NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
'गौरव यात्रा' की बढ़ती मुश्किलें, लोग नाराज़ और भष्टाचार के आरोप
जबसे वसुंधरा वापस लौटी हैं तबसे इस यात्रा पर संकट के बादल छाए हुए हैं और इसकी वैधता पर लोग सवाल उठा रहे हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
21 Aug 2018
vasundhara
image courtesy: NDTV.com

 

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की प्रचलित गौरव यात्रा पर फिलहाल विराम लग गया है। यह यात्रा 24 अगस्त को जोधपुर ज़िले में फिर से शुरू की जाएगी। यात्रा को बीच में इसीलिए रोक दिया गया क्योंकि राजे को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की मौत के कार्यक्रम में जाना पड़ा। लेकिन जबसे वसुंधरा वापस लौटी हैं तबसे इस यात्रा पर संकट के बादल छाए हुए हैं और इसकी वैधता पर लोग सवाल उठा रहे हैं। 

हाल ही में वकीलों के एक समूह ने इस यात्रा पर गंभीर सवाल उठाये हैं। इस समूह ने राजस्थान हाईकोर्ट में एक PIL दायर करते हुए यह आरोप लगाया है कि वसुंधरा राजे की यह यात्रा सरकारी खर्च से चल रही है। उनका आरोप है कि यात्रा में सरकार के करोड़ों रुपये झोंके गए और सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया गया। मीडिया में आयी रिपोर्टें भी यह आरोप लगा रही है कि इस यात्रा में इंतज़ाम करने के लिए सरकारी टेंडर निकाले गए थे। इस सब के चलते हाई कोर्ट ने बीजेपी से जवाब माँगा है कि वह बताएं कि क्या यह यात्रा सरकारी है? अगर नहीं तो फिर इसमें कितना खर्चा किया गया है ? बताया जा रहा है कि बीजेपी के नेता का कहना है कि यह बीजेपी का कार्यक्रम है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी के प्रवक्ताओं ने मीडिया में बयान दिया था कि यह सरकारी कार्यक्रम है। 

बीजेपी की छपटाहट साफ़ देखी जा सकती है। सवाल उठ रहा है कि अगर यह यात्रा बीजेपी की है तो सरकारी तंत्र और पैसे का इस्तेमाल कैसे किया गया? बताया जा रहा है कि इस यात्रा में निकाले गए कुल टेंडरों की कीमत करोड़ों में है। हालाँकि बाद में इन्हें  रद्द करने के आदेश दिये गए, लेकिन सरकारी तंत्र के इस्तेमाल में कोई राय नहीं है। सूत्र बताते हैं कि इस पूरी यात्रा में कुल खर्च 150 से 200 करोड़ तक का है। सवाल है कि किसका है और कहाँ से आया है ? इस पूरे घटनाक्रम से भारी भ्रष्टाचार की बू आ रही है। 

लेकिन बात सिर्फ इस यात्रा पर खर्च की नहीं है। सवाल यह भी है कि जब तक जिस उदयपुर संभाग में यात्रा की गयी है वहाँ के लोग सरकार के काम और चुनावों के बारे में क्या नज़रिया रखते हैं ? जैसा की हमने पहले की रिपोर्टों में बताया कि दक्षिण राजस्थान में स्थित इस इलाके के लोग सरकार से खासे नाराज़ हैं। बात करने पर यह नाराज़गी ज़ाहिर होती है। लोगों का कहना है कि इस बार बीजेपी को वोट नहीं दिया जायेगा। हालाँकि उदयपुर संभाग के 7 ज़िलों में जहाँ भी रैलियां की गयी है वहाँ भीड़ जमा हुई है। लेकिन जानकारों का कहना है कि इसमें पार्टी कार्यकर्ता खाने, शराब और पैसे का लालच देकर लायी गयी जनता शामिल रही है। इनके अलावा आम जनता बदलाव की उम्मीद में किसी भी बड़े नेता की रैली में वैसे भी चली ही जाती है। 

लेकिन इस इलाके के हालात बहुत ख़राब है। करीब 60 से 70 लाख की आबादी वाला यह इलाका ,आदिवासी बहुल इलाका है और यहाँ 70% आबादी आदिवासियों की है। इस इलाके में 3 संसदीय  सीटें हैं और यहाँ से  28 विधायक चुने जाते हैं। पिछले चुनावों में बीजेपी के 27 विधायक इस संभाग से जीते थे। लेकिन इलाके का पिछड़ापन किसी से छुपा हुआ नहीं है और लग यह रहा है कि इस बार कांग्रेस ज़्यादातर सीटों पर जीतेगी। 

यहाँ ज़्यादातर आदिवासियों के पास ज़मीनें हैं , लेकिन उससे ज़्यादा आमदनी न होने की वजह से  वे मज़दूरी करने शहरों में चले जाते हैं। जहाँ कुछ महीनों के लिए उन्हें फैक्ट्रियों में या निर्माण मज़दूर के तौर पर काम मिल जाता है। लेकिन नोट बंदी के बाद से निर्माण का काम ठप्प पड़ गया है, जिससे लोगों को काम नहीं मिल रहा। राजस्थान में न्यूनतम वेतन सिर्फ 6 हज़ार रुपये प्रति माह है, यहाँ ज़्यादातर आदिवासी इससे भी कम में गुज़ारा करते हैं, वह भी तब जब नौकरी मिले। नरेगा स्कीम उनकी आमदनी का एक ज़रिया हुआ करती थी, लेकिन अगर सूत्रों की माने तो पिछले 5 सालों से उसके तहत भी काम नहीं मिल रहा है। इस इलाके में ज़्यादातर लोग गरीब हैं और उनके पास BPL कार्ड हुआ करते थे। लेकिन सूत्रों की मानें तो इलाके के ज़्यादातर गाँवों में आय न बढ़ने के बावजूद लोगों को बीपीएल क्षेणी से निकाल दिया गया। इस वजह से जहाँ उन्हें पहले 2 रुपए किलो गेहूँ मिला करता था अब 12 रुपये किलो मिलता है।  इसके अलावा उज्वला योजना के तहत भी एक बार तो सिलेंडर मिल जाता है लेकिन अगली बार महंगा होने के कारण उसे कोई नहीं खरीदता। सडकों की हालत इतनी ख़राब कि जब वसुंधरा जी इन इलाकों से गुज़र रही थीं तो ही सड़कें बनायीं जा रही थीं। 

यही वजह है कि लोगों में सरकार के प्रति नाराज़गी है और वह इसे बदलना चाह रहे हैं। उन्हें आज पिछली सरकारें याद आ रही हैं , जबकि उन्होंने भी कुछ ख़ास नहीं किया था। एक और मुद्दा जो इलाके के लोगों को परेशान कर रहा है वह है कि गहलोत सरकार के द्वारा शुरू की गयी सस्ती दवाइयों की स्कीम को ठीक से नहीं चलाया जा रहा। बीजेपी सरकार ने पहले तो उसे बंद करने का प्रयास किया था लेकिन बाद में जन विरोध के चलते इसे मजबूरी में जारी रखा गया। लेकिन आज यह योजना ईमानदारी से नहीं चलायी जा रही है। 

इस पूरे इलाके में सरकार द्वारा अपना 'प्रशंसाजनक' काम दिखाने से लोगों में नाराज़गी है और लोगों का गुस्सा देखकर लगता है कि आने वाले दिन राज्य में बीजेपी के लिए 'अच्छे दिन' नहीं होने वाले हैं।  

 

Vasundhara Raje
Rajasthan
BJP
gaurav yatra
Udaipur

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • Harnaaz Sandhu
    भाषा
    भारत की हरनाज संधू ने मिस यूनिवर्स 2021 का ख़िताब जीता
    13 Dec 2021
    संधू से पहले सिर्फ दो भारतीय महिलाओं ने मिस यूनिवर्स का खिताब जीता है। अभिनेत्री सुष्मिता सेन को 1994 में और लारा दत्ता को 2000 में यह ताज पहनाया गया था।
  • Madras High Court
    गौरी आनंद
    ट्रांसजेंडर लोगों के समावेश पर बनाए गए मॉड्यूल को वापस लेने पर मद्रास हाई कोर्ट ने सीबीएसई को फटकार लगाई
    13 Dec 2021
    पिछले दिनों सीबीएसई ने अपनी वेबसाइट से ट्रांसजेंडर बच्चों की शिक्षा से संबंधित एक शिक्षक प्रशिक्षण नियमावली को हटा दिया था, मद्रास हाईकोर्ट ने इसपर चिंता जताई है।
  • Julian Assange
    जॉन पिल्गेर
    जूलियन असांज का न्यायिक अपहरण
    13 Dec 2021
    हम में से कौन-कौन जूलियन असांज के साथ लम्बे समय तक चल रहे न्यायिक उपहास जैसे इस न्यायिक अपहरण के सिलसिले में महज़ तमाशाई बने रहने के बजाय उनके साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं?
  • property card
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: ‘स्वामित्व योजना’ लागू होने से आशंकित आदिवासी, गांव-गांव किए जा रहे ड्रोन सर्वे का विरोध
    13 Dec 2021
    आदिवासी समाज बनाम प्रशासन के इस तनाव का मूल कारण बन रहा है, प्रधानमंत्री द्वारा घोषित ‘स्वामित्व योजना’ लागू किये जाने के लिए पूरे इलाके के लोगों के गांव-घरों का ड्रोन से सर्वे कराया जाना। प्रशासन के…
  • jobs
    सुबोध वर्मा
    मोदी जी, शहरों में नौकरियों का क्या?
    13 Dec 2021
    पिछले कुछ वर्षों से 7-8 प्रतिशत की बेरोज़गारी दर के चलते शहरों में नौकरी चाहने वाले असहाय और निराश हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License