NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल ‘दबाव बनाने के हथकंडे’ के रूप में किये जाने से चिंतित: एडिटर्स गिल्ड
गिल्ड ने कहा, ‘‘ईजीआई इसलिए चिंतित है कि सरकारी एजेंसियों को स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए एक जबरदस्त उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह पेगासस सॉफ्टवेयर का उपयोग कर पत्रकारों और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं की व्यापक निगरानी पर हालिया मीडिया रिपोर्टों को देखते हुए और अधिक परेशान करने वाला है।’’
भाषा
23 Jul 2021
एडिटर्स गिल्ड

नयी दिल्ली: एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) ने शुक्रवार को कहा कि वह चिंतित है कि स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल ‘‘दबाव बनाने के हथकंडे’’ के रूप में किया जा रहा है।

आयकर विभाग ने कर चोरी के आरोपों में दो प्रमुख मीडिया समूहों ‘दैनिक भास्कर’ और उत्तर प्रदेश के हिंदी समाचार चैनल ‘भारत समाचार’ के विभिन्न शहरों में स्थित परिसरों पर बृहस्पतिवार को छापे मारे थे। इसके बाद ईजीआई की यह टिप्पणी आई है।

गिल्ड ने एक बयान में कहा, ‘‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया 22 जुलाई को देश के प्रमुख समाचार पत्र समूह दैनिक भास्कर के साथ-साथ लखनऊ के एक समाचार चैनल भारत समाचार के कार्यालयों पर आयकर छापों को लेकर चिंतित है।’’ उसने कहा, ‘‘दैनिक भास्कर द्वारा (कोविड-19) महामारी पर की गई उस गहन रिपोर्टिंग की पृष्ठभूमि के खिलाफ ये छापेमारी की गई हैं, जिसमें सरकारी अधिकारियों द्वारा घोर कुप्रबंधन और मानव जीवन के भारी नुकसान को सामने लाया गया था।’’

गिल्ड ने दावा किया कि हाल में इसके द्वारा आयोजित एक वेबिनार में, दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संपादक ओम गौर ने कहा था कि राज्य अधिकारियों की हालिया आलोचनात्मक कवरेज के बाद सरकारी विभागों से उनके विज्ञापनों को काट दिया है। गिल्ड ने कहा, ‘‘उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स में एक ऑप-एड भी लिखा था, जिसका शीर्षक था 'द गंगा इज रिटर्निंग द डेड। इट डज नॉट लाइ'।’’

गिल्ड ने कहा, ‘‘ईजीआई इसलिए चिंतित है कि सरकारी एजेंसियों को स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए एक जबरदस्त उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह पेगासस सॉफ्टवेयर का उपयोग कर पत्रकारों और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं की व्यापक निगरानी पर हालिया मीडिया रिपोर्टों को देखते हुए और अधिक परेशान करने वाला है।’’

उसने कहा कि फरवरी में, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने न्यूज़क्लिक.इन के कार्यालय पर छापे मारे थे, जो किसान आंदोलन और संशोधित नागरिक कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर रिपोर्टिंग करने में सबसे आगे था।’’

दैनिक भास्कर के मामले में भोपाल, जयपुर, अहमदाबाद और नोएडा समेत 30 स्थानों पर छापेमारी की गयी। छापेमारी सुबह साढ़े पांच बजे शुरू हुई और शाम तक जारी रही। दैनिक भास्कर समूह की मौजूदगी 12 राज्यों में हैं और यह हिंदी, गुजराती तथा मराठी में समाचार-पत्रों का प्रकाशन करता है। यह सात राज्यों में 30 रेडियो केंद्रों का भी संचालन करता है और छह वेब पोर्टल तथा चार मोबाइल फोन ऐप के साथ इसकी ऑनलाइन उपस्थिति भी है।

उत्तर प्रदेश में भारत समाचार के परिसरों और उसके प्रवर्तकों तथा कर्मचारियों के यहां छापे मारे गए।

अमेरिका की एक मीडिया समिति ने ‘दैनिक भास्कर’, ‘भारत समाचार’ के परिसरों पर छापों की निंदा की

वाशिंगटन: अमेरिका स्थित एक मीडिया समिति ने भारत के मशहूर मीडिया समूह ‘दैनिक भास्कर’ और टीवी चैनल ‘भारत समाचार’ के परिसरों पर आयकर के छापे की निंदा की और कहा कि भारत को सरकार की आलोचना करने वाले मीडिया घरानों को ‘‘डराने’’ के लिए ऐसी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।

‘कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) ने कहा कि भारत को प्रेस की स्वतंत्रता की अपनी लंबी परंपरा को पुनर्जीवित करना चाहिए और ‘‘पत्रकारों को सार्वजनिक हित के मामलों पर स्वतंत्र रूप से खबरें देने की अनुमति देनी चाहिए।’’

दैनिक भास्कर की 12 राज्यों में पकड़ है और समाचार पत्र के अलावा वह अपना रेडियो स्टेशशन, वेब पोर्टल चलाता है और उसका मोबाइल ऐप भी है। उसके परिसरों पर बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे छापेमारी की गई जो देर शाम तक जारी रही। विभिन्न राज्यों में 30 स्थानों पर छापेमारी की गई। वहीं, ‘भारत समाचार’ और उसके प्रवर्तकों, कर्मचारियों के परिसरों पर उत्तर प्रदेश में छापे मारे गए।

सीपीजे के एशिया कार्यक्रमों के समन्वयक स्टीवन बटलर ने कहा, ‘‘दैनिक भास्कर और भारत समाचार के परिसरों पर आयकर विभाग के छापों का इस्तेमाल... भारत सरकार की आलोचना करने वाले मीडिया घरानों को डराने-धमकाने के उद्देश्य से की गई कार्रवाई स्पष्ट रूप से एक घटिया रणनीति है और इसे रोके जाने की आवश्यकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत को प्रेस की स्वतंत्रता की अपनी लंबी परंपरा को पुनर्जीवित करना चाहिए, इन जांचों को बंद करना चाहिए और पत्रकारों को सार्वजनिक हित के मामलों पर स्वतंत्र रूप से खबरें देने की अनुमति देनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय अधिकारियों को तुरंत मीडिया समूह दैनिक भास्कर के कार्यालयों और उसके प्रबंध निदेशक के घर पर कब्जा छोड़ना चाहिए और ‘दैनिक भास्कर’ तथा ‘भारत समाचार’ के कर्मचारियों को परेशान करना बंद कर देना चाहिए।’’

देशभर में इन छापेमारी की आलोचना की जा रही है। हालांकि, केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने आयकर विभाग की कार्रवाई में सरकार का कोई हाथ नहीं होने की बात कही है।

Editors Guild
Dainik Bhaskar
Bharat Samachar
IT Raids
govt agencies
journalism
Pegasus Snooping
Newsclick

Related Stories

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा

पत्रकारिता की पढ़ाई के नाम पर महाविद्यालय की अवैध वसूली

गणेश शंकर विद्यार्थी : वह क़लम अब खो गया है… छिन गया, गिरवी पड़ा है

यूपी चुनावः कॉरपोरेट मीडिया के वर्चस्व को तोड़ रहा है न्यू मीडिया!

RSF ने कश्मीर प्रेस क्लब को बंद करने की जम्मू-कश्मीर प्रशासन की कार्रवाई की निंदा की

ख़बर भी-नज़र भी: …लीजिए छापेमारी के साथ यूपी चुनाव बाक़ायदा शुरू!

पत्रकारों पर बढ़ते हमले क्या आलोचना की आवाज़ दबाने की कोशिश है?

त्रिपुरा हिंसा : एडिटर्स गिल्ड, आइडब्ल्यूपीसी ने की यूएपीए वापस लेने की मांग, सीपीआइएमएल का प्रदर्शन

‘प्रेस की आज़ादी पर हमला': एडिटर्स गिल्ड, डीयूजे ने मीडिया समूहों पर आयकर विभाग के “सर्वे” की निंदा की

10 सितंबर को अपने कार्यालय पर आयकर विभाग के "सर्वे" पर न्यूज़क्लिक का बयान


बाकी खबरें

  • Inflation
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: सर जी, प्लीज़ यह महंगाई हमसे मत छीनिये
    07 Nov 2021
    सुनते हैं कि इस महंगाई की वजह से ही सरकार के सारे काम चल रहे हैं। एक तो इस मंहगाई से मिलने वाले पैसे से ही यह सब न दिखने वाला सारा विकास कार्य हो रहा है, और दूसरे इसी महंगाई की बदौलत ही यह सब न खाने…
  • facebook
    प्रबीर पुरकायस्थ
    मेटा: क्या यह सिर्फ फेसबुक की दागदार छवि बदलने का प्रयास है?
    07 Nov 2021
    फेसबुक की छवि को व्हिसिलब्लोअर फ्रांसिस हाउजेन और सोफी झांग के रहस्योद्घाटनों से काफी चोट लगी है। क्या यह उसकी अपने दागदार अतीत तथा वर्तमान से भी पीछा छुड़ाकर एक वैकल्पिक जगत में, फेसबुक द्वारा रचे…
  • world temperature rises
    अजय कुमार
    दुनिया के तापमान में 3 सेंटीग्रेड की बढ़ोतरी हो जाए तो क्या होगा?
    07 Nov 2021
    जिस तरह से दुनिया अपना विकास कर रही है, उस तरह से जलवायु सम्मेलन में घोषित किए जाने वाले लक्ष्य कभी हासिल नहीं हो पाएंगे। जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया का तापमान साल 2030 के भीतर ही 1.5…
  • Tripura issue
    डॉ. राजू पाण्डेय
    त्रिपुरा: सांप्रदायिक हिंसा पर हमारा मौन घातक
    07 Nov 2021
    साम्प्रदायिक वैमनस्य का कोई इतिहास न होते हुए भी त्रिपुरा अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में साम्प्रदायिक हिंसा की आग में झुलसता रहा।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    भाजपा जीतने के लिए और कांग्रेस हारने के लिए कुछ भी कर सकती है!
    06 Nov 2021
    इस बार #HafteKiBaat के नये एपिसोड में चार खास खबरों की चर्चा और विश्लेषण. दिवाली के मौके पर पीएम मोदी के सैनिकों के बीच नौशेरा जाने का क्या मतलब है? पंजाब में कांग्रेस क्या सेल्फ़ गोल करेगी?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License