरकार की, हमारा संघर्ष जारी रहेगा”
    24 Nov 2021
    किसान आंदोलन की एक ख़ासियत यह रही कि विभिन्न संगठन अपने अलग-अलग झंडों के साथ शामिल हुए। जिसको लेकर कहीं कोई ऐतराज नहीं रहा और यही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती रही। लखनऊ महापंचायत में इस विविधता और उसकी…
  • cartun
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: किताबों की राजनीति, राजनीति की किताब
    24 Nov 2021
    राजनीति में समय का बहुत महत्व है। और दोनों किताब वाकई भाजपा के हिसाब से ‘समय पर’ ही आईं हैं!
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License