NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
दिल्ली विश्वविद्यालय: स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग की पहली ही कक्षा में दिखा प्रशासन का कुप्रबंधन!
दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग में जल्दबाजी में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया था। इसे लेकर उठे तमाम विरोधों को दरकिनार कर प्रशासन ने दावा किया था कि व्यवस्था सुचारू होगी लेकिन स्थिति इसके उलट रही। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Sep 2019
DU

दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) के सेमेस्टर सिस्टम के पहले दिन की कक्षाओं में ही प्रशासन की बदइंतजामी देखने को मिली। स्टूडेंट्स का कहना है कि कई सेंटर्स में टीचर्स तो पहुंचे, लेकिन भीड़ की वजह से कई स्टूडेंट्स बिना कक्षा में गए ही घर लौट गए।

एसओएल के कई छात्रों ने न्यूज़क्लिक को बताया कि नॉर्थ और साउथ कैंपस स्टडी सेंटर में बैठने की जगह ही नहीं थी। कई सेंटर्स में छात्रों को कक्षाओं के अंदर ही नहीं आने दिया गया, जबकि उन्हें सूचना दी गई थी कि क्लास 1 सितंबर से होगी। कई सेंटर्स में छात्रों को वापस ये कहकर लौटा दिया गया कि क्लास 7 सितंबर से होगी। छात्रों ने कुछ जगहों पर उनके साथ हुई बदसलूकी की भी शिकायत की।

IMG-20190902-WA0008.jpg
वहीं, इस संबंध में एसओएल के ओएसडी डॉ. रमेश भारद्वाज ने मीडिया को बताया कि सेमेस्टर सिस्टम को लेकर स्टूडेंट्स में इतना उत्साह है कि पहले दिन कई सेंटर्स में 70 पर्सेंट स्टूडेंट्स पहुंचे। कई सेंटर में 5-5 शिफ्ट में ओरिएंटेशन हुआ। हंसराज कॉलेज में दिक्कत इसलिए आई, क्योंकि यहां दूसरे सेंटर से भी स्टूडेंट्स दोस्तों के चक्कर में आ गए।

इस पूरे प्रकरण को लेकर सोमवार को क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने एसओएल प्रशासन को अपनी शिकायत दी है। संगठन के सदस्य हरीश ने न्यूज़क्लिक को जानकारी दी कि अभी तक स्टूडेंट्स को यूजीसी गाइडलाइंस के तहत नया स्टडी मटीरियल प्रिंटेड फॉर्म में नहीं दिया गया है। रविवार को कई जगह ओरिएंटेशन डे से शुरुआत हुई, लेकिन शिक्षकों की आवाज कई छात्रों तक नहीं पहुंच पाई। कई जगह छात्र कक्षाओं से बाहर दरवाजों से झांकने को मज़बूर थे।

हालांकि, एसओएल प्रशासन का कहना है कि जो छात्र देरी से पहुंचे या जो दूसरे सेंटर के थे, उन्हें ही सेंटर्स ने लौटाया है।

IMG-20190902-WA0003.jpg
एसओएल छात्र भारती ने न्यूज़क्लिक को बताया कि श्रद्धानंद कॉलेज में नए सिलेबस के हिसाब से विषय ही नहीं मिले। कक्षाओं में इतनी भीड़ थी कि कई लोगों को खड़े होना पड़ा। बैठने की व्यवस्था बहुत गड़बड़ थी।

सत्यवती कॉलेज के सेंटर पहुंचीं स्टूडेंट प्रज्ञा ने बताया कि उन्हें कहा गया था कि टाइमटेबल अभी बना नहीं है, इसलिए क्लास टाली जा रही हैं। इतनी दूर से पैसे लगाकर छात्र आए और क्लास ही ना हो, तो बुरा लगता है।

एक अन्य छात्र राकेश का कहना है कि हंसराज कॉलेज में बहुत अफरा-तफरी का माहौल रहा। कुछ कक्षाओं को रद्द भी कर दिया गया। सिक्योरिटी ने स्टूडेंट्स को बाहर कर दिया था। आर्ट फैकल्टी में क्लास तो लगीं, लेकिन स्टूडेंट्स को जमीन पर बैठना पड़ा। स्टूडेंट्स की शिकायत है कि जब एसओएल को पहले से पता था कि इतने सारे स्टूडेंट्स हैं, तो सिर्फ 7-8 कमरे ही क्यों खोले गए, जबकि कॉलेजों में कमरे काफी हैं।

कई छात्रों का ये भी आरोप है कि हंसराज कॉलेज में एक फिल्म की शूटिंग के चलते क्लॉस नहीं दी गईं। यही नहीं, पहले तो छात्राओं को अंदर जाने दिया गया, लेकिन उन्हें बाद में ज़बरदस्ती कॉलेज से बाहर निकाल दिया गया। आर्ट्स फैकल्टी में छात्रों को ज़मीन और खिड़कियों पर भीड़ के कारण बैठकर पढ़ना पड़ा।

गौरतलब है कि केवाईएस ने इससे पहले जल्दबाज़ी में सीबीसीएस लागू करने के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आयोजित कर एसओएल प्रशासन को मिलने को मजबूर किया था। एसओएल अधिकारियों ने यह आश्वासन दिया था कि इस साल से कोई भी कुप्रबंध नहीं होगा। लेकिन इस बार भी प्रशासन ने छात्रों को बेवकूफ़ बनाया है।

जहां शिक्षा और संस्थानों को लेकर सरकार तमाम बड़े-बड़े दावे कर रही है, ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या शिक्षा ऐसी शिक्षा व्यवस्था से देश का भविष्य उज्ज्वल होगा? दिल्ली विश्वविद्यालय में एक बड़ी संख्या एसओएल छात्रों की है। इससे पहले भी कई बार ये छात्र सुविधाओं में बदहाली की शिकायत करते रहे हैं। ऐसे में पहले ही दिन प्रशासन के इस कुप्रबंध पर सवाल उठना लाज़मी है।

Delhi University
shcool of open learning
administration
Semester System
university students

Related Stories

दिल्ली: दलित प्रोफेसर मामले में SC आयोग का आदेश, DU रजिस्ट्रार व दौलत राम के प्राचार्य के ख़िलाफ़ केस दर्ज

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट को लेकर छात्रों में असमंजस, शासन-प्रशासन से लगा रहे हैं गुहार

यूजीसी का फ़रमान, हमें मंज़ूर नहीं, बोले DU के छात्र, शिक्षक

नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

डीयू: कैंपस खोलने को लेकर छात्रों के अनिश्चितकालीन धरने को एक महीना पूरा

दिल्ली विश्वविद्यालय के सामने चुनौतियां: एडहोकवाद, NEP और अन्य

डीयू: एनईपी लागू करने के ख़िलाफ़ शिक्षक, छात्रों का विरोध


बाकी खबरें

  • bihar
    अनिल अंशुमन
    बिहार शेल्टर होम कांड-2’: मामले को रफ़ा-दफ़ा करता प्रशासन, हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
    05 Feb 2022
    गत 1 फ़रवरी को सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो ने बिहार की राजनीति में खलबली मचाई हुई है, इस वीडियो पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान ले लिया है। इस वीडियो में एक पीड़िता शेल्टर होम में होने वाली…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    सत्ता में आते ही पाक साफ हो गए सीएम और डिप्टी सीएम, राजनीतिक दलों में ‘धन कुबेरों’ का बोलबाला
    05 Feb 2022
    राजनीतिक दल और नेता अपने वादे के मुताबिक भले ही जनता की गरीबी खत्म न कर सके हों लेकिन अपनी जेबें खूब भरी हैं, इसके अलावा किसानों के मुकदमे हटे हो न हटे हों लेकिन अपना रिकॉर्ड पूरी तरह से साफ कर लिया…
  • beijing
    चार्ल्स जू
    2022 बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक के ‘राजनयिक बहिष्कार’ के पीछे का पाखंड
    05 Feb 2022
    राजनीति को खेलों से ऊपर रखने के लिए वो कौन सा मानवाधिकार का मुद्दा है जो काफ़ी अहम है? दशकों से अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने अपनी सुविधा के मुताबिक इसका उत्तर तय किया है।
  • karnataka
    सोनिया यादव
    कर्नाटक: हिजाब पहना तो नहीं मिलेगी शिक्षा, कितना सही कितना गलत?
    05 Feb 2022
    हमारे देश में शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, फिर भी लड़कियां बड़ी मेहनत और मुश्किलों से शिक्षा की दहलीज़ तक पहुंचती हैं। ऐसे में पहनावे के चलते लड़कियों को शिक्षा से दूर रखना बिल्कुल भी जायज नहीं है।
  • Hindutva
    सुभाष गाताडे
    एक काल्पनिक अतीत के लिए हिंदुत्व की अंतहीन खोज
    05 Feb 2022
    केंद्र सरकार आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार को समर्पित करने के लिए  सत्याग्रह पर एक संग्रहालय की योजना बना रही है। इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के उसके ऐसे प्रयासों का देश के लोगों को विरोध…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License