NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दलित नेताओं के विरोध प्रदर्शन से हक्के-बक्के रह गये अमित शाह
अमित शाह से अनंत हेगड़े के संविधान-विरोधी और दलित-विरोधी वक्तव्य पर सवाल किये गयेI
योगेश एस.
31 Mar 2018
Amit Shah and Anant Kumar Hegde

बीजेपी को कर्णाटक में ऐसे सवालों का सामना कर पड़ रहा है जिससे असहमति से नफ़रत करने वाली इस पार्टी को सक्ते में डाल दिया हैI बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 30 मार्च को मैसूर में दलित नेताओं को संबोधित कर रहे थेI श्रोताओं में मौजूद दलित नेताओं के गुस्से के चलते अमित शाह को अपना भाषण रोकना पड़ाI उनसे सवाल किया गया कि दिसम्बर 2017 में अनंत कुमार हेगड़े के अनुचित भाषण पर उनकी पार्टी खामोश क्यों है और इसे नज़रंदाज़ क्यों किया गयाI इस अवरोध की वजह से बीजेपी के कार्यकर्त्ताओं और विरोध करने वालों के बीच झड़प हो गयीI बीजेपी के कार्यकर्त्ताओं ने प्रदर्शनकारियों को कार्यक्रम स्थल से बाहर करने की कोशिश की और प्रदर्शनकारियों ने कार्यक्रम स्थल के बाहर नारेबाज़ी की I

हेगड़े ने अपने भाषण में देश में धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाये थेI उसने कहा कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो वह संविधान बदल देंगे I

हेगड़े का यह वक्तव्य धर्मनिरपेक्षता और देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने की बात करने वाले और मौजूदा केंद्र सरकार की सांप्रदायिक राजनीति पर सवाल उठाने वाले बुद्धिजीवियों और चिंतित नागरिकों का मखौल उड़ाने के लिए दियाI अनंत कुमार हेगड़े के इस भाषण से राज्य और देश में काफी बवाल मचायाI चूँकि यह वक्तव्य लोकतांत्रिक रूप से चुने गये संसद सदस्य और केंद्रीय मंत्री ने दिया इसलिए इसके मायने गंभीर हैंI इस संदर्भ में पार्टी के शीर्ष नेताओं सहित कई लोगों से लोगों ने सवाल किये गयेI इस कथन पर बीजेपी नेता पूरी तरह खामोश रहे और उन्होंने इससे किनारा कर लियाI इसी रवैया की वजह से हमें इतिहास में जाना पड़ता है और भारतीय संविधान तथा डॉ. अम्बेडकर के साथ बीजेपी-आरएसएस के संबंधों को परखना पड़ता हैI प्रसिद्ध लेखक देवानूरा महादेव ने मंत्री के वक्तव्य के विरोध में एक खुला ख़त लिखा:    

...फिर, मानो युद्धभूमि में युद्धनाद की तरह तुमने कहा, ‘हम संविधान बदल देंगें...इसीलिए हम यहाँ तक पहुँचे हैं!’ अगर संविधान लिखने का काम तुम्हारे जैसों या तुम्हारे बाज़ीगर पूर्वजों को सौंपा गया होता तो तुम एक नरक की रचना कर उसे स्वर्ग घोषित कर देतेI भारत माता इसीलिए बची रही है क्योंकि डॉ. अम्बेडकर ने संविधान रचाI इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि संविधान में प्रस्तावित संशोधन संविधान की प्रस्तावना में दिए गये आदर्शों पर आधारित होंI यह याद रखना आपके लिए अच्छा रहेगा खासतौर से संसद के सदस्य होने के नातेI  

30 मार्च को प्रदर्शन कर रहे दलित नेताओं ने कहा कि हेगड़े के शब्दों ने देश के जाति-विरोधी आन्दोलन के नेता और प्रतीक का अपमान किया हैI यह पूरी घटना अमित शाह के लिए काफी शर्मिंदा करने वाला थाI पहले तो शाह ने बीजेपी के मुख्यमंत्री के उम्मीदवार येद्दुरप्पा को सबसे भ्रष्ट नेता कह डाला और फिर सांसद प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने एससी/एसटी के लिए कुछ नहीं कियाI इसके बाद दलित नेताओं के विरोध प्रदर्शन से अमित शाह स्तब्ध ही रह गयेI वो अपना वही पुराना राग अलापने के आलावा कुछ नहीं कर पाए कि ‘बीजेपी का इन वक्तव्यों से कुछ लेना-देना नहीं’I प्रजावाणी में आई एक खबर के मुताबिक अमित शाह से प्रदर्शनकारियों ने यह पूछा कि हेगड़े के खिलाफ़ कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया और इसी से यह सारा घटनाक्रम शुरू हुआI

इससे पहले 20 जनवरी 2018 को हेगड़े बेल्लारी में एक रोज़गार मेले और कौशल प्रदर्शनी में बोलने गये तो वहाँ उन्हें भी विरोध का सामना करना पड़ाI विरोधियों से गुस्साए हेगड़े ने कहा कि कौशल विकास मंत्री के नाते यह उनकी ज़िम्मेदारी है कि वो नरेंद्र मोदी के विकास के सपने को सच कर दिखाएँ और उन्हें ‘गली के कुत्तों के भौंकने’ से कोई फ़र्क नहीं पड़ताI दलित कार्यकर्त्ताओं को ‘गली का कुत्ता’ कहकर हेगड़े ने एक और विवाद को जन्म दे दियाI

इसी पृष्ठभूमि में दलित नेताओं ने उस कार्यक्रम में विरोध प्रदर्शन किया जहाँ दरअसल अमित शाह दलित नेताओं से “बातचीत” करने वाले थेI अमित शाह, जिन्हें नापसंद है कि उनसे कोई सवाल पूछे, से सवाल किये गयाI राज्य में 12 मई को चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी को मज़दूरों, किसानों, दस्तकारों, छात्रों, शिक्षकों और अन्य लोगों के ऐसे ही कई सवालों का सामना करना पड़ेगाI

Amit Shah
Anant Kumar Hegde
BJP
BJP-RSS

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • bulldozer
    न्यूज़क्लिक टीम
    दिल्ली: बुलडोज़र राजनीति के ख़िलाफ़ वामदलों का जनता मार्च
    11 May 2022
    देश के मुसलमानों, गरीबों, दलितों पर चल रहे सरकारी बुल्डोज़र और सरकार की तानाशाही के खिलाफ राजधानी दिल्ली में तमाम वाम दलों के साथ-साथ युवाओं, महिलाओं और संघर्षशील संगठनों ने उपराज्यपाल अनिल बैजल के…
  • qutub minar
    न्यूज़क्लिक टीम
    अब क़ुतुब मीनार, ताज महल से हासिल होंगे वोट? मुग़ल दिलाएंगे रोज़गार?
    11 May 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में आज वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा सवाल पूछ रहे हैं कि देश में कभी क़ुतुब मीनार के नाम पर कभी ताज महल के नाम पर विवाद खड़ा करके, सरकार देश को किस दिशा में धकेल रही…
  • sedition
    विकास भदौरिया
    राजद्रोह पर सुप्रीम कोर्ट: घोर अंधकार में रौशनी की किरण
    11 May 2022
    सुप्रीम कोर्ट का आज का आदेश और न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ का हाल का बयान, जिसमें उन्होंने कहा था कि नागरिकों के असंतोष या उत्पीड़न को दबाने के लिए आपराधिक क़ानून का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए, एक आशा…
  • RAVIKANT CASE
    असद रिज़वी
    लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!
    11 May 2022
    प्रोफ़ेसर रविकांत चंदन हमले की FIR लिखाने के लिए पुलिस के आला-अफ़सरों के पास दौड़ रहे हैं, लेकिन आरोपी छात्रों के विरुद्ध अभी तक न तो पुलिस की ओर से क़ानूनी कार्रवाई हुई है और न ही विवि प्रशासन की ओर…
  • jaysurya
    विवेक शर्मा
    श्रीलंका संकट : आम जनता के साथ खड़े हुए खिलाड़ी, सरकार और उसके समर्थकों की मुखर आलोचना
    11 May 2022
    श्रीलंका में ख़राब हालात के बीच अब वहां के खिलाड़ियों ने भी सरकार और सरकार के समर्थकों की कड़ी निंदा की है और जवाब मांगा है। क्रिकेट जगत के कई दिग्गज अपनी-अपनी तरह से आम जनता के साथ एकजुटता और सरकार…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License