NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गौरी लंकेश: कलम से क़त्ल तक का सफर!
गौरी लंकेश हत्याकांड में 323 दिन से चल रही तफ्तीश में सोमवार को दो और लोगों की गिरफ्तारी के साथ एक डायरी भी बरामद हुई। इस डायरी में कुल 34 लोगों का नाम हैं जिन्हें मारने की साजिश की गई थी।
शारिब अहमद खान
25 Jul 2018
gauri lankesh

कर्नाटक पुलिस ने गौरी लंकेश हत्याकांड में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन दो संदिग्धों का नाम गणेश मिस्की और अमित राघवेन्द्र है। दोनो संदिग्ध इस केस में किस रूप से संलिप्त है इसका खुलासा होना अभी बाकी है। एसआईटी ने कथित आरोपियों के पास से एक डायरी बरामद की है। इस डायरी में गौरी लंकेश व थियेटर आर्टिस्ट गिरीश कर्नाड के अलावा कुल 34 लोगों के नाम हैं जिन्हें मारने की साज़िश की गई थी और यह सारे नाम वह हैं जो वर्तमान में सत्ता पर काबिज पार्टी की आलोचना करते हैं।

ज्ञात हो कि पिछले वर्ष 5 सितंबर को वरिष्ठ पत्रकार व सामाजिक कार्यक्रता गौरी लंकेश की हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या राजा राजेशवरी नगर स्थित उनके आवास के बाहर गोली मारकर की गई थी। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। आपको बता दें कि गौरी लंकेश हत्याकांड में अब तक कर्नाटक पुलिस द्वारा गठित एसआईटी 9 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

एसआईटी के अनुसार गौरी लंकेश की हत्या का षडयंत्र अमोल काले ने रचा था, वहीं केटी नवीन कुमार ने हत्या के लिए असलहा उप्लब्ध कराया था और गौरी लंकेश पर गोली परशुराम वाघमारे ने चलाई व मोहन नायक ने इन आरोपियो को बैंगलुरू में घर व बाकि सुविधायें उप्लब्ध कराई। पकड़े गए बाकि आरोपी भी किसी न किसी रूप से इस हत्याकांड के षडयंत्र में शामिल हैं।

हालांकि जिस हथियार से इस घटना को अंजाम दिया गया था उसे अभी तक एसआईटी खोज नहीं पाई है। वहीं गौरतलब है कि पुलिसवालों का यह भी कहना है कि गौरी लंकेश और एमएम कलबुर्गी की हत्या के बीच सम्बंध है। आपको बता दें कि कलबुर्गी की हत्या 2015 में कर दी गई थी।

किताबी पन्नों में भारत को आज़ादी  15 अगस्त 1947 को मिल गई थी। लेकिन इस आज़ादी को ज़मीन पर उतारने के लिए लड़ी जाने वाली लड़ाईयाँ ऐसी हैं, जिसमे मुखर होकर पढ़ने लिखने वाले लोगों पर आए दिन हमले होते रहते हैं। पत्रकार गौरी लंकेश या यूँ  कहें कि पत्रकारिता का एक ऐसा चेहरा जो की सरकार की आलोचना और समाज को सच का आइना दिखाने के लिए प्रसिद्ध था उसकी हत्या 5 सितंबर 2017 को बदमाशों ने कर दी। 

अब यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि वह बदमाश कोई और नहीं बल्कि हिंदूत्ववादी कट्टरवादी संगठन से जुड़ा हुआ व्यक्ति था। मीडिया में आयी खबर के हिसाब से इस केस में गोली चलाने वाले शख्स परशुराम वाघमारे ने एसआईटी के सामने कबुल किया था कि मैंने  अपने धर्म की रक्षा के लिए गौरी लंकेश की हत्या की है।

वहीं जब एसआईटी के तहकीकात से यह पता चलता है कि शिक्षक व सामाजिक कार्यक्रता एमएम कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या एक ही हथियार से हुई थी, तब कोई बड़े षडयंत्र की बू आना स्वाभाविक बात है। गौरी लंकेश मौत के घाट अचानक नहीं उतार दी गईं, उनकी हत्या एक साजिश और योजना के तहत हुई है। 

गौरी लंकेश की मौत महज़ सच का गला घोटना नहीं था बल्कि पूरे पत्रकार समूह के लिए एक करारा झटका और चेतावनी थी कि आने वाले वक्त में मौजूदा हुक्मरानों के खिलाफ लिखने की सज़ा , सजा-ए-मौत होगी। क्योंकि आज तक जितने भी पत्रकारों की हत्या हुई है उन्होंने कहीं न कहीं सरकार या क्षेत्र के बाहुबलियों का चेहरा समाज के सामने लाने की कोशिश की है और 5 सितंबर की रात एक निष्पक्ष पत्रकार गौरी लंकेश की मौत उन्हें इसी कड़ी में कतारबद्ध करती है। 

हैरान और स्तब्ध करने वाली बात यह है कि भारत देश की जिस संस्कृति में किसी की मौत पर आंसु बहाया जाता है, उस देश में एक खास विचाराधारा का समर्थन करने वाले संगठनों ने इस मौत का मज़ाक और जश्न मनाया। अपने आप को सभ्य समाज का हिस्सा कहने वालों में से उसी समाज का एक नागरिक निखील दादीच ने इस मौत का मजाक उड़ाया और अपश्ब्द के साथ सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इसे विडंबना ही कहें या कुछ और कि मजाक उड़ाने वाले व्यक्तियों मे से कई लोगों को को प्रधान सेवक खुद ट्वीटर पर फॉलो करते हैं। 

हालांकि पत्रकारों की हत्या कि घटना कोई नई नहीं हैं। इस तरह की घटनांए हर सरकार में होती आईं हैं। जैसे राइजिंग कशमीर के शुजात बुखारी, हिंदुस्तान अखबार के राजदेव रंजन, द इंडियन एक्सप्रेस के शिवानी भटनागर, आउटलुक के इरफान हुसैन। 

जब तक जांच नहीं हुई थी तब यह कहना या इसका निर्णय कर लेना न्यायोचित नहीं होता कि पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या किसी खास विचारधारा को मानने वाले लोगों ने की है, लेकिन अब यह बात किसी से छुपी नहीं है कि यह हत्या किसने की, किसके इशारे पर की व इन हत्यारों को किसकी शय है।

सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा गौरी लंकेश की तुलना जानवर से करने के बाद एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार ने 28 सितंबर 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा था और पत्र में लिखा था कि भारत जैसे महान लोकतंत्र की जनता का इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग करना दुखद है।

सच का गला घोटने की कोशिश की जा रही है। चाहे गौरी लंकेश कितनी ही गलत क्यों न हो, सरकार या किसी खास विचारधारा के कितना ही विरोध में क्यों न लिखती हों, उनकी हत्या तो नहीं होनी चाहिए। आज़ादी की हीरक जयंती की ओर बढ़ते भारत वासीयों को इस बात पर मंथन करना चाहिए कि संविधान हम तमाम भारत वासीयों को बोलने और लिखने की आज़ादी देता है और इसका अपमान करने वालों के लिए भारतीय संविधान में दंड भी निर्धारीत हैं।

एक तरफ हम भारत की मीडिया को स्वतंत्र मिडिया कहते हैं और दूसरी तरफ जब हम ‘कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट’ के अध्ययन को देखते हैं तो पाते हैं कि हिंदुस्तान पत्रकारों के लिए तेरहवां सबसे खतरनाक देश है, तो यह भद्दा मजाक सा लगता है। इस अध्ययन के अनुसार पत्रकारों की सुरक्षा के मामले में हमारे मुल्क का स्थान प्रत्येक वर्ष नीचे होता जा रहा है। वहीं पेरिस स्थित ‘रिपोर्टस विदाउट बॉर्डर’ एनजीओ के अध्ययन के अनुसार पत्रकारों की स्वतंत्रता में 180 देशों में हिंदुस्तान का स्थान 138 है। जो कि पिछले साल के मुकाबले दो स्थान अधिक है।

हालांकि एसआईटी जब पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड के मामले की अंतिम चार्जशीट कोर्ट में दाखिल करेगी तब केस की साड़ी परतें खुल जायेंगी, फिलहाल जांच जैसे-जैसे आगे बढती जा रही है हर रोज़ नए खुलासे हो रहे हैं। एसआईटी का दावा है कि पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड का केस अंतिम चरण में पँहुच चुका है। 

ये ठीक है इस केस के अपराधियों को पुलिस पकड़ने में कामयाब रही है लेकिन उन पत्रकारों का क्या जो दिल्ली के बाहर छोटे-छोटे शहरों, कस्बों और नगरों में अपनी पत्रकारिता धर्म निभाते हैं? उन्हें इस तरह की मुसीबतों से रोज़ गुजरना पड़ता है। उनकें पास न तो महानगरों का सुरक्षित वातावरण होता है और न ही अंग्रेजी (एक्स, वाई, ज़ेड) सुरक्षा नाम जैसी कोई चीज होती है!

हमें नहीं पता की गौरी लंकेश किसी खास विचारधारा का समर्थन करती थीं या नहीं? लेकिन अगर करतीं भी थीं  तो क्या इसकी कीमत जान देकर चुकानी पड़ेगी? 

gauri lankesh
BJP
karnataka
Sanatan sanstha
Hindutva

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • rahul modi
    लाल बहादुर सिंह
    मोदी-संघ की "विकास और विरासत" की फासीवादी मुहिम का जवाब रैडिकल लोकतान्त्रिक विमर्श है, हिन्दू बनाम हिंदुत्व नहीं
    21 Dec 2021
    जनता के जीवन के वास्तविक सवालों को महत्वहीन बना देने और इससे काटकर पूरे सामाजिक-राजनीतिक विमर्श को हिन्दू पहचान, संस्कृति और विरासत के भावनात्मक, विभाजनकारी नैरेटिव पर केंद्रित कर देने की कोशिश हो…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 5,326 नए मामले, ओमिक्रॉन के मामले बढ़कर 174 हुए
    21 Dec 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.23 फ़ीसदी यानी 79 हज़ार 97 हो गयी हैं, लेकिन ओमिक्रॉन के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है | 
  • covid
    ज्योत्सना सिंह, आना व्रासर
    यात्रा प्रतिबंधों के कई चेहरे
    21 Dec 2021
    ओमिक्रॉन का पता चलने के बाद महामारी की जवाबी प्रतिक्रिया को लेकर ज़रूरी आपूर्ति की डिलीवरी को रोकते हुए और अविकसित देशों के प्रति अपने नस्लवादी पूर्वाग्रह दिखाते हुए कई अमीर देशों ने दक्षिणी अफ़्रीका…
  • Inequality
    भरत डोगरा
    भारत के पास असमानता से निपटने का समय अभी भी है, जानें कैसे?
    21 Dec 2021
    घोर पूंजीवाद के नेतृत्व में चलने वाली अर्थव्यवस्था और संयुक्त राज्य अमेरिका के मॉडल का अनुसरण करने वाला वर्तमान अत्यधिक असमान आर्थिक मार्ग सभी नागरिकों की ज़रूरतों को स्थायी रूप से पूरा नहीं कर सकता…
  • daily
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    पलवल में मुस्लिम युवक की हत्या, लोकसभा में चुनाव सुधार बिल पास और अन्य ख़बरें
    20 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी पलवल में मुस्लिम युवक की हत्या, चुनाव सुधार बिल लोकसभा में पास और अन्य ख़बरों पर।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License