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भारत
राजनीति
दिल्ली सरकार के बाद गेस्ट टीचर्स ने बीजेपी दफ़्तर घेरा, नौकरी की सुरक्षा की मांग
28 फ़रवरी को जब से 22 हज़ार गेस्ट टीचर्स को नौकरी से हटाया गया तब से ही स्थाई नौकरी की मांग को लेकर पहले उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर पर फिर गुरुवार को एलजी हाउस के बाहर प्रदर्शन करने के बाद आज शनिवार को हजारों शिक्षकों ने भाजपा कार्यालय पर प्रदर्शन किया।
मुकुंद झा
09 Mar 2019
guest teacher protest

दिल्ली के 22 हज़ार शिक्षक पिछले 1 मार्च से सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं। शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन शनिवार, आंदोलन के 9वें दिन भी जारी रहा। दिल्ली के हजारों शिक्षक नौकरी की सुरक्षा की मांग को लेकर 9 दिनों से कभी दिल्ली की सड़कों पर, कभी शिक्षा मंत्री, LG, और भाजपा कार्यालय पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
आज शनिवार दिल्ली के गेस्ट टीचरों ने भाजपा के प्रदेश मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। शिक्षकों का कहना है कि दिल्ली सरकार ने गेस्ट टीचरों के स्थाई करने को लेकर पॉलिसी बनाकर उप राजयपाल(LG) को भेज दिया है लेकिन वो इस पर साइन नहीं कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि LG केंद्र के प्रतिनिधि होते हैं और केंद्र में भाजपा है और वो भाजपा के इशारे पर ही काम कर रहे हैं। इसलिए हम भाजपा के मुख्यालय पर प्रदर्शन कर रहे हैं। 

60 साल की पॉलिसी क्या है? इसकी मांग क्यों? 

प्रदर्शन कर रहे सभी शिक्षक 60 साल की पॉलिसी की मांग कर रहे हैं। अभी दिल्ली में जितने भी गेस्ट टीचर है उन्हें कभी भी हटा दिया जाता है। जैसे ही  उनके पोस्ट पर कोई स्थाई नियुक्ति होती है वैसे ही गेस्ट टीचर को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ती है। लेकिन इस पॉलिसी के आने के बाद से जितने भी गेस्ट टीचर दिल्ली में काम कर रहे हैं सभी रेगुलर टीचर की उम्र तक काम करते रहेंगे, जो कि 60 साल है। उससे पहले किसी भी टीचर को हटाया नहीं जा सकेगा।  

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"सरकार हमारे साथ सरकारी खेल खेल रही है"

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि दिल्ली सरकार, LG, और केंद्र सरकार सभी हमारे साथ खेल रही है। कोई भी हमारी समस्या का निदान नहीं कर रहा है बल्कि एक दूसरे पर टाल रहे हैं। शिक्षकों ने कहा कि हम सभी से मांग कर रहे हैं कि वो हमारे प्रदर्शन में आएँ, हम एक टेबल लगाते हैं, वहीं फ़ैसला करें कि क्या करना है!

इसके अलावा पूर्वी दिल्ली स्कुल के शिक्षक अमित ने कहा, "सरकार हमारे साथ दोहरी नीति अपना रही है। हमें हटाने के लिए तो कोर्ट की दुहाई दे रही है लेकिन उसी कोर्ट का आदेश है कि समान काम का समान वेतन मिलना चाहिए। सरकार वो तो नहीं दे रही है। क्यों?"

वर्ष 2012 से दिल्ली के सरकारी स्कूलों में गेस्ट टीचर के रूप में काम कर रहे शिक्षक संजय जोशी ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, "इन सरकार और राजनितिक दलों ने अपनी राजनीती के चक्कर में दिल्ली के 22 हज़ार शिक्षकों के घरों के चूल्हों को बंद करने का इंतज़ाम कर दिया है।" उन्होंने भाजपा, मनोज तिवारी और LG से सीधा सवाल किया कि जब दिल्ली सरकार ने पॉलिसी बनाकर भेज दी है तो वो उस पर साइन क्यों नहीं कर रहे हैं! उनहोंने कहा, "कल मनोज तिवारी ने कहा था कि दिल्ली सरकार ने पॉलिसी नहीं बनाई है इसके बाद दिल्ली सरकार ने कैबिनट नोट जारी कर दिया है, अब वो क्या कर रहे हैं? LG  साहब शायद जान-बूझकर देरी कर रहे हैं। एक-दो दिन में देश में आचार संहिता लग जाएगी और एक बार फिर हम चुनावी मुद्दा बनकर रह जाएंगे। लेकिन वो सभी दल जो गेस्ट टीचर के साथ धोखा कर रहे हैं, उनके लिए एक बात साफ़ है कि आगामी चुनावों में उनको इसका भुगतान करना पड़ेगा।

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मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, "भाजपा नहीं चाहती है कि दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था,जो आज देश की सबसे बेहतर व्यस्व्था बनी है वो बनी रहे इसलिए वो इन शिक्षकों को स्थायी करने की पॉलिसी को पास नहीं होने दे रही है। यदि 22 हज़ार टीचरों को नौकरी से बाहर निकाल देंगे तो स्कूल कैसे चला पाएंगे?  भाजपा की केंद्र सरकार शिक्षा विभाग का भट्टा बैठाने की कोशिश कर रही है।"

मनीष सिसोदिया ने आगे कहा, "हम दिल्ली की शिक्षा और शिक्षक दोनों की बेहतरी के लिए कार्य करे रहे हैं। हमने हर साल होने वाली भर्ती प्रक्रिया को ख़त्म करके उन्हें कंटिन्यू किया है। पहले कम तनख़्वाह मिलती थी और अब टीचरों को 35 हज़ार रुपए मिल रहे हैं। सेवा का मसला केंद्र के पास जाने के  बाद टीचरों को रखने-हटाने में हमारा दख़ल नहीं है।" सिसोदिया ने कहा कि अजीब स्थिति हो गई है कि स्कूल हम बनाएँ लेकिन टीचर कितने होंगे वह केंद्र तय करे।

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इससे पहले उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे गेस्ट टीचर्स गुरुवार को एलजी हाउस के बाहर प्रदर्शन करने पहुँचे। हज़ारों की संख्या में पहुँचे टीचर्स के दिन भर सड़क पर रहने के बाद शाम को 6 बजे एलजी ने गेस्ट टीचर्स के प्रतिनिधि मंडल को एलजी हाउस के अंदर बुलाया। वहाँ एलजी के एक प्रतिनिधि ने शिक्षकों से मुलाक़ात की और बताया कि कैबिनेट में पास हुई गेस्ट टीचर्स के 60 साल की उम्र तक पढ़ाए जाने की पॉलिसी अभी उनके पास नहीं आई है। हालांकि उनहोंने कहा कि शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की ओर से गेस्ट टीचर्स की समस्या को लेकर लिखा पत्र मिला है, उसे संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया है। 

इसे भी पढ़ें:  गेस्ट टीचर्स हटाने से दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था चरमराई, आंदोलन तेज़

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