NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
रालोद के सम्मेलन में जाति जनगणना कराने, सामाजिक न्याय आयोग के गठन की मांग
रालोद की ओर से रविवार को दिल्ली में ‘सामाजिक न्याय सम्मेलन’ का आयोजन किया जिसमें राजद, जद (यू) और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने भाग लिया। सम्मेलन में देश में जाति आधारित जनगणना कराने और सामाजिक न्याय आयोग के गठन की मांग की गई।
भाषा
30 May 2022
RLD

नयी दिल्ली: जयंत चौधरी की पार्टी राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने रविवार को ‘सामाजिक न्याय सम्मेलन’ का आयोजन किया जिसमें राजद, जद (यू) और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने भाग लिया। सम्मेलन में देश में जाति आधारित जनगणना कराने और सामाजिक न्याय आयोग के गठन की मांग की गई।

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की 35वीं पुण्यतिथि पर विज्ञान भवन में ‘सामाजिक न्याय सम्मेलन’ का आयोजन किया गया, जहां रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने कहा कि जाति जनगणना होने तक देश में समानता नहीं होगी।

उच्चतम न्यायालय द्वारा 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण पर रोक लगाने के विषय पर उन्होंने कहा, ‘‘अगर आंकड़ों की समस्या है तो सरकार गिनती क्यों नहीं करवाती और बताती है कि किसकी कितनी संख्या और किसके पास क्या है?’’

चौधरी ने कहा, ‘‘सामाजिक न्याय मेरी विरासत है और जातिगत जनगणना कराकर आर्थिक सामाजिक असमानता को खत्म करना मेरी नैतिक जिम्मेदारी है और मैं इससे पीछे नहीं हटूंगा।’’

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता शरद यादव, मनोज झा, जनता दल (यूनाइटेड) के नेता के सी त्यागी, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता सुभाषिनी अली, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता सुखेंदु शेखर रॉय और अपना दल (के) की नेता कृष्णा पटेल सहित अन्य नेताओं ने सम्मेलन में भाग लिया।

सम्मेलन में पारित एक प्रस्ताव के अनुसार, एक नयी आर्थिक नीति की मांग की गई जो धन सृजन के बजाय रोजगार सृजन पर केंद्रित हो और जो कृषि क्षेत्र और नोटबंदी तथा कोविड-19 महामारी के कारण बुरी तरह प्रभावित छोटे तथा मध्यम व्यवसायों को प्रोत्साहित करे।

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘हम जाति जनगणना और अन्य सार्वजनिक और निजी स्रोतों के आंकड़ों का विश्लेषण करने और सकारात्मक कार्रवाई तथा नीतियों की सिफारिश करने के लिए सामाजिक न्याय आयोग या समान अवसर आयोग के गठन की मांग करते हैं।’’

प्रस्ताव में यह सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय संतुलन आयोग के गठन की मांग भी की गई है कि आर्थिक प्रगति के फायदे देश के सभी क्षेत्रों में समान रूप से सामंजस्य स्थापित कर सके।

RLD
Jayant Choudhary
Rashtriya Lok Dal
caste census

Related Stories

आज़म के परिवार से जयंत की मुलाकात के क्या मायने निकाले जाएं?

विधानसभा चुनाव: एक ख़ास विचारधारा के ‘मानसिक कब्ज़े’ की पुष्टि करते परिणाम 

यूपीः किसान आंदोलन और गठबंधन के गढ़ में भी भाजपा को महज़ 18 सीटों का हुआ नुक़सान

यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !

यूपी चुनाव: सियासी दलों के लिए क्यों ज़रूरी हो गए हैं बाहुबली और माफ़िया?

यूपी चुनाव: बिगड़ते राजनीतिक मौसम को भाजपा पोस्टल बैलट से संभालने के जुगाड़ में

सरकार सिर्फ़ गर्मी, चर्बी और बदले की बात करती है - राकेश टिकैत

यूपी चुनाव: धन-बल और सत्ता की ताक़त के शीर्ष पर बैठी भाजपा और विपक्ष का मुक़ाबला कितना? 

किसी भी मांग या सवाल पर योगी सरकार ने लाठियां ही दी है: जयंत चौधरी

यूपी चुनाव: क्या पश्चिमी यूपी कर सकता है भाजपा का गणित ख़राब?


बाकी खबरें

  • non veg
    अजय कुमार
    क्या सच में हिंदू धर्म के ख़िलाफ़ है मांसाहार?
    13 Apr 2022
    इतिहास कहता है कि इंसानों के भोजन की शुरुआत मांसाहार से हुई। किसी भी दौर का कोई भी ऐसा होमो सेपियंस नही है, जिसने बिना मांस के खुद को जीवित रखा हो। जब इंसानों ने अनाज, सब्जी और फलों को अपने खाने में…
  • चमन लाल
    'द इम्मोर्टल': भगत सिंह के जीवन और रूढ़ियों से परे उनके विचारों को सामने लाती कला
    13 Apr 2022
    कई कलाकृतियों में भगत सिंह को एक घिसे-पिटे रूप में पेश किया जाता रहा है। लेकिन, एक नयी पेंटिंग इस मशहूर क्रांतिकारी के कई दुर्लभ पहलुओं पर अनूठी रोशनी डालती है।
  • एम.के. भद्रकुमार
    रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं
    13 Apr 2022
    यह दोष रेखाएं, कज़ाकिस्तान से म्यांमार तक, सोलोमन द्वीप से कुरील द्वीप समूह तक, उत्तर कोरिया से कंबोडिया तक, चीन से भारत, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान तक नज़र आ रही हैं।
  • ज़ाहिद खान
    बलराज साहनी: 'एक अपरिभाषित किस्म के कम्युनिस्ट'
    13 Apr 2022
    ‘‘अगर भारत में कोई ऐसा कलाकार हुआ है, जो ‘जन कलाकार’ का ख़िताब का हक़दार है, तो वह बलराज साहनी ही हैं। उन्होंने अपनी ज़िंदगी के बेहतरीन साल, भारतीय रंगमंच तथा सिनेमा को घनघोर व्यापारिकता के दमघोंटू…
  • bhasha
    न्यूज़क्लिक टीम
    उन्मादी भीड़ को लगा नफ़रत के ख़ून का चस्का, निशाने पर देश
    12 Apr 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने राम नवमी की आड़ में देश भर में planned हिंसा की घटनाओं के राजनीतिक मंशा पर बात की। दिल्ली में हुई लिंचिंग की घटना हो या फिर तमाम राज्यों में तलवारों और डीजे…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License