NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
कीव में झूठी खबरों का अंबार
प्रथमदृष्टया, रूस के द्वारा अपने सैनिकों के द्वारा कथित अत्याचारों पर यूएनएससी की बैठक की मांग करने की खबर फर्जी है, लेकिन जब तक इसका दुष्प्रचार के तौर पर खुलासा होता है, तब तक यह भ्रामक धारणाओं अपना काम कर चुकी होंगी। 
एम. के. भद्रकुमार
05 Apr 2022
Kyiv
डोंबास में रुसी सेना से लड़ने की तैयारियों में जुटे यूक्रेनी सैनिक 

पिछले एक महीने से कीव के आसपास के क्षेत्रों में रुसी सैनिकों द्वारा किये जा रहे कथित अत्याचारों के आरोपों से नाराज मास्को ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक की मांग की है। प्रथम दृष्टया, यह आरोप एक फेक न्यूज़ लग सकती है, लेकिन जब तक इस बारे में दुष्प्रचार के तौर पर पर्दाफाश होता है तब तक यह गलत धारणाओं को एक सांचे में ढाल चुका होगा।

तास की एक रिपोर्ट कहती है: “रुसी रक्षा मंत्री ने रविवार को बताया कि रुसी सशस्त्र बलों ने कीव क्षेत्र में स्थित, बुचा को 30 मार्च को छोड़ दिया था, जबकि “अपराधों के सुबूत” इसके चार दिन बाद सामने आये, जब यूक्रेनी सुरक्षा सेवा के अधिकारी शहर में पहुंचे थे। मंत्रालय ने जोर देकर कहा है कि 31 मार्च को शहर के मेयर अनातोली फेडोरुक ने एक वीडियो संबोधन में इस बात की पुष्टि की थी कि बुचा में अब कोई रुसी सैनिक नहीं है। हलांकि, उन्होंने उन नागरिकों के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा था, जिन्हें उनके पीठ के पीछे हाथ बांधकर गोली मार दी गई थी।”

इससे भी अधिक आश्चर्य की बात यह है कि इस “ब्रेकिंग न्यूज़” के कुछ ही मिनटों के भीतर पश्चिमी देशों के नेताओं- राष्ट्राध्यक्षों, विदेश मंत्रियों, पूर्व राजनेता – अपने-अपने बयानों के साथ विधिवत रूप से तैयार होकर झटपट प्रकट हो गए, और सिर्फ वीडियो, चंद सेकंड के वीडियो और चंद तस्वीरों के एक समूह को आधार बनाकर आरोप लगाने को तैयार हैं। इस बारे में न ही कोई विशेषज्ञ राय ही ली गई, न ही कोई फॉरेंसिक जांच ही की गई, और न ही अभियुक्तों को सुनवाई का कोई अवसर ही दिया गया।

फ़्रांसिसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने अपने चुनाव अभियान के साथ इस खबर की शुरुआत की, जहाँ वे अगले रविवार को होने वाले मतदान में एक बार फिर से निर्वाचित होने के लिए मरीन ले पेन के साथ कड़े मुकाबले में जूझ रहे हैं, ने कथित रुसी अत्याचारों को “युद्ध अपराध” के रूप में ब्रांड किया है। कुछ इसी तरह का हाल जर्मन चांसलर ओलाफ शुल्ज का भी है, जो खुद को बड़ी मुसीबत में घिरे पा रहे हैं, क्योंकि जर्मनी मार्च में मुद्रास्फीति की दर को +7.3% दर्ज कर रहा है।

संकट में घिरे राजनीतिज्ञों के झूठ-मूठ के हौव्वा खड़ा करने में कुछ भी असामान्य बात नहीं है। मैक्रॉन और शुल्ज जैसे होशियार दिमाग के मालिकों को अब तक अपनी त्रुटिपूर्ण नीतियों का अहसास हो गया होगा, कि कैसे उनकी गलत नीतियों की वजह से उन्हें निर्दयतापूर्वक रूस के हाथों इस प्रकार की रणनीतिक हार की ओर जाना पड़ रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि: इस बिंदु पर आकर आखिर इस प्रकार की नौटंकी करने की जरूरत क्यों है?

यह फेक न्यूज़ इसलिए भी सामने आई है क्योंकि एक सप्ताह के भीतर ही पूर्वी डोनबास क्षेत्र में रुस के  विशेष अभियान का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। जिन 60,000-80,000 यूक्रेनी सैनिकों को तैनात किया गया है, जिन्हें सशस्त्र बलों की सर्वश्रेष्ठ इकाइयों के तौर पर दर्जा हासिल है, डोनबास में चारों तरफ से घिर गए हैं। 

पिछले एक महीने के दौरान कीव में यूक्रेन की सेना को कुचलने में रुसी कृत्रिम आक्रमण की कोशिशें रंग लाई हैं। जब तक कीव के प्रशासनिक ढांचे (और उनके पश्चिमी “सलाहकारों”) के सामने सच्चाई आई, तब तक जो नुकसान होना था वह हो चुका था। इस परिणामी स्थिति की विशालता का क्या व्यापक प्रभाव पड़ने वाला है के लिए कुछ स्पष्टीकरण की जरूरत है।

उपरोक्त नक्शा नोवोस्ती (दुर्भाग्य से, रुसी भाषा में है) से 3 अप्रैल की सटीक जमीनी स्थिति को पुनः प्रस्तुत किया गया है, और इवान एंड्रीव के द्वारा की गई समीक्षा, जो कि एक अनुभवी युद्ध संवावदाता हैं, जिन्होंने सीरिया में रुसी अभियान को कवर किया था, ने डोनबास में कड़ाह को महत्व दिया है, जहाँ पर संख्यात्मक तौर पर यूक्रेनी सेना की कई टुकड़ियां फंसी हुई हैं, जिनको विपक्षी ताकतों द्वारा उनके सैन्य-आधार और अन्य मैत्रीपूर्ण बलों से अलग-थलग कर दिया गया है।

यह कड़ाह काफी बड़ा है, इसे खार्किव की दिशा में डोनबास क्षेत्र के उपरी हिस्सों में नक्शे पर नीली और काली धारियों में चिह्नित किया गया है। एक सप्ताह पूर्व कीव क्षेत्र से भारी संख्या में पीछे हटने वाला रुसी स्तंभ उत्तर में चेर्निहिव और सुमी और खार्किव (पूर्वोत्तर में रुसी सीमा के पास) शहरों को दरकिनार करते हुए उस कड़ाह की ओर एक बड़े वृत्त चाप में प्रबंधन कर रहा है।

यूक्रेनी सेना पूरी तरह से हथियारबंद हैं और उन्होंने खुद को बड़े पैमाने पर मजबूत कर रखा है, लेकिन इस घेरेबंदी से बचकर निकल पाने में असमर्थ है। न ही कीव के लिए यह संभव है कि वह अतिरिक्त सैन्य बल को भेज सके क्योंकि पश्चिम की तरफ ग्रामीण इलाकों के रूप में बड़े पैमाने पर खुले खेत-खलिहान (जो हर तरह से नीपर नदी तक जाता है) हैं। रूसियों के पास हवाई वर्चस्व है और उनकी खोजी निगाहों से दुश्मन की किसी भी हरकत को छिपा पाना असंभव है।

रुसी सेना ने अपने अभियान के पहले चरण के माध्यम से सभी आस-पास के हवाई अड्डों को संचालन योग्य नहीं छोड़ा है और पास के यूक्रेनी तेल के भंडारों को सुनियोजित तरीके से नष्ट कर डाला है। जैसा कि मैंने तीन दिन पहले ही अपने पिछले ब्लॉग में लिखा था, कि रुसी सेना ने एक विनाशकारी आधात दिया है: “मुख्य रूप से, मध्य पोल्टावा क्षेत्र में मिर्गोरोड़ सैन्य हवाई क्षेत्र को, जो कि रणनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण केंद्र था, को संचालन से बाहर कर दिया गया है और साथ ही कई यूक्रेनी लड़ाकू हेलीकॉप्टरों और विमान इसके छलावे वाले कार पार्किंग में पाए गये हैं, और इसके साथ-साथ ईंधन और विमानन हथियारों के डिपो को नष्ट कर दिया गया है।”

इसी प्रकार, खार्कीव को घेर लिया गया और “गुरूवार को शहर में रक्षा मुख्यालय पर इस्कंदर ऑपरेशनल-टैक्टिकल मिसाइलों के साथ एक बेहद-सटीक हमले में, “100 से अधिक राष्ट्रवादियों और पश्चिमी देशों से आये भाड़े के आतंकवादियों” के मारे जाने की पुष्टि की गई थी।”

बहरहाल- उम्मीद है कि यूक्रेनी सेना आत्मसमर्पण करने के बजाय अच्छी टक्कर देगी- हालांकि यह चरों तरफ से घिरी हुई है, बिना किसी हवाई कवर के, और जंग में शामिल होने के लिए इसके पास शक्तियों को रोटेट करने या पर्याप्त ईंधन की गुंजाइश नहीं है और साथ ही गोला-बारूद तेजी से खत्म हो रहा है। 

इतना तो तय है कि जल्द ही एक बड़ी लड़ाई शुरू होने जा रही है, जो कि अब तक के समूचे रुसी विशेष अभियान में सबसे निर्णायक होने जा रहा है। मुश्किल सिर्फ यह है कि, इस कड़ाह में जातीय रुसी आबादी (रुसी पासपोर्ट धारकों सहित) की भी बहुतायत में बस्तियां हैं। नागरिकों के हताहत होने या नागरिक बुनियादी ढाँचे के विनाश से बचने के लिए इस आक्रमण को लंबे समय तक बड़े ही धैर्य के साथ संपन्न करना होगा। 

कहने का तात्पर्य यह है कि चरण 2 के पूरा होने में एक महीने या इसके आसपास का समय लग सकता है। कोई गलती न करें, यहाँ पर रूसियों को हर हाल में जीतना है (जिसे वे हासिल कर लेंगे) क्योंकि वे यूक्रेनी सशस्त्र बलों की कमर तोड़ देंगे। ज़ेलेंस्की की तमाम धमकियों के बावजूद, कीव को अपनी हार की विशालता का अहसास अवश्य होगा, और उसके पश्चिमी आकाओं को भी दीवार पर लिखी हुई इबारत साफ़-साफ़ नजर आ रही होगी। 

इसे सुनिश्चित करने के लिए, आगे पूरा एक महीना पड़ा है जहाँ पश्चिमी रणनीति लगातार खुद को फेक न्यूज़ को तैयार करने में लगा देगी, और सूचना युद्ध को तेज करेगी। यहाँ तक कि पश्चिमी ख़ुफ़िया अधिकारियों की देखरेख के तहत कुछ झूठे फ्लैग ऑपरेशन भी आयोजित किये जा सकते हैं।

सबसे बदतरीन स्थिति में, हो सकता है कि कीव रासायनिक हथियारों वाले अपने अंतिम दावं को भी खेल सकता है। रूस ने इन ठिकानों जा ब्यौरा प्रसारित किया है जहाँ यूक्रेन ने रासायनिक हथियारों के जखीरे को जमा कर रखा है। जैसा कि पता है कि अमेरिका ने पहले से ही सैन्य सहायता के तौर पर विशेष उपकरण (गैस मास्क, सुरक्षात्मक कपड़े आदि) की आपूर्ति कर रखी है ताकि रासायनिक हथियारों से निपटा जा सके और समूहिक सुरक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षण दे रखा है।

मैक्रॉन और शुल्ज ने जिस तत्परता के साथ फेक न्यूज़ का सेवन किया है, वह सूचना युद्ध में एक नए चरण के अग्रदूत के तौर पर है। संक्षेप में कहें तो पेरिस और बर्लिन में इस बीच एक शांत जागृति की स्थिति है कि रुसी अभियान सफलतापूर्वक अपने निर्धारित उद्देश्यों को के के बाद एक पूरा कर रहा है।

टीएस इलियट ने अपनी सर्वोत्कृष्ट रचना, द वेस्टलैंड में “अप्रैल” के बारे में लिखा है, यह “सबसे क्रूर महीना है, मृत भूमि से लिलेक के प्रजनन का समय, स्मृति और इच्छा का मिश्रण, वसंत की बारिश के साथ बेजान जड़ों में सरगर्मी।” लेकिन इस साल के “अप्रैलनुमा” की काली विडंबना यह होने जा रही है कि यहाँ की उर्वरता और नवीनीकरण को रूस के पुनरुत्थान के बारे में दुनिया के इतिहास और मिथक दोनों ही में, पश्चिमी मस्तिष्कों के द्वारा तैयार किया जायेगा।

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे गए लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

Fake News in Kiev Heralds ‘Cruel’ April

United Nations Security Council
Russian troops
Ukrainian Security Service
Emmanuel Macron
Ukrainian forces

Related Stories

मैक्रों की जीत ‘जोशीली’ नहीं रही, क्योंकि धुर-दक्षिणपंथियों ने की थी मज़बूत मोर्चाबंदी

फ्रांस में मैक्राँ की जीत से दुनियाभर में राहत की सांस

माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है

AUKUS पर हंगामा कोई शिक्षाप्रद नज़ारा नहीं है

काकेशस में रूसी शांति व्यवस्था को फ़्रांस की चुनौती क्यों

फ़्रांस : पुलिस को अधिक अधिकार देने वाले बिल के ख़िलाफ़ भारी विरोध जारी

फ़्रांस के इम्मानुएल मैक्रॉन की सोच के पीछे का सच

बीच बहस : फ्रांस ; कार्टून और हत्या : अभिव्यक्ति की आज़ादी और आहत भावना

ग्रीन-लेफ़्ट पार्टी फ्रांस के स्थानीय निकाय चुनावों में बड़ी जीत की ओर

यूरोपीय संघ अपनी सुरक्षा नीति में अमेरिकी हस्तक्षेप कम करना चाहता है


बाकी खबरें

  • Purvanchal in protest against Lakhimpur incident
    विजय विनीत
    लखीमपुर कांड के विरोध में पश्चिमी से लेकर पूर्वांचल तक आंदोलन, धरना-प्रदर्शन
    04 Oct 2021
    पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में संयुक्त किसान मोर्चा जमकर प्रदर्शन किया। किसानों को उपद्रवी करार देने पर बनारस से निकलने वाले अखबार की प्रतियां भी फूंकी। मोदी के गोद लिए गांव नागेपुर…
  • Abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसानों में आक्रोश, प्रियंका अखिलेश का हल्लाबोल
    04 Oct 2021
    'न्यूज चक्र' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा, लखीमपुर खीरी में हुई 4 किसानों की हत्या पर बात कर रहे हैं, साथ ही बीजेपी के नेताओं के द्वारा किसानों के प्रति हिंसा के लिए उकसाए जाने और…
  • Analysing India’s Climate Change Policy
    सिद्धार्थ चतुर्वेदी
    भारत की जलवायु परिवर्तन नीति का विश्लेषण
    04 Oct 2021
    भारत की जलवायु परिवर्तन नीति की शुरुआत 2008 से मानी जा सकती है, जब जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री की परिषद (परिषद) द्वारा जलवायु परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) की घोषणा की गई थी। 
  • Rakesh Tikait
    असद रिज़वी
    लखीमपुर कांड: किसानों के साथ विपक्ष भी उतरा सड़कों पर, सरकार बैकफुट पर आई, न्यायिक जांच और एफआईआर की शर्त पर समझौता
    04 Oct 2021
    कई घंटे चली बातचीत के बाद किसान नेता राकेश टिकैत की मौजूदगी में सरकार और किसानों के बीच समझौता हो गया है। प्रत्येक मृतक के परिवार को 45 लाख के मुआवजे के अलावा घटना की “न्यायिक जांच” और 8 दिन में…
  • resident doctors' strike
    सोनिया यादव
    महाराष्ट्र: रेज़िडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल और सरकार की अनदेखी के बीच जूझते आम लोग
    04 Oct 2021
    महाराष्ट्र में लगभग सभी मेडिकल कॉलेज के करीब 5 हजार से अधिक रेसिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर हैं। उनका दावा है कि वे पिछले छह महीने से सरकार तक अपनी मांगों को पहुंचाने में लगे हैं। लेकिन सरकार उनकी बातों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License