NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
डीयू : शैक्षणिक आज़ादी के लिए छात्रों का प्रदर्शन
"आरएसएस के इशारे पर काम करने वाले डीयू प्रशासन का यह रवैया स्वतंत्र शैक्षणिक संस्थान के लिए ख़तरनाक है। किसी भी विश्वविद्यालय के जीवित रहने के लिए ज़रूरी है कि अपने प्रोफ़ेसरों को एकेडमिक फ़्रीडम दी जाए और छात्रों में एक महत्वपूर्ण तार्किक और आलोचनात्मक सोच विकसित की जाए।"
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
23 Jul 2019
DU Protest

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों ने अपनी एकेडमिक फ़्रीडम, यानी शैक्षणिक आज़ादी पर हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ आज मंगलवार को दिल्ली विश्विद्यालय के आर्ट्स फ़ैकल्टी के बाहर प्रदर्शन किया। सभी ने डीयू के पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया में एबीवीपी की बाधा और हस्तक्षेप की निंदा की।

इससे पहले एबीवीपी के कार्यकर्ताओं द्वारा अंग्रेज़ी और इतिहास विभाग के प्रोफ़ेसरों को धमकाने और एकेडमिक काउन्सिल की बैठक को बाधित किया था। इसे शिक्षकों ने विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता पर हमला बताया था। शिक्षकों का कहना है कि सिलेबस तैयार करना एक स्वतंत्र शैक्षणिक काम है जिसमें विषय के साथ गहन जुड़ाव की आवश्यकता होती है और इसमें विषय के सभी शिक्षण सदस्यों के साथ व्यापक चर्चा की जाती है। अंग्रेज़ी विभाग के नव प्रस्तावित पाठ्यक्रम को डीयू में 120 से अधिक फ़ैकल्टी सदस्यों के संयुक्त प्रयासों द्वारा तैयार किया गया था। फ़ैकल्टी सदस्यों ने भी दिल्ली विश्वविद्यालय की एकेडेमिक काउन्सिल और कार्यकारी परिषद के समक्ष कई बार संशोधित सिलेबस का प्रस्ताव दिया था लेकिन कुलपति ने आरएसएस समर्थित शिक्षक के दबाव और एबीवीपी के दबाव में संशोधित सिलेबस को वापस भेज दिया।

डीयूटीए की पूर्व अध्यक्षा नंदिता नारायणन ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, "पाठ्यक्रम तय करने के लिए एक तय क़ायदे और नियम है। उसी के आधार पर पाठ्यक्रम तैयार किये जाते है। इसमें सभी हितधारकों शमिल होते है। लेकिन अब इन सभी को ख़त्म किया जा रहा है और शिक्षकों को धमकाया जा रहा है। विरोध करना सबका अधिकार है लेकिन उसके लिए एकेडमिक काउन्सिल की मीटिंग हॉल तक जाना और उसके सदस्यों को धमकी देना पूरी तरह निंदनीय है।"

उन्होंने कहा, "ये सब बिना प्रशासन की मिलीभगत के नहीं हो सकता है क्योंकि जहाँ मीटिंग हो रही थी उसके अंदर किसी को भी बिना परमिशन के जाने की अनुमति नहीं है तो फिर इतनी संख्या में परिषद के छात्र कैसे पहुंच गए!”

शिक्षक संघ के सदस्यों ने भी इसकी निंदा की और कहा, "आरएसएस के इशारे पर काम करने वाले डीयू प्रशासन का यह रवैया स्वतंत्र शैक्षणिक संस्थान के लिए ख़तरनाक है। किसी भी विश्वविद्यालय के जीवित रहने के लिए ज़रूरी है कि अपने प्रोफ़ेसरों को एकेडमिक फ़्रीडम दी जाए और छात्रों में एक महत्वपूर्ण तार्किक और आलोचनात्मक सोच विकसित की जाए, लेकिन अगर शिक्षकों की चर्चा और तर्क की जगह किसी विशेष विचारधारा और उसके संगठनों के दबाव में पाठ्यक्रम तैयार किये जाएंगे तो विश्विद्यालय की आत्मा ही ख़त्म हो जाएगी।"

इससे पहले भी कई बार पाठयक्रमों से कई महत्वपूर्ण मुद्दों को हटाया गया है। इतिहास विभाग से भारत में वाम आंदोलन के इतिहास से संबंधित अध्यायों को हटा दिया था। राजनीति विज्ञान विभाग ने कृषि संकट और माओवादियों के संदर्भ में प्रोफ़ेसर नंदिनी सुंदर के लेखन को हटा दिया अंग्रेज़ी विभाग ने शिल्पा परालकर द्वारा 2002 में गुजरात दंगों के संदर्भ में लिखे गए मणिबेन उर्फ़ "बीबीजान" नामक एक अध्याय को हटा दिया है। इसी तरह, मुज़फ्फ़रनगर दंगों का उल्लेख वाले चैप्टर को अंग्रेज़ी पत्रकारिता पाठ्यक्रम से बाहर कर दिया गया था।

Delhi University
Student Protests
RSS
teachers protest
DUTA
ABVP

Related Stories

लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

दिल्ली : पांच महीने से वेतन न मिलने से नाराज़ EDMC के शिक्षकों का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

एमपी : ओबीसी चयनित शिक्षक कोटे के आधार पर नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License