NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
जनसंवाद: बच्चों की देखरेख और सुरक्षा को राजनीतिक एजेंडे में शामिल करने की मांग
दिल्ली में लगभग 93 प्रतिशत लोग असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं। परिवार का भरण पोषण करने के लिए महिला-पुरूष दोनों को काम पर जाना पड़ता है। उनके पीछे बच्चे दुर्घटना, यौन शोषण, गुम होना जैसे हादसों के शिकार हो जाते है और देखरेख के आभाव में कुपोषित और बीमार रहते हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Dec 2019
jansanwad

दिल्ली :“मैं अपने 2 छोटे बच्चों को अपनी बुजुर्ग सास के भरोसे छोड़ कर काम पर जाती हूँ, जबकि उनको स्वयं देखरेख की ज़रूरत है, पर कोई बाल देखरेख व्यवस्था न होने के कारण उनके पास बच्चे छोड़ने को मजबूर हूँ।” यह बात ओखला से आई एक महिला ने रखी।

इसी तरह अपनी 8 माह की बच्ची के साथ आईं रूमिना ने बताया कि वह पहले काम करती थीं पर बेटी के जन्म के बाद उन्हें काम छोड़ना पड़ा क्योंकि उनके पास किसी तरह की बाल देखरेख व्यवस्था नहीं है।दिल्ली में महिलाओं के लिए बाल देखरेख की व्यवस्था न होना एक बड़ी समस्या है।

bhavan.JPG

छोटे बच्चों की देखरेख एवं सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को लेकर दिल्ली की लगभग 50 शहरी गरीब बस्तियों से 1000 समुदाय महिला प्रतिनिधियों ने “राज्य स्तरीय जनसंवाद" में भागीदारी की।यह जनसंवाद मंगलवार, 10 दिसम्बर को, दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के मावलंकर हाॅल में 'नींव दिल्ली फोर्सेस' के सहयोग से आयोजित हुआ।

इस कार्यक्रम में समुदाय के लोगों ने अपने अनुभव एवं मांग को साझा किया ताकि छोटे बच्चों की देखरेख एवं सुरक्षा से संबंधित मुद्दे भी राजनीतिक पार्टियों के घोषणा पत्र में शामिल हो सके। 

समुदाय की आवाज़ को सुनने के लिए दिल्ली सरकार की ओर से प्रतिनिधि निशा सिंह (सलाहाकार-उप मुख्यमंत्री), रीटा सिंह (सदस्य, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग) अरविन्द्र सिंह (राष्ट्रीय अध्यक्ष, कांग्रेस असंगठित मजदूर संगठन) व दिल्ली की बस्तियों में कार्यरत लगभग 40 गैर सरकारी संगठन प्रतिनिधि एवं बच्चों और महिलाओं के मुद्दों पर कार्यरत नेटवर्क एवं विशेषज्ञों देविका सिंह, अमृता जैन, गौरी चौधरी, रीना बनर्जी, अंजली भारद्वाज, अशोक झा, थानेश्वर दयाल आदिगौड़, चिराश्री घोष ने भागीदारी की।

दिल्ली सरकार की प्रतिनिधि निशा सिंह ने दिल्ली में आंगनवाड़ी सेवाओं में सुधार को साझा किया और आश्वासन दिया कि छोटे बच्चों की देखरेख की व्यवस्था आंगनवाड़ी में ही सुनिश्चित हो सके। रीटा सिंह ने मुद्दे का समर्थन किया है और आश्वासन दिया कि आयोग के माध्यम से सरकार तक इन बातों को पहुँचाएंगी। 

अरविन्द्र सिंह ने लोगों से वादा किया कि वह दिल्ली कांग्रेस के राजनीतिक घोषणा पत्र में इन मुद्दों को जरूर शामिल करवाएंगे।

आपको बता दें कि दिल्ली में लगभग 93 प्रतिशत लोग असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं। परिवार का भरण पोषण करने के लिए महिला-पुरूष दोनों को काम पर जाना पड़ता है। उनके पीछे बच्चे दुर्घटना, यौन शोषण, गुम होना जैसे हादसों के शिकार हो जाते है और देखरेख के आभाव में बच्चे कुपोषित और बीमार रहते हैं। इसका सीधा असर बच्चों के सर्वांगीण विकास पर पड़ता है। साथ ही बड़े भाई बहन अपने छोटे भाई-बहनों की देखरेख की जिम्मेदारी के कारण शिक्षा के अधिकार से भी वंचित रह जाते हैं।

हम सब जानते है कि पहले 6 वर्ष मानव जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं। 90 प्रतिशत मस्तिष्क की कोशिकाओं का विकास इसी आयु में हो जाता है। इस आयु में बच्चों के साथ हुई इस तरह की घटनाओं का असर उनके पूरे जीवन काल पर पड़ता है। 

दिल्ली के सरकारी आंकड़े भी इस स्थिति को बताते हैं कि हर चौथा बच्चा अपनी आयु अनुसार कम वजन का है और आधे से भी ज्यादा बच्चों में खून की कमी हैं। दिल्ली की शहरी बस्तियों में स्थिति और भी गंभीर है पर आज भी छोटे बच्चों के सवाल न तो राजनीतिक दलों के एजेंडे में है और न ही सरकारें गंभीर रहीं है।

बच्चों के लिए सरकार द्वारा चल रही केवल एक मात्र सेवा ‘‘समेकित बाल विकास परियोजना‘‘ (आई.सी.डी.एस) है जिसके अंतर्गत दिल्ली में 10897 आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 42 प्रतिशत बच्चे ही सम्मिलित हैं जिसके कारण आज भी कई जरूरतमंद बच्चे इस योजना का फायदा नहीं ले पा रहे हैं। यह केंद्र भी केवल 4 घंटे के लिए ही खुलते हैं। 

राष्ट्रीय ई.सी.सी.ई. नीति में आंगनवाड़ी सह क्रैश एवं राष्ट्रीय क्रैश योजना के अन्तर्गत बाल देखभाल केंद्र का प्रावधान भी है परन्तु अभी तक पूरी दिल्ली में वर्ष 2016 में दिल्ली सरकार द्वारा उठाये गये ठोस कदम के तहत अब तक 23 आंगनवाड़ी सह क्रैश ही दो जिलों में खोले गये हैं।

अभी तक दिल्ली में राष्ट्रीय क्रैश योजना एवं आंगनवाड़ी सह क्रैश से सरकारी 164 झूलाघर है जिसकी पहुँच मात्र 4000 बच्चों तक है। आज भी शहरी बस्तियों में परिवारों के लगभग 5 लाख बच्चों की देखरेख और सुरक्षा एक चिंता का विषय बना हुआ है।

दिल्ली फोर्सेस नींव, दिल्ली की शहरी बस्तियों में कार्यरत 40 स्वयंसेवी संस्थाओं का एक अनौपचारिक समूह है जो दिल्ली की स्लम एवं पुनर्वास 120 बस्तियों में 1,50000 परिवारों के साथ छोटे बच्चों के अधिकारों के लिए सन् 2001 से काम कर रहा है।  इसकी मुख्य मांगें हैं-

सभी महिलाओं को 6 महीने तक बिना शर्त मातृत्व हक मिले।सभी बच्चों के सम्पूर्ण विकास व देखरेख के लिए क्रैश का अधिकार मिले एवं उसकी उचित व्यवस्था हो।सभी महिलाओं के काम को पहचान, सम्मान एवं उचित दाम मिले। 

state level people meet on child creche
new delhi foundation
child welfare
ICDS
forum for creche and child care service

Related Stories

सिकुड़ते पोषाहार बजट के  त्रासद दुष्प्रभाव

लॉकडाउन ने कैसे छीना बच्चों के मुँह से पोषक आहार

क्या यूपी-बिहार में बाल कुपोषण को ख़त्म किया जा सकता है?


बाकी खबरें

  • असद रिज़वी
    CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा
    06 May 2022
    न्यूज़क्लिक ने यूपी सरकार का नोटिस पाने वाले आंदोलनकारियों में से सदफ़ जाफ़र और दीपक मिश्रा उर्फ़ दीपक कबीर से बात की है।
  • नीलाम्बरन ए
    तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है
    06 May 2022
    रबर के गिरते दामों, केंद्र सरकार की श्रम एवं निर्यात नीतियों के चलते छोटे रबर बागानों में श्रमिक सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।
  • दमयन्ती धर
    गुजरात: मेहसाणा कोर्ट ने विधायक जिग्नेश मेवानी और 11 अन्य लोगों को 2017 में ग़ैर-क़ानूनी सभा करने का दोषी ठहराया
    06 May 2022
    इस मामले में वह रैली शामिल है, जिसे ऊना में सरवैया परिवार के दलितों की सरेआम पिटाई की घटना के एक साल पूरा होने के मौक़े पर 2017 में बुलायी गयी थी।
  • लाल बहादुर सिंह
    यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती
    06 May 2022
    नज़रिया: ऐसा लगता है इस दौर की रणनीति के अनुरूप काम का नया बंटवारा है- नॉन-स्टेट एक्टर्स अपने नफ़रती अभियान में लगे रहेंगे, दूसरी ओर प्रशासन उन्हें एक सीमा से आगे नहीं जाने देगा ताकि योगी जी के '…
  • भाषा
    दिल्ली: केंद्र प्रशासनिक सेवा विवाद : न्यायालय ने मामला पांच सदस्यीय पीठ को सौंपा
    06 May 2022
    केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच इस बात को लेकर विवाद है कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासनिक सेवाएं किसके नियंत्रण में रहेंगी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License