NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली :निगम के 6 लाख छात्रों अबतक क्यों नहीं मिली नोटबुक?
हमारी सरकार का नारा है ‘सब पढ़े, सब बढ़े’ परन्तु बिना नोटबुक कैसे पढ़ें, जब नहीं पढ़ें तो कैसे बढ़ें?
मुकुंद झा
10 Jul 2018
mcd school education
Image Courtesy: amarujala.com

शाहाबाद डेरी के एक निगम स्कूल की चौथी कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा ने बतया कि शैक्षिक सत्र 2018-19 के शुरू हुए तीन माह बीत जाने के बाद भी उसे स्कूल से कोई नोटबुक नहीं मिली है| वो खुद ही नोटबुक खरीदकर पढ़ाई कर रही है।

सोनिया विहार के निगम स्कूल की तीसरी कक्षा की छात्र की कहानी बहुत ही झकझोरने वाली थी| उसे भी अबतक स्कूल की तरफ से मिलने वाली नोटबुक नहीं मिली है, उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ही खरब है| उसके पास नोटबुक के लिए पैसे नहीं है, अभी वो किसी की दी हुई पुरानी नोटबुक को लेकर स्कूल जाती है|

दिल्ली में निगम विद्यालयों का शैक्षिक सत्र अप्रैल में शुरू हुआ था, उत्तरी नगर निगम और पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) द्वारा संचालित स्कूलों में पढ़ रहे लगभग छह लाख छात्रों को गर्मी की छुट्टियों के समाप्त होने के बाद भी नोटबुक नहीं मिले हैं। इन विद्यालयों में पढ़ रहे अधिकांश बच्चे समाज के निचले स्तर से आते हैं और इन सुविधाओं में देरी उन्हें बहुत प्रभावित करती है।

2009 में लागू शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अनुच्छेद 8 के अनुसार, निगम द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालयों के लिए छात्रों को स्टेशनरी, किताबें, नोटबुक और अन्य सुविधाएँ प्रदान करना अनिवार्य है। ये हर सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वो सभी छात्रों को प्रथमिक सुविधाएँ प्रदान करें|

अप्रैल में शुरू हुए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकें दी गईं, नोटबुक नहीं। स्कूल वर्दी और बैग जैसी अन्य सुविधाओं के लिए जो धन सीधे माता-पिता के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता है। वो भी अभी तक कई स्कूलों के बच्चों को नहीं मिला है|

निगम की एक महिला शिक्षक ने न्यूज़क्लिक को नाम न ज़ाहिर किए जाने की शर्त पर बताया कि यह समस्या निगम के स्कूलों के लिए कोई नई बात नही हैं| इस तरह की समस्या का सामना निगम के शिक्षकों और छात्रों के लिए आमबात है। इन सब के कारण छात्रों को पढने में बहुत परेशानी होती है|

 उन्होंने आगे कहा कि, “आप सोच के देखिए कि बिना किताब और नोटबुक कैसे पढ़ाई होगी। क्योंकि निगम के स्कूल में अधिकतर गरीब और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार के बच्चे आते हैं, इनमें से अधिकांश के लिए अपने बच्चों को स्टेशनरी खरीदकर देना संभव नहीं होता है| उनके लिए स्कूल से मिलने वाले ये सुविधाएँ ही सहारा होता, वो भी सरकार की सुस्ती के कारण समय पर नहीं मिल पाती हैं”|

इसे भी पढ़े : दिल्ली में कक्षा 12वीं तक ईडब्ल्यूएस छात्र शिक्षा ले सकतें है?

निगम की एक महिला शिक्षक ने कहा कि उन्हें यानि शिक्षकों को भी कई–कई महीने मासिक वेतन नही मिलता| उन्होंने एक घटना का ज़िक्र करते हुए बताया कि कई माह वेतन न मिलने से आर्थिक तंगी के कारण पूर्वी दिल्ली के एक निगम स्कूल के शिक्षक ने आत्महत्या कर ली थी| अभी भी उनके स्कूल में शिक्षकों को मई और जून का वेतन नहीं मिला हैं”|  

अंत में उन्होंने कहा कि प्रधानचार्य कह रहे की नोटबुक का भंडार आने वाला है और जल्दी ही छात्रों को मिल जाएगा।

 ये समस्या कोई पहली बार नहीं हुई, पिछले शैक्षणिक सत्र में भी बच्चों को नोटबुक अगस्त में मिले थे| मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जब इन बच्चों के माता-पिता सुविधाओं की कमी को लेकर अपनी याचिका लेकर उच्च न्यायालय चले गए तो पूर्वी निगम के स्कूलों ने देरी के लिए निविदा प्रक्रिया में बदलावों को दोषी ठहराया।

ये तब है जबकी भाजपा निगम में काफ़ी लंम्बे समय से सत्ता में है जो की भारत को विश्व गुरु बनाने का रोज़ ऐलान करती है | परन्तु उनसे पूछना चाहिए कि बिना किताब और नोटबुक के बिना कैसे भारत विश्वगुरु बनेगा? 

 

MCD
BJP
primary education in delhi
Education crises
AAP Govt

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • उपेंद्र स्वामी
    फ्रांस में मैक्राँ की जीत से दुनियाभर में राहत की सांस
    25 Apr 2022
    दुनिया भर की: रविवार को हुए मतदान में मैक्राँ को 58.55 फीसदी वोट मिले। दक्षिणपंथी ला पेन ने अगर मौजूदा राष्ट्रपति मैक्राँ को हराकर उलटफेर कर दिया होता तो खासी बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल हो जाती।
  • Brinda Karat
    न्यूज़क्लिक टीम
    NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात
    25 Apr 2022
    कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) और नई शिक्षा नीति (NEP) के विरोध में, छात्र, शिक्षक और राजनेता केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए केंद्रीकृत परीक्षा लागू करने, एमफिल पाठ्यक्रम को खत्म…
  • communalism
    भाषा सिंह
    बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून
    24 Apr 2022
    औरंगज़ेब के ख़िलाफ़ जंग का ऐलान करते हुए देश के हुक्मरान, टाइम मशीन से देश को मुगलकाल में वापस ले जाकर, वापस तलवार लेकर लड़ाई के मैदान में उतरने जैसा तेवर दिखाते हैं।
  • Communalism
    न्यूज़क्लिक टीम
    दक्षिणपंथ का इतिहास; धार्मिक जुलूसों का भावनाएँ भड़काने के लिए इस्तेमाल
    24 Apr 2022
    पिछले कुछ हफ़्तों में भारत ने कई घटनाएँ देखी जहाँ धार्मिक जुलूसों के बाद सांप्रदायिक हिंसा हुई; चाहे राम नवमी के बाद मुसलमानों के खिलाफ हुई हिंसा हो या हाल ही में हनुमान जयंती पर दिल्ली के जहांगीरपुरी…
  • bihar
    अनिल अंशुमन
    बिहार : हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक कुंवर सिंह के परिवार को क़िले में किया नज़रबंद
    24 Apr 2022
    कुंवर सिंह की प्रपौत्र वधु पुष्पा सिंह एक वीडियो में बता रही हैं कि उन्हें पूरे परिवार के साथ सरकार व प्रशासन ने घेरेबंदी में रखा हुआ है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License