NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दुनिया के अमीर लोगों ने किस तरह टैक्स हेवेन देशों से फ़ायदा उठाया?
स्विस लीक, पनामा पेपर, बहामा लीक, पैराडाइज पेपर ने कई अहम खुलासे किए।

पृथ्वीराज रूपावत
26 Jun 2018
panama papers

 

21 जून को पनामा पेपर्स का दूसरा सेट मीडिया एजेंसियों द्वारा जारी किया गया। इसके सामने आने के बाद विदेशों में वित्तीय लेनदेन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में रहा। लीक हुए पनामा पेपर्स के ताज़े मामले में क़रीब 1.2 मिलियन से अधिक नए दस्तावेज़ शामिल हैं, जिनमें कम से कम 12,000 भारतीयों से जुड़े हैं। नए खुलासे से पता चलता है कि किस तरह पनामा लॉ कंपनी मोसाक फोंसेका साल 2016 के इस खुलासे का केंद्र था। मोसाक फोंसेका ने वैश्विक कार्यवाही के चलते अपनी धोखाधड़ी को छिपाने की कोशिश की। इस तरह नए लीक ने पहले हुए खुलासे में शामिल ग्राहकों की मौजूदगी की पुष्टि की और इससे इसके नए ग्राहक भी बेनक़ाब हुए।

पिछले कुछ वर्षों में मशहूर हस्तियों, राजनेताओं और अपराधियों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कर धोखाधड़ी के मामले में मीडिया ने लगातार खुलासे किये। इस मामले के सामने आने के बाद बड़े पैमाने पर लोगों ने व्यापक विरोध हुए, जिसने दुनिया भर की सरकारी एजेंसियों को अपने देश में जाँच शुरू करने के लिए मजबूर किया। पनामा पेपर्स के अलावा मीडिया ने जिन अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों का खुलासा किया वे हैं- पैराडाइज पेपर (नवंबर 2017 में प्रकाशित), बहामा लीक (सितंबर 2016), स्विस लीक (2013) और लिस्तेस्ताइन घोटाला (2008)। इन सभी खुलासों से ये बात सामने आई कि दुनिया भर के अमीर लोगों ने टैक्स हेवेन देशों से फ़ायदा उठाया है।

यद्यपि भारतीय अमीर लोग और राजनेताओं के नाम लगभग सभी ऐसे लीक में शामिल हैं, फिर भी अब तक भारत में केवल नाम मात्र की जाँच की जा रही है। साल 2014 के चुनावों के दौरान बीजेपी नेताओं ने अपने प्रचार में टैक्स हेवेन देशों से काला धन वापस लाने का वायदा किया था। हालांकि मई 2014 में सत्ता सँभालने के बाद नरेंद्र मोदी की अगवायी में बीजेपी सरकार ने कर चोरी के प्रति ढ़ीला रवैया अपनाते हुए कॉर्पोरेट और अमीर लोगों को खुश करना बेहतर समझा। यह भी ध्यान रहे कि इस सरकार के समय में अन्य विदेशी खुलासे किए जा रहे हैं।

द इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) जर्मन अख़बार Süddeutsche Zeitung और द इंडियन एक्सप्रेस सहित एक मीडिया कोलैबोरेशन् ने अप्रैल 2016 में पहली बार पनामा लीक का खुलासा किया था। इस मीडिया कोलैबोरेशन् ने लीक के दूसरे सेट के कागजात का भी विश्लेषण जारी किया है। पनामा पेपर्स के पहले किए गए खुलासे में मोसैक फोंसेका के ग्राहकों के 11.5 मिलियन दस्तावेज़ शामिल थे। इसने खुलासा किया कि कैसे इस कंपनी ने दुनिया भर के ग्राहकों के लिए अज्ञात विदेशी कंपनियों की स्थापना में नियमों की धज्जियाँ उड़ाई दी थीं।

हाल में हुआ खुलासा भारत के धनी लोगों (जो पहले सूचीबद्ध थे) जैसे शिव खेमका, अमिताभ बच्चन, जहाँगीर सोराबजी, डीएलएफ ग्रुप-प्रमोटर केपी सिंह और उनका परिवार, अनुराग केजरीवाल, मेहरासंस ज्वैल्रस के नवीन मेहरा और हाजरा इकबाल मेमन और उनके परिवार सहित अन्य लोगों से इस कंपनी के लेनदेन की पुष्टि करता है। हाल के खुलासे में इस सूची में कुछ नए नाम भी जुड़ गए जैसे अजय बिजली और उनके परिवार, पीवीआर सिनेमा के मालिक, कविन भारती मित्तल, हाइक मैसेंजर के सीईओ, एयरटेल के सुनील मित्तल के बेटे, जलज आश्विनी डानी, एशियन पेंट्स प्रमोटर अश्विन डानी के बेटे और अन्य भी कई लोग लिस्ट में शामिल हैं।

साल 2016 के पनामा पेपर्स की जाँच में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का आंतरिक मंडल, तत्कालीन आइसलैंड के प्रधानमंत्री Sigmundur David Gunnlaugsson, तत्कालीन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ का परिवार शामिल था। हाल के खुलासे ने आर्जेंटीना के फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेस्सी, आर्जेंटीना के राष्ट्रपति मौरिसिओ मैक्री का परिवार और एक शेल कंपनी जिसका मालिक फ्रेंच ज्वैलर पियरे कार्टियर के इस कंपनी से लेनदेन को उजागर किया है।

हालांकि पहला पनामा पेपर लीक उन दस्तावेजों पर आधारित था जिसने साल 1970 से 2015 के अंत तक इस कंपनी के आंतरिक कार्यप्रणाली का खुलासा किया था। ताज़े खुलासे में साल 2016 के शुरूआत से 2017 के आख़िर तक इस कंपनी के कारोबार को उजागर किया है। ज्ञात हो कि कुछ महीने पहले ये कंपनी बंद हो गई।

पनामा पेपर्स लीक के चलते दुनिया भर में बड़े पैमाने पर जाँच की गई। साल 2016 के आख़िर तक 79 देशों में सरकार और कंपनियों ने इस लॉ कंपनी, बिचौलिए या ग्राहकों से क़रीब 150 जाँच, लेखा परीक्षा या पूछताछ की। भारत में 21 जून 2018 तक सरकारी एजेंसियों ने 426 लोगों की जाँच की जिससे लगभग 1140 करोड़ रुपए के अज्ञात विदेशी निवेश का पता चला।

पैराडाइज पेपर्स

पैराडाइज पेपर का संबंध दो विदेशी कंपनियों के 13.4 मिलियन दस्तावेज़ के लीक होने से है। ये दो विदेशी कंपनियां ऐप्पलबी (नाम बदल कर एस्टारा रखा गया) और एशियासिटी है। एप्पलबी एक क़ानूनी सेवा प्रदाता कंपनी है जो 10 देशों में संचालित है और एशियासिटी एक सिंगापुर आधारित कॉर्पोरेट सेवा प्रदाता कंपनी है। इस पेपर ने साल 1950 से 2016 तक की अवधि को शामिल किया है। गोपनीयता अधिकार क्षेत्र में सरकारों द्वारा गुपत रखे गए 19 कॉर्पोरेट रजिस्ट्रियों से विवरण का भी खुलासा हुआ है। ये 19 देश एंटीगुआ और बारबूडा, अरुबा, बहामास, बारबाडोस, बरमूडा, केमैन द्वीप, कुक द्वीप, डोमिनिका, ग्रेनडा, लबुआन, लेबनान, माल्टा,मार्शल द्वीप समूह, सेंट किट्स एंड नेविस, सेंट लुसिया, सेंट विन्सेंट, समोआ, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, और वानुआतु हैं।

 

इस वित्तीय आंकड़ों ने बेशुमार तरीकों को तैयार किया जिसके द्वारा कंपनियों और व्यक्तियों ने कृत्रिम संरचनाओं का इस्तेमाल करके टैक्स से बचाव किया था। इन फाइलों में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय, यू2 बैंड के प्रमुख गायक बौनो, अमेरिकी गायक मैडोना जैसे प्रमुख व्यक्तित्वों के नाम शामिल थेI भारतीयों में जाने-माने नामों में विजय माल्या, हर्ष मोइली, बीजेपी के सांसद रविंद्र किशोर सिन्हा, नागरिक उड्डयन के तत्कालीन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा और कांग्रेस नेता सचिन पायलट शामिल हैं। इन फ़ाइलों में कुल 714 भारतीयों के नाम शामिल हैं। सूची में दर्ज नामों की संख्या के आधार पर भारत 180 देशों में से 19वे स्थान पर है।

बहामा लीक

सितंबर 2016 में आईसीआईजे ने बहामा कॉर्पोरेट रजिस्ट्री से लगभग 1.5 मिलियन दस्तावेजों का एक सेट जारी किया जिसमें 1990 से 2016 के बीच पंजीकृत 175,000 कंपनियों, फाउंडेशन्स और ट्रस्ट के डायरेक्टर्स और मालिकों के नाम शामिल थे।

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, इस लीक ने "विदेशी कंपनियों के अधिकारियों, शेयरधारकों या मालिकों का खुलासा करते हुए अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों तथा धनी और शक्तिशाली व्यक्तियों को बहमास की तरफ से दिए जाने वाले गुप्त ऑफर का पर्दा उठाया।" इन फाइलों में शामिल कुछ भारतीयों के नाम हैं वेदांत समूह के अनिल अग्रवाल, पूर्व बैरन समूह के कबीर मुलचंदानी, फैशन टीवी इंडिया के प्रमोटर राजन मधु और फिनिश वॉटर ब्रांड वीन वाटर्स के चेयरमैन और चीफ एक्जीक्यूटिव अमन गुप्ता अन्य लोगों में शामिल हैं।

स्विस लीक

स्विस लीक का संबंध जेनेवा स्थित एचएसबीसी प्राइवेट बैंक के आंकड़ों से है। ये आंकड़े हर्वे फल्सियानी द्वारा निकाला गया था जो पूर्व एचएसबीसी कर्मचारी थे जो बाद में व्हिस्टलब्लॉवर हो गए। इन आंकड़ों में 200 से अधिक देशों से 100,000 से अधिक व्यक्तियों और कानूनी संस्थाओं के नाम को शामिल किया गया है जो साल 1988 से 2007 तक की अवधि के आंकड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार जून 2011 में फ्रांसीसी अधिकारियों ने भारतीयों से संबंधित एचएसबीसी प्राइवेट बैंक में 700 असंगत बैंक खातों की एक सूची भेजी थी जिसके बाद सरकारी एजेंसियों ने जाँच शुरू की और ये प्रक्रिया अभी भी चल रही है।

उद्योगपति में अंबानी बंधु मुकेश और अनिल अंबानी, तथा जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल इन लीक में सूचीबद्ध अन्य लोगों में शामिल हैं। इस लीक की जाँच जारी है।

लिकटेंस्टीन घोटाला

ये घोटाला साल 2008 में उस समय सामने आया जब एक बैंक कर्मचारी ने विभिन्न देशों को संदिग्ध डेटा बेच दिया जिसमें खाताधारकों के नाम शामिल थे। इस आंकड़ों से पता चला कि लिकटेंस्टीन के बैंकों ने अपने दुनिया भर के ग्राहकों को उनके संबंधित देशों में कर से बचने के लिए किस तरह मदद की। इसके बाद साल 2009 में इंडो-जर्मन डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस कन्वेंशन के तहत जर्मन सरकार ने भारत को एक सूची सौंपी जिसमें लिकटेंस्टीन के एलजीटी बैंक में भारतीयों के खाते का विवरण शामिल हैं। विभिन्य ट्रस्टों ने जो एलजीटी बैंक में कथित रूप से धन छिपाए उनमें एम्ब्रुनोवा ट्रस्ट एंड मार्लाइन मैनेजमेंट, मनीची ट्रस्ट, रुविशा ट्रस्ट, डेनिस स्टीफ्टंग ट्रस्ट, ड्राइडे सटिफ्टन्फ ट्रस्ट, वेबस्टर फाउंडेशन और उर्वशी फाउंडेशन शामिल हैं। हालांकि इस घोटाले का खुलासा हुए क़रीब 10 साल बीत चुके हैं फिर भी इन ट्रस्टों पर भारतीय टैक्स एजेंसियों द्वारा शुरू की गई जाँच अभी भी

panama papers
Bahama papers
paradise papers
swiss leak

Related Stories

स्विस बैंकों में भारतीयों की राशी बढ़ी, लेकिन यह खुलासा सिर्फ ऊँठ के मुँह में जीरे सामान है

विजय माल्या का अपना स्वर्ग

क्या पैरेडाइस पेपर्स का हाल भी पनामा , बिरला और सहारा पेपर्स की तरह होगा ?


बाकी खबरें

  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    आप ने भगवंत मान को बनाया सीएम उम्मीदवार, चुनाव आयोग पर भेदभाव का आरोप और अन्य ख़बरें
    18 Jan 2022
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी आम आदमी पार्टी का भगवंत मान को सीएम उम्मीदवार घोषित करने पर , चुनाव आयोग की कार्रवाइयों पर उठते सवाल और अन्य ख़बरों पर।
  • up elections
    अजय कुमार
    5 साल के कामकाज में महंगाई और मज़दूरी के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पूरी तरह से फेल!
    18 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश और पंजाब में 5 साल में रोजगार पहले से भी कम हुआ है। बेरोजगारी बढ़ी है। महंगाई बढ़ी है। कमाई कम हुई है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: क्या कोरोना के नए मामलों में आई है कमी? या जाँच में कमी का है असर? 
    18 Jan 2022
    दिल्ली में अचानक कोरोना मामलों में कमी आई है। आखिर केस कम होने के पीछे क्या कारण है? क्योंकि इस बीच कोरोना जाँच में भी भारी कमी हुई है। आँकड़े बताते हैं कि जाँच की संख्या घटाकर आधी कर दी गई है।
  • BJP
    रवि शंकर दुबे
    बीजेपी में चरम पर है वंशवाद!, विधायक, मंत्री, सांसद छोड़िए राज्यपाल तक को चाहिए परिवार के लिए टिकट
    18 Jan 2022
    यूपी विधानसभा चुनावों से पहले इन दिनों बीजेपी के भीतर जमकर बवाल चल रहा है। हर नेता अपने परिवार के सदस्यों के लिए टिकट मांग रहा है, ऐसे में बीजेपी ने कुछ की ख्वाहिशें तो पूरी कर दी हैं, लेकिन कुछ…
  • Asaduddin Owaisi
    अजय गुदावर्ती
    राजनीतिक धर्मनिरपेक्षता के बारे में ओवैसी के विचार मुसलमानों के सशक्तिकरण के ख़िलाफ़ है
    18 Jan 2022
    मुसलमानों के सामाजिक बस्तीकरण के खिलाफ और उनकी आर्थिक गतिशीलता के लिए निरंतर अभियान, जो एआइएमआइएम और उसके नेताओं की राजनीति से परे है, के जरिए ही देश की अल्पसंख्यक राजनीति सही दिशा में आगे बढ़ेगी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License