NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
मिस्र की सरकार से सना सेफ और राजनीतिक क़ैदियों को रिहा करने का आग्रह
अपने भाई और जाने-माने एक्टिविस्ट अला अब्देल फत्ताह के अवैध हिरासत का विरोध करने को लेकर जून से सना सेफ को प्री-ट्रायल हिरासत में रखा गया है।
पीपल्स डिस्पैच
06 Aug 2020
सना सेफ

200 से अधिक प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ-साथ पेशेवर और कलाकारों ने मिस्र की सरकार से तुरंत मिस्र के जाने-माने फिल्म संपादक, लेखक और राजनीतिक और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता सना सेफ को बुधवार 5 अगस्त को रिहा करने का आह्वान किया है। उनका अचानक अपहरण कर लिया गया और बाद में 23 जून को काहिरा में प्रोसेक्यूटर जनरल के कार्यालय के बाहर से गिरफ़्तार कर लिया गया था जहां वह शिकायत दर्ज कराने गईं थी।

सेफ की रिहाई के लिए पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में जूलियट बिनोचे, नोम चोम्स्की, जेएम कोएट्ज़ी, नाओमी क्लेन, अरुंधति रॉय और अन्य प्रमुख हस्तियां शामिल हैं। इस पत्र को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल, पीईएन इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और रेप्रीव द्वारा भी समर्थन किया गया है। जिन फिल्म संगठनों ने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं उनमें सनडांस इंस्टीट्यूट, इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टिवल एम्स्टर्डम, यूरोपियन फिल्म एकेडमी और सोसाइटी डेस रैलिसैटेर्स डे फिल्म्स जैसे सम्मानित संस्थान शामिल हैं।

उनके अन्यायपूर्ण और ग़ैरक़ानूनी अपहरण और गिरफ़्तारी के दिन सना सेफ अटॉर्नी जनरल के कार्यालय में उस हमले के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराने के लिए थी जो उनकी मां, चाची, बहन और खुद पर तोरा जेल के बाहर हुई थी। सना के भाई अला अब्देल फत्ताह जो मिस्र के प्रसिद्ध कार्यकर्ता हैं उनको रिहा करने की मांग को लेकर इन चारों ने तोरा जेल के बाहर डेरा डाला हुआ था।

लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ 2011 के विद्रोह में अला प्रमुख चेहरा थे। मार्च 2019 में रिहा होने के बाद वे गिरफ़्तार हुए और सितंबर 2019 से बिना किसी ट्रायल के जेल में बंद थे और वे इस शर्त पर रिहा हुए कि वह हर रात अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन की सेल में बिताएंगे। अला को मूल रूप से 2013 में अधिकारियों की अनुमति के बिना विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में जेल में डाल दिया गया था जिसके लिए उन्हें पांच साल के लिए जेल की सजा सुनाई गई थी।

इस पत्र में हस्ताक्षरकर्ताओं ने मिस्र के अधिकारियों से अन्य कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, वकीलों, लेखकों, कलाकारों और अन्य लोगों को रिहा करने का आग्रह किया है जो सरकार के ख़िलाफ़ अपने बोलने की आज़ादी, अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण विरोध के लिए अपने अधिकार के प्रयोग को लेकर वर्तमान में जेलों और हिरासत केंद्रों में बंद हैं। उन्होंने मिस्र सरकार से प्री-ट्रायल डिटेंशन के गलत इस्तेमाल, ग़ैरक़ानूनी और अपमानजनक कार्रवाई को तुरंत समाप्त करने के लिए कहा है जिसका प्रयोग मिस्र के भीतर हजारों बंदियों और कैदियों के साथ दुर्व्यवहार और अत्याचार करने के लिए किया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता का आह्वान करते हुए इस पत्र के अंत में हस्ताक्षरकर्ताओं ने गरिमा और न्यायपूर्ण जीवन जीने के लिए लोगों के अधिकारों का प्रयोग करने के प्रयास में दुनिया भर के लोगों द्वारा वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

egypt
Sanaa Seif
Egyptian film-maker
International news

Related Stories

दुनिया भर की: कोलंबिया में पहली बार वामपंथी राष्ट्रपति बनने की संभावना

अमेरिका में महिलाओं के हक़ पर हमला, गर्भपात अधिकार छीनने की तैयारी, उधर Energy War में घिरी दुनिया

रूस-यूक्रैन संघर्षः जंग ही चाहते हैं जंगखोर और श्रीलंका में विरोध हुआ धारदार

दुनिया भर की: सोमालिया पर मानवीय संवेदनाओं की अकाल मौत

सूडान: सैन्य तख़्तापलट के ख़िलाफ़ 18वें देश्वयापी आंदोलन में 2 की मौत, 172 घायल

कोविड -19 के टीके का उत्पादन, निर्यात और मुनाफ़ा

दुनिया भर की: जर्मनी में ‘ट्रैफिक लाइट गठबंधन’ के हाथों में शासन की कमान

इजिप्ट : राजनीतिक क़ैदियों के समर्थन में मशहूर हस्तियों ने किया भूख हड़ताल का ऐलान

इजिप्ट की संसद ने आतंकवादी समूहों से कथित संबंधों वाले सरकारी कर्मचारियों को बर्ख़ास्त करने के लिए क़ानून पारित किया

इतिहासकार की हिरासत को लेकर व्यापक आलोचना के बाद इजिप्ट ने ज़मानत पर रिहा किया


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश चुनाव: जनता गुस्से में है सरकार की विफलताओं पर
    01 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश के चुनावों में इस बात जनता बेहद गुस्से में है सरकार की विफलताओं को लेकर। चाहे फिर वो कोरोना काल में हुई मौत हो या फिर महंगाई और बेरोज़गारी, सरकार हर मोर्चे पर नाकाम ही नज़र आयी है , ऐसा…
  • Gujara
    दमयन्ती धर
    गुजरात दंगों के 20 साल: विस्थापित मुस्लिम परिवार आज भी अस्थाई शिविरों में रहने के लिए मजबूर
    01 Mar 2022
    20 वर्षों के बाद भी बुनियादी सुविधाओं के बिना ये शिविर हिंसा प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी आवास बन चुके हैं, जो एक बार फिर से विस्थापित कर दिए जाने की आशंका के बीच रहने के लिए मजबूर हैं।
  • BHU hospital
    सोनिया यादव
    यूपी: बीएचयू अस्पताल में फिर महंगा हुआ इलाज, स्वास्थ्य सुविधाओं से और दूर हुए ग्रामीण मरीज़
    01 Mar 2022
    बीते साल नवंबर में ही ओपीडी की फीस बढ़ोत्तरी के बाद अब एक बार फिर सभी जांच सुविधाओं की दर में दो से तीन गुना की बढ़ोत्तरी की गई है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य मानकों में…
  • Naveen
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूक्रेन के खारकीव में गोलाबारी में भारतीय छात्र की मौत
    01 Mar 2022
    छात्र का नाम नाम नवीन शेखरप्पा है। वह कर्नाटक के रहने वाले थे।
  • ukraine
    एपी
    ब्रिटेन ने यूक्रेन को उड़ान प्रतिबंधित क्षेत्र बनाने के आह्वान को ख़ारिज किया
    01 Mar 2022
    ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हम यह (उड़ान प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित) नहीं करने वाले हैं, क्योंकि हम ऐसी स्थिति में आ जाएंगे, जब हमें रूसी विमानों को मार गिराना हेागा।’’
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License