NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
एक वर्ष में भारत में 90 लाख रोज़गार हुए नष्ट
भारत में करीब 47 करोड़ कामकाजी लोग हैं. यानी एक प्रतिशत की बूँद भी अगर रोज़गार के सागर से गिर कर नष्ट होती है तो इसका मतलब है कि देश में 47 लाख लोगो ने रोज़गार खो दिया.
सुबोध वर्मा
14 Nov 2017
Translated by महेश कुमार
job less in india

सी.एम.आई.ई. द्वारा पिछले सप्ताह जारी आँकड़ों के अनुसार अक्टूबर 2016 से अक्टूबर 2017 के बीच देश ने 90 लाख रोज़गार खोये हैं. एक के बाद एक आयी श्रम ब्यूरो की रिपोर्टों द्वारा रिकॉर्ड किए गए डाटा के मुताबिक़ पिछले तीन वर्षों में रोज़गार में लगातार गिरावट की प्रवृत्ति को जारी रखा है.

हमेशा ही की तरह, इस संकट की अनदेखी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने 13 नवम्बर को मनीला में आसियान (ASEAN) शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली शिखर वार्ता में अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक व्यक्तियों के सामने घोषणा करते हुए कहा कि “वे भारत को वैश्विक विनिर्माण का केंद्र और युवाओं को रोज़गार सृजनकर्ता बनाना चाहते हैं”. 

 

सी.एम.आई.ई. ने अक्टूबर में बेरोज़गारी की दर 5.7 प्रतिशत बतायी. जुलाई महीने से इसमें 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, खरीफ़ के सीजन में भी इसमें बढ़ोतरी जारी रही जबकि साधारण मानसून होने के वजह से काफी बड़ी तादाद में लोगों को कृषि क्षेत्र में रोज़गार मिला होगा.

इस सबके बीच,औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में फिर से गिरावट आई है, पिछले साल जहाँ इसमें 5% की दर से विकास हुआ, वहीं इस साल यह आँकड़ा सिर्फ 3.8% ही रह गया. इससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि औद्योगिक क्षेत्र में अभी भी मंदी/गिरावट जारी है. रोज़गार नष्ट होने का यह एक सबसे बड़ा कारण है. विशेष रूप से, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं का उत्पादन वास्तव में 4.8% से घट गया जबकि बुनियादी ढाँचा और निर्माण माल के उत्पादन में बढ़ोतरी मात्र 0.5% तक रही.

ये गंभीर आँकड़े उस वक्त जारी किए गए, जब हज़ारों कार्यकर्त्ता दिल्ली में बेहतर मजदूरी की माँग और अन्य माँगों के बीच नौकरी की सुरक्षा की माँग के लिए विरोध कर रहे थे. मज़दूरों ने 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कई कर्मचारियों के महासंघों के आह्वान पर संसद के सामने तीन दिवसीय एक विशाल महापड़ाव का आयोजन किया.

नौकरियों के इस विस्फोटक संकट के लिए मोदी सरकार की उदासीनता इसके साथ निपटने में उनकी अक्षमता से ही मेल खाती है. हवाबाज़ी में नौकरी पैदा करने के लिए मजबूर प्रयासों के अलावा – हाल ही में अरुण जेटली के दावे के अनुसार जिसमें उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के लिए आवंटित 5.35 लाख करोड़ के परिव्यय की परियोजनाओं से करीब 25,000 व्यक्तियों को रोज़गार हर वर्ष मिलेगा – सरकार द्वारा रोज़गार पैदा करने के माले में बहुत कम बात की जाती है. यह तब और भी बड़ा अजीब सा लगता है तब मोदी और उनकी सरकार 2014 में सबको रोज़गार देने के वायदे के साथ आई थी.

सी.एम.आई.ई. की रपट में रोज़गार में भारी गिरावट नवम्बर 2016 से तभी से दिखती है – जब मोदी की तबाही मचाने वाली नोटबंदी प्रभाव में आई थी. पाठकों को याद होगा कि नवंबर-दिसंबर 2016 में मोदी ने 86% मुद्रा की अचानक वापसी घोषणा कर दी थी, जिससे पूरे देश में अराजकता की स्थिति पैदा हो, सभी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कामकाज रुक गया, कृषि उत्पाद की कीमतें गिर गयी, औद्योगिक उत्पादन में गिरावट हुयी लोगों को तकलीफों का सामना अलग से करना पडा.

अर्थव्यवस्था अचानक नोटबंदी के झटके से उभर नहीं पायी, इस सम्बन्ध में रोज़गार पर  सी.एम.आई.ई. डाटा स्पष्ट दिखाता है. नोटबंदी के पूर्व दस महीनों के दौरान काम की भागीदारी की औसत दर 47 प्रतिशत थी जबकि उसके 10 महीने बाद वह 44 प्रतिशत रह गयी.     

अक्टूबर 2016 में नोटबंदी से पहले के महीने में रोज़गार में भागेदारी 46.42 प्रतिशत की थी. नवम्बर 2016 में नोटबंदी की घोषणा के बाद यह घट कर 44.81 प्रतिशत हो गयी. पिछले महीने नोटबंदी के पूरे वर्ष के बाद यह और घटकर 44.55 प्रतिशत हो गयी.

भारत में करीब 47 करोड़ कामकाजी लोग हैं. यानी एक प्रतिशत की बूँद भी अगर रोज़गार के सागर से गिर कर नष्ट होती है तो इसका मतलब है कि देश में 47 लाख लोगो ने रोज़गार खो दिया. हर वर्ष काम करने की आयु के एक करोड़ बीस लाख लोग रोज़गार बाज़ार में प्रवेश करते हैं. इसलिए यह कहना गलत न होगा कि देश में एक बड़ी बेरोजगारों की फौज तैयार हो रही है क्योंकि मांग के हिसाब से रोज़गार पैदा करने कोई कोशिश नज़र नहीं आती है.

job loss
modi sarkar
unemployment

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

ज्ञानव्यापी- क़ुतुब में उलझा भारत कब राह पर आएगा ?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

लोगों की बदहाली को दबाने का हथियार मंदिर-मस्जिद मुद्दा


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद: ईद बाद वकील कमिश्नर लेंगे परिसर का जायज़ा
    26 Apr 2022
    ‘प्रशासन पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुका है कि उसका स्थान ज्ञानवापी बैरिकेडिंग से बाहर है। श्रृंगार गौरी में रोजाना दर्शन पूजन को परंपरा का हिस्सा कतई न बनाया जाए। सिर्फ चैत्र नवरात्रि के दिन ही वहां…
  • रवि शंकर दुबे
    अनुदेशकों के साथ दोहरा व्यवहार क्यों? 17 हज़ार तनख़्वाह, मिलते हैं सिर्फ़ 7000...
    26 Apr 2022
    योगी आदित्यनाथ ऑफिस के ट्विटर हैंडल से किए गए एक ट्वीट के बाद कमेंट्स की बाढ़ आ गई। और एक सच सामने आया कि कैसे अनुदेशकों का शोषण किया जा रहा है।
  • विवेक शर्मा
    मनरेगा: ग्रामीण विकास मंत्रालय की उदासीनता का दंश झेलते मज़दूर, रुकी 4060 करोड़ की मज़दूरी
    26 Apr 2022
    ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से ताजा जारी किए गए एक रिपोर्ट के मुताबिक 4,060 करोड़ रूपए की मज़दूरी का भुगतान नहीं हो सका है।
  • आज का कार्टून
    जहांगीरपुरी से शाहीन बाग़: बुलडोज़र का रोड मैप तैयार!
    26 Apr 2022
    अतिक्रमण हटाने के नाम पर बड़ी और छोटी सरकार का अगला टारगेट शाहीन बाग़ कहा जा रहा है। इस बीच , बीच की सरकार ख़ामोश है।
  • मोहम्मद इमरान खान
    बिहार: नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने समान नागरिक संहिता का किया विरोध
    26 Apr 2022
    जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जब तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं, बिहार में यूसीसी लागू नहीं होगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License