NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली पहुंचा नर्मदा बचाओ आन्दोलन
नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर द्वारा २७ जुलाई को शुरु किया गया अनशन अब तक जारी है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Aug 2017
दिल्ली पहुंचा नर्मदा बचाओ आन्दोलन

नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर द्वारा २७ जुलाई को शुरु किया गया अनशन अब तक जारी है। उनका ये अनशन  सरदार सरोवर डैम कि  उचाई बढ़ानें  के खिलाफ है ,जिससे ४००००  परिवारों की ज़िन्दगी पर सीधा असर पड़ेगा। मेधा पाटकर का कहना है की  ये अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक उन सभी परिवारों को  सही तरीके से पुनर्वासित नहीं किया जाता। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश सरकार ये दावा कर रही है की सभी  प्रभावित परिवारों से वे लगातर संपर्क में हैं ताकि लोग अपने गावों  को जल्दी खाली कर दें। सुप्रीम कोर्ट ने लोगों के पुनर्वास के लिए सरकार  को , ३१ जुलाई तक का समय दिया था।  पर सामाजिक कार्यकर्ताओ की अपील के बाद इसकी अवधी को  ८ अगस्त तक बढ़ा दिया गया है। मेधा पाटकर ने इस  फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि  ये  आंदोलन की जीत है और  वो आगे भी कोर्ट से अपील करती रहेंगी। दुनिया के मशहूर चिंतक और इतिहासकार नोआम चोम्स्की ने  भी नर्मदा बचाओ आंदोलन को अपना समर्थन करते  हुए एक ऑनलाइन पेटीशन साइन किया है। इस पेटीशन में प्रधान मंत्री से इस मामले में जल्द से जल्द दखल देने की अपील की गयी है। ऑनलाइन पेटीशन के मुताबिक सभी प्रभावित लोगों की मांगों को मान लिया जाना चाहिए , जिससे लोगों का शांति प्रिय विरोध के तरीकों और लोकतांत्रिक व्यवस्था  में भरोसा बना रहे। इसके आलावा बहुत से सामाजिक और राजनैतिक क्रयकर्ताओं ने ३ अगस्त को इस आंदोलन के समर्थन  में जंतर मंतर पर धरना दिया। 

नर्मदा  बचाओ आंदोलन का इतिहास काफी पुराना है , इसकी शुरुवात 1980 के दशक में हुई जब पहली  बार मध्य प्रदेश और गुजरात में 30 बड़े , 135 मध्यम  और 300 छोटे डैम  बनाने  की योजना को हरी झंडी दे दी गयी। साथ ही नर्मदा ट्रिब्यूनल ने सरदार सरोवर डैम की उचाई बढ़ाये जाने की योजना को पारित किया। इसी दौरान मेधा पाटकर और उनके साथियों ने सरकार  के इस फैसले का विरोध करते हुए नर्मदा बचाओ आंदोलन की शुरुवात की। NBA   शुरू में डैम बनाने के पूरी तरह   खिलाफ था , और उनका  कहना था की इससे न सिर्फ लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा बल्कि उनकी सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरण को भी नुक्सान पहुंचेगा। सरकार को उस वक्त  वर्ल्ड बैंक से डैम के लिए फंडिंग मिल रही थी। पर NBA  और आदिवासियों के लगातार विरोध और  मेधा के सत्याग्रह की वजह से  उन्हें पीछे हटाना पड़ा । मीडिया में भी ये रिपोर्ट्स बाहर आने लगीं जिससे ये साफ़ दिखा की नर्मदा ट्रिब्यूनल ने पुनर्वास और पर्यावरण के नियमों को ताक पे रखते हुए , डैम्स  के निर्माण की सहमति दी थी।  
 

इस  दौरान  सरकारें  ये कहती रहीं  कि डैम्स  देश को बिजली और पानी पहुंचाने और देश की प्रगति के लिए बहुत ज़रूरी है। सुप्रीम कोर्ट में ये मामला जाने के बाद शुरू में  आंदोलन के पक्ष में फैसला होता दिखा , पर २००० के सुप्रीम कोर्ट ने डैम्स  बनाने के हक़ में फैसला दिया। इसके  बाद से ही ये आंदोलन लोगों के सही पुनर्वास कराने  के हक़ में चल रहा है।  
 

पूंजीवादी नीतियों के चलते अक्सर किसानो , मज़दूरों और आदिवासीयो की मूलभूत ज़रूरतों को ताक पे रखते हुए सरकारें और व्यवस्था पूंजीपतियों के हक़ में खड़ी दिखती हैं ।  विकास के नाम पर अक्सर ये खेल खेला जाता है , जिसम में  गरीबों और मेहनतकश जनता के जीने के अधिकार तक का हनन होता है। एक तरह से ये विकास पूँजीपति  वर्ग का विकास  साबित हुआ है जिसकी कीमत  मेहनतकश जनता को चुकानी पड़ती है। नर्मदा घाटी के लोगों के ये लड़ाई पूरी मेहनतकाश जनता की लड़ाई है , क्यूकी जिस विकास के नाम पर ये होता हो रहा है वो सिर्फ कुछ लोगों का विकास है।

नर्मदा बचाओ आन्दोलन
मेधा पाटकर
योगेन्द्र यादव

Related Stories

नर्मदा बांध विस्थापितों का बेमियादी उपवास नर्मदा तट पर जारी

लगातार उपवास पर बैठे नर्मदा घाटी के 11 लोग और मेधा पाटकर

नर्मदा घाटी से प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र : मन की बात या मनमानी बात?

‘आप’ का संकट

जनता की ‘आप’ में तानाशाही की सेंध


बाकी खबरें

  • कैथरीन स्काएर, तारक गुईज़ानी, सौम्या मारजाउक
    अब ट्यूनीशिया के लोकतंत्र को कौन बचाएगा?
    30 Apr 2022
    ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति धीरे-धीरे एक तख़्तापलट को अंजाम दे रहे हैं। कड़े संघर्ष के बाद हासिल किए गए लोकतांत्रिक अधिकारों को वे धीरे-धीरे ध्वस्त कर रहे हैं। अब जब ट्यूनीशिया की अर्थव्यवस्था खस्ता…
  • international news
    न्यूज़क्लिक टीम
    रूस-यूक्रैन संघर्षः जंग ही चाहते हैं जंगखोर और श्रीलंका में विरोध हुआ धारदार
    29 Apr 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार ने पड़ोसी देश श्रीलंका को डुबोने वाली ताकतों-नीतियों के साथ-साथ दोषी सत्ता के खिलाफ छिड़े आंदोलन पर न्यूज़ क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से चर्चा की।…
  • NEP
    न्यूज़क्लिक टीम
    नई शिक्षा नीति बनाने वालों को शिक्षा की समझ नहीं - अनिता रामपाल
    29 Apr 2022
    नई शिक्षा नीति के अंतर्गत उच्च शिक्षा में कार्यक्रमों का स्वरूप अब स्पष्ट हो चला है. ये साफ़ पता चल रहा है कि शिक्षा में ये बदलाव गरीब छात्रों के लिए हानिकारक है चाहे वो एक समान प्रवेश परीक्षा हो या…
  • abhisar sharma
    न्यूज़क्लिक टीम
    अगर सरकार की नीयत हो तो दंगे रोके जा सकते हैं !
    29 Apr 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस अंक में अभिसार बात कर रहे हैं कि अगर सरकार चाहे तो सांप्रदायिक तनाव को दूर कर एक बेहतर देश का निर्माण किया जा सकता है।
  • दीपक प्रकाश
    कॉमन एंट्रेंस टेस्ट से जितने लाभ नहीं, उतनी उसमें ख़ामियाँ हैं  
    29 Apr 2022
    यूजीसी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट पर लगातार जोर दे रहा है, हालाँकि किसी भी हितधारक ने इसकी मांग नहीं की है। इस परीक्षा का मुख्य ज़ोर एनईपी 2020 की महत्ता को कमजोर करता है, रटंत-विद्या को बढ़ावा देता है और…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License