NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
घटना-दुर्घटना
मज़दूर-किसान
समाज
भारत
दिल्ली : सरकारी तंत्र ने फिर से ली सफ़ाई कर्मचारियों की जान
सिर्फ़ दिल्ली की ही बात करें तो पिछले दो साल में तकरीबन 50 से अधिक मौतें सीवर या अन्य तरह के सैप्टिक टैंको की सफ़ाई करते हुए हुई हैं।
मुकुंद झा
29 Jun 2019
Jal Board

दिल्ली में एकबार फिर सरकारी लापरवाही ने मज़दूरों की जान ले ली है। वेस्ट दिल्ली के ख्याला इलाक़े में दिल्ली जल बोर्ड का इंटरसेप्टर बनाने के काम के दौरान एक मज़दूर की मौत हो गई और दो मज़दूरों के लापता होने की ख़बर है। सरकार की ओर से कहा जा रहा ही कि इन मज़दूरों की मौत अचानक पानी छोड़े जान के कारण हुई है परन्तु म्यूनिसिपल वर्कर्स लाल झण्डा यूनियन,दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक़ इन मज़दूरों की मौत का मुख्य कारण मूलभुत सुरक्षा उपकरण का न होना है। 

इस पूरी घटना ने दिल्ली सरकार पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ़ सीएम सिर पर मैला ढोने वाले असंगठित मज़दूरों को प्रशिक्षित करने और आधुनिक मशीनें देने की बात कर रहे हैं। इसको लेकर दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने नोट भी पास कर दिया है लेकिन दूसरी तरफ़ उनके ही अंतर्गत आने वाले दिल्ली जल बोर्ड के चेयरमैन ख़ुद दिल्ली के मुखिया केजरीवाल हैं। उसी विभाग के सीवरों की सफ़ाई और अन्य कामों के दौरान लगातार मज़दूरों की मौत हो रही है। परन्तु इन घटनाओं की ज़िम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है।

सिर्फ़ दिल्ली की ही बात करें तो पिछले दो साल में तकरीबन 50 से अधिक मौतें सीवर या अन्य तरह के सैप्टिक टैंको की सफ़ाई करते हुए हुई हैं। हर मौत के बाद एक बात कही जाती है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी लेकिन अभी तक किसी मामले में कोई दोषी मिला ही नहीं है क्योंकि किसी भी मामले पर कोई कार्रवाई हुई ही नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

पश्चिमी दिल्ली के ख्याला में 30 फ़ुट गहरे एक नाले की सफ़ाई के दौरान एक मज़दूर की मौत हो गई, जबकि दो अन्य पानी में बह गए और वे लापता हैं। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली जल बोर्ड ने अचानक ही पानी की आपूर्ति शुरू कर दी, जिसके चलते यह घटना हुई। दरअसल,बोर्ड ने सफ़ाई को लेकर पानी की आपूर्ति बंद की हुई थी। दिल्ली जल बोर्ड मज़दूर यूनियन और मज़दूर नेताओं ने इस बात से साफ़ इनकार किया कि मज़दूरों की मौत सिर्फ़ अचानक पानी छोड़ने से हुई है। उन्होंने कहा, "अगर मज़दूरों को सुरक्षा उपकरण दिये गए होते तो उनकी जान बच जाती। यह मान भी लें कि अचानक पानी छोड़ने से मौत हुई तो इसकी ज़िम्मेदारी भी सरकार की है। जब आपको पता है कि मज़दूर काम कर रहे हैं ,तो कैसे पानी छोड़ दिया गया। कॉर्डिनेशन में इतनी ग़लती कैसे हुई? इसकी भी जांच होनी चाहिए।”

 पुलिस ने बताया कि बोर्ड ने नाले पर सीमेंट की एक दीवार बनाने का ठेका प्रतिभा इंडस्ट्रीज़ को दिया था। 
मृतक मजदूर की पहचान शाहरूख़ (25) के तौर पर की गई है, जो उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले थे। वहीं, लापता मज़दूरों के बारे में बताया जा रहा है कि 19 वर्षीय अंकित उत्तर प्रदेश के हरदोई और देवेंद्र शर्मा (25) उत्तर प्रदेश के एटा के रहने वाले हैं।

मज़दूरों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?

दिल्ली जल बोर्ड मज़दूर यूनियन के नेता और सीटू दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र गौड़ ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, "ये जो मज़दूरों की मौत हुई है ये हादसा नहीं हत्या है। क्योंकि इन मज़दूरों को कोई सुरक्षा उपकरण यहाँ तक कि जूते और सरक्षा बेल्ट भी नहीं दिये गए थे। साथ ही ये मज़दूर इस तरह के सीवर की सफ़ाई के लिए ट्रेंड भी नहीं थे। ये एक तरह के दिहाड़ी मज़दूर थे। ऐसे में इन्हे इस सीवर में उतारना हत्या की साज़िश नहीं तो और क्या है?

उन्होंने आगे कहा, "यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले ऐसी तमाम घटनाएँ हुई हैं। मज़दूरों की मौत का कारण यह होता है कि उनके पास सुरक्षा गार्ड नहीं होते हैं।" तो सवाल यह है कि ऐसा होता क्यों है? उन्होंने बताया, "दिल्ली जल बोर्ड के जो पक्के कर्मचारी है वो कभी भी बिना किसी सुरक्षा के ऐसे सीवरों में नहीं उतरते हैं। परन्तु बीते सालों में सरकारों ने पैसे बचाने के लिए बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को दिहाड़ी पर काम दिये हैं या फिर निजी कंपनियों को ठेका दिया है। इस केस में भी ऐसा ही हुआ है जिन मज़दूरों की मौत हुई है वो ठकेदार के नीचे काम कर रहे थे। पक्के मज़दूरों के पास ये अवसर होता है कि वो मना कर सकते हैं कि वो सीवर में नहीं जाएंगे लेकिन दिहाड़ी मज़दूर के पास ये अवसर नहीं होता है। अगर किसी मज़दूर ने सुरक्षा उपकरण की मांग की तो अगले दिन उसकी छुट्टी कर दी जाती है।”

इस मामले से एक बात तो साफ़ है कि सरकारें चंद पैसे बचाने के लिए और निजी ठेकेदार  अपने लाभ के लिए इन मज़दूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मौत के सीवरों में उतरने पर मजबूर करते हैं। और फिर यही सरकार इनकी मौत पर दुखी होने का नाटक भी खेलती है।

delhi jal board
safai karmachari andolan
safai karmachari
CONTRACT SAFAIKARAMCHARIS
Delhi
delhi govt

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

महानगरों में बढ़ती ईंधन की क़ीमतों के ख़िलाफ़ ऑटो और कैब चालक दूसरे दिन भी हड़ताल पर

दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 861 नए मामले, 6 मरीज़ों की मौत
    11 Apr 2022
    देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 11 हज़ार 58 हो गयी है।
  • nehru
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या हर प्रधानमंत्री एक संग्रहालय का हक़दार होता है?
    10 Apr 2022
    14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेहरू स्मृति संग्रहालय और पुस्तकालय की जगह बने प्रधानमंत्री संग्रहालय का उद्घाटन करेंगेI यह कोई चौकाने वाली घटना नहीं क्योंकि मौजूदा सत्ता पक्ष का जवाहरलाल…
  • NEP
    नई शिक्षा नीति का ख़ामियाज़ा पीढ़ियाँ भुगतेंगी - अंबर हबीब
    10 Apr 2022
    यूजीसी का चार साल का स्नातक कार्यक्रम का ड्राफ़्ट विवादों में है. विश्वविद्यालयों के अध्यापक आरोप लगा रहे है कि ड्राफ़्ट में कोई निरंतरता नहीं है और नीति की ज़्यादातर सामग्री विदेशी विश्वविद्यालयों…
  • imran khan
    भाषा
    पाकिस्तान में नए प्रधानमंत्री का चयन सोमवार को होगा
    10 Apr 2022
    पीएमएल-एन के शहबाज शरीफ, पीटीआई के कुरैशी ने प्रधानमंत्री पद के लिए नामांकन पत्र जमा किया। नए प्रधानमंत्री का चुनाव करने के लिए सोमवार दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होगी।
  • Yogi
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति
    10 Apr 2022
    हर हफ़्ते की प्रमुख ख़बरों को लेकर फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License