NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कला
साहित्य-संस्कृति
भारत
पाकिस्तान
फ़ैज़: हम ने इस इश्क़ में क्या खोया है क्या सीखा है... आजिज़ी सीखी ग़रीबों की हिमायत सीखी
‘इतवार की कविता’ में आज फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की 111वीं सालगिरह और प्यार के दिन वैलेंटाइन्स डे की पूर्व बेला पर पढ़ते हैं फ़ैज़ की यह नज़्म जिसमें वह बात कर रहे हैं अपने रक़ीब से...
न्यूज़क्लिक डेस्क
13 Feb 2022
फ़ैज़: हम ने इस इश्क़ में क्या खोया है क्या सीखा है... आजिज़ी सीखी ग़रीबों की हिमायत सीखी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ जब सियालकोट में रहते थे, उनके घर के सामने एक लड़की रहती जिससे फ़ैज़ को इश्क़ था। एक दिन फ़ैज़ कॉलेज से वापस आये और मालूम हुआ कि वो लड़की शहर छोड़ कर जा चुकी है। रेख़्ता वेबसाइट के मुताबिक़ आग़ा नासिर लिखते हैं कि कई सालों बाद जब फ़ैज़ बेहद मशहूर हो गए थे तब वे सियालकोट आये, और वहाँ उसी लड़की से मुलाकात हुई जो कि उसी वक़्त शहर आई हुई थी। लड़की के शौहर को फ़ैज़ से मिलने की बहुत चाह थी। लड़की ने फ़ैज़ की मुलाकात अपने शौहर से करवाई, वहीं से यह नज़्म ईजाद हुई 'रक़ीब से...'

 

आज फ़ैज़ की 111वीं सालगिरह पर पेश है वही नज़्म 'रक़ीब से...'

 

आ कि वाबस्ता हैं उस हुस्न की यादें तुझ से

जिस ने इस दिल को परी-ख़ाना बना रक्खा था

जिस की उल्फ़त में भुला रक्खी थी दुनिया हम ने

दहर को दहर का अफ़्साना बना रक्खा था

 

आश्ना हैं तिरे क़दमों से वो राहें जिन पर

उस की मदहोश जवानी ने इनायत की है

कारवाँ गुज़रे हैं जिन से उसी रानाई के

जिस की इन आँखों ने बे-सूद इबादत की है

 

तुझ से खेली हैं वो महबूब हवाएँ जिन में

उस के मल्बूस की अफ़्सुर्दा महक बाक़ी है

तुझ पे बरसा है उसी बाम से महताब का नूर

जिस में बीती हुई रातों की कसक बाक़ी है

 

तू ने देखी है वो पेशानी वो रुख़्सार वो होंट

ज़िंदगी जिन के तसव्वुर में लुटा दी हम ने

तुझ पे उट्ठी हैं वो खोई हुई साहिर आँखें

तुझ को मालूम है क्यूँ उम्र गँवा दी हम ने

 

हम पे मुश्तरका हैं एहसान ग़म-ए-उल्फ़त के

इतने एहसान कि गिनवाऊँ तो गिनवा न सकूँ

हम ने इस इश्क़ में क्या खोया है क्या सीखा है

जुज़ तिरे और को समझाऊँ तो समझा न सकूँ

 

आजिज़ी सीखी ग़रीबों की हिमायत सीखी

यास-ओ-हिरमान के दुख-दर्द के मअ'नी सीखे

ज़ेर-दस्तों के मसाइब को समझना सीखा

सर्द आहों के रुख़-ए-ज़र्द के मअ'नी सीखे

 

जब कहीं बैठ के रोते हैं वो बेकस जिन के

अश्क आँखों में बिलकते हुए सो जाते हैं

ना-तवानों के निवालों पे झपटते हैं उक़ाब

बाज़ू तोले हुए मंडलाते हुए आते हैं

 

जब कभी बिकता है बाज़ार में मज़दूर का गोश्त

शाह-राहों पे ग़रीबों का लहू बहता है

आग सी सीने में रह रह के उबलती है न पूछ

अपने दिल पर मुझे क़ाबू ही नहीं रहता है

Faiz Ahmed Faiz
revolutionary poet
urdu poetry about love
poetry of love and revolution

Related Stories

चले चलो कि वो मंज़िल अभी नहीं आई...

हां, हुक्मरान आपको फ़ैज़ और उनकी नज़्म से डरना ही चाहिए...


बाकी खबरें

  • fact check
    पूजा चौधरी
    प्रकाश जावड़ेकर ने कोयला ले जाती ट्रेन का जो वीडियो ट्वीट किया, वो 8 महीने पुराना है
    25 Oct 2021
    राज्यसभा सदस्य और पूर्व पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कोयला ले जा रही एक ट्रेन का वीडियो ट्वीट करते हुए दावा किया कि पॉवर प्लांट्स के कोयले की आपूर्ति के लिए चार इंजन वाली 4 किलोमीटर लंबी रैक…
  • christians
    सबरंग इंडिया
    इस साल ईसाइयों पर 300 से ज्यादा हमले हुए, 2000 से अधिक महिलाएं, आदिवासी और दलित घायल हुए
    25 Oct 2021
    हाल की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्टें बताती हैं कि कैसे ईसाई समुदाय को देश भर में निगरानी, बर्बरता, हमलों और सामाजिक बहिष्कार के साथ निशाना बनाया गया है।
  • Savarkar and Gandhi
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या था गांधी और सावरकर का रिश्ता?
    24 Oct 2021
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन बात की शुरुआत करते हैं राजनाथ सिंह के दावे से कि गाँधी के कहने पर सावरकर ने अंग्रेज़ों को माफ़ी नामा दिया था, और इसके बाद वे सावरकर…
  • fertilizer
    अजय कुमार
    खाद की किल्लत में कहीं सब्सिडी पर खेल न हो जाए?
    24 Oct 2021
    खाद की दुकानों पर ताला लटका है। खाद की मांग है लेकिन खाद नहीं मिल पा रही। इसलिए खाद की कालाबाजारी हो रही है। मगर वाकई देश में खाद कम है। अगर खाद कम है तो क्यों कम है?
  • modi
    विजय विनीत
    मोदी का दौरा: न काशी रहा, न क्योटो बना, बनारस मांग रहा है सात साल का हिसाब
    24 Oct 2021
    दीपावली से पहले सोमवार, 25 अक्टूबर को रैली करने मोदी फिर बनारस आ रहे हैं। वह रिंग रोड के किनारे मेहंदीगंज के कल्लीपुर में 5200 करोड़ की सौगात बांटेंगे। मोदी की रैली से पहले सवालों की गर्मी है, जिसका…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License