NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
एमपी चुनावः वादाख़िलाफ़ी से नाराज़ लोगों ने मतदान बहिष्कार करने का पोस्टर लगाया
इन पोस्टरों में लिखा है, 'अगर कॉलोनियां अवैध हैं तो हम वैध तरीक़े से कैसे मतदान कर सकते हैं? 25 वर्षों से हम नारकीय ज़िंदगी जी रह रहे हैं। हम नेताओं से वोट मांगकर शर्मिंदा न करने का अनुरोध करते हैं।'
काशिफ काकवी
26 Nov 2018
MP elections 2018

भोपाल: सोहागपुर के नीमनबुद्ध और सुक्रीखुर्द गांवों के निवासी और पिप्रिया के जेनोरा गांव के लोगों ने मतदान न करने का फैसला किया है क्योंकि सरकार अब तक उन्हें पेयजल और बिजली मुहैया नहीं करवा पाई है।

इसी तरह नीमच में सात अनाधिकृत कॉलोनियों के लोगों ने अपने घरों के बाहर पोस्टर लगाया है। इस पोस्टर में उन्होंने लिखा है कि वे चुनावों का बहिष्कार करेंगे क्योंकि पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी भी उनके कॉलोनियों में नहीं पहुंच पाई है।

इन पोस्टरों में लिखा है, 'अगर कॉलोनियां अवैध हैं तो हम वैध तरीक़े से कैसे मतदान कर सकते हैं? 25 वर्षों से हम नारकीय ज़िंदगी जी रह रहे हैं। हम नेताओं से वोट मांगकर शर्मिंदा न करने का अनुरोध करते हैं।' लोगों का कहना है कि जब तक उन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल जाती और उनकी कॉलोनियों को वैध नहीं किया जाता तब तक वे वोट नहीं डालेंगे। राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में लोग नेताओं को हर तरह का वायदा करने और उन्हें न पूरा करने पर दोषी ठहरा रहे हैं।

नीमच के एक ग्रामीण महेश राव ने कहते हैं, "वर्ष 2013 में हमारे स्थानीय विधायक ने हमसे वादा किया था कि वह हमारी कॉलोनियों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराएंगे और हमारी कॉलोनियों को अधिकृत घोषित करेंगे लेकिन पांच साल के बाद भी ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। कॉलोनी बने हुए 25 साल हो चुके हैं लेकिन न तो बीजेपी और न ही कांग्रेस ने हमारी किसी भी मांग को पूरा किया। इसके बजाय उन्होंने हमें बार-बार धोखा दिया। इसलिए हम किसी भी नेता को यहां आने नहीं देंगे और न ही हम अपना वोट देंगे।"

विरोध के संकेत के रूप में घरों के बाहर काले झंडे लगाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान नेता उनके इलाके में कैंप लगाते हैं और बड़े-बड़े वादे करते हैं लेकिन उन्हें कभी पूरा नहीं करते हैं। एक अन्य ग्रामीण ने कहा, "हमारे पास उन्हें वोट देने का कोई कारण नहीं है। दो दशकों से अधिक समय गुज़र जाने के बाद भी हम बुनियादी सुविधाओं के लिए भीख मांग रहे हैं। हम दूसरे इलाक़ों से पानी लाते हैं यहां तक कि सीवेज सिस्टम भी यहां ठीक नहीं है।"

न केवल नीमच में बल्कि 50 किलोमीटर दूर मनसौर में जहां पिछले साल किसानों के विरोध प्रदर्शन के चलते पुलिस फायरिंग में छह किसान की मौत हो गई थी वहां सोयाबीन की खेती करने वाले किसान अपनी मांगों को लेकर सरकार के उदासीन रवैये से परेशान हैं। किसानों की शिकायत है कि अच्छी फसल होने के बावजूद उन्हें गिरती कीमतों के चलते घाटे का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों ने भी चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है।

इस बीच विभिन्न स्थानों से बहिष्कार की ख़बर ने चुनाव आयोग और स्थानीय नेताओं को चिंता में डाल दिया है। चुनाव आयोग द्वारा नागरिकों को वोट डालने के लिए प्रोत्साहित करने के लगातार प्रचार के बावजूद ग्रामीणों ने वोट न डालने का फैसला किया है। ऐसे में लोगों की नाराज़गी को भलीभांति समझा जा सकता है।

न्यूज़क्लिक के साथ बात करते हुए मध्यप्रदेश चुनाव आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वीएल कंठ राव ने कहा "राज्य के विभिन्न हिस्सों से बहिष्कार की ख़बर आने के बाद हमने उन स्थानों पर प्रशिक्षित अधिकारियों की टीमों को लोगों को वोट डालने के लिए समझाने को कहा है क्योंकि मतदान का बहिष्कार कोई समाधान नहीं है। यह उनका अधिकार है और उन्हें इसका इस्तेमाल करना चाहिए। यह लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।"

चुनाव आयोग की टीम के दौरे के बाद सोहागपुर के नीमनबुद्ध और सुक्रीखुर्द गांव के निवासी और पिप्रिया में जेनोरा गांव के लोग अपना वोट डालने को राज़ी हो गए हैं लेकिन उन्होंने कहा है कि वे नोटा का इस्तेमाल करेंगे। लेकिन नीमच के निवासी चुनावों का बहिष्कार करने पर अभी भी अड़े हुए हैं।

Madhya Pradesh elections 2018
Shivraj Singh Chouhan
BJP
civic amenities
Boycott elections
Neemanbudha
Sukreekhurd
Neemuch
Sohagpur
election commission of India
election commission

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • रवि शंकर दुबे
    ‘’मुसलमानों के लिए 1857 और 1947 से भी मुश्किल आज के हालात’’
    05 Apr 2022
    ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव रहमानी ने आज के दौर को 1857 और 1947 के दौर से ज़्यादा घातक बताया है।
  • भाषा
    ईडी ने शिवसेना सांसद संजय राउत से संबंधित संपत्ति कुर्क की
    05 Apr 2022
    यह कुर्की मुंबई में एक 'चॉल' के पुनर्विकास से संबंधित 1,034 करोड़ रुपये के कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन की जांच से संबंधित है। 
  • सोनया एंजेलिका डिएन
    क्या वैश्वीकरण अपने चरम को पार कर चुका है?
    05 Apr 2022
    पहले कोरोना वायरस ने एक-दूसरे पर हमारी आर्थिक निर्भरता में मौजूद खामियों को उधेड़कर सामने रखा। अब यूक्रेन में जारी युद्ध ने वस्तु बाज़ार को छिन्न-भिन्न कर दिया है। यह भूमंडलीकरण/वैश्वीकरण के खात्मे…
  • भाषा
    श्रीलंका के नए वित्त मंत्री ने नियुक्ति के एक दिन बाद इस्तीफ़ा दिया
    05 Apr 2022
    श्रीलंका के नए वित्त मंत्री अली साबरी ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। एक दिन पहले राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने अपने भाई बेसिल राजपक्षे को बर्खास्त करने के बाद उन्हें नियुक्त किया था।
  • भाषा
    हरियाणा के मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ मामले पर विधानसभा में पेश किया प्रस्ताव
    05 Apr 2022
    हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मनोहर लाल द्वारा पेश प्रस्ताव के अनुसार, ‘‘यह सदन पंजाब विधानसभा में एक अप्रैल 2022 को पारित प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करता है, जिसमें सिफारिश की गई है कि…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License