NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
दिल्ली : फैक्ट्रियों में हो रहे आग हादसों के खिलाफ मज़दूरों का प्रदर्शन  
सभी मज़दूरों ने एक स्वर में मज़दूरों की आग से हो रही मौतों को दुर्घटना नहीं हत्या कहा। मज़दूरों ने एक सवाल बार बार पूछा कि कब तक और कितने मज़दूरों की मौते? कब जागेगी सरकार!  
मुकुंद झा
16 Jul 2019
दिल्ली : फैक्ट्रियों में हो रहे आग हादसों के खिलाफ मज़दूरों का प्रदर्शन   

दिल्ली में फैक्ट्रियों में लगातार आग से हो रहे हादसों के खिलाफ़ संयुक्त ट्रेड यूनियन ने मंगलवार को दिल्ली के श्रम मंत्री गोपाल राय के आवास पर प्रदर्शन किया और अपना ज्ञापन सौंपा। इस प्रदर्शन में दिल्ली के विभिन्न इलाकों के सैकड़ों मज़दूरों ने भाग लिया। सभी मज़दूरों ने एक स्वर में मज़दूरों की आग से हो रही मौतों को दुर्घटना नहीं हत्या कहा। मज़दूरों ने एक सवाल बार बार पूछा कि कब तक और कितने मज़दूरों की मौते? कब जागेगी सरकार!  

इस प्रदर्शन में सीटू, एक्टू, एटक  सहित केंद्रीय ट्रेड यूनियन शामिल हुई। यूनियनों के मुतबिक दिल्ली में लगातार हो रही औद्योदगक दुर्घटना में कई मज़दूर मारे जा रहे हैं एवं गंभीर रूप से  घायल हो रहे हैं। ये बहुत ही दुखद एवं निंदनीय है। उन्होंने कहा की ट्रेड यूनियनों द्वारा बार-बार चेताये जाने के बावजूद सरकार द्वारा कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सभी मज़दूर संगठनों ने कहा कि दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में खुलेआम श्रम कानूनों का उल्लंघन जारी है, मज़दूरों को बाहर से ताला लगाकर काम करवाना आम बात हो गई है। ज्यादतर कारखानों में सुरक्षा के उपाय तो दूर, हवा-पानी-रौशनी-शौचालय तक की सुविधा नहीं है। इन कारखानों का श्रम विभाग द्वारा कोई जांच-निरीक्षण नहीं किया जाता।

लगभग 50 वर्षीय वीरेन जो दिल्ली के एसके मैटल फैक्ट्री में काम करते थे, जिन्हे बिना किसी नोटिस और कोई ठोस कारण के उनके फैक्ट्री मालिक ने काम से बाहर कर दिया, उन्होंने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि वो इस ममले को लेकर बीते कई सालों से लेबर कोर्ट के चक्कर  काट रहे हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। 
वीरेन आगे बताते हैं कि दिल्ली के मज़दूर किस माहौल में काम करते हैं, वो कहते हैं कि हम मज़दूरों को फैक्ट्री मालिक किसी जानवर की तरह काम कराते हैं। हम अंदर काम करते हैं और मालिक बाहर से ताला मरकर चला जाता और जब हम इसका विरोध करते हैं तो वो उनका सीधा जवाब होता है कि तुम्हे दिक्कत है तो तुम जा सकते हो। वीरेन, बड़े उदासी से पूछते हैं कि आप ही बताइए हम क्या करें?
मज़दूर संगठन एटक के नेता नैन सिंह ने 12 जुलाई को दिल्ली के शाहदरा के झिलमिल औद्योगिक क्षेत्र के हुए दर्दनाक हादसे जिसमें तीन मज़दूरों ने अपनी जान गंवा दी थी, को याद करते हुए कहा कि वो हादसा उनकी आँखों के सामने हुआ था। आग इतनी भीषण थी कि उसे बुझाने में 7-8 घंटे लगे। लेकिन ये घटना कोई अचानक हुआ हादसा नहीं है। उन्होंने बताया कि आज भी इतनी मौतों के बाद भी मज़दूर की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जाँच के नाम पर अधिकारी भी खानपूर्ति कर निकल जाते हैं। 

IMG-20190716-WA0019.jpg
 पूर्वी दिल्ली सीटू के सचिव पुष्पेंद्र ने कहा कि झिलमिल फ्रेंड्स कॉलोनी औद्योगिक क्षेत्र गली-4 में यह दुर्घटना दिल्ली के श्रम मंत्री तथा श्रम विभाग तथा पुलिस विभाग की घोर लापरवाही का नतीजा थी। जमुनापार में ऐसी तमाम औद्योगिक इकाइयां काम कर रही हैं जिन पर न तो मजदूरों का कोई रिकॉर्ड रखा जाता है और न उनकी सुरक्षा की कोई व्यवस्था है। जमुनापार में कार्यरत यूनियनों ने इन मसलों को श्रम मंत्री और मुख्यमंत्री को दिए गए ज्ञापनों एवं धरना प्रदर्शनों के माध्यम से बार बार उठाया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि एक तरफ दिल्ली के श्रम मंत्री दिल्ली के मजदूरों को न्यूनतम वेतन देने के बहाने अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह दर्दनाक दुर्घटना में मारे गए मजदूरों के प्रति सरकार और श्रम विभाग पूरी तरह से असंवेदनशील है। 
एक साल में लगभग 49 मज़दूरों की मौत, जिम्मेदार कौन?
ट्रेड यूनियन ने एक लिस्ट भी मंत्री जी को दी जिसमे जनवरी 2018 से अलग-अलग फैक्ट्रियों में आग लगने से मज़दूरों की मौत का आकड़ा है। इस लिस्ट के मुताबिक  एक साल में लगभग 49 मज़दूरों की मौत इस तरह के हादसों में हो चुकी है। 

KUBNNB.PNG
एक्टू के दिल्ली सचिव अभिषेक ने कहा की ये कोई एक घटना नहीं है, इसतरह की घटना तो आम हो गई है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि इस तरह के हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। आगे वो कहते है की झिलमिल और तमाम औद्योगिक क्षेत्रों में हो रहे हादसों के साथ अगर हम दिल्ली के सीवरों में हो रही सफाई कर्मचारियों की मौतों को देखें तो हम पाएंगे की सरकार चाहे जो भी काम करने का दावा कर रही हो, वो मेहनतकश जनता के आधे पेट भी जिंदा रहने की गारंटी नहीं कर सकती। 
क्या मज़दूरों की जान बच सकती थी!
सीटू राज्य सचिव और दिल्ली विश्विद्याल में इतिहास के प्रोफेसर सिद्धश्वेर शुक्ला जिन्होंने दिल्ली में हो रही इन घटनाओं को लेकर शोध किया है, उन्होंने बतया कि दिल्ली की फैक्ट्रियों में आग से पहले भी मज़दूरों की मौते होती रही है लेकिन बवाना में जब जनवरी2018  में एक दर्दनाक घटना हुई जिसमें 18 मज़दूरों की मौत हुई। इसके बाद विश्विद्यालय के कुछ छात्रों ने मिलकर इस तरह की घटना को लेकर शोध किया और इस पर डॉक्यूमेंट्री बनाई, जिसका नाम एग्जिट गेट था। 
सिद्धश्वेर आगे कहते है जब इस फ़िल्म  के लिए शोध कर रहे थे तो हमने कई केस स्टडी किया जिसमे कई गंभीर चूक सामने आई। सबसे पहले तो सरकार और प्रशसन साइट मैपिंग में ही गलती करते है। मज़दूरों और फैक्ट्री की संख्या जगह से अधिक है। दूसरा इसके बाद लेबर इंस्पेक्टर द्वार फैक्ट्री के लाइसेंस देने में धांधली की जाती है, बिना किसी जाँच के लाइसेंस दे दिए जाते हैं। इसके बाद दिल्ली में सरकारी संस्थानों के आपस में समन्वय न होने के कारण भी समस्या और भी गंभीर है। उन्होंने कहा कि यह प्रमुख कारण है कि दिल्ली की फैक्ट्री खतरनाक होती जा रही हैं। 
उन्होंने कहा कि इन मौतों को रोका जा सकता था, अगर ठीक से नियम कानूनों का पालन किया जाए। वो कहते हैं कि इस तरह कि घटनाएं न हों इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाना चाहिए। 
1- मज़दूर और फैक्ट्री मालिकों में सुरक्षा को लेकर और श्रम कानूनों को लेकर जागरूकता अभियान की जरूरत है। 
2. सख्ती से श्रम कानूनों को लागू करने की जरूरत है। 
3. मज़दूरों को काम करने के लिए सुरक्षति माहौल सुनिश्चित  किया जाए। अभी दिल्ली में जिस हालत में मज़दूर काम करते हैं वो ऐसा है जिसमें छोटी भी कोई घटना मज़दूरों को लील लेती है। 

 

 

 

 

 

workers protest
bawana fire
bawana factory fire
CITU
AICCTU
Labour Laws
Delhi’s factory Fire
Delhi
Labour Right

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Politics Grounds Proposed Financial Hub in Bengal
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    बंगाल में प्रस्तावित वित्तीय केंद्र को राजनीति ने ख़त्म कर दिया
    28 Sep 2021
    2010 में वाम सरकार द्वारा प्रस्तावित इस परियोजना पर टीएमसी ने 2011 में अपना दावा किया। लेकिन अब तक यह परियोजना सुचारू नहीं हो पाई है।
  • DISCRIMINATION
    अरविंद कुरियन अब्राहम
    राज्य कैसे भेदभाव के ख़िलाफ़ संघर्ष का नेतृत्व कर सकते हैं
    28 Sep 2021
    यह दुर्भाग्य है कि यूपीए सरकार ने भेदभाव-विरोधी क़ानून बनाने की विधाई प्रक्रिया में शीघ्रता से काम नहीं किया।
  • Bharat Bandh
    अनिल अंशुमन
    भारत बंद अपडेट: झारखंड में भी सफल रहा बंद, जगह-जगह हुए प्रदर्शन
    28 Sep 2021
    चूंकि इस बंद को वाम दलों समेत भाजपा विरोधी सभी राजनीतिक दलों ने सक्रीय समर्थन दिया था इसलिए झारखंड में इस बार राज्य गठबंधन सरकार में शामिल झामुमो, कांग्रेस व राजद पार्टियों के नेता व कार्यकर्त्ता…
  • Bhagat Singh
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    भगत सिंह: रहेगी आबो-हवा में ख़याल की बिजली
    28 Sep 2021
    आज शहीदे-आज़म, क्रांति के महानायक भगत सिंह की 114वीं जयंती है। पूरा देश उन्हें याद कर रहा है, अपना क्रांतिकारी सलाम पेश कर रहा है।
  • Students and youth are also upset with farmers, expressed their pain by tweeting in lakhs
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    किसानों के साथ छात्र -युवा भी परेशान, लाखों की संख्या में ट्वीट कर ज़ाहिर की अपनी पीड़ा
    28 Sep 2021
    27 सितंबर को देशभर के लाखों नौजवान छात्रों ने एक मेगा ट्विटर कैम्पेन किया जहाँ 40 लाख से अधिक ट्वीट्स के साथ रेलवे के छात्रों ने अपनी पीड़ा को ज़ाहिर किया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License