NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपीः एनएसए के आरोपों से परेशान दलित व्यक्ति ने की आत्महत्या!
पिछले साल शब्बीरपुर जातीय हिंसा में नाम आने के बाद सोनू ने आत्महत्या कर ली। मृतक के परिवार का कहना है कि वह परेशान था। बार-बार अदालती समन के चलते उसकी आमदनी प्रभावित हो रही थी जिससे वह अपने बच्चों की बुनियादी ज़रुरत पूरी नहीं कर पाता था।
अब्दुल अलीम जाफ़री
26 Nov 2019
UP
Image Courtesy: Patrika

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा क्रूर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के सख़्ती से हुए इस्तेमाल ने राज्य में एक और ज़िंदगी छीन ली। इस क़ानून का इस्तेमाल उत्पीड़न के एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

लगभग एक महीने पहले सहारनपुर जिले के बड़गांव थाना क्षेत्र के शब्बीरपुर गांव में सोनू नाम के एक दलित व्यक्ति ने कथित तौर पर ज़हर खाकर अपनी जान गंवा दी थी। इस घटना को मीडिया में न के बराबर जगह मिली। उनके परिवार के सदस्यों का कहना है कि वह नियमित तौर पर अदालत में खुद को पेश करने में सक्षम नहीं होने से परेशान थे।

मृतक के परिवार का कहना है, "सोनू पर 5 मई 2017 को सहारनपुर जातिगत हिंसा के सिलसिले में धारा 302, 307 और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) सहित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के कई आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसी दिन स्थानीय पुलिस द्वारा उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया था और देवबंद जेल में भेज दिया गया था। सोनू 18 महीने तक उन मामलों के लिए जेल में क़ैद था जो उसने कभी भी अपराध नहीं किया।" परिवार ने कहा कि वह अदालतों की रोज़ाना सुनवाई से काफी परेशान था।

सोनू के बड़े भाई हरीश कुमार ने न्यूजक्लिक को बताया कि “सोनू किसी और के खेत में काम करता था। बच्चों की बुनियादी ज़रुरतों को पूरा करने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे। इन सबके बावजूद उन्हें सप्ताह में तीन बार सहारनपुर और देवबंद की अदालत जाना पड़ता था। उसकी पांच बेटियां हैं जिसमें सबसे छोटी बेटी महज डेढ़ महीने की है।"

कुमार ने कहा कि सोनू ने 30 अक्टूबर को ज़हर खाकर अपनी जान गंवा दी। कुमार आगे कहते हैं, "उस दिन भी वह सुनवाई के लिए देवबंद गया था। लौटने के बाद उसने ज़हर खा लिया और मर गया। एनएसए जैसे गंभीर आरोपों के अलावा आत्महत्या के पीछे का कारण पुलिस का लगातार उत्पीड़न है।"

हरीश कहते हैं, “जब सोनू ज़िंदा था तो स्थानीय पुलिस हर दिन हमारे घर आती थी और 18 महीने जेल में बिताने के बावजूद उसे परेशान करती थी। विडंबना यह है कि सोनू का नाम एफआईआर की अज्ञात सूची में था और उसे एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया था।”

सोनू की बहन अरुणा ने न्यूजक्लिक को बताया, "उस दिन भी सोनू अदालत की सुनवाई के लिए देवबंद गए थे। किसी को नहीं पता था कि वो जहर खा के लौटेंगे।"

उन्होंने कहा कि सोनू के घर आने के कुछ घंटे बाद उन्हें उल्टी, पसीना और दर्द की शिकायत होने लगी। "हम उन्हें अस्पताल ले जा रहे थे तभी उनकी मौत हो गई।"

आत्महत्या के कारण के बारे में पूछे जाने पर अरुणा ने कहा, "उनकी कमाई ज़्यादा नहीं थी और उन्हें सहारनपुर और देवबंद अदालत हर एक दिन बाद या सप्ताह में तीन बार अदालत जाना पड़ता था। जब भी वह अदालत की सुनवाई के लिए जाने के लायक नहीं होते थे तो अदालत से एक वारंट आ जाता था। वह काफी परेशान थे।"

अरुणा ने कहा कि उस दिन "जब सोनू की तबीयत बिगड़ने लगी तो उन्होंने अपनी मां के कानों में बताया कि उसने ज़हर खा लिया है क्योंकि उसके पास अदालत की सुनवाई पर जाने की हिम्मत नहीं है।"

शब्बीरपुर हिंसा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले के एक छोटे से गांव शब्बीरपुर में 5 मई 2017 की सुबह बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा हुई थी। उस दिन प्राभवशाली ठाकुर समुदाय से संबंधित एक समूह महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर जुलूस निकाल रहे थे। जब ये जुलूस दलित समाज के एक छोटे से गांव से गुज़र रहा था तो दलित समुदाय के कुछ लोगों ने जुलूस में बजाए जा रहे तेज संगीत पर आपत्ति जताई।

इसके बाद दोनों समूहों ने एक-दूसरे पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। जारी हिंसा में ठाकुर समुदाय के एक सदस्य की मौत हो गई। इसके तुरंत बाद ठाकुर समुदाय के हज़ारों लोगों ने शब्बीरपुर में दलित समुदाय के लोगों के घरों को घेर लिया। उन्होंने लोगों को पीटा और दलितों के 55 घरों को जला दिया। बाद में, जिले में दलितों के विरोध करने पर पुलिस ने क्रूर कार्रवाई की।

हिंसा के चार दिन बाद यानी 9 मई 2017 को दलित सामाजिक संगठन भीम आर्मी के नेतृत्व में कई दलित युवकों ने शब्बीरपुर में हिंसा के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। हालांकि पुलिस ने उन्हें अनुमति देने से इनकार कर दिया लेकिन समुदाय के कई युवा इकट्ठा हुए और उनकी पुलिस से झड़प हो गई। कुछ वाहनों में आग लगा दी गई, पथराव किया गया और एक पुलिस चौकी को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। संगठन के लगभग हर ज्ञात सदस्य के ख़िलाफ़ मामले दर्ज किए गए।

भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आज़ाद के साथ दो अन्य व्यक्ति शिवकुमार और सोनू को शब्बीरपुर में हुई हिंसा में उनकी कथित भूमिका के लिए एनएसए के तहत मामला दर्ज किया गया था।

न्यूज़क्लिक ने फोन करके बड़गांव पुलिस स्टेशन से प्रतिक्रिया जाननी चाही लेकिन फोन का जवाब नहीं मिला।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Dalit Man in UP Allegedly Killed Himself as he Was Upset Over NSA Charges

Saharanpur Violence
Shabbirpur
NSA
Bhim Army
Dalits
National Security Act
Uttar pradesh
Caste Tension

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

विचारों की लड़ाई: पीतल से बना अंबेडकर सिक्का बनाम लोहे से बना स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश


बाकी खबरें

  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    यदि संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर पर आज वोट हो, तो क्या वो पास होगा?
    07 Oct 2021
    क्या संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता अब भी वही है जिस मकसद के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई थी? या संयुक्त राष्ट्र संघ केवल ताकतवर देशों की कठपुतली बनकर रह गया है?
  •  David MacMillan,  Benjamin,
    भाषा
    अणुओं को बनाने का ‘हरित’ तरीका विकसित करने वाले लिस्ट, मैकमिलन को रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार
    07 Oct 2021
    आणविक निर्माण का एक ‘‘सरल’’ नया तरीका खोजने के लिए दो वैज्ञानिकों को रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार दिये जाने की बुधवार को घोषणा की गई
  • Lakhimpur Kheri
    सबरंग इंडिया
    लखीमपुर खीरी: पत्रकार की मौत सुर्खियों में क्यों नहीं आ पाई?
    07 Oct 2021
    रमन कश्यप का परिवार न्याय चाहता है, उन पर कथित तौर पर राजनीतिक दबाव था
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 22,431 नए मामले, 318 मरीज़ों की मौत
    07 Oct 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.72 फ़ीसदी यानी 2 लाख 44 हज़ार 198 हुई | 
  • Lakhimpur Kheri
    डॉ. राजू पाण्डेय
    लखीमपुर खीरी की घटना में निहित चेतावनी को अनदेखा न करें!
    07 Oct 2021
    जब देश का शासन चला रहे महानुभाव प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से अपने आलोचकों के विरुद्ध हिंसा के लिए अपने समर्थकों को उकसाने लगें तो देश की जनता का चिंतित एवं भयभीत होना स्वाभाविक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License