NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दो बेटों की पुलिस हिरासत ने रशीद के परिवार की ज़िंदगी बदल दी
कश्मीरी परिवारों द्वारा अपने बेटों को खोने की कई घटनाओं में से एक घटना रशीद खान की है। इस घटना ने रशीद के परिवार को बुरी तरह हिला दिया।
ज़ुबैर सोफी
07 Dec 2018
Rashid Khan Family

मध्य कश्मीर में स्थित मिट्टी और ईंट से बने अपने घर में अपनी बेटियों और रिश्तेदारों से घिरे अब्दुल रशीद ख़ान एक बिखरे हुए इंसान है। दरवाज़े पर नज़र टिकाए उनकी सात साल की बेटी रोते हुए अपने परिवार के लिए कमाई करने वाले भाई का इंतज़ार कर रही है।
पेशे से मोबाइल टावर का मैकेनिक 24 वर्षीय इश्फाक अहमद ख़ान काम के लिए घर से निकला लेकिन वापस नहीं लौटा। उसके लौटने के बजाय ख़बर यह मिली कि वह कश्मीर के सशस्त्र प्रतिरोध आंदोलन में शामिल हो गया है।
27 नवंबर 2018 को 48 वर्षीय अब्दुल रशीद खान को उस वक़्त झटका लगा जब उन्होंने एके-47 राइफल के साथ अपने बेटे इश्फाक की तस्वीर सोशल मीडिया पर देखी। इस राइफल के साथ युवाओं की तस्वीर अब सशस्त्र संगठन में शामिल होने की घोषणा करने का विलक्षण तरीका बन गई है।
इस ख़बर ने पूरे खान परिवार को विशेष रूप से इश्फाक की चार बहनों को मानो तबाह कर दिया। परिवार के लिए यह दूसरा झटका था क्योंकि इश्फाक के छोटे भाई 21 वर्षीय उमर खान को लोक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।
बडगाम ज़िले में गोरिपोरा सोज़ीथ में स्थित अपने एक मंज़िला घर में बैठे हुए रशीद अपनी व्यथा सुनाते हुए कहते हैं कि उनके दो बेटों के घर से दूर होने के चलते परिवार की खुशी एक ही झटके में बिखर गई।
कुछ महीने पहले जम्मू-कश्मीर में हुए नगरीय स्थानीय निकाय चुनावों से पहले पुलिस ने क़ानून- व्यवस्था क़ायम रखने को लेकर कई पत्थरबाज़ों को गिरफ्तार किया था।
8 अक्टूबर 2018 को परिमपोरा पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मियों ने मध्य रात्रि को रशीद के घर को घेर लिया और उमर के ठिकाने के बारे में उनसे पूछा। रशीद ने पूछा "खेयरी चा" यानी सब ठीक है? उन्होंने कहा कि उनके सवाल का जवाब दिए बिना एक पुलिसवाले ने उन्हें उनका कॉलर पकड़ कर खींचा और उन्हें बख्तरबंद गाड़ी में डाल दिया। इसके बाद एक अन्य पुलिसवाले ने रशीद की पत्नी रफीका से कहा, "उमर को कल पुलिस स्टेशन लेकर आओ"।
उमर के परिवार ने कहा कि वे पुलिस के सामने उसे पेश करने को लेकर डर गए थे वह पहले से ही शारीरिक रूप से कमज़ोर था तो ऐसे में किसी भी तरह का नुकसान या यातना उसकी हालत को और खराब कर देता। उमर के सेहत का ख़्याल रखते हुए इश्फाक ने पुलिस स्टेशन जाने का फैसला किया।
हिरासत से रिहा हुए रशीद ने कहा, "मैं दिल की कई बीमारियों से पीड़ित हूं, मुझे नियमित तौर पर दवा लेनी पड़ती है।" लेकिन इश्फाक को 15 दिनों तक हिरासत में रखा गया था। इस दौरान रशीद ने अपने बेटे के रिहाई के लिए कई बार पुलिस स्टेशन गए और स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) से अनुरोध किया और उनसे पूछा कि जब उमर किसी मामले में शामिल नहीं था तो क्यों वे उसकी तलाश कर रहे हैं।
लेकिन रशीद कहते हैं कि सही जानकारी देने के बजाय एसएचओ उनसे दुर्व्यवहार करते। रशीद ने बताया, "जब भी मैं पुलिस स्टेशन गया, एसएचओ अक्सर मुझसे दुर्व्यवहार करते थे, मुझे मारते थे और मुझसे पुलिस स्टेशन न आने को कहते थे।"
उन्होंने कहा, कभी-कभी एसएचओ इश्फाक के सामने ही मुझसे दुर्व्यवहार करते थे जिससे उसे गुस्सा आता था।
23 अक्टूबर को इश्फाक लॉक-अप में 15 दिनों की यादों और शरीर पर यातना के निशान लिए घर लौटा।
रशीद ने कहा कि उसने उमर को पुलिस स्टेशन ले जाने का फैसला किया क्योंकि पुलिस ने हर किसी से वादा किया था कि वे उसे केवल कुछ दिनों के लिए ही गिरफ्तारी में रखेंगे।
इस दौरान इश्फाक ने परिवार से अनुरोध किया कि वह उमर को पुलिस स्टेशन न ले जाए क्योंकि उसे डर था कि पुलिस उसे पीएसए के तहत गिरफ्तार कर लेगी। हालांकि रशीद ने कहा कि ग्रामीणों के सामने पुलिस द्वारा किए गए वादे पर उन्हें विश्वास था।
इस बीच रफीका ने अपने बेटे इशफाक में कुछ बदलाव देखा जो लगातार अपने पैरों और पीठ में दर्द की शिकायत कर रहा था। रफीका ने कहा, "उसकी दाढ़ी को पुलिस ने खींचा था और उसने मुझे बताया कि पुलिस ने उससे दुर्व्यवहार किया और यातना दी।"
इश्फाक की सात वर्षीय सबसे छोटी बहन नादिया जान अकेली थी जो उसके चेहरे को छूती और उससे पूछती थी कि उसके दाढ़ी में क्या हुआ। वह उसके सिर को मालिश करती और उसके ज़ख़्मों पर मलहम लगाती। रशीद ने कहा भाई-बहनों के बीच काफी बेहतर रिश्ता था।
26 अक्टूबर को इश्फाक ने अपनी मां से कहा कि वह काम करने जा रहा है। एक इलेक्ट्रिक टावर निर्माण कंपनी के साथ काम करने की वजह से वह कभी-कभी कुछ दिनों के लिए घर से दूर रहेगा।
27 अक्टूबर को पुलिस ने उमर को हिरासत में ले लिया। उसके बाद रशीद और कुछ ग्रामीणों को सादे काग़ज़ पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया और उमर का आईडी कार्ड सौंपने के लिए कहा गया क्योंकि उसके ज़मानत के लिए दस्तावेज़ तैयार किया जा रहा था। रशीद ने कहा, "उन्होंने हमें कुछ दिनों के बाद आने और उमर को साथ लेने के लिए कहा।"
7 नवंबर को रशीद अपने रिश्तेदारों और ग्रामीणों के साथ पुलिस स्टेशन गए और उमर की ज़मानत के बारे में हेड कांस्टेबल से पूछा। पर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया गया था। एक पुलिसकर्मी ने उन्हें बताया, "हमने तुम्हारे बेटे को कोटबलवाल जेल भेज दिया है क्योंकि उसे पीएसए के तहत गिरफ्तार किया गया है।"
रोते हुए रशीद ने बताया कि उन्होंने हेड कांस्टेबल से अनुरोध करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मुझे धक्का दे दिया गया और चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह फिर से पुलिस स्टेशन आया तो वे उसे भी गिरफ्तार कर लेंगे।
यह सब सोचते हुए कि इश्फाक काम पर गया है तो परिवार ने उमर के पीएसए में गिरफ्तार होने और परिवार के प्रति पुलिस के रवैये के बारे में उसे जानकारी न देने का फैसला किया क्योंकि उसे इसकी चेतावनी दी गई थी।
लेकिन छोटी बच्ची नदिया ने अपने पिता से उनका फोन मांगा और अपने भाई को घटना के बारे में जानकारी देने के लिए फोन किया। नदिया ने कहा, "मैंने कई बार 'भाई' को फोन करने की कोशिश की लेकिन उसका फोन बंद था।"
परिवार ने सोचा कि इश्फाक हमेशा की तरह दूरदराज के इलाक़े में काम करता होगा यही कारण है कि उसका फोन नहीं लगा था।
रशीद और रफीका ने उमर की रिहाई के लिए मिन्नत करते हुए घर में शांति क़ायम रखने की कोशिश की।
लेकिन यह शांति ज़्यादा दिनों तक नहीं रह सकी। 26 नवंबर को इश्फाक की एक तस्वीर सोशल नेटवर्किंग साइटों पर वायरल हो गई जिसमें वह असॉल्ट राइफल्स लिए हुए था। इस तस्वीर के साथ दी गई जानकारी के मुताबिक़ इश्फाक 10 नवंबर को लश्कर-ए-तैयबा आतंकवादी संगठन (जम्मू-कश्मीर में सक्रिय विदेशी आतंकवादी संगठन) में शामिल हो गया था।
तब से रशीद और रफीका दोनों दिल की बीमारियों में मुबतिला हो गए। इस बीमारी के चलते दोनों लगभग बिस्तर पर गिर गए। उनकी तीनों बेटियां अपने भाई के घर लौटने की उम्मीद में हैं क्योंकि परिवार के पास आमदनी का कोई दूसरा साधन नहीं है।
अभी तक रशीद को उनके रोज़मर्रा और इलाज के खर्चों के लिए उनके रिश्तेदार मदद कर रहे हैं।
इश्फाक की बड़ी बहन वज़़ीरा ने बताया कि उसका भाई अपनी शादी, परिवार और माता-पिता के इलाज के ख़र्च के लिए पैसा बचाता था। इशफाक को एक अच्छे गेंदबाज के रूप में भी जाना जाता था। उसने घाटी में सबसे बड़े क्लब दि कश्मीर नाइट्स के लिए खेला था।
परिवार के सभी सदस्य इश्फाक से लौटने के लिए अपील कर रहे हैं और उमर की रिहाई के लिए दुआ कर रहे हैं। इस बीच नदिया दरवाज़े पर टकटकी लगाए देखती रहती है। वह अपने भाइयों के लौटने का इंतज़ार कर रही है और अपने स्कूल बैग को कैंडीज़ से भरने का इंतज़ार कर रही है जिसे वह अक्सर भर दिया करता था।

Kashmir crises
Jammu & Kashmir
Rashid Khan Family
Public Safety Act
LASHKER-E-TOIBA
Ishfaq Ahmad Khan

Related Stories

कश्मीर में ज़मीनी स्तर पर राजनीतिक कार्यकर्ता सुरक्षा और मानदेय के लिए संघर्ष कर रहे हैं

कश्मीरः जेल में बंद पत्रकारों की रिहाई के लिए मीडिया अधिकार समूहों ने एलजी को लिखी चिट्ठी 

पब्लिक सेफ़्टी एक्ट: मनमुताबिक़ हिरासत में ली जाने की कार्रवाईयां जारी, नए कश्मीर में असहमति की कोई जगह नहीं

नगालैंड व कश्मीर : बंदूक को खुली छूट

कश्मीर में दहेज़ का संकट

'कश्मीर में नागरिकों की हत्याओं का मक़सद भारत की सामान्य स्थिति की धारणा को धूमिल करना है'—मिलिट्री थिंक-टैंक के निदेशक

कुछ सरकारी नीतियों ने कश्मीर में पंडित-मुस्लिम संबंधों को तोड़ दिया है : संजय टिक्कू

फ़ोटो आलेख: ढलान की ओर कश्मीर का अखरोट उद्योग

कांग्रेस की सेहत, कश्मीर का भविष्य और भीमा-कोरेगांव का सच!

जम्मू और कश्मीर : सरकार के निशाने पर प्रेस की आज़ादी


बाकी खबरें

  • Chhattisgarh
    रूबी सरकार
    छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार से नाराज़ विस्थापित किसानों का सत्याग्रह, कांग्रेस-भाजपा दोनों से नहीं मिला न्याय
    16 Feb 2022
    ‘अपना हक़ लेके रहेंगे, अभी नहीं तो कभी नहीं’ नारे के साथ अन्नदाताओं का डेढ़ महीने से सत्याग्रह’ जारी है।
  • Bappi Lahiri
    आलोक शुक्ला
    बप्पी दा का जाना जैसे संगीत से सोने की चमक का जाना
    16 Feb 2022
    बप्पी लाहिड़ी भले ही खूब सारा सोना पहनने के कारण चर्चित रहे हैं पर सच ये भी है कि वे अपने हरफनमौला संगीत प्रतिभा के कारण संगीत में सोने की चमक जैसे थे जो आज उनके जाने से खत्म हो गई।
  • hum bharat ke log
    वसीम अकरम त्यागी
    हम भारत के लोग: समृद्धि ने बांटा मगर संकट ने किया एक
    16 Feb 2022
    जनवरी 2020 के बाद के कोरोना काल में मानवीय संवेदना और बंधुत्व की इन 5 मिसालों से आप “हम भारत के लोग” की परिभाषा को समझ पाएंगे, किस तरह सांप्रदायिक भाषणों पर ये मानवीय कहानियां भारी पड़ीं।
  • Hijab
    एजाज़ अशरफ़
    हिजाब के विलुप्त होने और असहमति के प्रतीक के रूप में फिर से उभरने की कहानी
    16 Feb 2022
    इस इस्लामिक स्कार्फ़ का कोई भी मतलब उतना स्थायी नहीं है, जितना कि इस लिहाज़ से कि महिलाओं को जब भी इसे पहनने या उतारने के लिए मजबूर किया जाता है, तब-तब वे भड़क उठती हैं।
  • health Department
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग
    16 Feb 2022
    "स्वास्थ्य सेवा की बात करें तो उत्तर प्रदेश में पिछले पांच सालों में सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। प्रदेश के जालौन जिले की बात करें तो यहां के जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक पिछले चार साल से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License