NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संस्कृति
भारत
राजनीति
गाइड बुक : “भारत माता की जय”
"भारत माता की जय" बोलने से "भारत माता की जय" बुलवाना अधिक फलदायी होता है। बुलवाया भी अगर मुसलमानों, इसाईयों या दलितों से जाये तो और अधिक फलदायी होता है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
27 Jan 2019
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy : Indian Express

विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि इस चुनावी वर्ष में "भारत माता की जय" को स्कूलों, कालेजों के पाठ्य-क्रम में शामिल किया जा रहा है। इससे पहले कि "भारत माता की जय" विषय का कोर्स सिलेबस बने और उसकी पाठ्य-पुस्तकें बाजार में उपलब्ध हों, यह लेखक प्रथा का पालन करते हुए "भारत माता की जय" विषय पर एक गाइड बुक ला रहा है। यह हमारे देश की प्रथा है कि पाठ्य-पुस्तक बाजार में उपलब्ध हो या न हो, गाइड बुक अवश्य मिल जाती है। और अधिकतर छात्र भी पाठ्य-पुस्तक पढ़ें न पढ़ें, गाइड बुक अवश्य पढ़ते हैं। छात्रों की सुविधा तथा विषय को आसान बनाने के लिए इस गाइड बुक को प्रश्नोत्तर के रूप में दिया जा रहा है। 

प्रश्न: "भारत माता की जय" का इतिहास संक्षेप में बताएं ?

उत्तर: "भारत माता की जय" का इतिहास बहुत पुराना है। माना जाता है कि मनुष्य ने जब बोलना शुरू किया तो सबसे पहले "भारत माता की जय" ही बोला था। हालाँकि कुछ भ्रमित इतिहासकारों की राय इस बारे में अलग ही है। इतिहास की प्राचीन पुस्तकों यथा वेदों और पुराणों में भी कई जगह "भारत माता की जय" का उल्लेख मिलता है। उपनिषदों में भी कई जगह इस तरह के श्लोक हैं जिनका अर्थ प्रबुद्ध इतिहासकार "भारत माता की जय" के रूप में करते हैं। भाषा शास्त्री यह भी मानते हैं कि नवजात शिशु जब "माँ" का उच्चारण करता है तो वह वास्तव में "भारत माँ की जय" ही बोल रहा होता है।

Teerchi-nazar 2 (1)_0.jpg

प्रश्न: मनुस्मृति में "भारत माता की जय" को लेकर क्या कहा गया है? 

उत्तर: प्राचीन भारत के समाज-शास्त्र के प्रमुख ग्रन्थ मनुस्मृति में "भारत माता की जय" को लेकर स्पष्ट निर्देश हैं। चारों वर्गों में से सबसे निचले वर्ग के लिए "भारत माता की जय" बोलना-सुनना पूर्णतया निषेध था। यहाँ तक कि उस वर्ग के किसी व्यक्ति के कान में गलती से भी "भारत माता की जय" का उद्घोष पड़ जाता था तो यह प्रावधान था कि उसके कानों में पिघलता हुआ सीसा डाल दिया जाये। ब्राह्मणों और क्षत्रियों को "भारत माता की जय" बोलने की जरूरत ही नहीं मानी जाती थी क्योंकि उन्हें उसके बिना ही देशभक्त माना जाता था। वैश्यों को जरूर बार-बार "भारत माता की जय" बोल कर अपनी देशभक्ति दर्शानी पड़ती थी। महिलाएं, चाहे वे किसी भी वर्ग से हों, "भारत माता की जय" नहीं बोल सकती थीं। परन्तु सवर्ण वर्ग की महिलाएं "भारत माता की जय" सुन अवश्य सकती थीं। 

प्रश्न: रामायण एवं महाभारत काल में "भारत माता की जय" पर संक्षेप में प्रकाश डालें। 

उत्तर: प्राचीन काल की ऐतिहासिक पुस्तकों रामायण एवं महाभारत में भी "भारत माता की जय" का उल्लेख प्रमुखता से मिलता है। राष्ट्रभक्त इतिहासकारों ने शोध कर पता चलाया है कि भगवान श्री राम जी की वानर सेना  ने रावण की राक्षस सेना का सामना "भारत माता की जय" के उद्घोष के साथ ही किया था। इसी तरह जब केवट भगवान राम, सीता जी और लक्ष्मण को नदी पार करा रहा था तो गा रहा था "हैया हो, भारत माता की जय, हैया रे"। यह भी पता चला है कि लक्ष्मण ने शूपर्णखां की नाक इसी लिए काटी थी क्योंकि शूपर्णखां ने  "भारत माता की जय" बोलने से मना कर "जय हिन्द" बोल दिया था। महाभारत काल की सारी लड़ाई भी "भारत माता की जय" और "हिंदुस्तान जिंदाबाद" को बोलने को लेकर ही थी। शासक वर्ग चाहता था कि पांडव भी "भारत माता की जय" बोलें पर पांडव इस मामले पर "हिंदुस्तान जिंदाबाद" को भी "भारत माता की जय" के बराबर सम्मान दिलाना चाहते थे। कृष्ण, जो दलित (यादव- ओ बी सी) थे और मनुस्मृति के अनुसार "भारत माता की जय" नहीं बोल सकते थे, पांडवों के साथ खड़े थे। सूर्य-पुत्र कर्ण को भी कुंती ने इसी शर्म से अपना पुत्र मानने से इंकार कर दिया था कि कर्ण "भारत माता की जय" के मामले में पांडवों के साथ नहीं खड़े हो दुर्योधन के साथ खड़े थे। अन्य महारथी यथा महपिता भीष्म, गुरु द्रोण आदि भी शासक वर्ग के साथ खड़े थे। गीता में भी कृष्ण ने कहा है, "यदा यदा हि धर्मस्य..........."   अर्थात जब कभी भी "भारत माता की जय" को लेकर विवाद होगा तो, हे अर्जुन! मैं बार-बार जन्म लूंगा। 

प्रश्न: स्वतंत्र भारत में "भारत माता की जय" को लेकर क्या स्थिति है ?

उत्तर: स्वतंत्र भारत में "भारत माता की जय" की स्थिति के बारे में जानने से पहले हमें उससे पहले के समय में जाना पड़ेगा। स्वतंत्रता संग्राम के समय "भारत माता की जय","हिंदुस्तान जिंदाबाद","जय हिन्द" और "इंक़लाब जिंदाबाद", जैसे सभी नारे सामान रूप से लोकप्रिय थे। जब भारत स्वतंत्र हुआ और संविधान लागू हुआ तो सभी लोग बराबर मान लिए गए और मनुस्मृति का कानून समाप्त हो गया । यानी एक निचली जाति का व्यक्ति भी "भारत माता की जय" बोल सकता था और चाहे तो नहीं भी बोल सकता था। इससे उसकी देश भक्ति पर कोई संदेह नहीं किया जाता था। "भारत माता की जय" को लेकर वर्तमान स्थिति यह है कि "भारत माता की जय" बोलना और बुलवाना अच्छा माना जाता है। उन सभी के लिए जिनकी देशभक्ति संदिग्ध है, उनके लिए "भारत माता की जय" बोलना अनिवार्य किया जा सकता है। 

प्रश्न: "भारत माता की जय" को रोहित वेमुला, कन्हैया और उमर खालिद के सन्दर्भ में समझाएं ? (इस प्रश्न के बारे में अभी विवाद है कि इसे पाठ्य-क्रम में रखा जाये या नहीं)

उत्तर: इन तीनों के सन्दर्भ में "भारत माता की जय" को समझना थोड़ा कठिन काम है। रोहित वेमुला हैदराबाद विश्व-विद्यालय का छात्र था और दलित था। उसका विश्वास था कि भारत के संविधान ने "भारत माता की जय " के बारे में उसे भी वह सब अधिकार दिया हुआ है जो अन्य सभी सवर्ण छात्रों को दिया हुआ है। वह "अपनी भारत माता की जय" बोलना चाहता था पर सवर्ण छात्रों का कहना था कि क्योंकि वह दलित है इस लिए उसे "अपनी भारत माता की जय" बोलने का अधिकार नहीं है। हाँ, वह चाहे तो उनकी "भारत माता की जय" बोल सकता है। आखिर उसकी और उसके साथियों की शिकायत ऊपर की गई और शासन ने उसे छात्रावास से निकाल दिया। इससे पहले कि उस पर राजद्रोह का मुकदमा चल सके, वह नहीं रहा। 

कन्हैया का केस थोड़ा सा अलग है। वह दरिद्र परिवार से संबंधित है इसलिए उसकी भारत माता शासन की भारत माता से अलग थीं। वह "भारत माता की आजादी की जय" बोलना चाहता था। यहाँ पर सरकार ने अति तत्परता दिखाई और उस पर राजद्रोह का मुकदमा दायर कर दिया। 

उमर खालिद का केस अधिक जटिल है। वह मुसलमान है और उस पर जेएनयू का छात्र भी। वह यदि "भारत माता की जय" सैकड़ों बार बोले तो भी एक बार ही माना जाता है। इसके अतिरिक्त मुसलमान के लिए "भारत माता की जय" के साथ साथ पाकिस्तान मुर्दाबाद जोड़ना भी आवश्यक होता है, तभी उसे "भारत माता की जय" बोलने का फल प्राप्त होता है।

प्रश्न: "भारत माता की जय" बोलना किस किस के लिए अनिवार्य है ?

उत्तर: "भारत माता की जय" कोई भी बोल सकता है। जो व्यक्ति टैक्स की चोरी करता है, वह अगर "भारत माता की जय" न बोले तो चलता है। जो विदेशों में काला धन रखता है, अथवा देश के बैंकों का धन चुरा कर विदेश भाग गया हो, वह "भारत माता की जय" न बोले तो चलता है। जो देश के कानून को अपनी मुट्ठी में रखता है, उसे ठेंगा दिखता है, वह भी "भारत माता की जय" न बोले तो चलता है। परन्तु मुसलमान, ईसाई, दलित, आदिवासी, कश्मीर या पूर्वोत्तर में रहने वाले लोगों के लिए, भले ही वे कितने भी देशभक्त क्यों न हों, "भारत माता की जय" बोलना अनिवार्य है। 

प्रश्न: "भारत माता की जय" के उद्घोष की महिमा बखान करें ?

उत्तर: "भारत माता की जय" के उद्घोष की महिमा अपरम्पार है और उसे पूरी तरह से बखान करना लगभग  असम्भव है। वैसे तो इसका जाप जब इच्छा हो तब किया जा सकता है पर ब्रह्म महूर्त में स्नान कर, भोजन ग्रहण करने से पहले जाप करने से अधिक फल प्राप्त होता है। १००८ बार जाप करने से टैक्स चोरी के पाप का नाश होता है। लगातार ९ दिन जाप करने से काला धन सफ़ेद हो जाता है। बारह पूर्णमासी को  "भारत माता की जय"का जाप कर, चन्द्रमा को जल चढाने से एनआरआई बनने की सम्भावनाएं बढ़ जाती हैं। अगर केसरिया रंग के आसन पर बैठ कर जाप किया जाये तो शासन से नजदीकी बढ़ती है। परन्तु योगासन करते हुए  "भारत माता की जय" का जाप करना निषेध है। इससे मति भ्रष्ट होने की सम्भावना रहती है।   

टिप्पणी: "भारत माता की जय" बोलने से "भारत माता की जय" बुलवाना अधिक फलदायी होता है। बुलवाया भी अगर मुसलमानों, इसाईयों या दलितों से जाये तो और अधिक फलदायी होता है।

Satire
Political satire
Hindutva
Hindutva Agenda
hindutva terorr
bharat mata ki jai
भारत माता की जय
व्यंग्य
राजनीतिक व्यंग्य

Related Stories

मथुरा: शाही ईदगाह पर कार्यक्रम का ऐलान करने वाले संगठन पीछे हटे, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

अयोध्या केस को गलत तरीके से हिंदू-मुस्लिम विवाद के तौर पर पेश किया गया: हिलाल अहमद

आख़िर भारतीय संस्कृति क्या है?

निक्करधारी आरएसएस और भारतीय संस्कृति

भारत माता कौन है?

तिरछी नज़र : प्रधानमंत्री का एक और एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

हिन्दुस्तान के न्यूज़ चैनलों ने डेमोक्रेसी को कुचला है : रवीश कुमार

क्या संत रविदास के केसरियाकरण की कोशिशें रवां है?

"खाऊंगा, और खूब खाऊंगा" और डकार भी नहीं लूंगा !

कुंभ 2019 : श्रद्धालु पूछ रहे हैं, कहां हैं सरकार की बहुप्रचारित सुविधाएं?


बाकी खबरें

  • The Indian Agricultural Situation Must Not Be Misread
    प्रभात पटनायक
    खेती के संबंध में कुछ बड़ी भ्रांतियां और किसान आंदोलन पर उनका प्रभाव
    15 Nov 2021
    इनमें पहली भ्रांति तो इस धारणा में ही है कि खेती किसानी पर कॉर्पोरेट अतिक्रमण तो ऐसा मामला है जो बस कॉर्पोरेट और किसानों से ही संबंध रखता है। यह ग़लत है। 
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 10,229 नए मामले, 125 मरीज़ों की मौत
    15 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.39 फ़ीसदी यानी 1 लाख 34 हज़ार 96 हो गयी है।
  • Facebook
    परंजॉय गुहा ठाकुरता
    फ़ेसबुक/मेटा के भीतर गहरी सड़न: क्या कुछ किया जा सकता है?
    15 Nov 2021
    क्या सांप्रदायिक नफ़रत फैलाने के सिलसिले में सक्रिय रूप से उकसाने को लेकर फ़ेसबुक के ख़िलाफ़ क़ानूनी और नियामक कार्रवाई की जा सकती है? हालांकि, अमेरिका में इसकी एक मिसाल मौजूद है, लेकिन भारत में इसे…
  • tax
    सुबोध वर्मा
    सरकार का टैक्स कलेक्शन तो बढ़ा है, लेकिन फिर भी ख़र्च में कटौती जारी
    15 Nov 2021
    मोदी सरकार ने शिक्षा, सामाजिक न्याय, पर्यावरण समेत कई मंत्रालयों के ख़र्च पर रोक लगा दी है। 
  • Gurgaon Panchayat
    मुकुंद झा
    गुड़गांव पंचायत : औद्योगिक मज़दूर, किसान आए एक साथ, कहा दुश्मन सांझा तो संघर्ष भी होगा सांझा!
    15 Nov 2021
    रविवार को गुड़गांव में बेलसोनिका ऑटो कंपोनेंट इंडिया इंप्लॉयीज यूनियन, मानेसर द्वारा मजदूर-किसान पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें  कृषि बिलों को वापस लेने और श्रम संहिताओं को समाप्त करने की संयुक्त…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License