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ग़ाज़ीपुर धरना स्थल खाली करने के आदेश, पुलिस और किसान आमने सामने; राकेश टिकैत ने कहा धरना जारी रहेगा
गाज़ीपुर बॉर्डर पर पिछले 60 से अधिक दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों को गाज़ियाबाद पुलिस ने आज रात धरना स्थल छोड़ने की चेतवानी दी है। इससे पहले कल बुधवार रात को वहां की बिजली काट दी गई थी और पानी सप्लाई भी रोक दी गई थी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
28 Jan 2021
farmers protest

दिल्ली: बुधवार रात और गुरवार के दिन में अचानक पुलिस प्रशासन के लोग किसान आंदोलन को समाप्त करने पर तुले हुए हैं। गाजीपुर बॉर्डर पर पिछले 60 से अधिक दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों को गाज़ियाबाद पुलिस ने आज रात में धरना स्थल छोड़ने की चेतवानी दी है। इससे पहले कल बुधवार रात को वहां की बिजली काट दी ,पानी सप्लाई को रोक दिया और सुबह कुछ रिपोर्ट के मुतबिक शौचालयों को भी बंद कर दिया था।  

इसके साथ ही भारतीय किसान यूनियन के नेता और इस मोर्चे के नेतृत्वकारी राकेश टिकैत के खिलाफ नोटिस दिया गया है। साथ ही उनके गिरफ़्तारी की भी उम्मीद की जा रही है। परन्तु राकेश टिकैत ने साफ किया कुछ भी हो जाए वो धरना स्थल नहीं छोड़ेंगे। उनके साथ अभी वहां हज़ारों किसान बैठे हुए हैं। सभी का कहना है कि  पुलिस जेल में डाल दे लेकिन हम अपना आंदोलन नहीं छोड़ेंगे।

राकेश टिकैत ने कहा कि बीजेपी के लोग गुंडागर्दी कर रहे हैं, आंदोलन जारी रखो।  उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए गुरुवार की शाम को कहा कि कुछ हुआ तो प्रशासन जिम्मेदार होगा। राकेश टिकैत ने कहा कि बीजेपी के लोग गुंडागर्दी कर रहे हैं।
वहां स्थति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है , लेकिन  आंदोलनकारी किसानों के हौसलें पूरी तरह बुलंद है। उनका कहना है पुलिस अगर  गिरफ़्तार करेगी तो इससे बड़ा जनसैलब पीछे गाँवो से यहां आएगा।

यह सिर्फ गाजीपुर पर नहीं हुआ है बल्कि उत्तर प्रदेश के बागपत में 40 दिनों से शांतपूर्ण रूप से प्रदर्शन कर रहे  किसानों को  बुधवार रात बल प्रयोग करके हटा दिया गया। 

इसी तरह हरियाणा पुलिस ने भी सिंघु और टिकरी बॉर्डर को छोड़कर पुरे राज्य के टोल और बाकि अन्य जगहों पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने का काम कर रही है।  वहां भी टिकरी बार्डर और सिंघु पर इस वक़्त दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्सेज की संख्या को बढ़ा दिया गया है। बड़ी संख्या में BSF, CRPF के जवान तैनात हैं।

इस सबके पीछे केंद्र सरकार 26 जनवरी के दिन हुए लाल क़िले की घटना की आड़ ले रही है।  किसान नेताओं ने उसी दिन साफ कर दिया था कि हिंसा से उनका कोई लेना देना नहीं है। सभी किसानों ने उस घटना की निंदा की थी।  हालांकि इस पूरे घटना को लेकर पुलिस और केंद्र सरकार पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 

आपको बता दे ये किसान पांच महीने तक पंजाब और पिछले दो महीने से अधिक से दिल्ली के बॉर्डर पर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे थे।  इसमें कोई भी हिंसा नहीं हुई, जो झुटपुट घटना भी हुई, उसमें पुलिस से झड़प थी।  26 जनवरी के दिन की ही बात करें तो पूरे देश में ऐतिहसिक किसान परेड हुई और दिल्ली में लाखों ट्रैक्टरों द्वारा मार्च किया गया।  इतने बड़े आंदोलन में एक लाल किले के अपवाद को छोड़ दें तो पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण ही रहा है।  

Ghazipur protest site
Power Cut Ghazipur Border
farmers protest
Anti Farm Laws

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