NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आज़ादी आंदोलन से गद्दारी करने वाले आज आज़ादी शब्द से भी भड़क रहे हैं : दीपंकर
पटना में सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ आगामी कार्यदिशा पर विचार गोष्ठी में संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया गया। इस गोष्ठी में वाम दलों के प्रतिनिधियों के अलावा राजद, हम (से) और अन्य राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों ने लिया हिस्सा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
06 Mar 2020
Dipankar

पटना (बिहार) : पटना के भारतीय नृत्य कला मंदिर में भाकपा माले और इंसाफ मंच द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए भाकपा-माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि जिन ताकतों ने देश की आज़ादी के आंदोलन में कोई हिस्सा नहीं लिया, वे ही आज आज़ादी शब्द से भड़क रहे हैं। सीएए-एनआरसी व एनपीआर के खिलाफ चल रहे न्यायपूर्ण आंदोलनों के खिलाफ भाजपाइयों ने ‘गोली मारो’ अभियान चला रखा है। भाजपा और आरएसएस के लोग आज गोली मारो गैंग के रूप में सामने आए हैं। दिल्ली में राज्य प्रायोजित हिंसा वाला माॅडल आज पूरे देश में थोपने की कोशिशें की जा रही है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली की घटना को सिर्फ दिल्ली की घटना के रूप में नहीं देखना चाहिए। वे इस माॅडल को खड़ा करके पूरे देश में थोपना चाहते हैं। दिल्ली में इस बार न तो इंदिरा गांधी की हत्या हुई, न ही गुजरात जैसा कुछ हुआ था, फिर दिल्ली को निशाना क्यों बनाया गया?

दिल्ली को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह अभी आंदोलनों का भी केंद्र बना हुआ है। वहां जेएनयू, जामिया और शाहीनबाग के आंदोलन है। दूसरा दिल्ली विधानसभा को जीतने के लिए भाजपा ने सबसे घटिया किस्म का प्रचार अभियान चलाया, फिर भी जनता से उसे नकार दिया। दिल्ली की जनता ने भाजपा को जो तमाचा मारा है, इसी का वे बदला चुका रहे हैं और पूरी दिल्ली को हिंसा व उपद्रव की आग में झोंक दिया। उपद्रवियों की गिरफ्तारी की बजाय उन्हें सुरक्षा प्रदान की जा रही है। देश में थोपे जा रहे इस फासीवादी माॅडल को पूरी तरह से ध्वस्त करने का संकल्प लेना होगा।

भाजपा-आरएसएस के निशाने पर केवल मुस्लिम या कम्युनिस्ट नहीं है, बल्कि आंदोलन करने वाले सभी लोग हैं। निजीकरण के खिलाफ आंदोलन करने वाले रेलवे मजदूर, स्मार्ट सिटी के खिलाफ संघर्ष कर रहे सभी गरीब, रोजगार मांग रहे नौजवान आदि सभी हैं।

88310967_790984631410592_8708547518402658304_n.jpg

उन्होंने बिहार की नीतीश सरकार पर हमला करते हुए कहा कि बिहार के विकास के बुनियादी सवालों से विश्वासघात करने वाले नीतीश कुमार अब उन मुद्दों को बकवास बता रहे हैं। दरअसल, विगत पंद्रह वर्षों में नीतीश जी ने बिहार की जनता के साथ केवल बकवास ही किया है और बिहार को पीछे धकेलने का काम किया है। नीतीश जी यहां के दलित-गरीबों की सबसे पुरानी मांग को बकवास कहा है। दरअसल, उन्होंने खुद को बिहार की राजनीति में अपने को बकवास साबित किया है। न्याय के नाम पर अन्याय ही हुआ है। नीतीश जी दिल्ली में भाजपा का चुनाव प्रचार करने गए थे और वे बिहार में भाजपाइयों के प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का ही काम कर रहे हैं। दिल्ली हिंसा पर नीतीश कुमार ने शर्मनाक चुप्पी साध रखी है।

मोदी और नीतीश कुमार दोनों बकवास करने वाले लोग हैं। इसलिए दोनों के बीच एकता बनी है। इस मोर्चे के खिलाफ बड़ी एकता, बड़ी लड़ाई चाहिए। हमें और गंभीरता से काम करना होगा।

बिहार में विधानसभा चुनाव आने वाला है। हम चाहते हैं कि जिस प्रकार दिल्ली व झारखंड की जनता ने भाजपा को करारा तमाचा जड़ा, बिहार की जनता भी भाजपइयों को गहरी शिकस्त दे। लेकिन जिस प्रकार का तालमेल लोकसभा चुनाव में हुआ था, उससे तो यह नहीं होने वाला है। हमें उससे आगे निकलना होगा।

सीएए, एनआरसी और एनपीआर विरोधी इस गोष्ठी में राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता उदय नारायण चैधरी, सीपीआई के रविंद्र नाथ राय, सीपीएम के अरुण कुमार मिश्रा, प्रख्यात अर्थशास्त्री डीएम दिवाकर, शिक्षाविद मोहम्मद गालिब, पीयूसीएल के सरफराज, सामाजिक कार्यकर्ता रूपेश, लोकतांत्रिक जन पहल की कंचन वाला, ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता शाहिद कमाल, साहित्यकार प्रेम कुमार मणि, बामसेफ के प्रतिनिधि एहसान अहमद आदि ने भी अपने विचार रखे।

5 March_0.jpg

राजद के वरिष्ठ नेता व बिहार विधानसभा के पूर्व स्पीकर उदय नारायण चैधरी ने अपने संबोधन में कहा कि आज भाजपाई केवल गाय-गोबर की चर्चा कर रहे हैं। देश की आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है। दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों, मुसलमानों के अधिकारों पर हमला किया जा रहा है। आरक्षण पर भी लगातार हमला किया जा रहा है। दलितों के अधिकारों पर सबसे पहला हमला नीतीश के ही राज में हुआ। उन्होंने अंग्रेजी जमाने के सेडिशन चार्ज के कानून को खत्म करने की मांग की।

साहित्याकार प्रेम कुमार मणि ने कहा कि आज लगता है कि भारत वह भारत नहीं रहा। हमारे पूर्वजों ने जिस भारत को सजाया, उसे बर्बाद किया जा रहा है। प्रो. डीएम दिवाकर ने कहा कि आज देश चैराहे पर खड़ा है। एक विमर्श तीन तलाक, राम मंदिर, धारा 370, सीएए हो इस सीरीज का चल रहा है। दूसरी ओर आम लोगों के जीवन के सवालों का विमर्श है। लेकिन भाजपइयों ने जिन बहसों को उभारा था, वे एक-एक ध्वस्त हो रही हैं। महाराष्ट्र, झारखंड व दिल्ली में वे चुनाव हार चुके हैं। जनता ने उन्हें सबक सिखा दिया है।

सीपीआईएम के नेता अरूण कुमार मिश्रा ने कहा कि यदि भाजपा के लोग देश के संविधान को बदलने पर आमदा हैं, तो हम भी सीएए-एनआरसी व एनपीआर जैसे काले कानूनो को पूरी तरह से खारिज करने के प्रति प्रतिबद्ध है। सीपीआई के रवीन्द्र नाथ राय ने भाजपा-संघ के खिलाफ बड़ी एकता के निर्माण का आह्वान किया।

मंच का संचालन भाकपा-माले के पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा व इंसाफ मंच के कयामुद्दीन अंसारी ने किया। जबकि अध्यक्ष मंडल में केडी यादव, सूरज कुमार सिंह आदि शामिल थे। मंच पर अन्य कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।

विचार गोष्ठी के राजनीतिक प्रस्ताव

1. न्याय व अधिकार के सवाल पर चल रहे आंदोलनों को बदनाम करने, उन्हें दबाने की साजिशें रचने और पूरे देश में फासीवादी माॅडल खड़ा करने की भाजपाई कोशिशें लगातार जारी हैं। दिल्ली में राज्य प्रायोजित हिंसा की भयावहता हम सबने देखी, जिसमें पुलिस तंत्र पूरी तरह सांप्रदायिक नजर आई। जामिया, जेएनयू आदि विश्वविद्यालयों के छात्र आंदोलनों से लेकर विगत 3 मार्च को आहूत यंग इंडिया अधिकार मार्च पर भी पुलिसिया दमन किया गया।

मार्च के दौरान बिहार आइसा के पूर्व राज्य सचिव शिवप्रकाश रंजन को मीडिया को संबोधित करते वक्त पीटा गया। हम दिल्ली पुलिस की बर्बरता व उसके सांप्रदायिक चरित्र की कड़ी निंदा करते हुए मांग करते हैं कि दिल्ली में नफरत व उन्माद की राजनीति को बढ़ावा देने वाले कपिल मिश्रा जैसे नेताओं को अविलंब गिरफ्तार किया जाए और इसकी जवाबदेही लेते हुए देश के गृह मंत्री अमित शाह अपने पद से तत्काल इस्तीफा दें। दिल्ली हिंसा में बिहार के लोग भी मारे गए हैं, लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री ने इसपर एक शब्द बोलना उचित नहीं समझा है। हम इस मसले पर नीतीश कुमार की चुप्पी की कड़ी निंदा करते हैं।

2. एक ओर, दिल्ली में हिंसा व नफरत भड़काने वाले अपराधियों को बचाया जा रहा है। तो दूसरी ओर, संविधान व लोकतंत्र बचाने की लड़ाई लड़ रहे जेएनयू के नेताओं से लेकर कर्नाटक के स्कूली बच्चों तक पर राजद्रोह का मुकदमा थोपा जा रहा है। हम सभी आंदोलनकारियों पर से राजद्रोह का मुकदमा वापस लेने तथा ब्रिटिशकालीन राजद्रोह के प्रावधान को ही खत्म करने की मांग करते हैं।

3. सीएए-एनआरसी-एनपीआर एकीकृत रूप में आरएसएस का विभाजनकारी प्रोजेक्ट है। इसके खिलाफ चल रहे आंदोलन में दलित-गरीबों समेत व्यापक जनता की गोलबंदी के साथ संपूर्ण पैकेज को खारिज करने की दिशा में आंदोलन को और व्यापक बनाने की जरूरत है। आज की विचार गोष्ठी से हम तमाम आंदोलनरत शक्तियों को अपनी पहलकदमी बढ़ाने और आपसी एकता व समझदारी को और ऊंचे स्तर पर ले जाने का आह्वान करते हैं। साथ ही, बिहार में एनपीआर पर संपूर्णता में रोक लगाने की मांग पर आंदोलन जारी रखने का संकल्प लेते हैं। आने वाले दिनों में पूरे राज्य में पंचायती राज संस्थाओं तथा ग्राम सभाओं के जरिये इन काले कानूनों के खिलापफ प्रस्ताव पारित करने का भी आह्वान करते हैं।

4. बिहार में जल-जीवन-हरियाली योजना के नाम पर लाखों दलित-गरीबों को वास-आवास से उजाड़ने की नोटिस थमा दी गई है। विचार गोष्ठी के जरिए हम बिहार सरकार से मांग करते हैं कि इस गरीब विरोधी योजना को तत्काल वापस ले, सभी भूमिहीनों के आवास की गारंटी करे और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के कहीं भी गरीबों को विस्थापित नहीं करे।

5. प्रमोशन में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का हालिया बयान भाजपा-संघ गिरोह द्वारा दलितों-पिछड़ों के आरक्षण को खत्म करने की साजिश का ही जारी रूप है। आज के आयोजन से हम आरक्षण की गारंटी के लिए बिहार विधनसभा से तत्काल प्रस्ताव पारित करने की मांग करते हैं।

6. बिहार में हड़ताली शिक्षकों से वार्ता करने और उनकी जायज मांगों पर उचित कार्रवाई करने की दिशा में बिहार सरकार को तत्काल पहल लेनी चाहिए। हम आंदोलनकारी शिक्षकों पर से आंदोलन के दौरान किए गए सभी प्रकार के मुकदमों की वापसी की मांग करते हैं।

CAA
NRC
NPR
CPM
CPI
JNU
Jamia Milia Islamia
Shaheen Bagh
Bihar
Nitish Kumar
BJP
Narendra modi

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर


बाकी खबरें

  • parliament
    एम श्रीधर आचार्युलु
    भारतीय संसदीय लोकतंत्र का 'क़ानून' और 'व्यवस्था'
    03 Dec 2021
    बिना चर्चा या बहस के संसद से वॉकआउट, टॉक-आउट, व्यवधान और शासन ने 100 करोड़ से अधिक भारतीय नागरिकों की आकांक्षाओं को चोट पहुंचाई है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज दूसरे दिन भी एक्टिव मामले में हुई बढ़ोतरी  
    03 Dec 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 9,216 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश भर में अब एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 0.29 फ़ीसदी यानी 99 हज़ार 976 हो गयी है।
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    संबित को पर्यटन विभाग का जिम्मा देने पर उठे सवाल
    02 Dec 2021
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस अंक में वरिष्ठ अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा को कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा भारत पर्यटन विकास निगम का अध्यक्ष नियुक्त किए…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव से पहले उठ रहा मथुरा के मंदिर का मुद्दा, UN ने किया ख़ुर्रम परवेज़ का समर्थन और अन्य ख़बरें
    02 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी यूपी में घुल रहे सांप्रदायिक ज़हर, कार्यकर्ता ख़ुर्रम परवेज़ का UN ने किया समर्थन और अन्य ख़बरों पर।
  • bihar protest
    अनिल अंशुमन
    बिहार : शिक्षा मंत्री के कोरे आश्वासनों से उकताए चयनित शिक्षक अभ्यर्थी फिर उतरे राजधानी की सड़कों पर  
    02 Dec 2021
    शिक्षा मंत्री के कोरे आश्वासनों से उकताए चयनित शिक्षक अभ्यर्थी फिर राजधानी की सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हुए हैं। इनकी एक सूत्री मांग है कि सरकार नियुक्ति की तिथि बताए, वरना जारी रहेगा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License