NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
बर्फीली सर्दी में लद्दाख में खुले स्कूल, छात्र हुए बीमार  
नई दिल्ली के साथ लद्दाख के ‘एकीकरण’ का शायद कुछ ऐसा ही मतलब है।  
टिकेंदर सिंह पंवार
21 Dec 2019
Translated by महेश कुमार
Jawahar Navodaya Vidyalaya
Image courtesy: Facebook

केंद्र का प्रशासन, जो अब लेह और अन्य क्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर के पूर्ववर्ती राज्य पर सीधे शासन कर रहा है, ने जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) जो कि पूरी तरह से आवास केन्द्रित विद्यालय है को कड़कड़ाती ठंड में भी खोलने के लिए मजबूर कर दिया है।

गृह मंत्री अमित शाह, जो अब दिल्ली में रहते हैं, शायद वे नहीं जानते हैं कि शून्य से नीचे के तापमान में काम करने की कोशिशों का क्या अंजाम होता है।

आमतौर पर लद्दाख में स्कूलों को तीन सबसे गंभीर सर्दियों के महीनों में बंद कर दिया जाता है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने नए फ़रमान जारी कर चोगलामसर गाँव में जेएनवी को जोकि लेह से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर है और जो लेह-किलोंग राजमार्ग पर है, उसे खुले रहने पर मजबूर कर दिया है।

और इसके परिणाम सभी के सामने हैं: चोगलामसर के इस स्कूल में छात्रों की एक बड़ी तादाद बीमार पड़ गई है, जो कि बिवाई की बीमारी से पीड़ित हैं, जिसकी पुष्टि स्थानीय त्वचा विशेषज्ञ ने भी की है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली और मेधावी छात्रों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए नवोदय विद्यालय योजना एक प्रयोगात्मक प्रणाली है। उन्हें स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के तहत एक स्वायत्त निकाय द्वारा प्रशासित किया जाता है, जो मानव संसाधन विकास मंत्रालय के दायरे में आता है।

बिवाई एक दर्दनाक बीमारी है जो त्वचा को लाल कर देती है, उससे खुजली होती है और सूजन पैदा हो जाती हैं जो हाथ-पैर की उंगलियों, नाक, कान और उन संवेदनशील अंगों को प्रभावित करती है जिन्हे बच्चे सर्दी में बचा नहीं पाते हैं और वे उन्हे बर्फीली हवाओं और मौसम में उजागर कर देते हैं। बिवाई उन घावों में बदल सकता है जो बहुत दर्दनाक होते हैं, और लद्दाख जैसी वीरान  परिस्थितियों में वह और भी बदतर हो सकती है। ये बीमारियाँ बर्फीली सर्दी में त्वचा पर होने वाली असामान्य प्रतिक्रिया हैं।

ठंड और बिवाई से पीड़ित कई बच्चों के माता-पिताओ ने नवोदय विद्यालय के अभिभावक-शिक्षक संघ के माध्यम से लेह के डिप्टी कमिश्नर सचिन कुमार वैश्य को इस बारे में शिकायत की है।

लेह के सबसे वरिष्ठ जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मोटूप दोरजे को छात्रों की आपातकालीन स्थिति की देखभाल करने करने के लिए चोगलामसर के जेएनवी में ले जाया गया। उन्होंने पाया कि भारी ठंड के कारण बड़ी संख्या में छात्रों के हाथों में सूजन आ गई है। जो सबसे बुरी बात है वह यह कि इस स्कूल में हीटिंग/गरमाईश की कोई व्यवस्था नहीं है - जिसका अर्थ है कि स्कूल और उनके हॉस्टल लगभग दिसंबर से जनवरी तक फ़्रीज़र की तरह ठंडे रहते हैं।

वैसे इस बात पर किसी को आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए कि वहाँ गरमाईश या हीटिंग की सुविधा क्यों नहीं है, क्योंकि सामान्य तौर पर यह स्कूल दिसंबर के पहले सप्ताह के बाद बंद हो जाता है। कुछ वर्षों पहले तो स्कूल दिसंबर में बिल्कुल नहीं खुलते थे, क्योंकि स्थानीय प्रशासन तापमान और मौसम की स्थिति के आधार पर कक्षाएं लगाने का फ़ैसला लेता था।

लेकिन इस साल, लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनने में के बाद, इस क्षेत्र के पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर आरके माथुर अब केंद्र के इशारे पर प्रशासन की कमान संभाल रहे हैं।

इसका नतीजा यह है कि जेएनवी स्कूल और हॉस्टल सर्दियों के मौसम में भी इतने लंबे समय तक खुले हुए हैं कि बच्चे उंगलियों की सूजन से पीड़ित हैं। एक सामान्य वर्ष में, इस समय तक, छात्र अपने छात्रावास के कमरे खाली कर देते थे और स्कूल छोड़ गाँवों में अपने माता-पिता के साथ रहने चले जाते थे। जेएनवी की वेबसाइट ख़ुद कहती है कि इसका परिसर "खड़े और तूफ़ानी रास्तों से जुड़ा हुआ है" और यह कि स्कूल ख़ुद "चारों ओर के पहाड़ों से घिरा हुआ है।" हीटिंग या गरमाईश के बिना इस तरह की इमारत शरद ऋतु के हफ़्तों में रहने के लिए काफ़ी दुर्गम हो जाती है फिर आप सर्दियों के महीनों की तो बात ही भूल जाईए।

लेह और आसपास के मौसम की स्थिति को समझने के लिए, यह याद रखें कि शहर में पर्यटकों की बड़ी तादाद भी आती है और उनके ठहरने की मांग को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में होटल भी खुल गए हैं। फिर भी, लेह शहर के 97 प्रतिशत होटल हर साल अक्टूबर के अंत तक बंद हो जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि केवल 3 प्रतिशत  होटल ही केंद्रीय हीटिंग प्रदान कर सकते हैं, और इसलिए केवल वे ही खुले रहते हैं। वास्तव में, कुछ पर्यटक कठोर मौसम के बावजूद भी, चूंकि कुछ होटल खुले हैं, इसलिए इस क्षेत्र का दौरा करते हैं।

लेकिन नाज़ुक स्कूली बच्चों को क्षेत्र के प्रशासकों ने बर्फ़ीली ठंड को सहन करने के लिए मजबूर कर दिया है, जो स्पष्ट रूप से इस क्षेत्र या यहाँ रहने के आदी नहीं हैं।

बड़ी संख्या में प्रभावित छात्रों के कारण डॉक्टरों ने चेतावनी दी गई है कि इस तरह के मामलों के गंभीर होने से बच्चों को गैंग्रीन हो सकता है, जो उनकी उंगलियों और हाथों को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।

लेखक हिमाचल प्रदेश के शिमला शहर के पूर्व डिप्टी मेयर हैं। व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Adm Keeps Ladakh School Open in Winter: Students Get Chilblains

Ladakh Union Territory
Chilblain
Jawahar Navodaya Vidyalaya
Students forced to attend school
Jammu and Kashmir
Amit Shah

Related Stories

4जी के दौर में 2जी: कश्मीरी छात्रों पर भारी पड़ता कभी न ख़त्म होने वाले लॉकडाउन

दिल्ली चुनाव: स्कूली शिक्षा का मुद्दा किसे जीत दिलाएगा?

जेएनयू हमला : डीयू से लेकर आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी तक विरोध प्रदर्शन

 CAA: AMU में पुलिस कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है 

उत्तराखंड : केंद्र की दख़ल के बाद कश्मीरी छात्रों को लेट फ़ीस से राहत, लेकिन अभी डर बरक़रार

देहरादून : मुश्किल में कश्मीरी छात्र, लेट फीस और परीक्षा का संकट

वे JNU जैसे संस्थानों को क्यों बर्बाद कर रहे हैं?

हिमाचल प्रदेश : सरकार की ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के ख़िलाफ़ छात्रों का प्रदर्शन

कश्मीर : सरकार छात्रों को “चारे” की तरह इस्तेमाल कर रही है

हरियाणा चुनाव : बीजेपी के घमंड को चुनौती देने के लिए प्रदर्शन कर रहे झज्जर में मेडिकल कॉलेज के छात्र


बाकी खबरें

  • तिरछी नज़र: सो सॉरी, सेल नहीं, रेंट
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: सो सॉरी, सेल नहीं, रेंट
    29 Aug 2021
    अब देश की संपत्तियां सेल पर हैं, बेची जा रही हैं, सॉरी! मतलब, किराये पर दी जा रही हैं। सरकार जी खुद ही दे रहे हैं। और हम भी उम्मीद से हैं कि कभी ना कभी हमारा भी मौका आएगा और हम भी कुछ खरीद पाएंगे।
  • गुजरात: धर्म-परिवर्तन क़ानून को लेकर हाईकोर्ट और सरकार के बीच क्या विवाद है?
    सोनिया यादव
    गुजरात: धर्म-परिवर्तन क़ानून को लेकर हाईकोर्ट और सरकार के बीच क्या विवाद है?
    29 Aug 2021
    धर्म-परिवर्तन के नए क़ानून पर हाईकोर्ट की सख़्ती से गुजरात सरकार सकते में है। कानून के कई प्रावधानों पर हाईकोर्ट की रोक के ख़िलाफ़ राज्य की विजय रुपाणी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा की है।
  • 200 हल्ला हो: अत्याचार के ख़िलाफ़ दलित महिलाओं का हल्ला बोल
    रचना अग्रवाल
    200 हल्ला हो: अत्याचार के ख़िलाफ़ दलित महिलाओं का हल्ला बोल
    29 Aug 2021
    "जाति के बारे में क्यों ना बोलूं सर जब हर पल हमें हमारी औक़ात याद दिलाई जाती है..."
  • रोटी के लिए जद्दोजहद करते खाना पहुंचाने वाले हाथ
    समृद्धि साकुनिया
    रोटी के लिए जद्दोजहद करते खाना पहुंचाने वाले हाथ
    29 Aug 2021
    नई श्रम सुधार संहिता के दायरे में गिग वर्कर्स को लाए जाने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा के लाभ प्रदान करने के बावजूद फुड डिलीवरी कर्मचारियों का शोषण बदस्तूर है, खासकर महामारी के बाद से। समृद्धि साकुनिया…
  • अफ़गानिस्तान: ‘ग्रेट गेम’  खेलने की सनक में अमेरिका ने एक देश को तबाह कर दिया
    जॉन पिलगर
    अफ़गानिस्तान: ‘ग्रेट गेम’  खेलने की सनक में अमेरिका ने एक देश को तबाह कर दिया
    29 Aug 2021
    कुछ दशक पहले अफ़गानिस्तान की अवाम ने अपनी आज़ादी ली थी, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों की महत्वाकांक्षाओं ने उसे तबाह कर दिया
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License