NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
ड्रोन युद्ध : हर बार युद्ध अपराधों से बचकर निकल जाता है अमेरिका, दुनिया को तय करनी होगी जवाबदेही
द न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा हाल में अफ़ग़ानिस्तान और पश्चिमी एशिया में 2014 के बाद से अमरीकी हवाई हमलों में मारे गए हजारों लोगों पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई। यह रिपोर्ट रेखांकित करती है कि अब साम्राज्यवादी अमेरिका को उसके युद्ध अपराधों के लिए जवाबदेह बनाने की ज़रूरत है।
पीपल्स डिस्पैच
31 Dec 2021
Drone warfare
इराक़ के मोसुल में हवाई हमले के बाद खंडहरों में घूमते नागरिक

इस महीने की शुरुआत में न्यूयॉर्क टाइम्स  द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट से पता चला है कि 2014 के बाद से अफगानिस्तान और पूर्वी एशिया के कुछ दूसरे देशों में अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों में कम से कम 1400 बेगुनाह नागरिकों की जान गई है। इन हवाई हमलों में मुख्यत ड्रोन हमले शामिल थे। अमेरिका के इन ड्रोन हमलों में नागरिकों की जिंदगियां खत्म होने पर कई रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, जिनमें कुछ दूसरे स्रोतों में, जैसे एयरवार्स, मारे गए बेकसूरों की संख्या और भी ज्यादा बताई गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा पीड़ितों को न्याय दिलाने और इन युद्ध अपराधों के लिए जवाबदेही तय करने की नाकामी का भी जिक्र है।

इस तरह के हमले अब तक इसलिए भी जारी है, क्योंकि अमेरिका को अब तक इनमें दोषी नहीं ठहराया गया है। यह अमेरिकी नागरिक और दूसरे देशों के नागरिकों में अंतर स्थापित कर एक कुलीनता का निर्माण करते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय कानूनों को भी नीचा दिखाया जाता है।

कोई जवाबदेही नहीं

जैसा न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि ज़्यादातर मामलों में पेंटागन ने जिम्मेदार व्यक्ति को ना तो सजा दिलवाई, ना ही उसके खिलाफ सुधारात्मक कार्रवाई की। ज्यादातर मामलों में तो अमेरिका ने माफ़ी मांगने या पीड़ितों को मुआवजा देने जैसी छोटी सी चीज तक नहीं की।

इन हत्याओं के लिए यह तर्क दिया जाता रहा है कि यह मुख्य कार्रवाई के साथ हुआ "अनुषांगिक नुकसान (कॉलेटरोल डैमेज)" है। अब यह नियम ही बन गया है। अमेरिका द्वारा नागरिकों की मौत के साथ जो बर्ताव किया जाता रहा है, उससे भी यह साफ़ हो जाता है।  न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़, उन्होंने जिन मामलों को रिकॉर्ड किया, उनमें से 90 फ़ीसदी में से ज्यादा को तो अमेरिका ने खोजबीन करने लायक तक नहीं समझा। आखिर जांच से ही तो संबंधित स्थितियों और जिम्मेदार व्यक्ति का पता लग सकता था। फिर जिन केसों में अमेरिका ने जांच की, उनमें से कई में तो जांच का प्रभार उन्हीं लोगों को दिया, जो इसके जिम्मेदार थे।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का दावा है कि 1311  जांच में से सिर्फ़ एक में पेंटागन के अधिकारियों ने हमले की जगह की यात्रा की और सिर्फ दो लोगों का ही इंटरव्यू किया गया। बाकी मामलों में "ख़तरनाक जगह" का हवाला देते हुए जमीन पर जांच नहीं की गई। यह तब है जब आईएसआईएस को  आधिकारिक तौर पर 2017 में हराया जा चुका है और अमेरिकी फ़ौजें अब भी मैदान पर मौजूद हैं।

बराक ओबामा के कार्यकाल में ड्रोन हमलों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया गया। अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया, इराक़ और दूसरे हिस्सों में ऐसे हमले जमकर किए गए। बराक ओबामा ने इन्हें "इतिहास में सबसे सटीक हवाई अभियान" बताया था। लेकिन इतनी हत्याओं के बाद यह सटीक कैसे हो सकता है? आंकड़े कहते हैं कि अगर अमेरिकियों की मौतों को तस्वीर में लें, तब जरूर बराक ओबामा का दावा सही होता है।

एयरवार्स के मुताबिक अमेरिकी हवाई हमलों में सिर्फ दो देशों में ही (इराक और सीरिया) 2014 के बाद से 19000 से 30000 लोगों की मौत हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक अफ़ग़ानिस्तान के बरांग में हर परिवार में "पांच सदस्यों की औसतन जान गई  है", इनमें ज्यादातर जानें अमेरिकी गठबंधन के हवाई हमलों में गई है।

अगर कोई पेंटागन द्वारा घोषित किए गए 1400 मौतों के आंकड़े को ही माने, तो साफ़ हो जाता है कि "बेहद सटीक हमलों" का नागरिकों की मौत या नागरिक संपत्ति के नुकसान से कोई लेना देना नहीं है। दरअसल यह तर्क इस पूर्वाग्रह पर आधारित है कि कुछ जिंदगियां (अमेरिकी सैनिकों की), बाकी से ज्यादा कीमती होती हैं।

वैधानिक आत्मरक्षा?

आधिकारिक जांच आंकड़ों में "वैधानिक आत्मरक्षा" शब्दावली का बखूबी प्रयोग होता है। लेकिन यह समझ से परे है कि बहुत दूर के लोग, हजारों मील दूर के लोगों से अमेरिका कैसे डर महसूस करता है? इस शब्दावली का प्रयोग 29 अगस्त को किए गए हवाई हमले में किया गया था, जहां एक ही परिवार के 10 लोग मारे गए थे, जिनमें 7 बच्चे थे।

जब अमेरिका नागरिकों के मारे जाने की बात भी मानता है और कहता है कि वह ऐसा नहीं होने देना चाहता, तो इसके पीछे ज्यादातर रणनीतिक वजह होती है, ना कि मानवीय। अमेरिका की सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन बिल अर्बन ने इस चीज को माना भी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, रणनीतिक तौर पर आम नागरिकों को कम से कम खतरे में डालना चाहता है। क्योंकि नागरिकों के साथ हुई ज्यादती को आतंकी संगठन भावनाएं भड़काने में इस्तेमाल करते हैं।

सह नुकसान का सिद्धांत न्याय की अवधारणा के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि यहां ड्रोन चलाने वाला ही न्यायाधीश और सजा देने वाले की भूमिका में आ जाता है। जबकि उसकी न्यूनतम जवाबदेही होती है। पूर्वी सीरिया के बघुज़ में कम से कम 80 लोग मारे गए थे, दरअसल दुनिया अमेरिकी हवाई हमलों से हुई मौतों के सटीक प्रभाव के बारे में जानती ही नहीं है।

काबुल की तरह, जब भी कभी हवाई हमले की बात सामने आती है, तो अमेरिकी सेना कहती है कि उसने आतंकियों को मारा। बहुत कम ही वे मारे गए लोगों की पहचान जाहिर करते हैं।

मिली हुई मीडिया अमेरिकी कार्रवाई को नैतिक पैमाने पर ऊंचा बताती है और अमेरिका को आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई में खुद को नेता बताकर बचने का रास्ता दे देती है। वर्ल्ड सोशलिस्ट वेबसाइट पर थॉमस स्क्रिपस ने बताया है कैसे मीडिया ने अमेरिकी युद्ध अपराधों की पाठकों के दिमाग में अच्छी तस्वीर बनाई है। थॉमस लिखते हैं कि " ऐसी मीडिया जो सच्चाई की रक्षक होने का दावा करती है, दरअसल वो सत्ताधारी वर्ग की प्रचार सेवा होती है।" थॉमस का कहना है कि इस तरीके की रिपोर्टिंग से अमेरिकी सेना को युद्ध अपराधों के लिए बहानों को दोहराने और उन्हें लोकप्रिय  बनाने का जरिया मिलता है।

कभी जब कोई रिपोर्ट अमेरिका के खिलाफ चली जाती है, तो अमेरिका सिर्फ घटना पर पछतावा कर आगे बढ़ जाता है। या घटना को "अच्छी मंशा के बीच हुई गलती" या फिर "वैधानिक आत्मरक्षा" बता देता है। अमेरिका को इन घटनाओं में सजा ना मिलना ना केवल उसकी सैन्य और आर्थिक ताकत का नतीजा है, बल्कि इसकी बड़ी वजह इन घटनाओं के खिलाफ प्रगतिशील और कामगार वर्ग द्वारा लगातार सामाजिक और राजनीतिक खेमेबंदी ना कर पाना है। जबकि इस तरह की कवायद से अंतरराषट्रीय समुदाय पर अच्छी मंशा वाले, जवाबदेही तय करने वाले संस्थाओं के निर्माण का दबाव बनता।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Afghanistan
Airwars
Baghuz
Civilian deaths
Collateral damage
Drone strikes
ISIS
kabul
Syria
The New York Times
US airstrikes
US Imperialism
US impunity
War on Terror

Related Stories

क्यों USA द्वारा क्यूबा पर लगाए हुए प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं अमेरिकी नौजवान

भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी

असद ने फिर सीरिया के ईरान से रिश्तों की नई शुरुआत की

तालिबान को सत्ता संभाले 200 से ज़्यादा दिन लेकिन लड़कियों को नहीं मिल पा रही शिक्षा

वेनेज़ुएला ने ह्यूगो शावेज़ के ख़िलाफ़ असफल तख़्तापलट की 20वीं वर्षगांठ मनाई

रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं

चीन और लैटिन अमेरिका के गहरे होते संबंधों पर बनी है अमेरिका की नज़र

काबुल में आगे बढ़ने को लेकर चीन की कूटनीति

अमेरिका में रूस विरोधी उन्माद: किसका हित सध रहा है?

यूक्रेन से सरज़मीं लौटे ख़ौफ़ज़दा छात्रों की आपबीती


बाकी खबरें

  • tourism sector
    भाषा
    कोरोना के बाद से पर्यटन क्षेत्र में 2.15 करोड़ लोगों को रोज़गार का नुकसान हुआ : सरकार
    15 Mar 2022
    पर्यटन मंत्री ने बताया कि सरकार ने पर्यटन पर महामारी के प्रभावों को लेकर एक अध्ययन कराया है और इस अध्ययन के अनुसार, पहली लहर में 1.45 करोड़ लोगों को रोजगार का नुकसान उठाना पड़ा जबकि दूसरी लहर में 52…
  • election commission of India
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली नगर निगम चुनाव टाले जाने पर विपक्ष ने बीजेपी और चुनाव आयोग से किया सवाल
    15 Mar 2022
    दिल्ली चुनाव आयोग ने दिल्ली नगर निगम चुनावो को टालने का मन बना लिया है। दिल्ली चुनावो की घोषणा उत्तर प्रदेश और बाकी अन्य राज्यों के चुनावी नतीजों से पहले 9 मार्च को होनी थी लेकिन आयोग ने इसे बिल्कुल…
  • hijab
    सीमा आज़ाद
    त्वरित टिप्पणी: हिजाब पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फ़ैसला सभी धर्मों की औरतों के ख़िलाफ़ है
    15 Mar 2022
    इस बात को दरअसल इस तरीके से पढ़ना चाहिए कि "हर धार्मिक रीति का पालन करना औरतों का अनिवार्य धर्म है। यदि वह नहीं है तभी उस रीति से औरतों को आज़ादी मिल सकती है, वरना नहीं। "
  • skm
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा
    15 Mar 2022
    एसकेएम ने फ़ैसला लिया है कि अगले महीने 11 से 17 अप्रैल के बीच एमएसपी की क़ानूनी गारंटी सप्ताह मना कर राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरूआत की जाएगी। 
  • Karnataka High Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिजाब  मामला: हिजाब इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने खारिज की याचिका
    15 Mar 2022
    अदालत ने अपना फ़ैसला सुनते हुए यह भी कहा कि शिक्षण संस्थानों में यूनिफ़ॉर्म की व्यवस्था क़ानूनी तौर पर जायज़ है और इसे संविधान के तहत दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं कहा जा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License