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शिक्षा
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डीयू : शिक्षक संघ के चुनाव में फिर से वाम दलों की जीत
29 अगस्त को दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के 2019 चुनाव हुए। वाम संगठन डीटीएफ़ के राजीब रे ने इस बार भी अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है। 
सुमेधा पाल
30 Aug 2019
DUTA
Image courtesy:Lokmat News Hindi

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ यानी DUTA के 2019 के चुनाव पूरे हो चुके हैं। इस साल के चुनाव में वाम संगठन डीटीएफ़ और आरएसएस के संगठन एनडीटीएफ़ में कड़ी टक्कर रही। जिसके बाद अध्यक्ष पद के लिए डीटीएफ़ के उम्मीदवार राजीब रे की जीत हुई। राजीब पिछली बार के चुनाव में भी अध्यक्ष चुने गए थे। 

अध्यक्ष पद के लिए कुल 7748 वोट डाले गए थे, जिसमें से 518 वोट अमान्य होने के बाद एनडीटीएफ़ के एके भागी 3481 और डीटीएफ़ के राजीब रे को 3750 वोट मिले। 

चूंकि कांग्रेस ने इस बार का चुनाव लड़ा ही नहीं तो ये चुनावी जंग वाम दलों और दक्षिणपंथी संगठनों के बीच था। 

डीटीएफ़ पिछले 4 बार से डीयूटीए के अध्यक्ष पद पर जीत रहा है। और इस बार राजीब रे के अलावा 3 और पदों पर डीटीएफ़ की विजय हुई है। 

अन्य पदों की बात करें तो एनडीटीएफ़ ने 4 और एएडी ने 3 पदों पर जीत हासिल की है। 

इस साल के चुनावी एजेंडे का ध्यान EWS कोटा, शिक्षकों को पेरमानेंट करने और National eduactional policy की तरफ़ रहा।

पिछले चार बार से चुनाव जीत रही डीटीएफ़ में राजीब रे के अलावा 3 और पदों पर जीत हासिल की। डीटीएफ़ की प्रो आभा देव हबीब ने 9057 वोट के जीत हासिल की। एनडीटीएफ़ के महेंद्र कुमार मीणा भी विजयी रहे, जिनके 8168 वोट थे। वीएस दीक्षित और जितेंद्र कुमार मीणा ने कार्यकारिणी में जीत हासिल की है। डीटीएफ़ ने कहा है कि उसने लगातार शिक्षकों के अधिकारों के लिए आंदोलन किए हैं।

डीटीएफ़ के एक बयान में ये भी कहा गया कि उसने लगातार सरकार की शिक्षक विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए हैं। कॉलेज को पैसे कमाने का ज़रिया बनाना और इसका निजीकरण करना सरकार की नीतियों में शामिल है। 

इससे पहले डीटीएफ़ ने 200 पॉइंट रोस्टर के ख़िलाफ़ भी प्रदर्शन किए थे और शिक्षकों-स्टाफ़ की पेंशन संबंधी दिक़्क़तों पर भी ध्यान दिया था। 

कुछ वक़्त पहले न्यूज़क्लिक से बात करते हुए आभा देव हबीब ने कहा था, "मुझे लगता है कि हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ शिक्षक, छात्र और कर्मचारी सब अपनी-अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। 

इसलिए हम शिक्षकों की लड़ाई ऐसे किसी संगठन के हाथ में नहीं दे सकते जिसने ख़ुद को सत्ता के साथ जोड़ लिया है।"

ये चुनाव ऐसे दौर में हुए थे जब कुछ ही समय पहले एकेडमिक काउंसिल की मीटिंग में एनडीटीएफ़ ने पढ़ाई जा रही किताबों में बदलाव करने की मांग की थी, जिसमें वीडी सावरकर को शामिल करना और गोधरा कांड से जुड़े विषयों को बाहर निकालने की बात की गई थी। 

पिछले चुनाव जो 2017 में हुए थे उसमें भी डीटीएफ़ के राजीब रे अध्यक्ष चुने गए थे और उनको 2636 वोट हासिल हुए थे। 2017 में भी एनडीटीएफ़ को 4 सीटें हासिल हुई थीं।

वाम दल इसलिए भी मज़बूत हुआ क्योंकि उसे एससी/एसटी शिक्षक संगठनों का साथ मिला था। 

DUTA election
DUTA
Rajib Ray
Abha Dev Habib
Left unity
Delhi University
du
NDTF

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