NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दलितों पर रोज़ाना हमले से सरकार को कोई फ़र्क नहीं पड़ता !
एससी-एसटी (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम होने के बावजूद एनडीए शासित राज्यों में उचित तरीक़े से लागू नहीं किया जा रहा है। वहीं केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने दलितों की तुलना कुत्तों से की।

पृथ्वीराज रूपावत
24 Jan 2018
bheema koregaon

केंद्र की सत्ता में बीजेपी के आने के बाद से पूरे देश में दलितों पर हमले तेज़ी से बढ़े हैं। दोषियों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई करने में अनिच्छुक नज़र आ रही है क्योंकि इस विभाग में ज़्यादातर उच्च जाति के लोग हैं। दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय पीड़ितों पर ही विभिन्न आरोपों के तहत केस दर्ज किए जा रहे हैं और उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है।

एनडीए शासित राज्यों में ये प्रवृत्ति सामान्य बात हो गई है। भीमा कोरेगांव हिंसा को उकसाने वाले लोगों को गिरफ़्तर होने से कथित तौर पर राजनीतिक दल द्वारा बचाया जा रहा है। पीड़ित वर्गों द्वारा हर रोज प्रतिरोध संघर्ष के बावजूद आंध्र प्रदेश में उच्च जातियों द्वारा दलितों के सामाजिक बहिष्कार की घटना आम हो गई है। इस बीच केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने दलितों की तुलना भौंकने वाले "कुत्तों" से कर दी है।

इस साल 1 जनवरी को पुणे के भीमा कोरेगांव में एक समारोह में भाग लेने के दौरान हिंदुत्व समूहों ने दलितों पर हमला किया जिसके परिणामस्वरूप एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

प्रत्यक्षदर्शियों की शिकायतों के आधार पर कोरेगांव हिंसा को उकसाने के लिए दक्षिण पंथी समूहों हिंदू एकता अगादी और शिवराज प्रतिष्ठान हिंदुस्तान के दो आरोपियों मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिडे के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया लेकिन महाराष्ट्र पुलिस द्वारा अब तक इन्हें हिरासत में नहीं लिया गया। हालांकि इस घटना को राष्ट्रव्यापी कवरेज मिला लेकिन यह संभावना है कि सत्तारूढ़ भाजपा के साथ इनकी संबद्धता ने इन्हें गिरफ्तारी से बचाने में मदद की होगी। विभिन्न राज्यों में दलित संगठनों ने इस हिंसा के लिए दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आंदोलन किया और कई सांसदों ने हाल ही में समाप्त हुए शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में इस मुद्दे को भी उठाया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एकबोटे और भिडे ने अन्य लोगों के साथ मिलकर 29 दिसंबर को कोरेगांव के पास के गांव वाधू में दलित आइकॉन गोविंद गायकवाड़ की समाधि का अपमान किया था। इसके चलते दलितों और मराठों के बीच हिंसा होने की वजह से पुणे ज़िले में दंगा जैसी स्थिति बन गई थी।

दलित नेता प्रकाश अम्बेडकर ने सवाल पूछा कि कोरेगांव में हिंसा भड़काने के आरोपियों को गिरफ़्तार करने में महाराष्ट्र पुलिस विफल क्यों हो गई। अम्बेडकर ने 22जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा "हम संभाजी भिडे और मिलिंद एकबोटे की गिरफ़्तारी की मांग कर रहे थे लेकिन गिरफ़्तारी नहीं हुई।"

इस बीच 23 जनवरी को पुणे की एक अदालत ने इस मामले में मिलिंद एकबोटे की अग्रिम ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी है।

आंध्र प्रदेश के पेड्डा गोटिपडु गांव में दलितों पर हमला

पिछले तीन सप्ताह से सभी वामपंथी दल और दलित संगठनों ने आंध्र प्रदेश के गुंटूर ज़िले के पेड्डा गोटिपडु गांव में छह दलितों पर हुए हमले के आरोप में उच्च जाति के कुछ लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। ये दलित युवक नए साल के मौके पर खुशियां मना रहे थें। इसी दौरान उनपर हमला किया गया था। सूत्रों के मुताबिक़ हमले के दौरान पीड़ितों में से दो व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए और अब भी गुंटूर के सरकारी अस्पताल में उनका इलाज़ चल रहा है।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अभियुक्तों के ख़िलाफ केस दर्ज करने के बजाय आंध्र प्रदेश पुलिस ने कथित तौर पर इन दोनों जातियों के बीच समझौता का रास्ता चुना है। सूत्रों की मानें तो इस घटना के बाद से उच्च जातियों के पास काम कर रहे दलित युवाओं का कहना है कि नियमित कार्यों में अब उनका बहिष्कार किया जा रहा है। इन मुद्दों को उठाते हुए वामपंथी पार्टी सीपीआई (एम) और सीपीआई ने राज्य में पीड़ितों के लिए न्याय की मांग को लेकर 24 जनवरी को "चलो पेड्डा गोटिपडु" रैली का आह्वान किया है।

भारतीय संविधान पर विवादास्पद बयान के विरोध में दलित प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री हेगड़े के काफ़िले को कर्नाटक के बेल्लारी में रोक दिया था, उन्होंने 20 जनवरी को एक बैठक में भाग लिया था। इस विरोध को लेकर हेगड़े ने कथित तौर पर कहा कि "हम हठी लोग हैं। जब सड़क पर कुत्ते भौंकते हैं तो हम परवाह नहीं करते।" उनके इस बयान को लेकर विपक्षी दलों और दलित संगठनों ने चौतरफा आलोचना की।

दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने दलित समुदायों पर अपमानजनक बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हेगड़े को अपने मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की है।

मीडिया को दिए बयान में मेवानी ने कहा "मंत्री ने दलित कार्यकर्ताओं का अपमान किया है जो उनके बयान के विरोध प्रदर्शन कर रहे थे... यह ऊपर से नीचे तक संघ परिवार और उसके लोगों के ब्राह्मणवादी और बुरे विचारों को दर्शाता है जिसमें दलितों के लिए कोई स्थान नहीं है।"

देश के विभिन्न हिस्सों में दलित समाज रोज़ाना कोरेगांव और आंध्र प्रदेश जैसी घटनाओं का सामना करते हैं। यह साफ है कि 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से दलित समुदायों के ख़िलाफ़ नफ़रत और हमले तेज़ी से बढ़े हैं लेकिन इस बढ़ती हिंसा के ख़िलाफ़ नेताओं ने कोई ठोस क़दम नहीं उठाया है।

bheema koregaon
RSS
BJP
Ananth kumar Hegde
Jignesh Mevani
CPI(M)

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • modi
    विजय विनीत
    मोदी का दौरा: न काशी रहा, न क्योटो बना, बनारस मांग रहा है सात साल का हिसाब
    24 Oct 2021
    दीपावली से पहले सोमवार, 25 अक्टूबर को रैली करने मोदी फिर बनारस आ रहे हैं। वह रिंग रोड के किनारे मेहंदीगंज के कल्लीपुर में 5200 करोड़ की सौगात बांटेंगे। मोदी की रैली से पहले सवालों की गर्मी है, जिसका…
  • Hunger Index
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    वैश्विक भुखमरी इंडेक्स में भारत की ‘तरक़्क़ी’: थैंक्यू मोदी जी!
    24 Oct 2021
    सरकार-जी ने जी तोड़ मेहनत की, अथक प्रयास किया और देश को वैश्विक भुखमरी इंडेक्स में शुभ संख्या 101वें स्थान पर पहुंचा कर ही दम लिया।
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : कवि असद ज़ैदी की मीडिया पर टिप्पणी
    24 Oct 2021
    इतवार की कविता में आज पढ़िये असद ज़ैदी की कविता "जो देखा नहीं जाता..."
  • jammu and kashmir
    डॉ. राजू पाण्डेय
    कश्मीर: हिंसा की राजनीति जितनी ही घातक है हिंसा पर राजनीति
    24 Oct 2021
    कश्मीर के हालात का उपयोग जब तक चुनावी सफलता अर्जित करने हेतु किया जाता रहेगा तब तक इसे हल करने की सरकार की नीयत पर संशय बना रहेगा। उत्तर प्रदेश के चुनाव निकट हैं। कश्मीर में हिंसा बढ़ रही है।
  • religious
    शंभूनाथ शुक्ल
    विशेष: धर्म से ऊपर का धर्म 
    24 Oct 2021
    धर्म आपका निजी मामला है। आपके नाम से उसकी पहचान कोई आवश्यक नहीं। अगर नाम इसी तरह रखे जाएँ तो धार्मिक वैमनस्यता काफ़ी हद तक स्वतः समाप्त हो सकती है। जैसे आर्यन, आलिया, मीना, रीना, रीता, इक़बाल, मुन्ना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License