NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
एमएसपी से किसान क्यों संतुष्ट नहीं है?
इस तथ्य के अलावा कि यह लागत की पर्याप्त वापसी नहीं करती है, दो अन्य कारक हैं जो मोदी सरकार की एमएसपी नीति को ज्यादातर कागज़ो तक ही सीमित कर रहे हैं।
सुबोध वर्मा
09 Oct 2018
गेहूं एमएसपी

देश में सिर्फ 12 प्रतिशत गेहूं पैदा करने वाले किसान अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को बेचने में सक्षम हैं और ज्यादातर राज्यों में मंडी (थोक बाजार) में कीमतें सीजन में ज़्यादातर समय एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य)  से नीचे रहती हैं। सरकार इन दो महत्वपूर्ण कारकों को अनदेखा करती है – पूरी की पूरी एमएसपी नीति किसानों को असंतुष्ट और संकट में घिरा छोड़ देती हैं। यह इस तथ्य के अतिरिक्त है कि सरकार किसी भी मामले में एमएसपी को उन स्तरों पर तय कर रही है जो कुल लागत +50 प्रतिशत के फार्मूले से कम हैं और जो किसानों की मांग रही है, जैसा कि न्यूज़क्लिक द्वारा पहले रिपोर्ट किया जा चुका है।

GFX1.jpg

उपर्युक्त ग्राफिक दिखाते हैं कि पंजाब और हरियाणा में अधिकांश किसान सरकारी खरीद एजेंसियों को अपना गेहूं बेचने में सक्षम हैं। ये दोनों राज्य मिलकर देश में गेहूं की कुल पैदावार का केवल 7 प्रतिशत ही पैदा करते हैं। उत्तर प्रदेश में, अनुमानित 1.5 करोड़ गेहूं किसान हैं, भारत में सबसे बड़ी संख्या, उसमें केवल 11 लाख किसान (7 प्रतिशत) अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को बेच पाते हैं। राजस्थान में यह केवल 4 प्रतिशत है जबकि  मध्य प्रदेश में यह 22 प्रतिशत है। इन पांच राज्य से भारत के 77 प्रतिशत गेहूं उत्पादक हैं। इन आंकड़ों की गणना कृषि मंत्रालय के तहत कृषि लागत और कीमतों पर आयोग द्वारा प्रकाशित रबी 2019-20 के लिए मूल्य नीति रिपोर्ट और 2010-11 और 2015-16 के परिचालन होल्डिंग्स पर कृषि जनगणना डेटा से की गई है।

लेकिन यही सब कुछ नहीं है। रबी प्राइस पॉलिसी रिपोर्ट में यह भी पता चलता है कि पंजाब और हरियाणा को छोड़कर ज्यादातर राज्यों में गेहूं को अप्रैल, मई और जून के महीनों में फैले साल के विपणन सत्र में अधिकांश गेहूँ को निश्चित एमएसपी से नीचे की दर पर बेचा जाता है तब जब गेहूं की फसल बाजार में लाई जाती है।

अफसोस की बात है कि, यूपी और राजस्थान में, लगभग पूरे तीन महीने का लंबा मौसम एमएसपी से नीचे गेहूं की कीमतों के साथ बीत गया जबकि सीजन में दो तिहाई से अधिक सत्र में दैनिक कीमतें तय दरों नीचे देखी गईं। केवल पंजाब और हरियाणा में सीजन के आस-पास भारी मात्रा में किसानों ने गेहूं के लिए एमएसपी स्तर की कीमतें प्राप्त करने में सफलता हासिल की थी।

GFX2.jpg

यदि हालात ऐसे हैं, तो यह आश्चर्य की बात नहीं है कि देश भर में किसान उथल-पुथल में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई योजनाओं की तरह, यह नीति भी ज्यादातर कागज़ तक ही सीमित है। और, इसका मतलब है कि किसानों के संकट को पॉलिसी घोषणाओं द्वारा पूरा नहीं किया जा सकता है। और जौं, सरसों, कस्तूरी आदि जैसे अन्य रबी फसलों की स्थिति तो ओर भी बदतर है।

इस निरंतर संकट के कई प्रतिबिंब हैं और मोदी सरकार इसे समझने में पूर्णत विफल है: 200 से अधिक किसानों और अन्य संगठनों के संयुक्त मंच ने इस साल नवंबर में दिल्ली में लॉन्ग मार्च का आह्वान किया है। कुछ ही दिन पहले, कई उत्तर भारतीय राज्यों के किसानों ने दिल्ली जाने की कोशिश की लेकिन दिल्ली-यूपी सीमा पर केंद्र सरकार के आदेशों पर उन्हें रोक दिया गया और उन पर हिंसक हमला किया। इस साल अच्छी फसल के के बावजूद किसानों की आत्महत्याएं जारी हैं।

कृषि मोर्चे पर मोदी सरकार की असफलताओं के चलते आगामी विधानसभा चुनावों पर असर होगा, जो चुनाव एमपी और राजस्थान में भी होंगे। किसानों का बढ़ता क्रोध पहले से ही अपनी राय को चुनावों में प्रतिबिंबित कर रहा है जो इन चुनावों में बीजेपी के लिए एक मुश्किल घड़ी या यहां तक कि नुकसान भी दिखाते हैं। और यह अगले साल आम चुनावों में भी यह एक मुद्दा होगा।

MSP
minimum support price
RABI CROPS
BJP
SWAMINATHAN COMMISSON
Narendra modi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में करीब दो महीने बाद एक दिन में कोरोना के सबसे ज़्यादा मामले दर्ज
    07 May 2022
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3,805 नए मामले सामने आए हैं। देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 20 हज़ार से भी ज़्यादा यानी 20 हज़ार 303 हो गयी है।
  • मुकुंद झा
    जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!
    07 May 2022
    कर्मचारियों को वेतन से वंचित करने के अलावा, जेएनयू प्रशासन 2020 से परिसर में कर्मचारियों की संख्या लगातार कम कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप मौजूदा कर्मचारियों पर काम का भारी दबाव है। कर्मचारियों की…
  • असद रिज़वी
    केंद्र का विदेशी कोयला खरीद अभियान यानी जनता पर पड़ेगा महंगी बिजली का भार
    07 May 2022
    कोल इंडिया का कोयल लगभग रुपया 3000 प्रति टन है.अगर विदेशी कोयला जो सबसे कम दर रुपया 17000 प्रति टन को भी आधार मान लिया जाए, तो एक साल में केवल 10 प्रतिशत  विदेशी कोयला खरीदने से 11000 करोड़ से ज्यादा…
  • बी. सिवरामन
    प्रेस स्वतंत्रता पर अंकुश को लेकर पश्चिम में भारत की छवि बिगड़ी
    07 May 2022
    प्रधानमंत्री के लिए यह सरासर दुर्भाग्य की बात थी कि यद्यपि पश्चिमी मीडिया में उनके दौरे के सकारात्मक कवरेज को सुनिश्चित करने के लिए उनके बैकरूम प्रचारक ओवरटाइम काम कर रहे थे, विश्व प्रेस स्वतंत्रता…
  • डॉ. राजू पाण्डेय
    सिख इतिहास की जटिलताओं को नज़रअंदाज़ करता प्रधानमंत्री का भाषण 
    07 May 2022
    प्रधानमंत्री द्वारा 400वें प्रकाश पर्व समारोह के मौके पर दिए भाषण में कुछ अंश ऐसे हैं जिनका दूरगामी महत्व है और बतौर शासक  देश के संचालन हेतु उनकी भावी कार्यप्रणाली एवं चिंतन प्रक्रिया के संकेत भी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License