NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
डॉक्टरी, इंजीनियरिंग में क्या रखा है ‘पकौड़ा रोजगार गारंटी योजना’ में शामिल होइए
सरकार पकौड़ा शास्त्र के अतिरिक्त पान कला, पंक्चर विज्ञान आदि में भी कोर्स शुरू कर सकती है। नौजवानों का बहुत भला होगा।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
10 Feb 2019
pakoda rozgar
सांकेतिक तस्वीर। साभार : यूट्यूब

जब से प्रधानमंत्री जी ने पकौड़ा बनाने को एक रोजगार बताया है, पकौड़े खाने से ज्यादा उस पर लिखने का मन हो रहा है। वैसे भी उम्र के जिस पड़ाव पर प्रधानमंत्री जी और मैं हूँ, पकौड़ा खाने से ज्यादा बोलने या लिखने की चीज रह गयी है। प्रधानमंत्री जी बोले और मैं लिख रहा हूँ। 

बारिश में पकौड़े खाना या फिर पकौड़े के साथ चाय पीना, यह हम भारतीयों को बहुत पसंद है। चाय का जिक्र आया तो चाय पर तो पहले ही बहुत लिखा जा चुका है। 2014 के बाद तो बहुत ही ज्यादा लिखा जा चुका है।  जब से एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बना है, चाय, चाय पे चर्चा, चाय के साथ चर्चा आदि बहुत होने लगी हैं। वैसे मोदी जी दस साल से अधिक मुख्यमंत्री रहे, यह पता ही नहीं चला की वे बचपन में चाय बेचा करते थे। जैसे ही वे प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी घोषित किये गए, उन्होंने बता दिया की वे बचपन में चाय बेचा करते थे। अपने बारे में सोच समझ कर बताने की मोदी जी की पुरानी आदत है। जैसे पहले वह अपने को अविवाहित बताते रहे थे, वो तो भला हो चुनाव आयोग का जो उन्हें बताना ही पड़ा कि वे विवाहित हैं, पर उन्होंने विवाह के एक महीने के भीतर ही अपनी पत्नी को, बिना तलाक दिये ही, छोड़ दिया था। ऐसा ही कुछ उनकी पढ़ाई के बारे में है, किसी को कुछ पता ही नहीं है कि मोदी जी कितने पढ़े लिखे हैं। लगता है स्वयं मोदी जी को भी नहीं पता नहीं है कि वे कितने पढ़े-लिखे हैं। पहले वे स्वयं बताते थे कि उनकी शिक्षा मात्र कक्षा सात तक हुई है। फिर पता नहीं क्या हुआ कि यह बात होने लगी कि मोदी जी तो बीए, एमए हैं। जब उनकी डिग्री का ठीक ठीक पता चलेगा वे स्वयं बता देंगे। वे ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं जो ये बता सकें कि वे मोदी जी के साथ पढ़ते थे। जैसे ही ऐसे लोग मिलेंगे, उनकी डिग्री की घोषणा कर दी जायेगी। संभव है, इस चुनाव से पहले प्रधानमंत्री जी यह भी यह घोषणा कर दें कि वे चाय के साथ पकौड़े भी बेचा करते थे। 

Teerchi-nazar 2 (1)_3.jpg

प्रधानमंत्री जी  को पकौड़ा बनाने को रोजगार का दर्जा देने का श्रेय जाता है। बचपन में मोदी जी चाय बेचा करते थे और इस  तर्क से चाय बेचने को रोजगार बनाने का श्रेय कांग्रेस की सरकार को जाता है। पर यह कांग्रेस की सोच का घटियापन रहा कि उसने कभी चाय बेचने को रोजगार नहीं बताया। कांग्रेस कभी भी मोदी जी जितना ऊंचा सोच ही नहीं पायी।

भाजपा की सोच हमेशा समय से आगे की रही है। अब देखिए, पकौड़ा बनाने से कितने लोगों को रोजगार मिलेगा। बेसन बेचने वाले को रोजगार मिलेगा। पकौड़ा तला जायेगा, तो तेली को रोजगार की गारंटी। उसमें सब्जी भरी जाएगी, तो सब्जी बेचने वाले को रोजगार। सब्जी मंडियों की रौनक बढ़ेगी तो किसानों का भी भला होगा। किसानों का भला तो दलहन और तिलहन उपजाने में भी होगा। उनकी तो बल्ले बल्ले हो जायेगी। जितने ज्यादा लोग पकौड़ा तलने के रोजगार में लगेंगे, उतना ही किसानों का भला होगा।

सरकार को चाहिए कि वह पकौड़ा पाक कला में प्राथमिक स्तर से लेकर स्नातक, स्नातकोत्तर डिग्री के साथ ही पीएचडी के कोर्स शुरू करे। मेधावी छात्रों को विशेषज्ञता के लिए छात्रवृत्ति भी शुरू की जाये। सरकार पकौड़ा शास्त्र के अतिरिक्त पान कला, पंक्चर विज्ञान आदि में भी कोर्स शुरू कर सकती है। नौजवानों का बहुत भला होगा। 

मन की बात : मोदी जी कभी छात्रों से मन की बात करते हुए उन्हें बतायें कि इस इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, डॉक्टरी में कुछ नहीं रखा। पकौड़ा शास्त्र में विशेषज्ञता हासिल करें, रोजगार गारंटीड मिलेगा।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

Satire
Political satire
Narendra modi
man ki baat
Pakoda Stall
pakoda rozgar yojna
Employment
unemployment

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"


बाकी खबरें

  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड:  रेलवे ठेकदार द्वारा खोदे गड्ढे में डूबकर गांव की 7 बच्चियों की मौत
    24 Sep 2021
    गुस्साए ग्रामीणों का आरोप है कि यहां से गुज़रनेवाली रेलवे लाइन में मिट्टी भराई के लिए रेलवे ठेकेदार ने गांव से सटी ज़मींन में ही खनन मानक के नियमों का उल्लंघन कर गड्ढे खुदवा दिए थे। इन्हीं में से एक…
  • Sensex
    न्यूज़क्लिक टीम
    सेंसेक्स ऊपर मतलब अमीरों के अच्छे दिन
    24 Sep 2021
    सेंसेक्स में पिछ्ले तीन सालों में 65% उछाल आया है, जबकि हमारी जीडीपी का हाल खस्ता है। इसका कारण है की देश की बड़ी कंपनियों का मुनाफ़ा तेज़ी से बढ़ा है, लेकिन कामगारों का वेतन और मजदूरी तीन साल में घट…
  • supreme court on caste census
    अजय कुमार
    जातिवार जनगणना न कराने से जुड़े सरकार के तर्क बेहद बचकाना!
    24 Sep 2021
    सरकार सुप्रीम कोर्ट से कह रही है कि प्रशासनिक जटिलताओं की वजह से जातिवार जनगणना कराना मुमकिन नहीं। क्या इस तर्क में दम है?
  • scheme workers
    मुकुंद झा
    स्थायी नौकरी और वेतन की मांग को लेकर देशभर में स्कीम वर्कर्स की हड़ताल और प्रदर्शन
    24 Sep 2021
    ये प्रदर्शन अखिल भारतीय संयुक्त समिति के आह्वान पर किए गए। एक दिवसीय हड़ताल के तहत पूरे देश में जिला मुख्यालयों, ब्लॉक मुख्यालयों व कार्यस्थलों पर आंगनवाड़ी, मिड डे मील और आशा कर्मचारियों द्वारा जोरदार…
  • kisan
    बादल सरोज
    हुक्काम बनाम अवाम : 17 सितंबर बनाम 27 सितंबर
    24 Sep 2021
    ख़ैरियत की बात यह है कि भारत दैट इज़ इंडिया नाम के सॉवरिन सेक्युलर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक में एक पब्लिक है अभी और वो सब जानती है। यही पब्लिक 17 सितंबर के इस झूठे, कल्पित और आभासीय रिकॉर्ड के खिलाफ 27…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License