NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव वाले चार राज्य: कौनसा एक राज्य है, जिसे लोगों की परवाह है?
असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में हालिया बजट आवंटन इस बात का साफ़ दिखाता है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और अन्य सामाजिक सरोकारों को लेकर इन राज्यों में अग्रणी राज्य कौन है।  
सुबोध वर्मा
15 Mar 2021
चुनाव वाले चार राज्य: कौनसा एक राज्य है, जिसे लोगों की परवाह है?
फ़ोटो: साभार: विकिमीडिया कॉमन्स

ख़ास तौर पर इन दिनों राज्य सरकार चलाना एक जटिल कार्य इसलिए है क्योंकि भारत में एक ऐसी मग़रूर केंद्र सरकार है जो सभी राजकोषीय और प्रशासनिक शक्तियों को केंद्रीकृत करने पर अमादा है। और अक्सर उन राज्यों को लेकर भेदभावपूर्ण तरीक़े से कार्य करती है, जो अलग राजनीतिक नज़रिया रखते हैं।

हालांकि, राज्य सरकार को उस तरह चला पाना मुमकिन है जिससे कि लोगों के कल्याण को केंद्र में रखा जा सके और इस बात को सुनिश्चिय करते हुए बेहद चौकन्ना रहे कि लोगों के जीवन स्तर में सुधार को लेकर जो कुछ किया जा सकता है, वह ज़मीन पर उतर सके। विभिन्न राज्यों के हालिया पारित बजट इस बात की झलक देते हैं कि राज्य सरकारों की प्राथमिकतायें क्या हैं और ये  सरकारें इन अहम क्षेत्रों में कितने पैसे लगा रहे हैं।

चार हफ़्तों के भीतर जिन चार प्रमुख राज्यों में चुनाव होने हैं, उनके 2021-22 के पारित बजट के बीच तुलना करने पर एक दिलचस्प तस्वीर सामने आती है। वाम और लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के नेतृत्व वाली केरल की राज्य सरकार दलितों,  आदिवासियों और अन्य पिछड़ी जातियों और अल्पसंख्यकों के स्वास्थ्य,  शिक्षा और कल्याण पर ख़र्च करने के मामले में साफ़ तौर पर अग्रणी है। केरल के मुक़ाबले तमिलनाडु कृषि और ग्रामीण विकास पर थोड़ा ज़्यादा ख़र्च करता है,  लेकिन यह भी तो है कि केरल में कृषि क्षेत्र बहुत छोटा है।

सटीक तुलना करने के लिए न्यूज़क्लिक ने एक-एक राज्य में प्रति व्यक्ति ख़र्च की गणना की है। केरल और असम की आबादी तक़रीबन 3.5 करोड़ है, जबकि तमिलनाडु की आबादी 7.6 करोड़ और पश्चिम बंगाल की 9.75 करोड़ है। ये आबादी, नई दिल्ली स्थित जनगणना कार्यालय की तरफ़ से लगाया गया 2021 के लिए जनसंख्या अनुमान हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य: केरला आगे, बंगाल पीछे

जैसा कि नीचे दिखाया गया है, राज्य सरकार की ओर से शिक्षा पर प्रति व्यक्ति सबसे ज़्यादा ख़र्च (6, 702रुपये) करने वाला राज्य केरल  और इस मामले में सबसे कम ख़र्च (4, 402रुपये) करने वाला राज्य ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस शासित पश्चिम बंगाल है। ज़्यादातर स्कूली शिक्षा, व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा भी राज्य सरकारों के अधीन ही आती है। हाल के सालों में केरल ने सरकार द्वारा संचालित स्कूलों को ग़ज़ब तरीक़े से बदल दिया है,  जिससे इन स्कूलों का नामांकन बढ़ रहा है।

स्वास्थ्य पर भी केरल में सबसे ज़्यादा ख़र्च (1919 रुपये) हुआ है, इसके बाद (2513 रुपये के साथ) तमिलनाडु  का स्थान है। इस लिहाज़ से पश्चिम बंगाल ख़ास तौर पर पिछड़ा हुआ है, जहां स्वास्थ्य पर व्यक्ति महज़ 1, 308 रुपये खर्च किया जाता है, जो केरल के ख़र्च से आधे से भी कम है। पिछले कुछ सालों में केरल ने वायरस (कोरोना और इससे पहले निपा) या फिर 2018 और 2019 के विनाशकारी बाढ़ जैसे कई स्वास्थ्य आपदाओं का सामना किया है। इनके बावजूद, राज्य सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का विस्तार करना और उसे मज़बूती देना जारी रखे हुआ है। इससे कोविड-19 के बहुत सारे मामले होने के बावजूद यहां मृत्यु दर में साफ़ तौर पर कम दिखायी देती रही है।

अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति और दूसरे वंचित तबक़े

जैसा कि नीचे दिये गये चार्ट में प्रति व्यक्ति ख़र्च में दिखाया गया है कि केरल की एलडीएफ़ सरकार दलितों,  आदिवासियों,  ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण पर ख़र्च करने के मामले में अग्रणी है। असम में 857 रुपये और पश्चिम बंगाल में महज़ 612 रुपये के मुक़ाबले केरल ने 907 रुपये प्रति व्यक्ति ख़र्च किये हैं। इन सभी चार राज्यों में इन तबकों में से कोई न कोई बड़ा समुदाय रहता है।

भले ही चुनाव के वक़्त इनकी चिंताओं की बात की जाती हो, मगर धरातल पर होते काम के लिहाज़ से यह कथित चिंता "सोशल इंजीनियरिंग" के एकदम उलट है। ये चुनावी रणनीति महज़ वोट खींचने के लिए होती है, चुनाव के बाद सबकुछ भुला दिया जाता है। असम में भारतीय जनता पार्टी पिछले पांच वर्षों से शासन कर रही है, उसने संकीर्ण राजनीतिक फ़ायदे के लिए जातीय पहचान बनाने और उन्हें विभाजित करने का ही प्रयास किया है,  लेकिन जहां तक विकास कार्यों की धरातल पर उतरने की बात है, तो इस लिहाज़ से यहां की सरकार बहुत पीछे है।

कृषि और ग्रामीण विकास

तमिलनाडु में इन अहम क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति ख़र्च सबसे ज़्यादा है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों शामिल किया गया हैं। तमिलनाडु प्रति व्यक्ति 4, 086 रुपये खर्च करता है,  इसके बाद केरल 3, 994 रुपये ख़र्च करता है,  हालांकि केरल में कम कृषि योग्य भूमि होने के चलते कृषि क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से काफ़ी सीमित रहा है।

हैरानी की बात यह है कि भारी कृषि आबादी वाले अन्य दो राज्य इस लिहाज़ से पीछे रह जाते हैं, हमेशा की तरह इस मामले में पश्चिम बंगाल सबसे पीछे है,  यहां कृषि और ग्रामीण विकास पर प्रति व्यक्ति महज़ 3, 178 रुपये ख़र्च किये जाते हैं। कृषि से सम्बन्धित इन राज्यों की तरफ़ से ख़र्च की जाने वाली ये मामूली दरें इस बात का एक संकेत हैं कि इन राज्यों और दूसरे राज्यों में किसानों के साथ कितनी नाइंसाफ़ी हुई है, जो कि तीन नये कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे किसानों के संघर्ष में भी दिखायी देती है।

यह हर एक राज्य सरकार के प्रदर्शन की पूरी कहानी तो नहीं है। लेकिन, जो कुछ भी मुमकिन है, उसकी यह एक झलक तो देती ही है कि अगर एक ऐसी ईमानदार सरकार, जो अपनी सीमित शक्तियों का इस्तेमाल करने को लेकर प्रतिबद्ध हो, तो लोगों के जीवन में बड़े बदलावों के प्रयासों में उन्हें कुछ हद तक मदद और राहत दी जा सकती है।

(पीयूष शर्मा द्वारा राज्य सरकार के पोर्टल से संकलित डेटा)

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Four Poll-Bound States: Which One Cares for the People?

Assembly elections
State Budgets
State Expenditure
per capita spending
HEALTH
education
development
Welfare Schemes
poll-bound states

Related Stories

गर्म लहर से भारत में जच्चा-बच्चा की सेहत पर खतरा

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

बच्चे नहीं, शिक्षकों का मूल्यांकन करें तो पता चलेगा शिक्षा का स्तर

विशेष: क्यों प्रासंगिक हैं आज राजा राममोहन रॉय

छत्तीसगढ़ के ज़िला अस्पताल में बेड, स्टाफ और पीने के पानी तक की किल्लत

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

लोगों की बदहाली को दबाने का हथियार मंदिर-मस्जिद मुद्दा

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप


बाकी खबरें

  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: सपा द्वारा पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का वादा मतदाताओं के बीच में असर कर रहा है
    02 Mar 2022
    2004 में, केंद्र की भाजपा सरकार ने सुनिश्चित पेंशन स्कीम को बंद कर दिया था और इसकी जगह पर अंशदायी पेंशन प्रणाली को लागू कर दिया था। यूपी ने 2005 में इस नई प्रणाली को अपनाया। इस नई पेंशन स्कीम (एनपीएस…
  • फिल्म लेखक और समीक्षक जयप्रकाश चौकसे का निधन
    भाषा
    फिल्म लेखक और समीक्षक जयप्रकाश चौकसे का निधन
    02 Mar 2022
    जयप्रकाश चौकसे ने ‘‘शायद’’ (1979), ‘‘कत्ल’’ (1986) और ‘‘बॉडीगार्ड’’ (2011) सरीखी हिन्दी फिल्मों की पटकथा तथा संवाद लिखे थे। चौकसे ने हिन्दी अखबार ‘‘दैनिक भास्कर’’ में लगातार 26 साल ‘‘परदे के पीछे’’ …
  • MAIN
    रवि शंकर दुबे
    यूपी की सियासत: मतदान से ठीक पहले पोस्टरों से गायब हुए योगी!, अकेले मुस्कुरा रहे हैं मोदी!!
    02 Mar 2022
    छठे चरण के मतदान से पहले भाजपा ने कई नये सवालों को जन्म दे दिया है, योगी का गढ़ माने जाने वाले गोरखपुर में लगे पोस्टरों से ही उनकी तस्वीर गायब कर दी गई, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी अकेले उन पोस्टरों में…
  • JSW protest
    दित्सा भट्टाचार्य
    ओडिशा: पुलिस की ‘बर्बरता’ के बावजूद जिंदल स्टील प्लांट के ख़िलाफ़ ग्रामीणों का प्रदर्शन जारी
    02 Mar 2022
    कार्यकर्ताओं के अनुसार यह संयंत्र वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन करता है और जगतसिंहपुर के ढिंकिया गांव के आदिवासियों को विस्थापित कर देगा।
  • CONGRESS
    अनिल जैन
    चुनाव नतीजों के बाद भाजपा के 'मास्टर स्ट्रोक’ से बचने की तैयारी में जुटी कांग्रेस
    02 Mar 2022
    पांच साल पहले मणिपुर और गोवा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बहुमत के नजदीक पहुंच कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, दोनों राज्यों में भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले कम सीटें मिली थीं, लेकिन उसने अपने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License