NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
धार्मिक अतिक्रमण: परवेश वर्मा के बयान से सांप्रदायिकता झलक रही है!
पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी सांसद परवेश वर्मा का कहना कि एक धर्म विशेष के पूजा स्थल में वृद्धि हो रही है और उससे कई तरह की दिक़्क़तें हो रही हैं, ये बात सच नहीं है। दिल्ली ही नहीं देश के तमाम हिस्सों में सार्वजनिक संपत्ति पर धर्म के नाम पर अवैध क़ब्ज़ा करना कोई नई बात नहीं हैI
मुकुंद झा
20 Jun 2019
धार्मिक अतिक्रमण: परवेश वर्मा के बयान से सांप्रदायिकता झलक रही है!

लोकसभा में सांसद के रूप में शपथ लेते ही परवेश साहिब सिंह वर्मा जो पश्चिमी दिल्ली से भाजपा के सांसद हैं, उन्होंने दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल को चिट्ठी लिखकर यह दावा किया कि उनके संसदीय क्षेत्र सहित शहर के कई हिस्सों में सरकारी ज़मीन और सड़कों पर मस्जिदों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इससे यातायात प्रभावित हो रहा है और जनता को असुविधा हो रही है। उन्होंने उप-राज्यपाल से तत्काल कार्रवाई का अनुरोध भी किया है। 

परवेश ने अपनी चिट्ठी में लिखा है, "मैं पूरी दिल्ली लेकिन ख़ासकर मेरे संसदीय क्षेत्र (पश्चिमी दिल्ली) के कुछ ख़ास भागों में सरकारी ज़मीन, सड़कों तथा एकांत स्थानों पर मस्जिदों के तेज़ी से बढ़ने के एक ख़ास तरीक़े के रूप से अवगत कराना चाहता हूँ।" साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और उप-राज्यपाल के कार्यालय द्वारा 'तत्काल कार्रवाई' सुनिश्चित की जाएगी।

उनकी ये सब बातें सुन कर ऐसा लगता है कि उनको किसी ने ग़लत जानकारी दी है। उन्होंने जो भी बातें कहीं वो केवल आधा सत्य हैं। दिल्ली में सिर्फ़ मस्जिद की संख्या नहीं बढ़ रही है बल्कि सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों की संख्या में वृद्धि हो रही है। भारत सरकार के आंकड़े के मुताबिक़ केवल दिल्ली में ही 1991 से 2011 के बीच धर्मिक स्थलों की संख्या में दोगुना से भी ज़्यादा की वृद्धि हुई है। सरकार की जनगणना के अनुसार 1991 में दिल्ली में 3,974 धर्मिक स्थल थे, वे 2001 बढ़कर 8,249 और फिर 2011 में और भी बढ़कर 8,668 हो गये। ये दिखाता है कि किस तरह धार्मिक स्थलों में लगातार वृद्धि हो रही हैI बता दें कि इनमें से कई अवैध अतिक्रमण करके बनाए गए हैं।
 
अवैध निर्माण की समस्या, सिर्फ़ मुस्लिम नहीं सभी धर्म बराबर के भागीदार!

परवेश वर्मा का कहना कि एक धर्म विशेष के पूजा स्थल में वृद्धि हो रही है और उससे कई तरह की दिक़्क़तें हो रही हैं, ये बात सच नहीं है। दिल्ली ही नहीं देश के तमाम हिस्सों में सार्वजनिक संपत्ति पर धर्म के नाम पर अवैध क़ब्ज़ा करना कोई नई बात नहीं हैI प्रार्थना स्थलों और पूजा के स्थान के नाम पर अवैध निर्माण या धार्मिक उत्सवों के अवसरों पर ग़ैर-क़ानूनी ढंग से पंडाल खड़ा करने की समस्या पूरे देश में अब चिंता का कारण बन रही है, जिसको लेकर कई बार कोर्ट ने भी चिंता ज़ाहिर की है और निर्देश भी जारी किये हैं। यहाँ ध्यान देने की ज़रूरत है की अधिकतर ऐसे धार्मिक स्थल सड़कों, चौक-चौराहों ,पार्क और गली-मोहल्लों के अंदर भी तेज़ी से बढ़ रहें हैं। इसमें कोई भी धर्म पीछे नहीं है। लेकिन जिस तरह से परवेश वर्मा ने एक धर्म विशेष को टारगेट किया है वो दर्शाता है कि वो धर्मिक अतिक्रमण को लेकर चिंतित नहीं हैं बल्कि वो इसके सहारे अगले 6-8 महीने में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में दिल्ली की सत्ता पर क़ाबिज़ होने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि शहर में सरकारी ज़मीन या सड़क किनारे क़रीब सौ मस्जिदें हैं। लेकिन जब वो यह कह रह थे तब वो भूल गए की सड़क किनारे ही लगभग उतने ही या उससे ज़्यादा ही मंदिर भी हैं।

प्रशासन आस्था के आगे लाचार 

ऐसा ही एक मामले को ले कर 2017 के मई में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक टीम गठित की गयी थीI जिसे दिल्ली में अवैध निर्माण और अतिक्रमण को चिन्हित कर कार्यवाही करने का आदेश दिया गया थाI इसकी जाँच में ये सामने आया कि पूरी दिल्ली में डीडीए भूमि पर 1,170 वर्ग गज़ ज़मीन पर अतिक्रमण की बात कही गई थी। इसमें करोल बाग़ के निकट बनी हनुमान मूर्ति को अवैध तरीक़े से स्थापित किये जाने की बात सामने आई थी। जिसके बाद कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जगह ख़ाली कराने के आदेश दिये थे।

परन्तु जब पुलिस ने इसको लेकर स्थानीय निकायों को नोटिस भेजा, कार्यवाही की माँग की तो स्थानीय निकायों ने आस्था का हवाला देते हुए मूर्ति हटाने के प्रस्ताव में संशोधन की माँग की और कोर्ट चले गए। इसी सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और सी हरी शंकर की पीठ ने स्थानीय निकाय से कहा था कि मूर्ति को वे एयर लिफ़्ट कर कहीं और शिफ़्ट करवा लें, इसके लिए वे उप राज्यपाल से बात करें।

साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा था कि स्थानीय निकाय किसी एक जगह पर क़ानून का पालन करके दिखा दें तो दिल्ली वालों के माइंडसेट में अंतर दिखने लगेगा। निगम निकायों को कई बार मौक़ा दिया जा चुका है, लेकिन कोई ऐसा करना ही नहीं चाहता। ये दर्शाता है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले पर सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया और कहा कि “धर्म के नाम पर किसी को भी सरकारी ज़मीन क़ब्ज़ाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।"

इसके साथ ही कोर्ट ने बहुत ही कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि “कोई आध्यात्मिकता आपराधिक गतिविधियों से नहीं जुड़ी हो सकती।" आगे कोर्ट ने कहा कि ये “बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और दर्दनाक है” कि शहर में फ़ुटपाथ की सार्वजनिक भूमि पर 108 फ़ुट की हनुमान की मूर्ति बन जाने की अनुमति दी गई थी।

लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार और सारा तंत्र आज भी इस मूर्ति को हटाने में असफ़ल रहा है। ये किसकी ज़िम्मेदारी है परवेश वर्मा को यह पूछना चाहिए था।
 
ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ मंदिर ही अवैध बने हैं बल्कि इसमें सभी धर्मों के पूजा स्थल बने हैं और इनको हटाने में अगर सरकारी तंत्र फ़ेल होता है तो इसके पीछे की वजह हमेशा उस धर्म के लोगों की आस्था होती है। जब किसी अवैध धर्मिक स्थल पर कार्रवाई होती है तो उस धर्म के ठेकेदरों की आस्था आहत हो जाती है। 

धर्मिक अतिक्रमण: धर्म और भू-माफ़ियाओं के गठजोड़

इन धार्मिक स्थलों के सहारे ज़मीन क़ब्ज़ा करने का भी सिलसिला देखा गया है। ये धार्मिक अतिक्रमण धर्म और भू-माफ़ियाओं के गठजोड़ को दिखाता है।  शहरों में जहाँ जगह काफ़ी महंगी होती है वहाँ मंदिर, मस्ज़िद और अन्य धार्मिक स्थलों का निर्माण कर ज़मीन क़ब्ज़ा करने वाला पूरा गिरोह होता है और कह सकते हैं कि यह एक धंधा बन चुका है। शहर में जहाँ कहीं भी सार्वजनिक जगह ख़ाली होती है या व्यवसायिक स्थलों पर सड़कों के किनारे फालतू जगह होती है, वह इन लोगों की गिद्ध दृष्टि में आ जाती हैI यह केवल किसी एक धर्म के लोगों की बात नहीं, बल्कि कमोबेश सभी धर्म के लोग धार्मिक भावनाओं का नाजायज़ फ़ायदा उठाते रहे हैं। सड़कों और गोलचक्करों पर कई मन्दिर और किसी संत या भगवान की मूर्ति या मस्ज़िद, या किसी अनजान पीर-फ़कीर की मज़ार बनी हुई मिल जाना आम बात है।
 
दरअसल यह मामला अतिक्रमण और ट्रैफ़िक जाम से जुड़ा हुआ है, यातायात के बढ़ते दबाव के कारण सड़कों के बीचों बीच बने धार्मिक स्थल और भी ज़्यादा गंभीर समस्या बन रहे हैं। 

परवेश वर्मा के बयान पर कांग्रेस और आप के नेताओं ने भाजपा पर पलटवार करते हुए उन पर दिल्ली विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे का ‘‘सांप्रदायीकरण’’ करने का आरोप लगाया है। ये समस्या गंभीर है और इसको लेकर कई बार हमारी न्यायपालिकाओं ने भी चिंता जताई है। लेकिन जब आप किसी एक विशेष धर्म के बारे में कहते हैं कि वो ही अवैध रूप से धार्मिक स्थलों का निर्माण करता है तो ऐसे बयानों से राजनीतिक संप्रदायिकता की बू आती है।

BJP
delhi government
religion
mosques
temples
temples in delhi
parmesh verma
bjp mp
Religious discrimination
Communalism
communal violence
Supreme Court
hanuman temple jhandewalan

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल


बाकी खबरें

  • विकास भदौरिया
    एक्सप्लेनर: क्या है संविधान का अनुच्छेद 142, उसके दायरे और सीमाएं, जिसके तहत पेरारिवलन रिहा हुआ
    20 May 2022
    “प्राकृतिक न्याय सभी कानून से ऊपर है, और सर्वोच्च न्यायालय भी कानून से ऊपर रहना चाहिये ताकि उसे कोई भी आदेश पारित करने का पूरा अधिकार हो जिसे वह न्यायसंगत मानता है।”
  • रवि शंकर दुबे
    27 महीने बाद जेल से बाहर आए आज़म खान अब किसके साथ?
    20 May 2022
    सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खान अंतरिम ज़मानत मिलने पर जेल से रिहा हो गए हैं। अब देखना होगा कि उनकी राजनीतिक पारी किस ओर बढ़ती है।
  • डी डब्ल्यू स्टाफ़
    क्या श्रीलंका जैसे आर्थिक संकट की तरफ़ बढ़ रहा है बांग्लादेश?
    20 May 2022
    श्रीलंका की तरह बांग्लादेश ने भी बेहद ख़र्चीली योजनाओं को पूरा करने के लिए बड़े स्तर पर विदेशी क़र्ज़ लिए हैं, जिनसे मुनाफ़ा ना के बराबर है। विशेषज्ञों का कहना है कि श्रीलंका में जारी आर्थिक उथल-पुथल…
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: पर उपदेस कुसल बहुतेरे...
    20 May 2022
    आज देश के सामने सबसे बड़ी समस्याएं महंगाई और बेरोज़गारी है। और सत्तारूढ़ दल भाजपा और उसके पितृ संगठन आरएसएस पर सबसे ज़्यादा गैर ज़रूरी और सांप्रदायिक मुद्दों को हवा देने का आरोप है, लेकिन…
  • राज वाल्मीकि
    मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?
    20 May 2022
    अभी 11 से 17 मई 2022 तक का सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का “हमें मारना बंद करो” #StopKillingUs का दिल्ली कैंपेन संपन्न हुआ। अब ये कैंपेन 18 मई से उत्तराखंड में शुरू हो गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License