NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
प्रतिबंधों से बचते हुए गुजरात के किसान अपने वेश बदलकर दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर हो रहे विरोध में शामिल होने के लिए निकले  
जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कच्छ में कहा कि राज्य सरकार द्वारा घर में नज़रबंद किये गये किसानों को पुलिस से और दिल्ली के पास हो रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से बचाने के लिए छुपाकर रखा गया है।
दमयन्ती धर
18 Dec 2020
protest

जैसा कि हम जानते हैं कि इस समय किसान केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ ख़ास तौर पर दिल्ली की सीमाओं पर देशव्यापी आंदोलन कर रहे हैं,ऐसे में गुजरात सरकार ने राज्य भर में धारा 144 लागू की हुई है और किसी भी तरह के विरोध को रोके हुआ है। गुजरात के पुलिस महानिदेशक (DGP),आशीष भाटिया ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की,जिसमें उन्होंने इस बात का ऐलान किया कि किसी भी तरह के हलचल या विरोध को लेकर सोशल मीडिया पर की जाने वाली पोस्ट से गिरफ़्तारी होगी।

राज्य सरकार की तरफ़ से जारी उस ऐलान के बाद किसानों के विरोध के समर्थन में फ़ेसबुक पर एक पोस्ट लिखने के चलते वडोदरा के एक शख़्स,सैलेश परमार को गिरफ़्तार कर लिया गया। उन्हें भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के बीच धारा 153 बी के तहत "भड़काऊ पोस्ट" लिखने को लेकर आरोपित किया गया।

इसके बाद,गुजरात भर में कई किसानों और किसान नेताओं,जिन्होंने उत्तर भारत में चल रहे विरोध को समर्थन दिया था,उन्हें नज़रबंद कर दिया गया। कुछ दिनों बाद,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों से बात करने के लिए मंगलवार को कच्छ पहुंचे,तक़रीबन 150 किसानों के एक समूह ने दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ख़ुद का वेश बदलकर पुलिस को छकाने में कामयाब रहे।

विरोध में शामिल होने की ख़ातिर वेश बदले

पालभाई अम्बालिया,जयेश पटेल और याकूब गुरजी ने अन्य किसान अधिकार कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर गुजरात किसान संघर्ष समिति नामक एक संगठन का गठन किया था। इस संगठन ने इस साल 6 दिसंबर को उत्तर भारत में किसानों की ओर से बुलाये गये भारत बंद को लामबंद करने और समर्थन करने के लिए किसानों से आह्वान किया था।

गुजरात किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों के लिए संघर्ष करने वाले 23 संगठन के लोग 11 दिसंबर को गांधीनगर में ‘खेड़ुत संसद’ के आयोजन को लेकर एक बैठक करने वाले थे, जिसमें राज्य भर से तक़रीबन दो हज़ार किसानों की भागीदारी की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन,उन्हें इसके लिए अनुमति नहीं मिली।

गुजरात किसान कांग्रेस नामक एक किसान संस्था के अध्यक्ष,पालभाई अंबालिया ने बताया,“राज्य सरकार ने गांधीनगर में खेड़ुत संसद को आयोजित करने को लेकर हमें अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसमें हमें उम्मीद थी कि कम से कम दो हज़ार किसान और कृषि कार्यकर्ता जुटेंगे। लेकिन,सरकार ने 10 दिसंबर से राज्य भर के किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। इसके बाद,हमने निजी तौर पर राज्य से बाहर जाने और विरोध स्थल पर पहुंचने का फ़ैसला किया।”

अम्बालिया ने आगे बताया,“मेरा सारा जीवन पारंपरिक गुजराती पोशाक पहने गुज़रा है,लेकिन मुझे अपनी गिरफ़्तारी से बचने और राज्य से बाहर जाने के लिए अपना वेश तक बदलना पड़ा। मैंने अपना सिर मुंडवा लिया, जीन्स और शर्ट पहनी और गुजरात की सीमा पार कर राजस्थान के उदयपुर पहुंच गया, जहां से हम आख़िरकार जयपुर दिल्ली राजमार्ग पर पहुंचे।”

एक अन्य किसान संगठन,गुजरात खेडूत समाज के अध्यक्ष,जयेश पटेल ने कहा कि गुजरात के किसानों के संगठनों ने 1 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने का फ़ैसला किया था। उन्होंने बताया,"गुजरात खेडूत समाज के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने सम्बन्धित़ ज़िला कलेक्टरों को एक ज्ञापन सौंपा था,जिसमें तीन केंद्रीय कृषि क़ानूनों को वापस लेने की मांग की गयी थी और विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों पर पानी की बौछारें और आंसू गैस के गोले जैसे तरीक़ों के इस्तेमाल को बंद करने की मांग की गयी थी।"

पटेल ने बताया,"3 दिसंबर (ज्ञापनों के सम्बन्ध में) पर किसी तरह के फ़ैसले नहीं लिये जाने की स्थिति में हमने तय कर लिया था कि हम मार्च करेंगे और उत्तर भारत में प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ शामिल हो जायेंगे।"

कथित तौर पर तक़रीबन 500 किसानों का एक समूह राज्य से बाहर निकलने और दिल्ली के पास प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने के लिए कमर कस रहा है।

गुजरात के एक किसान अधिकार कार्यकर्ता ने बताया, “किसान के अधिकारों को लेकर काम करने वाले 16 से ज़्यादा कार्यकर्ता और नेता गुजरात में नज़रबंद हैं। ज़्यादातर लोग पुलिस की नज़रों से नहीं बच पाये और राज्य की सीमाओं को पार नहीं कर सके। इसके बावजूद, हम में से तक़रीबन 150 लोग विरोध स्थल पर पहुंच चुके हैं। कई लोग आने वाले दिनों में पहुंचने की योजना बना रहे हैं।”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/evading-restrictions-gujarat-farmers-leave-disguise-join-protest-delhi-jaipur-highway

Farmer protest
farmer protest in gujrat
Farm Laws
farmer disguise
narendra modi in kutch
delhi-jaipur highway

Related Stories

पंजाब: आप सरकार के ख़िलाफ़ किसानों ने खोला बड़ा मोर्चा, चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर डाला डेरा

ख़बर भी-नज़र भी: किसानों ने कहा- गो बैक मोदी!

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

कृषि क़ानूनों के निरस्त हो जाने के बाद किसानों को क्या रास्ता अख़्तियार करना चाहिए

वे तो शहीद हुए हैं, मरा तो कुछ और है!

साम्राज्यवाद पर किसानों की जीत

यह जीत भविष्य के संघर्षों के लिए विश्वास जगाती है

किसान मोदी को लोकतंत्र का सबक़ सिखाएगा और कॉरपोरेट की लूट रोकेगा: उगराहां

एमएसपी भविष्य की अराजकता के ख़िलाफ़ बीमा है : अर्थशास्त्री सुखपाल सिंह

किसान-आंदोलन ने इस देश को बदल दिया


बाकी खबरें

  • रवि शंकर दुबे
    ‘’मुसलमानों के लिए 1857 और 1947 से भी मुश्किल आज के हालात’’
    05 Apr 2022
    ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव रहमानी ने आज के दौर को 1857 और 1947 के दौर से ज़्यादा घातक बताया है।
  • भाषा
    ईडी ने शिवसेना सांसद संजय राउत से संबंधित संपत्ति कुर्क की
    05 Apr 2022
    यह कुर्की मुंबई में एक 'चॉल' के पुनर्विकास से संबंधित 1,034 करोड़ रुपये के कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन की जांच से संबंधित है। 
  • सोनया एंजेलिका डिएन
    क्या वैश्वीकरण अपने चरम को पार कर चुका है?
    05 Apr 2022
    पहले कोरोना वायरस ने एक-दूसरे पर हमारी आर्थिक निर्भरता में मौजूद खामियों को उधेड़कर सामने रखा। अब यूक्रेन में जारी युद्ध ने वस्तु बाज़ार को छिन्न-भिन्न कर दिया है। यह भूमंडलीकरण/वैश्वीकरण के खात्मे…
  • भाषा
    श्रीलंका के नए वित्त मंत्री ने नियुक्ति के एक दिन बाद इस्तीफ़ा दिया
    05 Apr 2022
    श्रीलंका के नए वित्त मंत्री अली साबरी ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। एक दिन पहले राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने अपने भाई बेसिल राजपक्षे को बर्खास्त करने के बाद उन्हें नियुक्त किया था।
  • भाषा
    हरियाणा के मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ मामले पर विधानसभा में पेश किया प्रस्ताव
    05 Apr 2022
    हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मनोहर लाल द्वारा पेश प्रस्ताव के अनुसार, ‘‘यह सदन पंजाब विधानसभा में एक अप्रैल 2022 को पारित प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करता है, जिसमें सिफारिश की गई है कि…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License