NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
एम्नेस्टी इंटरनेशनल को श्रीनगर में प्रेस कांफ्रेंस की इजाजत नहीं मिली
‘‘कानून-व्यवस्था के मौजूदा हालात को कारण बताते हुए हमसे कहा गया कि हमें कार्यक्रम करने की औपचारिक अनुमति नहीं दी जा रही है।’’
भाषा
13 Jun 2019
Amnesty

गैर लाभकारी संस्था एम्नेस्टी इंटरनेशनल को जन सुरक्षा अधिनियम के कथित दुरुपयोग के संबंध में श्रीनगर में प्रेस कांफ्रेंस करने की प्रशासन ने बुधवार को इजाजत नहीं दी। इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है।

एम्नेस्टी के एक प्रवक्ता ने बताया कि प्रशासन ने संस्था को इस विषय पर प्रेस कांफ्रेंस करने की इजाजत नहीं दी। उन्होंने कहा, ‘‘कानून-व्यवस्था के मौजूदा हालात को कारण बताते हुए हमसे कहा गया कि हमें कार्यक्रम करने की औपचारिक अनुमति नहीं दी जा रही है।’’ बाद में संस्था ने इस संबंध में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की।

एम्नेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया है कि जम्मू-कश्मीर जन सुरक्षा अधिनियम जम्मू-कश्मीर में आपराधिक न्याय प्रक्रिया को खराब कर रहा है। संस्था का दावा है कि उसने 2012 से 2018 तक जन सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार 210 बंदियों के मामलों का विश्लेषण किया है।

इस रिपोर्ट पर जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बी. वी. आर. सुब्रमण्यम ने कहा कि देश में विधि का शासन है। उन्होंने कहा कि पीएसए एक एक्ट है और संतुलन बनाए रखने की न्याय प्रणाली मौजूद है। आप जाएं और खुद रिकॉर्ड देखें। पीएसए हैं जिन्हें अदालत ने सही ठहराया है, और कुछ ऐसे पीएसए भी है जिन्हें अदालत ने खारिज कर दिया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए कृपया इस बात को समझें कि पूरा तंत्र संतुलन बनाए रखने के लिए काम कर रहा है। जब रिकॉर्ड सही होता है तो अदालत उसे बरकरार रखती है, जब गलत होता है तो अदालत उसे खारिज कर देती है।’’

amnesty
Kashmir Crisis
Kashmir
human rights activists

Related Stories


बाकी खबरें

  • अजय कुमार
    रिपोर्टर्स कलेक्टिव का खुलासा: कैसे उद्योगपतियों के फ़ायदे के लिए RBI के काम में हस्तक्षेप करती रही सरकार, बढ़ती गई महंगाई 
    07 Apr 2022
    द रिपोर्टर्स कलेक्टिव के पत्रकार सोमेश झा ने सूचना के अधिकार के तहत हासिल दस्तावेज़ों की छानबीन कर यह पता लगाया है कि कैसे रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की स्वायत्तता को खत्म किया गया। कैसे रिज़र्व बैंक ऑफ़…
  • विजय विनीत
    सारनाथ के धमेक स्तूप की पूजा-प्रार्थना रोके जाने से पुरातत्व विभाग और बौद्ध धर्मावलंबियों में बढ़ा विवाद
    07 Apr 2022
    "अधीक्षण पुरातत्वविद अबिनाश मोहंती ने धमेक स्तूप की पूजा-ध्यान को धंधा बना लिया है। सख़्ती सिर्फ़ उन लोगों के साथ की जाती है जो सुविधा शुल्क नहीं देते। इनके दुर्व्यवहार से तंग आकर ताइवान, चीन, जापान,…
  • मनु मौदगिल
    भारतीय कैंपस के होस्टलों में ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए अब भी जगह नहीं
    07 Apr 2022
    जेंडर स्पेसिफिक छात्रावास की ग़ैरमौजूदगी का मतलब ट्रांसजेंडर छात्रों को आवास सुविधाओं से वंचित कर दिया जाना होता है, और इस वजह से उनमें से कई छात्र कॉलेज छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
  • सोमा मारला
    ईंधन की क़ीमतों में बढ़ोतरी से ग़रीबों पर बोझ न डालें, अमीरों पर लगाएं टैक्स
    07 Apr 2022
    केंद्र सरकार ग़रीबों पर टैक्स लगाकर अमीरों से वसूले जाने वाले टैक्स में कटौती कर रही है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    डीएपी और एनपीके खाद महंगी हुई, माकपा ने बताया मोदी सरकार का एक और किसान विरोधी फ़ैसला
    07 Apr 2022
    "कभी कभी तो लगता है जैसे यह सरकार किसानों से किसान आंदोलन का बदला ले रही हो।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License