NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बहुसंख्यक प्रभाव में लिया गया कश्मीर का फ़ैसला : संजय काक
भोपाल में आयोजित विनोद रैना स्मृति व्याख्यान में कश्मीर मसलों के जानकार मशहूर वृत्तचित्र निर्माता संजय काक ने ‘‘गांधी की याद में : नर्मदा और कश्मीर घाटी से उठते सवाल’’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि परिस्थितियां ऐसी बना दी गई है कि कश्मीर पर बातचीत में तर्क और तथ्य के लिए कोई जगह नहीं है।
राजु कुमार
04 Oct 2019
sanjay kak

"लोगों को यह गलतफहमी है कि जम्मू कश्मीर का जीवन शेष भारत के पैसों से चलता है। अध्ययन में सामने आया है कि जम्मू कश्मीर के कुल जीडीपी में पर्यटन का महज 6.9 फीसदी हिस्सा है और इस पर्यटन के राजस्व का 95 फीसदी वैष्णो देवी की यात्रा से आता है। यानी कोई कश्मीर में पर्यटन न करे, तो वहां के जीडीपी पर बहुत खास अंतर नहीं आएगा। जीडीपी का सबसे ज़्यादा हिस्सा यानी 18 फीसदी सेब के उत्पादन से आता है और सिर्फ कश्मीर के लिए यह बढ़कर 24 फीसदी तक हो जाता है।  कश्मीर के बारे में यह ग़लतफ़हमी भी फैलाई जा रही है कि वह विकास में पिछड़ा हुआ है, लेकिन विकास के हर संकेतक पर वह उत्तर भारत से बेहतर स्थिति में है। "

विख्यात अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज और प्रभात पटनायक का हवाला देते हुए ये बातें वरिष्ठ फिल्मकार संजय काक ने भोपाल में आयोजित विनोद रैना स्मृति व्याख्यान में ‘‘गांधी की याद में : नर्मदा और कश्मीर घाटी से उठते सवाल’’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कही। इसका आयोजन मध्यप्रदेश भारत ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा किया गया।

संजय काक ने कश्मीर के इन तथ्यों को रखते हुए कहा कि कश्मीर  के बारे में तथ्यहीन जानकारी देकर लोगों को भ्रमित किया गया, ताकि तथ्य एवं तर्क के साथ कोई कश्मीर पर बात न कर सके। अनुच्छेद 370 में संशोधन बहुसंख्यक के आवेग के आधार पर लिया गया फैसला है, जो न तो कश्मीर के हित में है और न ही शेष भारत के हित में। लेकिन यह अच्छा है कि 5 अगस्त के बाद लोगों ने  कश्मीर के बारे में सोचना शुरू कर दिया है और कई सारी बातें सामने आ रही हैं।

image 2_1.PNG

व्याख्यान में काक ने विषय के संदर्भ में कहा कि नर्मदा घाटी के अहिंसक आंदोलन के बावजूद सर्वोच्च न्यायालय का साल 2000 का फैसला बहुसंख्यक के आवेग या प्रभाव (इंपल्सन) में लिया गया फैसला था, जो कि इस तरह के निर्णय लिए जाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ। उसी तरह जम्मू कश्मीर पर लिया गया वर्तमान फैसला है। नर्मदा घाटी और कश्मीर घाटी से उठते सवाल का संदर्भ ‘‘लोकतंत्र का सवाल है एवं लोकतंत्र से सवाल है’’। उन्होंने कहा कि नर्मदा घाटी के आंदोलन में देश-विदेश का और मध्यम वर्ग का सहयोग था एवं जमीन पर आंदोलन भी मजबूत था, लेकिन सब बेमानी हो गया। कश्मीर  में प्रतिरोध अलग तरह का रहा है। वहां के मामले में बहस को जनता तक ले जाना मुश्किल है। 1999-2000 तक ऐसा करना आसान था।

उन्होंने कहा कि 5 अगस्त के पहले लोगों को लगता था कि कश्मीर की समस्या की शुरुआत 1989-90 से हुई है। पहली बार अब लोगों को लगा कि कश्मीर की समस्या का कोई इतिहास भी है। जब देश में आजादी का आंदोलन चल रहा था, तब कश्मीर  में सामंतवाद के खिलाफ आंदोलन चल रहा था। वहां की परिस्थितियां बिल्कुल ही अलग थी। हम अपनी जगह से वहां की परिस्थितियों को देखते हैं, इसलिए स्पष्ट तौर पर मुद्दे को नहीं समझ पाते। कश्मीर पर बात करने के लिए हमें वहां के बारे में अध्ययन करना चाहिए, ताकि जब कोई सवाल करे, तो हम उसका तार्किक जवाब दे सकें। यह हमारे समाज की विफलता है कि हमें सभी जगह आर्मी भेजना पड़ रहा है। यह लोकतांत्रिक राजीनीति का संकट है। कश्मीरी लोगों पर आज अलग तरह का दबाव है। जब तक वहां लोकतंत्र की बहाली नहीं होगी, तब तक स्थितियों में सुधार की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

व्याख्यान के दरम्यान संजय काक ने अपनी फोटो पुस्तक ‘‘विटनेस : 9 फोटोग्राफर्स - कश्मीर 1986-2016’’ में शामिल फोटोग्राफर्स के कुछ फोटो दिखाकर उस पर वहां के हालात पर चर्चा की। शुरुआत में हबीब तनवीर द्वारा स्थापित नया थियेटर के कलाकारों ने जन गीतों की प्रस्तुति की। मध्यप्रदेश भारत ज्ञान विज्ञान समिति की आषा मिश्रा ने बताया कि विनोद रैना स्मृति में यह छठवां व्याख्यान है।

photo 1_0.PNG

विख्यात शिक्षाविद् अनिता रामपाल ने कहा कि विनोद का कश्मीर और नर्मदा से गहरा लगाव था। उन्होंने एक बार कहा था कि हमारा जो कुछ बचेगा, उसे नर्मदा और झेलम में बहा देना। ऐसे में कश्मीर पर बात करना विनोद के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। हमने कश्मीर में अनाथ बच्चों की एक कार्यशाला आयोजित की थी। उसमें लोगों के बीच जो दुराव था, उसे टूटते हुए देखा। महज सात दिन की कार्यशाला में बच्चों ने एक-दूसरे के दर्द को समझा। हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि गैर कश्मीरी लोग भी कश्मीरी लोगों का दर्द समझेंगे, बिल्कुल उन बच्चों की तरह।

Jammu and Kashmir
sanjay kak
Memory of Gandhi
Kashmir Valley
kashmiri awaam
indian economy
GDP
Non-violence movement of Narmada Valley
Supreme Court

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

GDP से आम आदमी के जीवन में क्या नफ़ा-नुक़सान?

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • Anganwadi workers
    रौनक छाबड़ा
    हरियाणा: हड़ताली आंगनवाड़ी कार्यकार्ताओं के आंदोलन में अब किसान और छात्र भी जुड़ेंगे 
    08 Mar 2022
    आने वाले दिनों में सभी महिला कार्यबलों से सम्बद्ध यूनियनों की आस ‘संयुक्त महापंचायत’ पर लगी हुई है; इस संबंध में 10 मार्च को रोहतक में एक बैठक आहूत की गई है।
  • refugee crisis
    एपी
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: संयुक्त राष्ट्र ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इसे यूरोप का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट बताया 
    08 Mar 2022
    अमेरीका ने रूस से आयात होने वाले तेल पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी मुहिम शुरू की, तो दूसरी तरफ जेलेंस्की ने रूस को चिकित्सा आपूर्ति मार्ग पर हुआ समझौता याद दिलाया।
  • राज कुमार
    गोवा चुनावः कौन जीतेगा चुनाव और किसकी बनेगी सरकार?
    08 Mar 2022
    इस बार भाजपा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है क्योंकि तमाम विपक्षी दल भाजपा को हराने के लिए लड़े हैं और ये स्थिति कांग्रेस के पक्ष में जाती है।
  • privatization of railways
    सतीश भारतीय
    निजी ट्रेनें चलने से पहले पार्किंग और किराए में छूट जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं!
    08 Mar 2022
    रेलवे का निजीकरण गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर वजन लादने जैसा है। क्योंकि यही वर्ग व्यवसाय और आवाजाही के लिए सबसे ज्यादा रेलवे पर आश्रित है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की घटकर 50 हज़ार से कम हुई
    08 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,993 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.12 फ़ीसदी यानी 49 हज़ार 948 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License