NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
उत्तर प्रदेश: बुद्धिजीवियों का आरोप राज्य में धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने का फ़ैसला मुसलमानों पर हमला है
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों द्वारा धार्मिक उत्सवों का राजनीतिकरण देश के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर देगा।
अब्दुल अलीम जाफ़री
29 Apr 2022
Mosque Loudspeaker
गोरखपुर, 27 अप्रैल (आईएएनएस )। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बुधवार को धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकरों को उतारा जा रहा है।

लखनऊ: योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश के बाद, बुधवार शाम तक धार्मिक स्थानों से लगभग 11,000 लाउडस्पीकर हटा दिए गए थे।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सभी धार्मिक स्थलों पर की गई कार्रवाई पर उन लोगों ने सवाल उठाया है, जो रमजान के पवित्र महीने में इस कदम को मुख्य रूप से मस्जिदों पर निशाना साधना मानते हैं।

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य के विभिन्न धार्मिक स्थलों से कुल 10,923 लाउडस्पीकरों को हटा दिया गया था और 35,221 लाउडस्पीकरों की आवाज बुधवार की शाम 4.00 बजे तक उसके मानदंडों के मुताबिक कम कर दी गई थी।

राज्य के गृह विभाग ने बताया कि आगरा, मेरठ, बरेली, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, गोरखपुर और वाराणसी सहित राज्य के आठ जोनों एवं चार कमीशनरी-लखनऊ, कानपुर एवं गौतमबुद्ध नगर से लाउडस्पीकर हटा दिए गए हैं।

गृह विभाग ने कुल 2,395 लाउडस्पीकरों को हटाया है और लखनऊ जोन में धार्मिक स्थानों से 7,397 लाउडस्पीकरों की आवाज की मात्रा कम कर दी गई है। इसके बाद गोरखपुर और वाराणसी क्षेत्र का नंबर आता है।

बुधवार को, गृह विभाग ने पुलिस से लाउडस्पीकर को हटाने का निर्देश दिया और कहा कि राज्य भर में जिन धार्मिक स्थानों पर शोर सीमा मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं, वहां से लाउडस्पीकर हटा दिए जाएं।

राज्य में धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने का आदेश 24 अप्रैल 2022 को जारी किया गया था। इस संबंध में जिलों से 30 अप्रैल तक अनुपालन रिपोर्ट तलब की गई है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 21 अप्रैल 2022 को निर्देश दिया था कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर जोर से नहीं बजने चाहिए और उसकी आवाज सिर्फ उस परिसर तक ही सीमित रहनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि माइक्रोफोन नहीं लगाए जाने चाहिए और धार्मिक स्थानों पर नए लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने संवाददाताओं से कहा, "धार्मिक स्थलों से अनधिकृत लाउडस्पीकरों को हटाने और दूसरे, उसकी ध्वनि की अनुमेय सीमा के भीतर निर्धारित करने के लिए एक राज्यव्यापी अभियान चलाया जा रहा है।" उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर बिना किसी भेदभाव के हटाए जा रहे हैं।

यह मुद्दा महाराष्ट्र में भी जोर पकड़ रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने 3 मई 2022 तक सूबे की मस्जिदों में लाउडस्पीकर हटाने का अल्टीमेटम दिया हुआ है। एक वरिष्ठ पत्रकार, और एक किताब बाइज्जत बरी के लेखक अलीमुल्लाह खान ने न्यूजक्लिक से बातचीत में कहा: “यह व्यापक रूप से खुला मामला है कि एक समुदाय हमेशा भाजपा सरकार के निशाने पर होता है, चाहे वह मसला हलाल मांस का हो, पोशाक की पसंदगी या नापसंदगी की बात हो, या अब मस्जिद में लाउडस्पीकर का मुद्दा। इससे पहले, यह बात बहुत अधिक मालूमात नहीं थी, पर अब तो यह खुलकर सामने आ गयी है।”

खान ने सवाल किया, “अजान, जिसमें मुश्किल से दो मिनट लगते हैं, वह भला इलाकाई अमन और सद्भाव को कैसे बाधित कर सकता है? यह कदम पूरी तरह से सियासी है और इस्लामोफोबिया से जकड़ा है, जो महज बहुसंख्यक समुदाय को खुश करने के लिए उठाया गया है। यह संविधान में दिए गए प्रावधानों को कुचलने और मौजूदा हूकूमत की सियासी नाकामयाबी पर पर्दादारी की कोशिश है।"

खान की बातों से वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान भी इत्तेफाक रखते हैं। उनका कहना है, “भाजपा सरकार ने मुसलमानों को निशाना बनाने के अपने मकसद को पूरा करने का एक सूक्ष्म तरीका खोज लिया है। मस्जिदों में लाउडस्पीकर कोई आज से नहीं लगे हैं, बल्कि यह व्यवस्था तो सदियों से चली आ रही है, जबकि मंदिरों में लाउडस्पीकर का चलन नहीं हैं। ऐसा करके, वे अपने मूल मतदाताओं को एक संदेश भेजेंगे कि उन्होंने अपने मतदाताओं को मजबूत करने के लिए मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटा दिए हैं।”

इस मसले पर न्यूजक्लिक ने ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य कई मजहब के लोगों से भी बात की, जिनमें से कुछ ने कहा कि जब से भाजपा उत्तर प्रदेश में सत्ता में आई है, तब से इस तरह के विवाद एक नियमित मामला बन गए हैं। उनमें से कई ने हाल के धार्मिक जुलूसों के दौरान हो रही सांप्रदायिक हिंसा को याद किया। उनका कहना था कि साल 2014 के पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था, यहां तक कि क्षुद्र मुद्दों को भी एक हिंदू-मुस्लिम कोण या सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है, जो एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।

प्रयागराज (जिसे हाल तक इलाहाबाद के नाम से जाना जाता था) में रहने वाले लेखक और कवि यश मालवीय ने न्यूजक्लिक को बताया: “अगर यह फैसला बहुत पहले नेक इरादों के साथ लिया गया होता, तो सभी धर्मों को मानने वाले लोग इसका स्वागत करते। लेकिन रमजान के महीने में यह निर्णय लेने से यह संकेत मिलता है कि सरकार के इस कदम के पीछे उसके कुछ गलत इरादे हैं और वह नफरत फैलाने के काम में सफल हो रही है।”

बढ़ते सांप्रदायिक वैमनस्य पर चिंता व्यक्त करते हुए मालवीय ने कहा, “इस महत्त्वपूर्ण समय में, जब धर्म मानव मस्तिष्क पर हावी हो रहा है, इस तरह के निर्णय से गंगा-जमुनी तहजीब के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचेगा, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, उन्होंने कहा कि, "भारत त्योहारों की भूमि थी और “हर समुदाय पिछले कई दशकों से एक साथ त्योहार मनाता आ रहा है, लेकिन इस सरकार ने इसे राजनीति में बदल दिया है।”

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

UP: Decision to Remove Loudspeakers From Religious Places Aimed at Muslims, Allege Intellectuals

Loudspeakers
Yogi Adityanath
Mosque Loudspeaker
Religious Places
ramzan
up govt

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

यूपी: बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच करोड़ों की दवाएं बेकार, कौन है ज़िम्मेदार?

उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव का समीकरण

योगी 2.0 का पहला बड़ा फैसला: लाभार्थियों को नहीं मिला 3 महीने से मुफ़्त राशन 

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

ग्राउंड रिपोर्ट: स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रचार में मस्त यूपी सरकार, वेंटिलेटर पर लेटे सरकारी अस्पताल


बाकी खबरें

  • refugee crisis
    एपी
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: संयुक्त राष्ट्र ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इसे यूरोप का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट बताया 
    08 Mar 2022
    अमेरीका ने रूस से आयात होने वाले तेल पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी मुहिम शुरू की, तो दूसरी तरफ जेलेंस्की ने रूस को चिकित्सा आपूर्ति मार्ग पर हुआ समझौता याद दिलाया।
  • राज कुमार
    गोवा चुनावः कौन जीतेगा चुनाव और किसकी बनेगी सरकार?
    08 Mar 2022
    इस बार भाजपा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है क्योंकि तमाम विपक्षी दल भाजपा को हराने के लिए लड़े हैं और ये स्थिति कांग्रेस के पक्ष में जाती है।
  • privatization of railways
    सतीश भारतीय
    निजी ट्रेनें चलने से पहले पार्किंग और किराए में छूट जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं!
    08 Mar 2022
    रेलवे का निजीकरण गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर वजन लादने जैसा है। क्योंकि यही वर्ग व्यवसाय और आवाजाही के लिए सबसे ज्यादा रेलवे पर आश्रित है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की घटकर 50 हज़ार से कम हुई
    08 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,993 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.12 फ़ीसदी यानी 49 हज़ार 948 हो गयी है।
  • International Women's Day
    सोनिया यादव
    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: महिलाओं के संघर्ष और बेहतर कल की उम्मीद
    08 Mar 2022
    श्रम आंदोलन से उपजे इस आयोजन के केंद्र में प्रदर्शन की अहमियत रही है, लिहाज़ा आज महिलाओं के संघर्ष ने एक लंबा सफ़र तय किया है और इसमें उनका अपने ह़क़ और हुक़ूक के लिए आवाज़ बुलंद करना, सड़कों पर धरने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License